इस पहल को लेकर कंपनी के फाउंडर ने इसे “अब तक का सबसे बेहतरीन
निर्णय” बताया है। उनका मानना है कि अनुभव किसी उम्र का मोहताज नहीं होता, बल्कि यह किसी भी संगठन को नई दिशा दे सकता है।
अनुभव की ताकत बनी टीम की ताकत
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा गया कि 64 वर्षीय इंटर्न युवा टीम के साथ काम करते हुए अपने वर्षों के अनुभव साझा कर रहे हैं। वह न केवल कंपनी को व्यावसायिक समझ दे रहे हैं, बल्कि टीम के अंदर सकारात्मक माहौल और मोटिवेशन भी बढ़ा रहे हैं।
वीडियो में यह भी बताया गया कि वह कंपनी को “बिल्ड और स्केल” करने के अपने अनुभव से मार्गदर्शन दे रहे हैं और संगठन की कार्य संस्कृति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
क्यों चुना इंटर्नशिप?
लोगों के मन में यह सवाल उठा कि इतनी उम्र और अनुभव के बावजूद उन्होंने इंटर्न की भूमिका क्यों चुनी। इस पर कंपनी के फाउंडर ने बताया कि वह व्यक्ति सक्रिय रहना चाहते थे और अपने अनुभव को नई पीढ़ी के साथ साझा करना चाहते थे। वह घर बैठने के बजाय कुछ नया करना चाहते थे।
सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ
इस अनोखी पहल को सोशल मीडिया पर खूब सराहा जा रहा है। यूजर्स ने इसे “अनुभव का सम्मान” बताते हुए कहा कि ज्ञान कभी पुराना नहीं होता। कई लोगों ने यह भी कहा कि कंपनियों को उम्र के बजाय काबिलियत और अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए।
एक नई सोच की शुरुआत
यह घटना न केवल एक स्टार्टअप की कहानी है, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी है कि सीखने और सिखाने की कोई उम्र नहीं होती। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सही अवसर मिलने पर अनुभव और ऊर्जा का मेल किसी भी संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष
मुंबई की इस पहल ने एक नई सोच को जन्म दिया है—जहां उम्र नहीं, बल्कि अनुभव और जज्बा मायने रखता है। यह कदम आने वाले समय में अन्य कंपनियों को भी प्रेरित कर सकता है कि वे विविधता और अनुभव को अपनाएं।
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