“सिर्फ साउथ मुंबई साफ होने से पूरा शहर साफ नहीं होता”, कचरा संकट पर बॉम्बे हाईकोर्ट की BMC को कड़ी फटकार

“सिर्फ साउथ मुंबई साफ होने से पूरा शहर साफ नहीं होता”, कचरा संकट पर बॉम्बे हाईकोर्ट की BMC को कड़ी फटकार

मुंबई: मुंबई में कचरा और गंदगी की लगातार बनी समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ साउथ मुंबई या वर्ली जैसे इलाकों का साफ दिखाई देना पूरे मुंबई शहर के साफ होने का प्रमाण नहीं है।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ शहर में लगातार जारी कचरा प्रबंधन और खुले में कचरा फेंके जाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई के विभिन्न इलाकों में सफाई व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

“साउथ मुंबई पूरा मुंबई नहीं है”

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शहर के कई हिस्सों में गंदगी की स्थिति बनी हुई है। पीठ ने विशेष रूप से इस बात पर नाराजगी जताई कि साउथ मुंबई और वर्ली जैसे कुछ इलाकों की सफाई को पूरे शहर की स्थिति का पैमाना नहीं बनाया जा सकता।

अदालत के मुताबिक, मुंबई के अलग-अलग वार्डों में सड़क किनारे कचरा जमा होने और खुले में कचरा फेंके जाने की समस्या अभी भी खत्म नहीं हुई है।

पीठ ने कहा कि BMC ने सभी 24 वार्डों के लिए सफाई योजना और उपाय बताए हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीन पर कचरा फेंके जाने की समस्या लगातार दिखाई दे रही है।

मालाड और जोगेश्वरी की स्थिति पर खास चिंता

अदालत ने मुंबई के पश्चिमी उपनगरों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया। सुनवाई के दौरान जोगेश्वरी और मालाड में कचरे की स्थिति को विशेष रूप से गंभीर बताया गया।

इन इलाकों में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर कचरा जमा होने की शिकायतों को देखते हुए अदालत ने BMC से यह बताने को कहा कि संबंधित वार्ड अधिकारियों ने जमीन पर वास्तविक स्थिति की जांच के लिए क्या कदम उठाए हैं।

वार्ड अधिकारियों से मांगा विस्तृत जवाब

हाईकोर्ट ने BMC से एक व्यापक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें प्रत्येक वार्ड में सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और उसे सुधारने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देने को कहा गया है।

अदालत यह भी जानना चाहती है कि गांधी जयंती के अवसर पर चलाए गए ‘स्वच्छता अभियान’ के तहत BMC और उसके वार्ड अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की और उसका जमीन पर कितना असर दिखाई दिया।

“हम नागरिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर चिंतित हैं”

सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है। अदालत की चिंता आम नागरिकों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन की गुणवत्ता को लेकर है।

पीठ ने कहा कि शहर में बुनियादी स्वच्छता अनुशासन कायम रहना जरूरी है और हर वार्ड में स्वच्छता व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होनी चाहिए।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वर्षों से दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

“कानून अच्छे हैं, लेकिन लागू करने में समस्या है”

हाईकोर्ट ने कचरा फेंकने की नागरिकों की आदत पर भी टिप्पणी की। पीठ के मुताबिक, शहर में कई जगह खुले स्थान दिखाई देते ही वहां कचरा फेंकने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है।

अदालत ने कहा कि मुंबई में कचरा प्रबंधन को लेकर पर्याप्त कानून और नियम मौजूद हैं, लेकिन उनके प्रभावी अमल और enforcement में समस्या बनी हुई है।

इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुंबई की सफाई केवल BMC की जिम्मेदारी नहीं है; नागरिकों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना भी समस्या को बढ़ाता है।

पहले भी दी थी कार्रवाई की चेतावनी

इससे पहले 10 सितंबर को हुई सुनवाई में भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC के वार्ड अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि यदि शहर में लगातार जारी कचरा और खुले में कूड़ा फेंकने की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

अदालत ने उस समय भी मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

कांजुरमार्ग लैंडफिल से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट की ये टिप्पणियां कांजुरमार्ग लैंडफिल में नगरपालिका ठोस कचरे के लगातार डंप किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आईं।

इस मामले में अदालत मुंबई की समग्र कचरा प्रबंधन व्यवस्था, वार्ड स्तर की स्वच्छता और कचरे के निपटारे से जुड़े पहलुओं पर भी नजर रख रही है।

22 अक्टूबर को अगली सुनवाई

अब BMC को अदालत के निर्देश के अनुसार वार्ड स्तर की कार्रवाई और स्वच्छता व्यवस्था से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।

मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि BMC अपने हलफनामे में मुंबई के 24 वार्डों की वास्तविक स्थिति, खासकर मालाड और जोगेश्वरी जैसे पश्चिमी उपनगरों में कचरा प्रबंधन को लेकर क्या जवाब देती है और अदालत के निर्देशों के बाद जमीन पर क्या बदलाव दिखाई देता है।

 

Undercover Editor

From BMC updates, local area developments, railway station news, and crime reports to the latest in politics, sports, Bollywood, lifestyle, travel, and education, we bring you news that’s relevant, reliable, and real-time

 

Undercover Editor © 2025 – Designed by iCreato