Category: Law & Order

Contrary to popular belief, Lorem Ipsum is not simply random text. It has roots in a piece of classical Latin literature from 45 BC, making it over 2000 years old. Richard McClintock, a Latin professor

एंटी-CEC प्रदर्शन में शामिल अभिनेता इमरान खान को नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश

एंटी-CEC प्रदर्शन में शामिल अभिनेता इमरान खान को नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश

एंटी-CEC प्रदर्शन में शामिल अभिनेता इमरान खान को नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश मुंबई में 10 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के बाद विदेशी नागरिक अभिनेता पर इमिग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट के तहत कार्रवाई मुंबई: मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद अभिनेता इमरान खान को मुंबई पुलिस की ओर से नोटिस जारी किया गया है। विदेशी नागरिक इमरान खान को 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई उनके वीजा की शर्तों और Immigration and Foreigners Act, 2025 के प्रावधानों के कथित उल्लंघन को लेकर की गई है। मामले में मुंबई स्थित Foreigners Regional Registration Office (FRRO) द्वारा नोटिस जारी किया गया है। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद कार्रवाई इमरान खान 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए थे। यह प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इमरान खान समेत कई प्रदर्शनकारियों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में इमरान खान ने पुलिस वाहन के अंदर से अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पोस्ट किया था कि वह पुलिस के साथ “ड्राइव” पर जा रहे हैं। विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों पर नियम मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इमरान खान की गतिविधियों को उनके वीजा की शर्तों तथा विदेशी नागरिकों से संबंधित कानून के तहत जांचा गया है। अधिकारी ने बताया कि मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए कार्रवाई शुरू की गई है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, भारत में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी, आवाजाही और गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार के पास कानून के तहत व्यापक अधिकार हैं। विदेशी नागरिकों के लिए भारत में राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी से संबंधित नियम भी लागू होते हैं। पुलिस ने निजी शिकायत से किया इनकार पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी निजी शिकायत के आधार पर नहीं की गई है। एक अधिकारी के मुताबिक, संबंधित विभाग ने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू की है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कार्रवाई का स्वागत किया भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इमरान खान के खिलाफ हुई कार्रवाई का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि विदेशी नागरिकों द्वारा भारत की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना गंभीर विषय है और कहा कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, सोमैया द्वारा लगाए गए विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान से धन आने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। आमिर खान के भतीजे हैं इमरान खान अभिनेता इमरान खान अभिनेता आमिर खान के भतीजे हैं और कई हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं। हाल के दिनों में उन्होंने मुंबई में CEC के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में सार्वजनिक रूप से हिस्सा लिया था। अब FRRO के नोटिस के बाद उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है। Undercover Editor News Channel महेश .एम. राठोड, एडिटर  
लिव-इन रिलेशनशिप पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शादी जैसी स्थिति होने पर लागू होगी धारा 498A

लिव-इन रिलेशनशिप पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शादी जैसी स्थिति होने पर लागू होगी धारा 498A

लिव-इन रिलेशनशिप पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शादी जैसी स्थिति होने पर लागू होगी धारा 498A नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई रिश्ता “शादी जैसी प्रकृति” (relationship in the nature of marriage) का है, तो उसमें महिला के साथ क्रूरता होने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A लागू हो सकती है। ⚖️ क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि हर लिव-इन रिलेशनशिप पर यह कानून लागू नहीं होगा। कोर्ट के अनुसार, यह साबित करना जरूरी होगा कि दोनों पक्षों के बीच शादी करने का इरादा था और उनका रिश्ता विवाह जैसा था। 📌 महिला पर होगा प्रारंभिक सबूत का भार अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में महिला को यह साबित करना होगा कि संबंध सिर्फ साथ रहने का नहीं, बल्कि शादी के इरादे के साथ था। तभी धारा 498A के तहत मामला बन सकेगा। 🚫 बिना जांच के नहीं होगी गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में बिना प्रारंभिक जांच के किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न की जाए। कोर्ट ने Arnesh Kumar बनाम बिहार राज्य केस में तय दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य बताया। 🧾 मामला क्या था? यह फैसला कर्नाटक के एक मामले में आया, जहां एक महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने पहले से शादीशुदा होने की बात छिपाकर उससे शादी की और बाद में दहेज उत्पीड़न व हिंसा की। आरोपी ने तर्क दिया कि दूसरी शादी वैध नहीं थी, इसलिए उसे “पति” नहीं माना जा सकता और 498A लागू नहीं होना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में भी कानून लागू हो सकता है। ⚖️ कानून का उद्देश्य बताया कोर्ट ने कहा कि धारा 498A का मकसद महिलाओं को घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से बचाना है। बदलते सामाजिक परिवेश में कानून को भी समय के साथ ढलना होगा, ताकि महिलाओं को समान सुरक्षा मिल सके। 📊 डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट से अलग अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा कानून (2005) जहां सिविल राहत देता है, वहीं धारा 498A एक आपराधिक प्रावधान है, इसलिए इसमें सख्त मानक लागू होंगे। 🔍 निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने संतुलन बनाए रखते हुए यह भी सुनिश्चित किया है कि कानून का दुरुपयोग न हो और गिरफ्तारी से पहले उचित जांच अनिवार्य हो।
“हम भारत में हैं, टेबल पर मक्खी आ ही सकती है”: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, FDA की कार्रवाई पर उठाए सवाल

