यह घटना 28 मई 2017 की है, जब आरोपी पी. नारायणासामी पूसरिपडैयाची, जो उस समय रेलवे कमिश्नर की टोयोटा इनोवा चला रहा था, ने चर्चगेट के पास ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर निधि जેઠमलानी को टक्कर मार दी थी। बताया गया कि वाहन तेज रफ्तार (करीब 70 किमी/घंटा) में था और रेड सिग्नल के बावजूद यह हादसा हुआ।
⚠️ गंभीर चोटें और लंबा इलाज
हादसे में किशोरी के सिर और कमर में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उसने बड़ी सर्जरी करवाई और करीब तीन महीने बाद अस्पताल से छुट्टी मिली, लेकिन लंबे समय तक वह वेजिटेटिव स्टेट (कोमा जैसी स्थिति) में रही।
⚖️ कोर्ट का फैसला और वजह
हाल ही में मुंबई की अदालत ने आरोपी को लापरवाही से गाड़ी चलाने का दोषी ठहराते हुए ₹20,000 का जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
अदालत ने अपने फैसले में आरोपी की उम्र (66 वर्ष), आर्थिक स्थिति, पहली बार अपराध करने और लंबे समय तक चले ट्रायल को ध्यान में रखते हुए नरम रुख अपनाया।
💰 मुआवजा और हाई कोर्ट की टिप्पणी
इससे पहले 2021 में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने पीड़िता को लगभग ₹70 लाख का मुआवजा और भविष्य के इलाज के लिए ₹1.5 करोड़ का फंड देने का आदेश दिया था।
वहीं, Bombay High Court ने 2025 में सुनवाई के दौरान इस मामले की तुलना अरुणा शानबाग केस से करते हुए रेलवे मंत्रालय को मुआवजा बढ़ाने पर पुनर्विचार करने को कहा था।
📌 निष्कर्ष:
यह मामला एक बार फिर न्याय प्रक्रिया और सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इतने गंभीर हादसे के बावजूद मामूली जुर्माना लगने से न्याय और सजा के बीच संतुलन पर बहस तेज हो सकती है।
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