मुंबई महानगरपालिका की जंग: दहिसर–बोरीवली में मैंग्रोव कटाई और प्रदूषित नदी बने चुनावी मुद्दे

मुंबई महानगरपालिका की जंग: दहिसर–बोरीवली में मैंग्रोव कटाई और प्रदूषित नदी बने चुनावी मुद्दे

मुंबई | Undercover Editor News Channel

आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से पहले उत्तर मुंबई के दहिसर और बोरीवली इलाकों में राजनीति का केंद्र विकास नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संकट और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली बनता जा रहा है। आर नॉर्थ वार्ड में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेज़ी से खत्म होते मैंग्रोव और एक समय की जीवनदायिनी दहिसर नदी का नाले में तब्दील हो जाना है।

मैंग्रोव का विनाश, बढ़ती चिंता        

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि दहिसर (पश्चिम) में बीते तीन दशकों में मैंग्रोव क्षेत्र में भारी गिरावट आई है। पर्यावरण कार्यकर्ता हरीश पांडे के अनुसार,

“अगर 1995 की हवाई तस्वीरों की तुलना आज की स्थिति से की जाए, तो साफ दिखेगा कि किस तरह मैंग्रोव खत्म होते गए और उनकी जगह नई संरचनाएँ खड़ी हो गईं।”

दूसरे चरण के कोस्टल रोड प्रोजेक्ट ने स्थानीय नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है। कितने पेड़ काटे जाएंगे, उनका मुआवजा कैसे दिया जाएगा और इसके बाद पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा—इन सवालों का अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

दहिसर नदी की सफाई अब भी अधूरी

दहिसर नदी के पुनर्जीवन की योजनाएँ वर्षों से कागज़ों में ही सीमित हैं। बीएमसी द्वारा दहिसर (पश्चिम) में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य गंदे पानी को नदी में जाने से रोकना है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि असली चुनौती इसका सख़्त क्रियान्वयन है।

हरीश पांडे एक उदाहरण देते हुए कहते हैं,

“बोरीवली (पूर्व) में STP चालू है, फिर भी तबेलों का कचरा नदी में डाला जा रहा है। इससे पूरे प्रोजेक्ट का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।”

टूटी सड़के, गायब फुटपाथ               

स्थानीय समस्याएँ केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं। आर्किटेक्ट और पूर्व कांग्रेस नगरसेविका शीटल अशोक म्हात्रे ने फुटपाथों की खराब हालत और उपेक्षित उद्यानों को लेकर तीखी नाराज़गी जताई।

उन्होंने कहा,

“न्यू लिंक रोड पर तुकाराम ओंबले गार्डन 2009 में 4 करोड़ रुपये की लागत से बना था, लेकिन आज खंडहर जैसी हालत में है। मैंने बीएमसी, सांसद और विधायक को कई बार पत्र लिखे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

सामाजिक कार्यकर्ता कैसेंड्रा नज़रथ ने बताया कि कई आंतरिक सड़कों पर फुटपाथ हैं ही नहीं।

“पार्किंग और फेरीवाले पूरी लेन घेर लेते हैं। पैदल चलने वालों को जान जोखिम में डालकर सड़क पर चलना पड़ता है।”

आरक्षण और राजनीतिक उलटफेर

वार्ड आरक्षण में बदलाव के कारण कई पुराने नगरसेवकों की राजनीतिक राह मुश्किल हो गई है। प्रभाग 1 से एक दशक तक प्रतिनिधित्व करने वाले दिवंगत अभिषेक घोसालकर और उनकी पत्नी तेजस्वी घोसालकर अब आरक्षित सीट के कारण नए क्षेत्र की तलाश में हैं।

जवाबदेही की मांग

पूर्व भाजपा नगरसेवक हरीश छेड़ा ने सुझाव दिया कि उन बीएमसी इंजीनियरों पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए जो एक ही सड़क या नाली पर बार-बार काम कराते हैं, बिना स्थायी समाधान के।

स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी भी बड़ा मुद्दा

नागरिकों का कहना है कि भगवती अस्पताल के दूसरे चरण का उद्घाटन अब तक न होना गंभीर चिंता का विषय है।

पूर्व शिवसेना नगरसेविका शीटल मुकेश म्हात्रे के अनुसार,

“दक्षिण मुंबई से कनेक्टिविटी और भगवती अस्पताल का पूरा होना आर नॉर्थ वार्ड के लोगों के लिए बेहद अहम है।”

चुनाव से पहले असली सवाल

जैसे-जैसे BMC चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, दहिसर और बोरीवली के मतदाता अब बड़े वादों से ज्यादा ठोस समाधान चाहते हैं। पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित पैदल मार्ग, साफ़ नदी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ—ये मुद्दे तय करेंगे कि इस बार जनता किस पर भरोसा जताती है।

एक बात साफ है: आर नॉर्थ वार्ड में यह चुनाव सिर्फ़ राजनीति का नहीं, बल्कि पर्यावरण और नागरिक जीवन की गुणवत्ता का भी इम्तिहान है।

Undercover Editor

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