मुंबई में इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव पर संकट: शाडू मिट्टी की सप्लाई में देरी से मूर्तिकार परेशान

मुंबई में इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव पर संकट: शाडू मिट्टी की सप्लाई में देरी से मूर्तिकार परेशान

मुंबई में इस साल गणेशोत्सव से पहले पर्यावरण अनुकूल (इको-फ्रेंडली) मूर्तियों के निर्माण पर बड़ा संकट मंडराता नजर आ रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से मूर्तिकारों को मुफ्त शाडू (प्राकृतिक) मिट्टी देने की योजना इस बार देरी का शिकार हो गई है, जिससे शहरभर के पारंपरिक मूर्तिकारों में चिंता बढ़ गई है।

हर साल की तरह इस बार भी बीएमसी ने इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा देने के लिए पंजीकृत मूर्तिकारों को शाडू मिट्टी मुफ्त देने का ऐलान किया था। योजना के तहत प्रत्येक कलाकार को लगभग 1,000 किलोग्राम (40 बैग) मिट्टी उपलब्ध कराई जानी थी। लेकिन मानसून शुरू होने और मूर्ति निर्माण का समय आने के बावजूद अभी तक कई मूर्तिकारों को एक भी बैग नहीं मिला है।

समय पर सप्लाई न मिलने से बढ़ी परेशानी

श्री गणेश मूर्तिकला समिति के अध्यक्ष वसंत राजे का कहना है कि मूर्ति बनाने के लिए अप्रैल और मई का समय सबसे उपयुक्त होता है।

“अब तक हमें मिट्टी नहीं मिली है, जबकि यही समय मूर्तियों को तैयार करने के लिए बेहद अहम होता है,” उन्होंने बताया।

मूर्तिकारों के अनुसार, शाडू मिट्टी से बनी मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की तुलना में ज्यादा समय लेती हैं, खासकर मानसून में जब नमी अधिक होती है। ऐसे में देरी से सप्लाई मिलने पर मूर्तियों को सुखाने और तैयार करने में काफी दिक्कत होती है।

मानसून ने बढ़ाई चुनौती

मूर्तिकार भूषण पारुलेकर ने कहा,

“बरसात में मूर्तियां सूखने में हफ्तों लग जाते हैं, जबकि गर्मी में यह प्रक्रिया तेज होती है। अगर जल्द मिट्टी नहीं मिली, तो हमें खुद ही खरीदनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ेगी।”

वहीं, MyBMC पोर्टल पर पंजीकृत मूर्तिकार अनुश्का गुजर का कहना है कि इस देरी से उनके सीजनल व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है और काम करना भी मुश्किल हो गया है।

प्रशासन ने माना, जल्द सप्लाई का भरोसा

बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस समस्या को स्वीकार करते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रों में मिट्टी की खरीद और आपूर्ति में दिक्कतें आई हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सप्लाई चेन की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही सभी मूर्तिकारों को शाडू मिट्टी उपलब्ध करा दी जाएगी।

इको-फ्रेंडली पहल पर पड़ सकता है असर

पिछले साल बीएमसी ने करीब 990 मीट्रिक टन शाडू मिट्टी 500 पंजीकृत मूर्तिकारों को वितरित की थी। मुंबई में 1.81 लाख घरेलू गणेश मूर्तियों में से लगभग 30 से 40 हजार मूर्तियां शाडू मिट्टी की थीं।

मूर्तिकारों का मानना है कि अगर इस साल समय पर मिट्टी की सप्लाई नहीं हुई, तो इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा देने की यह पहल कमजोर पड़ सकती है।

निष्कर्ष

मुंबई में जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक देरी इस प्रयास पर सवाल खड़े कर रही है। अब सबकी नजर बीएमसी पर है कि वह कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान करती है, ताकि मूर्तिकार समय पर अपनी कला को अंतिम रूप दे सकें और शहर में हरित गणेशोत्सव सफलतापूर्वक मनाया जा सके।

 

Undercover Editor

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