मुंबई में 2026 में 231 दिन रही ‘अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ हवा, BMC ने जारी किया विंटर एक्शन प्लान

मुंबई में 2026 में 231 दिन रही ‘अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ हवा, BMC ने जारी किया विंटर एक्शन प्लान

निर्माण कार्य, सड़क की धूल, वाहनों और खुले में कचरा जलाने पर BMC की नजर; प्रदूषण नियंत्रण के लिए 76 विशेष टीमें तैनात

मुंबई: मुंबई में वायु प्रदूषण को लेकर जहां सर्दियों के दौरान चिंता बढ़ने लगती है, वहीं BMC के ताजा आंकड़ों में इस साल अब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार का दावा किया गया है। BMC के मुताबिक, 1 जनवरी से 22 अक्टूबर 2026 के बीच मुंबई में 231 दिन हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही।

यह संख्या पूरे 2025 में दर्ज किए गए 218 दिनों से भी अधिक है।

BMC के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में मुंबई में ‘अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ वायु गुणवत्ता वाले 185 दिन दर्ज किए गए थे। यह संख्या 2024 में बढ़कर 216 दिन और 2025 में 218 दिन हो गई। अब 2026 में 22 अक्टूबर तक यह आंकड़ा 231 दिनों तक पहुंच चुका है।

PM10 प्रदूषण में करीब 48% कमी का दावा

BMC ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के PRANA पोर्टल के आंकड़ों का भी हवाला दिया है। इसके अनुसार, मुंबई में PM10 की सांद्रता में 2017-18 से 2025-26 के बीच लगभग 48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

हालांकि, सर्दियों के दौरान प्रदूषण के संभावित बढ़ते स्तर को देखते हुए BMC ने अपनी निगरानी और कार्रवाई को और तेज करने की तैयारी की है।

BMC ने जारी किया Winter Air Pollution Action Plan 2026

सर्दी के मौसम को देखते हुए BMC ने Winter Air Pollution Mitigation and Enforcement Action Plan 2026 जारी किया है।

इस योजना में मुख्य रूप से इन प्रदूषण स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

  • निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल और प्रदूषण
  • सड़कों की धूल
  • वाहनों से होने वाला प्रदूषण
  • खुले में कचरा जलाना
  • प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट
  • पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण

76 विशेष टीमें करेंगी अचानक जांच

BMC ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए 76 वार्ड-स्तरीय एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन स्क्वॉड तैनात किए हैं।

इन टीमों को अचानक और नियमित निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक टीम को रोजाना कम से कम दो निर्माण स्थलों का निरीक्षण करना होगा और पहले से चिन्हित प्रदूषण हॉटस्पॉट पर नियमों के पालन की भी जांच करनी होगी।

नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित निर्माण स्थल को कारण बताओ नोटिस, काम बंद करने का नोटिस और जरूरत पड़ने पर सीलिंग जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

BMC के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान निरीक्षण रिपोर्ट के साथ फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग को भी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

निर्माण स्थलों पर 28 नियमों का पालन जरूरी

BMC ने निर्माण स्थलों के लिए 28 सूत्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिशा-निर्देश लागू किए हैं।

इनमें निर्माण स्थलों पर सेंसर आधारित एयर क्वालिटी मॉनिटर, पानी के स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन लगाने के साथ निर्माणाधीन इमारतों को कवर करना और मलबे व निर्माण सामग्री को ढके हुए वाहनों में ले जाना शामिल है।

BMC के अनुसार, अब तक 3,166 निर्माण स्थलों पर सेंसर आधारित एयर क्वालिटी मॉनिटर लगाए जा चुके हैं, जिन्हें केंद्रीय डैशबोर्ड से जोड़ा गया है। इससे अधिकारियों को संबंधित साइटों की प्रदूषण स्थिति की निगरानी करने में मदद मिल रही है।

निर्माण स्थलों पर 25 से 35 फीट तक बैरिकेडिंग

निर्माण स्थलों के आसपास बैरिकेडिंग को भी अनिवार्य किया गया है। परियोजना के आकार के अनुसार बैरिकेडिंग की न्यूनतम ऊंचाई 25 से 35 फीट तक निर्धारित की गई है।

