यह कार्यालय महज छह महीने पहले ही उद्घाटन के बाद शुरू किया गया था, लेकिन इतनी कम अवधि में ही इस तरह की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि इमारत के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने प्रशासन से पूरे भवन की तत्काल जांच और उच्च गुणवत्ता के साथ मरम्मत कार्य कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में कर्मचारियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
बारिश के चलते कार्यालय के कई केबिनों में पानी रिसाव की समस्या भी सामने आई है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब BMC पहले से ही मानसून के दौरान शहर में जलभराव और अव्यवस्था को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है।
23 जून से शुरू हुए मानसून के बाद मुंबई के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला है। इस दौरान पेड़ गिरने की घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की जान जा चुकी है। 30 जून को चेंबूर में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र की मौत हो गई, जबकि 4 जुलाई को आरे कॉलोनी में एक युवक की पेड़ की डाल गिरने से मौत हो गई। 5 जुलाई को कुर्ला (पश्चिम) में भी एक बुजुर्ग व्यक्ति की पेड़ गिरने से जान चली गई।
इसके अलावा, 2 जुलाई को एक 55 वर्षीय व्यक्ति की खुले मैनहोल में गिरकर मौत हो गई, जिससे BMC की लापरवाही पर और सवाल उठे। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए BMC को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई केवल घटनाओं के बाद दिखती है, जबकि असली जिम्मेदारी ऐसी घटनाओं को रोकने की है।
अदालत ने BMC की रिपोर्ट को “सिर्फ दिखावा” बताते हुए स्पष्ट किया कि मानव जीवन सर्वोपरि है और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर के बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही है।
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