निरीक्षण में सामने आईं गंभीर खामियां
FDA अधिकारियों द्वारा की गई औचक जांच में पार्लर के अंदर और स्टोरेज एरिया में जिंदा चूहे और मक्खियां पाए गए। इसके अलावा, बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट्स भी मिले, जिनका इस्तेमाल आइसक्रीम बनाने में किया जा रहा था।
एक्सपायर्ड फ्लेवर मौके पर नष्ट
निरीक्षण टीम ने पिस्ता, स्ट्रॉबेरी, अनानास, चेरी, बादाम, ब्लैककरंट समेत कई फ्लेवरिंग एजेंट्स को एक्सपायर्ड पाए जाने पर मौके पर ही नष्ट कर दिया, ताकि उनका आगे उपयोग न हो सके।
गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान लिए गए सैंपल्स की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आइसक्रीम में मिल्क फैट की मात्रा केवल 7.94 प्रतिशत थी, जबकि FSSAI के मानकों के अनुसार न्यूनतम 10 प्रतिशत होना अनिवार्य है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कोल्ड चेन में भी लापरवाही
FDA ने यह भी पाया कि आइसक्रीम के सुरक्षित भंडारण के लिए जरूरी कोल्ड चेन का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था, जो खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।
लाइसेंस निलंबित, दुकान बंद रखने के निर्देश
FDA के अनुसार, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत पार्लर का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, सैंपल रिपोर्ट आने तक दुकान को बंद रखने का निर्देश दिया गया है।
‘सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के तहत कार्रवाई
यह कार्रवाई FDA के ‘सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
निष्कर्ष:
मुंबई के प्रतिष्ठित फूड आउटलेट पर हुई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि खाद्य सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह घटना अन्य फूड व्यवसायों के लिए भी चेतावनी है कि वे स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करें।
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