“हम भारत में हैं, टेबल पर मक्खी आ ही सकती है”: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, FDA की कार्रवाई पर उठाए सवाल

“हम भारत में हैं, टेबल पर मक्खी आ ही सकती है”: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, FDA की कार्रवाई पर उठाए सवाल मुंबई: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रही सख्त कार्रवाई के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कदमों पर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि केवल एक-दो कीड़े या मक्खी दिखने के आधार पर किसी होटल का लाइसेंस निलंबित करना “व्यावहारिक” नहीं है और कार्रवाई संतुलित होनी चाहिए। ⚖️ कोर्ट की टिप्पणी ने खींचा ध्यान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान हल्के अंदाज में कहा, “हम भारत में हैं, मैडम… मेरे टेबल पर भी अभी मक्खी है। पिछले हफ्ते भी एक बड़ा कीड़ा सामने बैठा था, तो हम क्या कर सकते हैं?” हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है, लेकिन कार्रवाई “व्यावहारिक और न्यायसंगत” होनी चाहिए। 🏨 किस मामले पर हो रही थी सुनवाई? यह टिप्पणी नवी मुंबई के Park Inn by Radisson होटल की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। होटल ने 3 जुलाई को FDA द्वारा अपने FSSAI लाइसेंस निलंबन के फैसले को चुनौती दी है। होटल का कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए सीधे लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। 📋 कोर्ट ने FDA से पूछा—प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं? कोर्ट ने FDA से सवाल किया कि पहले सुधार (Improvement Notice) का नोटिस देना चाहिए था। यदि होटल नियमों का पालन नहीं करता, तभी लाइसेंस निलंबित किया जाना चाहिए था। पीठ ने कहा, “आपको पहले नोटिस देना चाहिए था, लेकिन आपने सीधे लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।” 🗣️ दोनों पक्षों की दलीलें वकील ने दलील दी कि कार्रवाई न्यायसंगत और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। केवल चेकलिस्ट या छोटे उल्लंघनों के आधार पर लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने FDA की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान पूरे राज्य में चल रहा है और इसमें BMC, KEM अस्पताल और क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया जैसे बड़े संस्थानों पर भी कार्रवाई की गई है। 📊 राज्य से मांगी गई रिपोर्ट हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 31 जुलाई तक एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे, जिसमें पूरे महाराष्ट्र में किए गए निरीक्षणों की जानकारी हो—खासकर सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों के कैंटीनों की। ⏳ अगली सुनवाई जल्द कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में जल्द आदेश जारी करेगा और अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है। 🔍 निष्कर्ष: बॉम्बे हाई कोर्ट की यह टिप्पणी साफ संकेत देती है कि खाद्य सुरक्षा के मामलों में सख्ती के साथ-साथ संतुलन और उचित प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है। अब सबकी नजर इस मामले में आने वाले कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों के लिए दिशा तय कर सकता है।  
मुंबई के नामी क्लबों पर FDA की बड़ी कार्रवाई: गंदगी, कॉकरोच और खराब खाने के चलते 5 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई के नामी क्लबों पर FDA की बड़ी कार्रवाई: गंदगी, कॉकरोच और खराब खाने के चलते 5 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई के नामी क्लबों पर FDA की बड़ी कार्रवाई: गंदगी, कॉकरोच और खराब खाने के चलते 5 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित मुंबई: मुंबई में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने शहर के कई नामी क्लबों और प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इस कार्रवाई में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI), MIG क्रिकेट क्लब समेत कुल पांच प्रतिष्ठान शामिल हैं। 🚨 जांच में सामने आई चौंकाने वाली लापरवाही FDA की जांच के दौरान इन प्रतिष्ठानों की रसोई में बेहद खराब स्वच्छता व्यवस्था पाई गई। अधिकारियों को किचन में कॉकरोच, मक्खियां और जाले मिले, जो सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) के किचन में खाने के पास बड़ी संख्या में कीड़े-मकोड़े पाए गए। इसके अलावा: ⚠️ MIG क्रिकेट क्लब में भी गंभीर अनियमितताएं बांद्रा स्थित MIG क्रिकेट क्लब में भी हालात बेहद खराब पाए गए। यहां: 📉 खाद्य सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन FDA के अनुसार, कई जगहों पर FIFO/FEFO (First In First Out / First Expired First Out) नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा: 🏢 अन्य क्लब भी कार्रवाई की जद में इस कार्रवाई में आरके जुहू जिमखाना, अपर्णा जुहू जिमखाना और विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब के लाइसेंस भी विभिन्न उल्लंघनों के चलते निलंबित किए गए हैं। 👨‍⚖️ FDA की सख्ती जारी नए आयुक्त तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में FDA पिछले दो महीनों से राज्यभर में सख्त कार्रवाई कर रहा है। इस अभियान का मकसद लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है। 🔍 निष्कर्ष: मुंबई जैसे महानगर में नामी क्लबों में इस तरह की लापरवाही सामने आना चिंता का विषय है। FDA की यह कार्रवाई न केवल अन्य प्रतिष्ठानों के लिए चेतावनी है, बल्कि उपभोक्ताओं की सेहत को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
1993 मुंबई ब्लास्ट केस: अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

