आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस को मामले की जांच करने और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। NHRC ने मुंबई पुलिस के अलावा X Corp, MeitY और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को भी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
आखिर NHRC ने क्यों लिया संज्ञान?
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली स्थित Sewa Nyaya Uthan Foundation के Intervention Head सतिश वैद की शिकायत के आधार पर आयोग के समक्ष यह मामला पहुंचा। शिकायत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आए कुछ पोस्ट और वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में बच्चों को शामिल किया गया।
शिकायत में कथित ग्रुप चैट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें प्रदर्शन की तैयारी और नाबालिगों की भागीदारी से संबंधित चर्चा होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने CJP से जुड़े अजिंक्य शिंदे, अभिजीत दिपके और सौरव दास समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और NHRC ने इन आरोपों की जांच के निर्देश दिए हैं। अभी यह अंतिम रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि आयोजकों ने जानबूझकर बच्चों का इस्तेमाल किया था।
बच्चों को लेकर आयोग ने क्या चिंता जताई?
NHRC की ओर से मामले को केवल किसी सार्वजनिक प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी तक सीमित नहीं माना गया। आयोग ने इस बात की जांच के निर्देश दिए हैं कि कहीं नाबालिगों को उनकी उम्र और संवेदनशीलता को देखते हुए किसी राजनीतिक प्रदर्शन में योजनाबद्ध तरीके से तो शामिल नहीं किया गया।
आयोग ने कथित तौर पर इस पहलू की भी जांच करने को कहा है कि क्या बच्चों की मौजूदगी का इस्तेमाल पुलिस की संभावित कार्रवाई से बचने के लिए किया गया था।
साथ ही, प्रदर्शन के दौरान बच्चों के फोटो और वीडियो बनाए जाने तथा बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के पहलू की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुंबई पुलिस को क्या जांच करनी होगी?
NHRC ने मुंबई पुलिस को उपलब्ध वीडियो, फोटो, सोशल मीडिया सामग्री और कथित चैट रिकॉर्ड की जांच करने को कहा है।
जांच में यह पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि:
NHRC ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान संज्ञेय अपराध सामने आता है तो कानून के अनुसार FIR दर्ज की जाए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
X Corp और MeitY को भी निर्देश
मामले में सिर्फ मुंबई पुलिस ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
X Corp से संबंधित अकाउंट और कंटेंट रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा बच्चों की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है।
वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को Information Technology Act और IT Rules के तहत लागू होने वाले प्रावधानों, विशेष रूप से डिजिटल सामग्री से जुड़ी due-diligence और रिकॉर्ड संरक्षण संबंधी जिम्मेदारियों की जांच करने को कहा गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की भी भूमिका
महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान संबंधित नाबालिगों के हित और उनकी सुरक्षा प्रभावित न हो।
कानून में बच्चों के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर क्या प्रावधान हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में ऐसा कोई सामान्य प्रावधान नहीं है जो हर परिस्थिति में बच्चों को किसी सार्वजनिक सभा या शांतिपूर्ण प्रदर्शन में मौजूद रहने से प्रतिबंधित करता हो।
संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि इस अधिकार पर अनुच्छेद 19(3) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
मामला तब गंभीर कानूनी सवाल खड़ा कर सकता है जब किसी बच्चे की मौजूदगी को क्रूरता, शोषण या किसी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल से जोड़ा जाए।
Juvenile Justice Act की धारा 75
Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 75 बच्चे के साथ क्रूरता से संबंधित है। इसमें बच्चे की देखभाल या नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति द्वारा बच्चे को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक पीड़ा पहुंचाने की स्थिति में सजा का प्रावधान है।
धारा 83(2) भी जांच के दायरे में
NHRC ने पुलिस को JJ Act की धारा 83(2) की लागू होने की संभावना की भी जांच करने को कहा है। यह प्रावधान वयस्कों द्वारा बच्चों को गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने से संबंधित है।
इसलिए जांच का मुख्य सवाल यह होगा कि प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी केवल संयोगवश थी या किसी ने उन्हें जानबूझकर किसी उद्देश्य से शामिल किया था।
पहले भी राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों को लेकर उठे हैं सवाल
राजनीतिक अभियानों और विरोध प्रदर्शनों में बच्चों की भागीदारी को लेकर इससे पहले भी बाल अधिकार संस्थाएं चिंता जताती रही हैं।
2019 में चुनावी प्रचार से जुड़े एक वीडियो को लेकर तत्कालीन NCPCR नेतृत्व ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से बच्चों की मौजूदगी के संबंध में जानकारी मांगी थी।
CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी बच्चों की मौजूदगी को लेकर NCPCR ने चिंता जताई थी। इसके अलावा 2022 में भारत जोड़ो यात्रा और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी को लेकर भी बाल अधिकारों से जुड़े सवाल उठे थे।
2024 में भी राजनीतिक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी से संबंधित मामलों में NHRC की ओर से चिंता जताई गई थी।
अब जांच के बाद क्या होगा?
फिलहाल NHRC का कदम जांच के निर्देश और रिपोर्ट तलब करने तक है। इसका अर्थ यह नहीं है कि CJP या उसके किसी पदाधिकारी को इस मामले में दोषी घोषित कर दिया गया है।
अब मुंबई पुलिस को उपलब्ध डिजिटल और अन्य साक्ष्यों की जांच करनी होगी। यदि जांच में किसी संज्ञेय अपराध के पर्याप्त संकेत मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि क्या बच्चों की मौजूदगी सामान्य नागरिक भागीदारी थी या उन्हें किसी संगठित तरीके से प्रदर्शन में शामिल किया गया था। इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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