तेल का तूफान: 10 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम, पेट्रोल-डीजल ने तोड़ा आम आदमी का बजट

तेल का तूफान: 10 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम, पेट्रोल-डीजल ने तोड़ा आम आदमी का बजट

नई दिल्ली:

देशभर में एक बार फिर आम जनता पर महंगाई की मार पड़ी है। वेस्ट एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए, जो पिछले 10 दिनों में चौथी बढ़ोतरी है।

इस ताजा बढ़ोतरी के साथ ही 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब ₹7.5 प्रति लीटर तक की वृद्धि हो चुकी है। लंबे समय तक कीमतों में स्थिरता रहने के बाद अब रोजाना संशोधन फिर से शुरू किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹2.61 बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल ₹2.71 महंगा होकर ₹95.20 प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल ₹111.21 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच चुका है। वहीं कोलकाता में पेट्रोल ₹113.51 और डीजल ₹99.82 प्रति लीटर हो गया है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी है, जिससे आयात लागत में भारी इजाफा हुआ है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति में बाधा ने वैश्विक बाजार को अस्थिर कर दिया है।

तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों के बावजूद उन्हें अभी भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार के अनुसार, 15 मई को की गई पहली बढ़ोतरी से कंपनियों के घाटे में करीब 25% की कमी आई थी, लेकिन इसके बावजूद वे प्रतिदिन लगभग ₹750 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं।

रेटिंग एजेंसी के अनुमानों के मुताबिक, पेट्रोल पर लगभग ₹10 प्रति लीटर और डीजल पर ₹13 प्रति लीटर का घाटा अब भी बना हुआ है। यही कारण है कि कीमतों में लगातार संशोधन जारी है।

इतना ही नहीं, सीएनजी की कीमतों में भी हाल ही में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में 23 मई को सीएनजी ₹1 प्रति किलो महंगी हुई, जिससे 15 मई के बाद कुल बढ़ोतरी ₹4 प्रति किलो तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती और वेस्ट एशिया का संकट जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

निष्कर्ष:

लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसका असर न सिर्फ आम जनता की जेब पर पड़ रहा है, बल्कि परिवहन, खाद्य वस्तुओं और अन्य जरूरी सेवाओं की लागत भी बढ़ने की संभावना है।

Undercover Editor

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