मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरी, आज से नियम लागू; जानिए उल्लंघन पर क्या होगा मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा से जुड़ी शर्तों को लेकर सरकार ने अब सख्ती शुरू कर दी है। मंगलवार से नियम लागू होने के बाद जिन चालकों को मराठी का आवश्यक ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, नियम का उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किया जाएगा। सरकार ने चालकों को मराठी सीखने और आवश्यक प्रशिक्षण पूरा करने के लिए पहले पर्याप्त समय दिया था। अब यह समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, मराठी की आवश्यक जानकारी प्रदर्शित नहीं कर पाने वाले चालकों को सबसे पहले 30 दिन का नोटिस दिया जाएगा। नियम नहीं मानने पर लाइसेंस निलंबित हो सकता है नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि चालक मराठी भाषा की निर्धारित शर्त पूरी नहीं करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बावजूद नियम का पालन नहीं करने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाने का प्रावधान है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि चालकों को नियमों का पालन करने के लिए कुल मिलाकर करीब चार महीने तक का समय मिल सकता है। 1.25 लाख चालकों को राहत इस नियम के तहत करीब 1.25 लाख ऑटो और टैक्सी चालकों को राहत मिलेगी। इन चालकों ने सरकार द्वारा आयोजित मराठी भाषा पाठ्यक्रम पूरा कर परीक्षा पास की है और प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। ऐसे चालकों पर इस प्रावधान के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी। ठाणे में आयोजित ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा पाठ्यक्रम अभियान’ के समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी को “भक्ति की भाषा, मजबूरी की नहीं” के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो लोग मराठी सीख रहे हैं, उनका मजाक उड़ाने के बजाय उनसे मराठी में बातचीत कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। शिंदे के मुताबिक, 105 दिनों के अभियान के दौरान करीब 1.25 लाख ऑटो और टैक्सी चालकों ने मराठी सीखी, परीक्षा दी और प्रमाणपत्र हासिल किए। परिवहन मंत्री ने अपनाया सख्त रुख परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “मैं मराठी नहीं बोलूंगा” जैसी मानसिकता अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अभियान के पीछे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की राजनीतिक पहल को महत्वपूर्ण बताया। सरनाईक ने यह भी कहा कि अभियान के लिए उद्योग विभाग की ओर से 1 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी। सरकार का क्या कहना है? मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में बड़ी संख्या में गैर-मराठी भाषी लोग रहते हैं और ऑटो-टैक्सी क्षेत्र में भी दूसरे राज्यों से आए लोग बड़ी संख्या में काम करते हैं। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य गैर-मराठी लोगों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। अब नियम लागू होने के बाद आने वाले महीनों में इसका पालन किस तरह कराया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।