मुंबई सिविक चुनावों से पहले बड़ा खुलासा: पिछली BMC हाउस में केवल 2 पार्षद ‘A-ग्रेड’, अधिकांश का प्रदर्शन बेहद कमजोर

मुंबई सिविक चुनावों से पहले बड़ा खुलासा: पिछली BMC हाउस में केवल 2 पार्षद ‘A-ग्रेड’, अधिकांश का प्रदर्शन बेहद कमजोर

मुंबई | 16 दिसंबर 2025 | अंडरकवर एडिटर न्यूज़ चैनल

मुंबई एक बार फिर नगर निगम चुनावों की ओर बढ़ रही है, लेकिन मतदान से पहले सामने आई एक अहम रिपोर्ट ने शहर की सिविक गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रजा फाउंडेशन (Praja Foundation) द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2021 के कार्यकाल वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की अंतिम हाउस में अधिकांश पार्षद अपने दायित्वों पर खरे नहीं उतर सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, मूल्यांकन किए गए 220 पार्षदों में से सिर्फ दो पार्षदों को ही ‘A’ ग्रेड मिला, जबकि लगभग 90 प्रतिशत पार्षद औसत से भी नीचे प्रदर्शन करते पाए गए। यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है, जब मुंबई के मतदाता नए प्रतिनिधियों को चुनने की तैयारी कर रहे हैं।

ग्रेडिंग रिपोर्ट: आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं

प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट में पार्षदों को 100 अंकों के पैमाने पर आंका गया:

  • A ग्रेड (80–100 अंक): केवल 2 पार्षद
  • B ग्रेड (70–80 अंक): 20 पार्षद
  • C से F ग्रेड (70 से कम): 198 पार्षद

कुल 227 पार्षदों में से 7 को मेयर पद या अधूरे कार्यकाल के कारण मूल्यांकन से बाहर रखा गया। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि मुंबई की सिविक राजनीति में जवाबदेही और सक्रियता की भारी कमी रही।

उपस्थिति और भागीदारी पर सवाल

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि समिति बैठकों में पार्षदों की उपस्थिति लगातार घटती गई।

  • 2017–18 में उपस्थिति: 82.15%
  • 2019–20 में घटकर: 73.70%

इसके साथ ही:

  • नगर निगम से जुड़े सवालों की संख्या साल दर साल कम होती गई
  • कोविड-19 से पहले ही सहभागिता में गिरावट शुरू हो चुकी थी
  • महामारी के दौरान डिजिटल माध्यम उपलब्ध होने के बावजूद पार्षदों की सक्रियता नहीं बढ़ी

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब BMC जैसे विशाल और संसाधन-समृद्ध निकाय से बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा की जाती है।

प्रणालीगत खामियां उजागर

रिपोर्ट ने BMC के कामकाज में कई बुनियादी कमजोरियों की ओर भी इशारा किया:

  • अधिकांश वार्डों में पार्षदों का कमजोर प्रदर्शन
  • पार्षदों की गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र का अभाव
  • स्थानीय स्तर पर किए गए कार्यों की अपर्याप्त सार्वजनिक जानकारी
  • बड़े बजट के बावजूद अपेक्षित परिणामों की कमी
  • विकेंद्रीकृत और जवाबदेह निर्णय-प्रणाली की जरूरत

चुनाव से पहले मतदाताओं के लिए अहम संदेश

यह रिपोर्ट आगामी नगर निगम चुनावों से पहले मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। नागरिक अब पार्षदों के पुराने प्रदर्शन के आधार पर बेहतर निर्णय ले सकते हैं। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि चुनाव के बाद पारदर्शिता, उपस्थिति रिकॉर्ड और सार्वजनिक डैशबोर्ड जैसी व्यवस्थाओं की मांग और तेज हो सकती है।

एक नागरिक कार्यकर्ता ने कहा,

“यह रिपोर्ट साफ बताती है कि मुंबई को ऐसे जनप्रतिनिधियों की जरूरत है जो सिर्फ वादे नहीं, बल्कि ठोस और मापने योग्य काम करके दिखाएं।”

चुनावी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने हाल ही में घोषणा की है कि BMC सहित राज्य के 29 नगर निगमों में 15 जनवरी 2026 को मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। नामांकन प्रक्रिया 23 से 30 दिसंबर के बीच चलेगी।

निष्कर्ष

देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई के लिए यह रिपोर्ट एक आईना है। आने वाले चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का अवसर नहीं, बल्कि जवाबदेह, सक्रिय और परिणाम-उन्मुख नगर प्रशासन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकते हैं।

Undercover Editor

From BMC updates, local area developments, railway station news, and crime reports to the latest in politics, sports, Bollywood, lifestyle, travel, and education, we bring you news that’s relevant, reliable, and real-time

 

Undercover Editor © 2025 – Designed by iCreato