गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ललित कुमार बिश्नोई और 19 वर्षीय विकास बिश्नोई के रूप में हुई है। दोनों को राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार किया गया।
फर्जी कंपनी के नाम पर कारोबारी को बनाया निशाना
DCP Zone 11 संदीप घुगे के मुताबिक, शिकायतकर्ता निर्मित संजय अजमेरा (32) ‘Premier Solvents’ नाम से केमिकल कारोबार चलाते हैं। उन्हें WhatsApp के जरिए ‘Shree Ramdev Industries’ नाम की कंपनी से एथिल एसीटेट का ऑर्डर मिला था। यह केमिकल वुड पॉलिश समेत कई उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है।
आरोपियों ने कथित तौर पर ‘Shree Ramdev Industries’ के नाम से फर्जी विजिटिंग कार्ड और लेटरहेड तैयार किए। इसके अलावा फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर कंपनी को वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई।
संदीप घुगे ने बताया कि ऑर्डर मिलने के बाद आरोपियों ने कारोबारी को भुगतान किए जाने का फर्जी स्क्रीनशॉट और UTR नंबर भेजा, जबकि वास्तव में कोई रकम ट्रांसफर नहीं की गई थी। पुलिस के अनुसार, इसी तरीके से आरोपियों ने चार से पांच बार ऑर्डर किए और बिना भुगतान किए केमिकल की सप्लाई हासिल की।
बाद में जब कारोबारी ने अपने बैंक खाते में भुगतान की जांच की तो कोई रकम प्राप्त नहीं हुई। जांच में सामने आया कि बिना भुगतान के सप्लाई किए गए केमिकल की कुल कीमत करीब ₹17.65 लाख थी।
राजस्थान तक पहुंची पुलिस की जांच
मामले में MHB Colony Police Station में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान MHB पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ठगी में इस्तेमाल किए गए फर्जी SIM कार्ड को ट्रेस किया।
पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और जोधपुर ईस्ट के DCP कार्यालय तथा जोधपुर साइबर टीम की मदद से आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की। तकनीकी जानकारी और अन्य सुरागों के आधार पर मुख्य आरोपी के रूप में ललित कुमार बिश्नोई की पहचान हुई।
पुलिस के मुताबिक, ललित लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। मोबाइल फोन से मिली जानकारी, आरोपी की तस्वीर और मुखबिरों से प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे जोधपुर के मंडोर इलाके में ट्रेस किया।
पुलिस टीम ने करीब आठ दिनों तक लगातार निगरानी रखी और इसके बाद जाल बिछाकर ललित बिश्नोई को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सामने आया दूसरे आरोपी का नाम
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान ललित ने कथित तौर पर इस ठगी में अपने साथी विकास बिश्नोई की भूमिका के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने विकास को भी गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपियों की कथित भूमिका सामने आने के बाद मामले में BNS की धारा 3(5) भी जोड़ी गई, जो कई व्यक्तियों द्वारा साझा मंशा से किए गए कृत्य से संबंधित है।
कई राज्यों में ठगी की आशंका
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर यह भी पता चला कि आरोपी महाराष्ट्र के अलावा गुजरात, दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा में भी इसी तरह की ठगी कर चुके हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक और फर्जी SIM कार्ड लेने, सोनू कुमार प्रजापत के नाम से फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार करने तथा ‘Shyam Industries’ नाम की एक और फर्जी कंपनी बनाने की कथित योजना में थे।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दूसरे राज्यों की करीब 39 केमिकल कंपनियों से संपर्क करने की योजना बना रहे थे। पुलिस अब इन कंपनियों से संपर्क और संभावित ठगी की जानकारी जुटा रही है।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने कारोबारियों को निशाना बनाया और कितनी रकम की कथित ठगी की गई। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
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