डेवलपर्स और ठेकेदारों को निर्माण स्थल से धूल बाहर फैलने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, निर्माण वाहनों के टायरों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि वाहन सार्वजनिक सड़कों पर धूल और मिट्टी न फैलाएं।

सड़क की धूल पर भी BMC की नजर

सड़क से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए BMC नियमित सफाई के साथ डीप क्लीनिंग अभियान चला रही है।

इसके लिए 29 मल्टीपर्पज वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसके अलावा, निर्माण परियोजनाओं के डेवलपर्स और ठेकेदारों को अपने निर्माण स्थलों से लगी सड़कों की सफाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

निर्माण और तोड़फोड़ के मलबे की होगी ट्रैकिंग

BMC ने Mumbai Debris Control and Tracking System (MDCTS) को भी अनिवार्य किया है।

इस व्यवस्था के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे को उसके स्रोत से लेकर अधिकृत रीसाइक्लिंग सुविधा तक ट्रैक किया जाएगा।

इस नियम के दायरे में डेवलपर्स और परियोजना संचालकों के अलावा SRA, MHADA, MIDC और MMRDA जैसी योजना एवं विकास संस्थाएं भी शामिल हैं।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई

BMC ने रेडी-मिक्स कंक्रीट वाहनों की भी जांच शुरू की है। इसके अलावा, visibly polluting यानी स्पष्ट रूप से अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुंबई ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय किया जा रहा है।

मुंबई की बेकरी भी प्रदूषण के रडार पर

BMC ने बेकरी उद्योग को भी पार्टिकुलेट प्रदूषण के एक स्रोत के रूप में चिन्हित किया है। नागरिक निकाय के अनुमान के मुताबिक, मुंबई के PM उत्सर्जन में बेकरी का योगदान लगभग 3.5 प्रतिशत है।

मुंबई की कुल 593 बेकरी में से 209 पहले से स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल कर रही थीं, जबकि 175 अन्य बेकरी भी स्वच्छ ईंधन पर स्थानांतरित हो चुकी हैं।

इसके अलावा:

  • 69 बेकरी अभी स्वच्छ ईंधन में बदलाव की प्रक्रिया में हैं।
  • 87 बेकरी अभी नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
  • 8 बेकरी बंद हो चुकी हैं।

BMC ने स्पष्ट किया है कि नई लाइसेंस और अनुमतियां तभी दी जाएंगी, जब संबंधित बेकरी में अनिवार्य ग्रीन-फ्यूल नियमों का पालन सुनिश्चित हो।

श्मशान घाटों में भी लगाए जाएंगे प्रदूषण नियंत्रण उपकरण

BMC शहर के 10 श्मशान घाटों में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने की प्रक्रिया में है। इसका उद्देश्य दाह संस्कार के दौरान निकलने वाले उत्सर्जन को कम करना है।

खुले में कचरा जलाने पर सख्ती

BMC ने खुले में कचरा और अन्य सामग्री जलाने वाले स्थानों को भी निगरानी के दायरे में रखा है।

चिन्हित हॉटस्पॉट पर निगरानी की जा रही है और खुले में जलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

BMC के दिशा-निर्देशों के अनुसार, उसके अधिकार क्षेत्र में खुले में कचरा जलाना प्रतिबंधित है। इसमें कचरा डंपिंग ग्राउंड और ऐसे अन्य स्थान भी शामिल हैं, जहां अक्सर कचरा जलाने की घटनाएं सामने आती हैं।

पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर भी जागरूकता अभियान

सर्दियों और त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाले वायु एवं ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए BMC लोगों के बीच जागरूकता संदेश भी जारी कर रही है।

BMC ने दोहराया है कि सार्वजनिक सड़क, रोड, गली, फुटपाथ और साइलेंस जोन में पटाखे जलाने की अनुमति नहीं है।

BMC की तैयारी कितनी कारगर होगी?

मुंबई में इस साल ‘अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ हवा वाले दिनों की संख्या बढ़ी है, लेकिन सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए BMC ने निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है।

अब निर्माण स्थलों से लेकर सड़कों की धूल, वाहनों, बेकरी, खुले में कचरा जलाने और पटाखों तक—प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई की जाएगी। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि 76 विशेष टीमें और नया विंटर एक्शन प्लान जमीन पर प्रदूषण नियंत्रण में कितना असर डालते हैं।

Undercover Editor

Mahesh Rathod — Editor

 

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