मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

नई दिल्ली: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर केंद्र की राजनीति में जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में रिट याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ताओं ने SIR से संबंधित फैसलों और उनकी प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड उपलब्ध कराने तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही, मामले का अंतिम निर्णय होने तक देशभर में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

याचिका में कौन-कौन हैं शामिल?

राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा याचिका में INDIA गठबंधन से जुड़े विभिन्न दलों के नेताओं को याचिकाकर्ता बनाया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • सौगत राय — तृणमूल कांग्रेस
  • अखिलेश यादव — समाजवादी पार्टी
  • तेजस्वी प्रसाद यादव — राष्ट्रीय जनता दल
  • संजय राउत — शिवसेना (UBT)
  • एम. ए. बेबी — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
  • डी. राजा — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
  • महुआ माजी — झारखंड मुक्ति मोर्चा
  • सुप्रिया सुले — राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)
  • ई. टी. मोहम्मद बशीर — इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग

याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है।

SIR के फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

याचिका में चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया से संबंधित फाइलें, बैठक की कार्यवाही, आधिकारिक टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियों का विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही ECINET और ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के चुनाव आयोग के फैसले से संबंधित पूरी फाइल पेश करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि प्रक्रिया में लिए गए फैसलों की वैधानिकता और पारदर्शिता की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 तथा टी. एन. शेषन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के संदर्भ में भी सवाल उठाए गए हैं।

हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण सार्वजनिक करने की मांग

याचिका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि हटाए गए मतदाताओं के नाम बूथवार प्रकाशित किए जाएं और प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताया जाए।

इसके अलावा, हटाए गए मतदाताओं का आयु और लिंग के आधार पर विवरण उपलब्ध कराने तथा पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र मतदाताओं को नाम शामिल कराने के लिए आवेदन का अवसर देने की मांग भी उठाई गई है।

सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रस्ताव

विपक्षी नेताओं ने SIR के तहत हटाए गए नामों और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने की मांग की है।

याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से संबंधित प्रक्रियाओं की अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के आधार पर समीक्षा करने का अनुरोध भी शामिल है।

इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि मामले के लंबित रहने के दौरान SIR से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाएं और उनकी कार्यवाही का उचित रिकॉर्ड रखा जाए। ऑनलाइन फॉर्म-6 को मौजूदा मतदाता पंजीकरण नियमों के अनुरूप बनाने की मांग भी की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले दायर हुई याचिका

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR तथा चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगा था। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए अनुरोध स्वीकार नहीं किया कि संबंधित मुद्दे पहले से ही अदालत में विचाराधीन हैं।

हालांकि, उन्होंने नेताओं को उचित राहत के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, SIR से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया था कि विपक्षी नेताओं की ओर से दायर नई याचिका पर भी लंबित मामलों के साथ विचार किया जा सकता है।

अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं की इस याचिका से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद को नया कानूनी मोड़ मिला है। विपक्षी दल जहां प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं याचिका पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उसके आदेशों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, SIR पर रोक लगाने और अन्य राहतों की मांग याचिका का हिस्सा है। इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार या मंजूर किया गया अंतिम आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

 

Undercover Editor

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