मुंबई में किसानों का विशाल प्रदर्शन: आजाद मैदान में गूंजे हक के स्वर, मंत्रियों से हुई अहम बैठक मुंबई: महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसानों ने मंगलवार (21 जुलाई 2026) को मुंबई के आजाद मैदान में एक विशाल रैली निकालकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के बैनर तले आयोजित इस राज्यस्तरीय रैली के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार के मंत्रियों से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों पर विस्तृत चर्चा की। किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे और राजस्व मंत्री चंद्रकांत बावनकुले से मुलाकात की। AIKS के राज्य सचिव डॉ. अजीत नवले के अनुसार, मंत्रियों के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही और कई मुद्दों पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं। रैली का नेतृत्व AIKS के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, पूर्व विधायक जे.पी. गावित, राज्य अध्यक्ष उमेश देशमुख, विधायक विनोद निकोले सहित कई प्रमुख नेताओं ने किया। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार पी. साईनाथ ने भी किसानों का मार्गदर्शन किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से उठाने की अपील की। रैली के दौरान किसानों ने कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन सब्सिडी बढ़ाने, देवस्थान, गैरान और आवासीय भूमि पर किसानों व मजदूरों को स्वामित्व अधिकार देने, फसल बीमा के पुराने मानकों को बहाल करने और भारी बारिश से हुई फसल क्षति का तत्काल मुआवजा देने की मांग शामिल रही। इसके अलावा, PESA कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने पर रोक लगाने की भी मांग की गई। मंत्रियों के साथ बैठक में ऋण भुगतान, फसल बीमा और भूमि अधिकार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में चल रहे छात्र-युवा आंदोलन के प्रति समर्थन भी जताया और केंद्र सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। इस रैली का उद्देश्य राज्य सरकार का ध्यान किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था। रैली की तैयारियां एक दिन पहले रात से ही शुरू हो गई थीं, और बड़ी संख्या में किसान राज्य के अलग-अलग जिलों से मुंबई पहुंचे। जनसभा के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय जाकर अपना ज्ञापन भी सौंपा। निष्कर्ष: मुंबई में हुई इस किसान रैली ने एक बार फिर कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को सामने ला दिया है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के आगामी कदमों पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि किसानों की मांगों पर कितना अमल होता है।