1993 मुंबई ब्लास्ट केस: अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

1993 मुंबई ब्लास्ट केस: अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा नई दिल्ली: 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषी अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सलेम ने याचिका दाखिल कर दावा किया है कि वह जेल में 25 साल की सजा पूरी कर चुका है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए। ⚖️ क्या है सलेम की दलील? अबू सलेम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कोर्ट में दलील दी कि जेल प्रशासन ने उन्हें अंडरट्रायल के तौर पर बिताए गए समय का पूरा लाभ (सेट-ऑफ) नहीं दिया है, जबकि टाडा कोर्ट ने इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए थे। सलेम का कहना है कि यदि अंडरट्रायल अवधि को जोड़ा जाए, तो वह निर्धारित 25 साल की सजा पूरी कर चुका है। 📜 प्रत्यर्पण शर्तों से जुड़ा मामला यह मामला उन शर्तों से भी जुड़ा हुआ है जिनके तहत सलेम को 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। इन शर्तों में उसकी सजा की अवधि को लेकर कुछ सीमाएं तय की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही सलेम को अंतरिम राहत देने से इनकार कर चुका है और उसे बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी सजा की अवधि की गणना को लेकर अपील करने की अनुमति दी थी। 🏛️ CBI का क्या कहना है? वहीं, CBI ने विशेष टाडा कोर्ट में कहा है कि सलेम को अपनी दो पुरानी सजा के मामलों में लगाए गए जुर्माने का भुगतान करना होगा। एजेंसी के अनुसार, सलेम को कुल ₹16.51 लाख का जुर्माना जमा करना अनिवार्य है। CBI ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर तय समयसीमा तक यह रकम जमा नहीं की जाती है, तो सलेम को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है। 🔍 कैसे जोड़ा गया सजा का समय? सलेम ने अपनी याचिका में बताया है कि उसने करीब 11 साल 10 महीने अंडरट्रायल के रूप में, लगभग 10 साल सजा के रूप में और 3 साल से अधिक अच्छे व्यवहार के आधार पर छूट (remission) के तौर पर पूरा किया है। इसी आधार पर उसने दावा किया है कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है। 📌 मामले की पृष्ठभूमि अबू सलेम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले का दोषी है, जिसमें देशभर में सनसनी फैल गई थी और सैकड़ों लोगों की जान गई थी। यह भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक माना जाता है। इस मामले में सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और वह फिलहाल नासिक रोड सेंट्रल जेल में बंद है। 🔍 निष्कर्ष: अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो यह तय करेगा कि अबू सलेम को समयपूर्व रिहाई मिलती है या नहीं। यह फैसला न केवल इस केस के लिए बल्कि प्रत्यर्पण शर्तों और सजा की गणना से जुड़े कानूनी पहलुओं के लिए भी अहम साबित होगा।
मुंबई में विवाद: प्रदर्शनकारियों को फर्जी ड्रग केस में फंसाने की धमकी देने वाला पुलिसकर्मी निलंबित

मुंबई में विवाद: प्रदर्शनकारियों को फर्जी ड्रग केस में फंसाने की धमकी देने वाला पुलिसकर्मी निलंबित

