नोटों के बंडल मिलने से मचा था विवाद
बताया जाता है कि 14 मार्च 2025 को दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर लगी आग के दौरान ₹500 के नोटों के जले हुए बंडल बरामद हुए थे। इस घटना के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
इसके बाद न्यायमूर्ति वर्मा का तबादला Allahabad High Court में कर दिया गया, जहां उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को शपथ भी ली। हालांकि, जांच पूरी होने तक उन्हें किसी भी न्यायिक कार्य से दूर रखा गया था।
संसद में महाभियोग प्रस्ताव
इस विवाद के बीच न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव भी लाया गया। उन्होंने इस प्रस्ताव को चुनौती देते हुए न्यायालय का रुख किया और जांच प्रक्रिया में त्रुटियों का आरोप लगाया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
Supreme Court of India ने सुनवाई के दौरान संसदीय जांच समिति के गठन में कुछ खामियों की ओर संकेत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इन त्रुटियों के आधार पर पूरी कार्यवाही को रद्द करना उचित होगा या नहीं, इस पर विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष को न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत जांच समिति गठित करने का अधिकार है, भले ही राज्यसभा में प्रस्ताव पारित न हुआ हो।
जांच और इस्तीफे के बीच बढ़ा दबाव
जांच के दौरान बढ़ते दबाव और संभावित कार्रवाई के बीच न्यायमूर्ति वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, उन्होंने इस्तीफा कब दिया, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
निष्कर्ष
यह मामला न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और खुलासे होने की संभावना है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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