सरकार से बातचीत के बाद भी जारी CJP का आंदोलन: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी

सरकार से बातचीत के बाद भी जारी CJP का आंदोलन: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी

नई दिल्ली:

देशभर में जारी ‘कॉकroach जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हो रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई है, लेकिन गतिरोध अभी भी बना हुआ है। CJP के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने बताया कि सरकार ने उनकी मुख्य मांग—धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—पर फैसला लेने के लिए एक दिन का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो देशभर में और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

यह आंदोलन पिछले एक महीने से जारी है, लेकिन हाल ही में दिल्ली में संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद यह और तेज हो गया। इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए थे, जिससे देशभर में आक्रोश बढ़ा।

इस बीच, CJP के एक अन्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार ने कुछ अन्य मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इनमें परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग शामिल है। इस मुद्दे पर आगे की बातचीत शनिवार को होने की संभावना है।

गौरतलब है कि इस आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने हाल ही में समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई स्पष्ट वादा नहीं किया गया है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पेपर लीक मामले को गंभीर बताते हुए एक सख्त कानून लाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय है और सरकार इस पर कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

दरअसल, हाल ही में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के पेपर लीक होने के बाद यह विवाद शुरू हुआ था। करीब 22.8 लाख छात्रों ने यह परीक्षा दी थी, जिसे बाद में रद्द कर दोबारा आयोजित करना पड़ा।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों छात्रों ने साफ कहा है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह आंदोलन जरूरी है।

निष्कर्ष:

सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन मुख्य मांग पर सहमति न बनने के कारण स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

 

Undercover Editor

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