मुंबई में विवाद: प्रदर्शनकारियों को फर्जी ड्रग केस में फंसाने की धमकी देने वाला पुलिसकर्मी निलंबित मुंबई: मुंबई में छात्र प्रदर्शन के बीच एक वायरल वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को दोबारा विरोध में शामिल होने पर फर्जी ड्रग केस में फंसाने की धमकी देता नजर आ रहा है। इस मामले के सामने आते ही मुंबई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर मुंबई कांग्रेस द्वारा साझा किया गया, जिसमें कुछ छात्रों को पुलिस वैन में बैठे हुए देखा जा सकता है। वीडियो में वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मी छात्रों को चेतावनी देते हुए कहता है कि अगर वे दोबारा प्रदर्शन में शामिल हुए तो उनके बैग में “नशीला पदार्थ” डालकर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। साथ ही वह यह भी कहता है कि वह उनकी जिंदगी बर्बाद कर देगा। घटना के सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने कहा कि वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी को उसके वर्तमान पद से हटा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि हाल के दिनों में मुंबई के शिवाजी पार्क, चेंबूर और आजाद मैदान जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र और नागरिक विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की रणनीतियों पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा डिजिटल ट्रैकिंग, फोन कॉल्स और घर जाकर निगरानी जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, ताकि लोग दोबारा प्रदर्शन में शामिल न हों। कई लोगों को कानूनी नोटिस भी भेजे गए हैं और उनसे पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और इसे दबाने के लिए डराने-धमकाने का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। निष्कर्ष: यह मामला अब कानून-व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ सकता है। सभी की नजरें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इस विवाद में आगे क्या कार्रवाई होती है।  

मुंबई में CJP समर्थन प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई: 50 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

मुंबई में CJP समर्थन प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई: 50 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज मुंबई: मुंबई में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में हुए प्रदर्शन को लेकर मुंबई पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। यह प्रदर्शन दादर स्थित चैत्यभूमि में आयोजित किया गया था। पुलिस के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन बिना आवश्यक अनुमति के किया गया था, जबकि उस समय शहर में धारा के तहत सार्वजनिक जमावड़े पर प्रतिबंध लागू था। महिम और शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशनों में आयोजकों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। यह प्रदर्शन दिल्ली में CJP के संसद मार्च को रोके जाने के बाद किया गया था। दिल्ली में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था। इसके विरोध में देश के कई हिस्सों में, including मुंबई, समर्थन प्रदर्शन आयोजित किए गए। मुंबई पुलिस ने बताया कि संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दादर, चैत्यभूमि, शिवाजी पार्क और महिम सहित कई इलाकों में सुरक्षा कड़ी की गई थी। कई लोगों, जिनमें छात्र भी शामिल थे, को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। बाद में कुछ को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किए गए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को भी सख्ती से दबाया। कुछ प्रतिभागियों ने दावा किया कि उन्हें बिना वजह हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ ने पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप लगाए। पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संयम बरता गया। इस बीच, शहर में सुरक्षा को देखते हुए मुंबई पुलिस ने 6 अगस्त तक पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा, आजाद मैदान, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और बीएमसी मुख्यालय जैसे संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। निष्कर्ष: मुंबई में इस कार्रवाई के बाद कानून-व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं और बढ़ सकती हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार के खिलाफ विरोध करना अपराध नहीं, मुंबई पुलिस का निर्वासन आदेश रद्द

बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार के खिलाफ विरोध करना अपराध नहीं, मुंबई पुलिस का निर्वासन आदेश रद्द

बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार के खिलाफ विरोध करना अपराध नहीं, मुंबई पुलिस का निर्वासन आदेश रद्द मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नागरिकों के मौलिक अधिकारों को मजबूत करते हुए मुंबई पुलिस के एक निर्वासन (Externment) आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करना किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और केवल इसी आधार पर उसे शहर से बाहर नहीं किया जा सकता। क्या है पूरा मामला? यह मामला सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी से जुड़ा है, जिन्हें मुंबई पुलिस ने एक साल के लिए मुंबई और उसके आसपास के इलाकों से बाहर रहने का आदेश दिया था। यह कार्रवाई उनके खिलाफ दर्ज कई FIR के आधार पर की गई थी, जो मुख्यतः सरकार के फैसलों के विरोध में किए गए प्रदर्शनों से संबंधित थीं। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी न्यायमूर्ति माधव जामदार ने सुनवाई के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन, नारेबाजी या सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के तहत आता है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के कारणों से महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत निर्वासन की कार्रवाई करना अधिकारों का उल्लंघन है। पुलिस के अधिकारों के दुरुपयोग पर सवाल कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं, न कि किसी राजनीतिक दल या नेता के प्रति। अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि केवल सरकार विरोधी नारे लगाने के आधार पर इतनी कठोर कार्रवाई कैसे की जा सकती है। पूर्व आदेशों को भी किया रद्द हाईकोर्ट ने न सिर्फ पुलिस द्वारा जारी मूल निर्वासन आदेश को रद्द किया, बल्कि कोंकण डिवीजन के डिविजनल कमिश्नर द्वारा उसे बरकरार रखने के फैसले को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह आदेश पूरी तरह से मनमाना और कानून के गलत इस्तेमाल का उदाहरण है। संवैधानिक अधिकारों की रक्षा अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, और ऐसे आदेश इन अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। निष्कर्ष: यह फैसला न केवल एक व्यक्ति को राहत देने वाला है, बल्कि पूरे देश में नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल भी बन गया है। अदालत के इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन करना अपराध नहीं, बल्कि अधिकार है।
नालासोपारा में बेकाबू भीड़ का पुलिस पर हमला: मिर्च पाउडर फेंककर की मारपीट, दो जवान घायल

