महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रही सख्त कार्रवाई के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कदमों पर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि केवल एक-दो कीड़े या मक्खी दिखने के आधार पर किसी होटल का लाइसेंस निलंबित करना “व्यावहारिक” नहीं है और कार्रवाई संतुलित होनी चाहिए।
⚖️ कोर्ट की टिप्पणी ने खींचा ध्यान
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान हल्के अंदाज में कहा,
“हम भारत में हैं, मैडम… मेरे टेबल पर भी अभी मक्खी है। पिछले हफ्ते भी एक बड़ा कीड़ा सामने बैठा था, तो हम क्या कर सकते हैं?”
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है, लेकिन कार्रवाई “व्यावहारिक और न्यायसंगत” होनी चाहिए।
🏨 किस मामले पर हो रही थी सुनवाई?
यह टिप्पणी नवी मुंबई के Park Inn by Radisson होटल की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। होटल ने 3 जुलाई को FDA द्वारा अपने FSSAI लाइसेंस निलंबन के फैसले को चुनौती दी है।
होटल का कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए सीधे लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया।
📋 कोर्ट ने FDA से पूछा—प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं?
कोर्ट ने FDA से सवाल किया कि पहले सुधार (Improvement Notice) का नोटिस देना चाहिए था। यदि होटल नियमों का पालन नहीं करता, तभी लाइसेंस निलंबित किया जाना चाहिए था।
पीठ ने कहा, “आपको पहले नोटिस देना चाहिए था, लेकिन आपने सीधे लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।”
🗣️ दोनों पक्षों की दलीलें
वकील ने दलील दी कि कार्रवाई न्यायसंगत और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। केवल चेकलिस्ट या छोटे उल्लंघनों के आधार पर लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता।
राज्य सरकार ने FDA की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान पूरे राज्य में चल रहा है और इसमें BMC, KEM अस्पताल और क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया जैसे बड़े संस्थानों पर भी कार्रवाई की गई है।
📊 राज्य से मांगी गई रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 31 जुलाई तक एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे, जिसमें पूरे महाराष्ट्र में किए गए निरीक्षणों की जानकारी हो—खासकर सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों के कैंटीनों की।
⏳ अगली सुनवाई जल्द
कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में जल्द आदेश जारी करेगा और अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है।
🔍 निष्कर्ष:
बॉम्बे हाई कोर्ट की यह टिप्पणी साफ संकेत देती है कि खाद्य सुरक्षा के मामलों में सख्ती के साथ-साथ संतुलन और उचित प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है। अब सबकी नजर इस मामले में आने वाले कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों के लिए दिशा तय कर सकता है।
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