पुणे/मुंबई: पुणे के आदिवासी सरकारी छात्रावास में छात्रों का आंदोलन सोमवार को 11वें दिन भी जारी रहा। अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए 10 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल आज मुंबई पहुंचकर आदिवासी विकास मंत्री प्रो. डॉ. अशोक रामाजी उईके से मंत्रालय में मुलाकात करेगा। छात्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात कर अपनी मांगें रखने की कोशिश करेंगे।
हड़ताल में शामिल छह छात्र—श्वेता गिरनाक (26), निकिता मेचकर (22), शरद थोकल (26), विजय भांदबल (25), राहुल धनवे (26) और राजाराम पाडवी (20)—पुणे के हडपसर-मांजरी सीमा के पास स्थित आदिवासी सरकारी बालक छात्रावास में अनशन जारी रखे हुए हैं।
सरकार के 14 अगस्त के GR को वापस लेने की मांग
छात्रों की प्रमुख मांगों में महाराष्ट्र सरकार द्वारा 14 अगस्त 2026 को जारी आदिवासी छात्रावासों से संबंधित शासन निर्णय (GR) को वापस लेना शामिल है। छात्र संगठन का कहना है कि नया आदेश मौजूदा परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए।
छात्रों ने 11 नवंबर 2011 के GR के आधार पर संशोधित आदेश जारी करने की मांग की है। साथ ही छात्रावासों में मिलने वाले भत्तों और अन्य आर्थिक सुविधाओं को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जोड़ने की मांग की गई है, ताकि महंगाई के अनुसार इन सुविधाओं में हर साल बढ़ोतरी हो सके।
छात्रावासों में सुरक्षा और ₹1 करोड़ बीमा की मांग
आदिवासी छात्रों ने छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। इसके अलावा प्रत्येक आदिवासी छात्र के लिए ₹1 करोड़ का बीमा कवर देने की मांग भी रखी गई है।
यह मांग गडचिरोली में सांप के जहर से तीन आदिवासी छात्रों की हालिया मौत के बाद और महत्वपूर्ण हो गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मृत छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की भी मांग की है।
महिला छात्रों के लिए सुरक्षित छात्रावास की मांग
छात्रों ने पुणे में आदिवासी छात्राओं के लिए सुरक्षित और सभी जरूरी सुविधाओं से लैस केंद्रीय छात्रावास भवन बनाने की मांग भी की है।
इसके अलावा छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में खाली पड़े पदों को तत्काल भरने की मांग की गई है। इनमें चपरासी, सुरक्षा गार्ड और सफाई कर्मचारियों के पद शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि नियमित भर्ती पूरी होने तक इन पदों पर स्थायी या अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
पहले भी हो चुकी है मंत्री और अधिकारियों से बैठक
छात्र प्रतिनिधियों ने 18 अगस्त को आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके से मुलाकात की थी। इसके बाद 22 अगस्त को आदिवासी विकास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त और अन्य अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई। हालांकि, मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद छात्रों का आंदोलन और अनशन जारी है।
अब छात्रों की नजर आज मुंबई में होने वाली बैठक पर है। प्रदर्शनकारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर आदिवासी छात्रों की सुरक्षा, शिक्षा और छात्रावासों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान करेगी।
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