नालासोपारा में बेकाबू भीड़ का पुलिस पर हमला: मिर्च पाउडर फेंककर की मारपीट, दो जवान घायल

नालासोपारा में बेकाबू भीड़ का पुलिस पर हमला: मिर्च पाउडर फेंककर की मारपीट, दो जवान घायल अंडरकवर एडिटर न्यूज़ चैनल, १८ अप्रैल, २०२६. ठाणे: Nalasopara के बावखल इलाके में शनिवार को कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां एक उग्र भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने न केवल पुलिस पर मिर्च पाउडर फेंका, बल्कि लाठी-डंडों से भी हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। जमीन विवाद से शुरू हुआ बवाल प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद जमीन के मुद्दे से जुड़ा हुआ है। कुछ लोगों ने कथित रूप से एक व्यक्ति की जमीन पर कब्जा करने के प्रयास में प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए सड़क जाम कर दिया। इस दौरान Mumbai-Ahmedabad Highway पर अचानक बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस पर अचानक हमला स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो भीड़ ने आक्रामक रुख अपना लिया। पुलिस द्वारा समझाने की कोशिश के बावजूद भीड़ ने सुनने से इनकार कर दिया और अचानक मिर्च पाउडर फेंकते हुए हमला शुरू कर दिया। इस हमले में पुलिसकर्मी हेमराज वाघेरे और शुभम उगले घायल हो गए। इसके अलावा, अंकित उपाध्याय नामक व्यक्ति को भी भीड़ ने पीटा। इलाके में तनाव, पुलिस की सख्त कार्रवाई घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। Mandvi Police Station ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। निष्कर्ष यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटी-छोटी बातों पर भीड़ किस तरह हिंसक रूप ले सकती है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की है।
🚨 Temple Trust Shocked: Worker Arrested for Stealing from Donation Boxes at Siddhivinayak Temple

🚨 Temple Trust Shocked: Worker Arrested for Stealing from Donation Boxes at Siddhivinayak Temple

🚨 Temple Trust Shocked: Worker Arrested for Stealing from Donation Boxes at Siddhivinayak Temple Mumbai: In a disturbing incident that has raised serious concerns over security and trust, a 57-year-old temple worker has been arrested for allegedly stealing money from donation boxes at the renowned Siddhivinayak Temple. According to officials, the accused—identified as Rajendra Pendurkar—was taken into custody by the Dadar Police following a complaint filed by temple authorities. The alleged theft took place inside the pujari room of the temple, where donation boxes are kept. Suspicion arose after irregularities were noticed, prompting officials to review CCTV footage. The recordings reportedly revealed the accused repeatedly extracting currency notes from the boxes. In one instance, he was seen using his fingers to pull out cash from a donation box kept inside the priest’s chamber, as mentioned in the FIR. Preliminary estimates suggest that at least ₹10,000 has been stolen. However, authorities believe the amount could be higher, and investigations are currently underway to determine whether such thefts had been occurring over a longer period. Police are also probing the possibility of involvement of other staff members, if any, in the incident. Temple authorities have taken the matter seriously, emphasizing the need for stricter monitoring and security within the premises to prevent such breaches in the future. The incident has not only shocked devotees but also highlighted the urgent need for tighter vigilance even in highly revered religious institutions.

Recent News

Undercover Editor

From BMC updates, local area developments, railway station news, and crime reports to the latest in politics, sports, Bollywood, lifestyle, travel, and education, we bring you news that’s relevant, reliable, and real-time

 

Undercover Editor © 2025 – Designed by iCreato