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🚨 Tata Consultancy Services नासिक विवाद: अंडरकवर पुलिस जांच में यौन शोषण, दबाव और धार्मिक प्रभाव के आरोप उजागर

🚨 Tata Consultancy Services नासिक विवाद: अंडरकवर पुलिस जांच में यौन शोषण, दबाव और धार्मिक प्रभाव के आरोप उजागर

🚨 Tata Consultancy Services नासिक विवाद: अंडरकवर पुलिस जांच में यौन शोषण, दबाव और धार्मिक प्रभाव के आरोप उजागर अंडरकवर एडिटर न्यूज़ चैनल, १४ अप्रैल, २०२६. नासिक/नई दिल्ली: Nashik स्थित Tata Consultancy Services (TCS) के एक बीपीओ यूनिट में चल रहे कथित अनियमितताओं के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। अंडरकवर पुलिस जांच में यौन शोषण, मानसिक दबाव और धार्मिक प्रभाव जैसे गंभीर आरोप सामने आने के बाद इस मामले में अब तक 9 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गुप्त पुलिस ऑपरेशन से खुला मामला पुलिस के अनुसार, फरवरी माह में मिली एक शिकायत के आधार पर इस मामले की गुप्त जांच शुरू की गई। इसके तहत पुलिसकर्मियों ने हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में बीपीओ यूनिट में तैनात होकर करीब दो सप्ताह तक गतिविधियों पर नजर रखी। इस दौरान कर्मचारियों के बीच हो रही बातचीत और व्यवहार का निरीक्षण किया गया, जिससे प्रारंभिक शिकायतों की पुष्टि हुई। इसके आधार पर मार्च में देओलाली पुलिस स्टेशन में पहली FIR दर्ज की गई। यौन शोषण और दबाव के गंभीर आरोप शिकायत के अनुसार, एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। साथ ही उस पर अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाने और धार्मिक प्रथाओं को प्रभावित करने का भी आरोप है। जांच के दायरे के बढ़ने के साथ अन्य कई महिला कर्मचारियों (उम्र 18–25 वर्ष) ने भी यौन उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार और मानसिक दबाव के आरोप लगाए। पुलिस ने बताया कि कई मामलों में कार्यस्थल पर अनुचित टिप्पणियां, छेड़छाड़ और निजी व धार्मिक निर्णयों को प्रभावित करने के प्रयास शामिल हैं। 9 FIR, 7 गिरफ्तार, SIT जांच जारी 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल 9 FIR दर्ज की गईं। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, पीछा करना, और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। अब तक 7 आरोपियों—जिनमें वरिष्ठ कर्मचारी और एक महिला HR अधिकारी भी शामिल हैं—को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहा है। POSH नियमों पर भी उठे सवाल जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या कंपनी ने कार्यस्थल पर महिलाओं के संरक्षण से जुड़े POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के प्रावधानों का सही पालन किया था या नहीं। पुलिस के अनुसार, यदि मौखिक शिकायतें भी सामने आई थीं, तो कंपनी को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। कंपनी का रुख और बचाव पक्ष की दलील इस मामले पर Tata Consultancy Services ने सख्त रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात कही है और जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। वहीं, आरोपियों के वकीलों ने इन आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। उनका कहना है कि सामान्य कार्यस्थल बातचीत और व्यक्तिगत आचरण को गलत तरीके से आपराधिक रूप दिया जा रहा है। निष्कर्ष यह मामला न केवल कॉर्पोरेट कार्यस्थलों पर सुरक्षा और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समय रहते की गई जांच और सतर्कता से गंभीर अपराधों का पर्दाफाश संभव है।

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