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Contrary to popular belief, Lorem Ipsum is not simply random text. It has roots in a piece of classical Latin literature from 45 BC, making it over 2000 years old. Richard McClintock, a Latin professor

मुंबई में डेंगू के मामलों में 28% बढ़ोतरी, बारिश के बीच बढ़ा खतरा; डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

मुंबई में डेंगू के मामलों में 28% बढ़ोतरी, बारिश के बीच बढ़ा खतरा; डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

मुंबई में डेंगू के मामलों में 28% बढ़ोतरी, बारिश के बीच बढ़ा खतरा; डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह गर्म और उमस भरे मौसम के साथ जगह-जगह जमा पानी बना मच्छरों के प्रजनन का कारण; डेंगू के बाद बुखार उतरने पर भी कई दिनों तक रह सकती है कमजोरी मुंबई: मुंबई में डेंगू के मामलों में पिछले साल की तुलना में करीब 28 प्रतिशत बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। गर्म और उमस भरे मौसम के साथ बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी Aedes मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शहरवासियों से मच्छरों से बचाव के साथ डेंगू के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। डॉक्टरों के मुताबिक, डेंगू से ठीक होने के बाद भी मरीज को तुरंत पहले जैसी ऊर्जा महसूस हो, यह जरूरी नहीं है। बुखार खत्म होने के बाद भी थकान, कमजोरी, चक्कर, कम स्टैमिना और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी कई दिनों या कुछ मामलों में कुछ हफ्तों तक रह सकती है। क्यों बढ़ रहा है मुंबई में डेंगू का खतरा? डेंगू संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर अक्सर घरों और आसपास मौजूद छोटे-छोटे पानी जमा होने वाले स्थानों में पनपते हैं। फूलों के गमले और उनकी ट्रे, बाल्टी, कूलर, पुराने टायर, फेंके गए कंटेनर, छत, निर्माणाधीन इमारतों और अन्य जगहों पर जमा बारिश का पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। Zynova Shalby Hospital, Mumbai के Internal Medicine Expert डॉ. निमित्त नागड़ा के अनुसार, मुंबई में इस समय डेंगू के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। गर्म और उमस भरा मौसम Aedes मच्छरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करता है। डेंगू का खतरा किसी एक उम्र तक सीमित नहीं है। बच्चे, युवा, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग सभी संक्रमित मच्छर के काटने से डेंगू की चपेट में आ सकते हैं। बुखार उतरने के बाद भी कमजोरी क्यों? विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार खत्म होना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता। डॉ. विमल जे. पाहुजा, MD (Internal Medicine), Metabolic Physician एवं Diabetologist, Dr LH Hiranandani Hospital के मुताबिक, डेंगू और मलेरिया के बाद मरीज की रिपोर्ट बेहतर होने के बावजूद कुछ समय तक काफी कमजोरी महसूस हो सकती है। डेंगू में शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तेज हो सकती है और कई मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं तथा प्लेटलेट्स में कमी देखी जाती है। गंभीर मामलों में डिहाइड्रेशन, शरीर में तरल पदार्थों का असंतुलन और कुछ अंगों पर प्रभाव भी पड़ सकता है। वहीं मलेरिया लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इनके नष्ट होने से कुछ मरीजों में एनीमिया हो सकता है, जिससे थकान और शारीरिक क्षमता कम हो सकती है। डेंगू के सामान्य लक्षण क्या हैं? डेंगू या मलेरिया के दौरान मरीजों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: बुखार खत्म होने के बाद भी कुछ मरीजों को थोड़ी दूर चलने पर थकान, पैरों में भारीपन, चक्कर, कम स्टैमिना, ध्यान लगाने में परेशानी और सामान्य काम करने में कमजोरी महसूस हो सकती है। प्लेटलेट कम होने पर घबराएं नहीं, लेकिन निगरानी जरूरी डॉक्टरों के अनुसार डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ एक प्लेटलेट रिपोर्ट देखकर स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जाना चाहिए। मरीज की पूरी क्लिनिकल स्थिति, हाइड्रेशन, ब्लीडिंग के लक्षण और अलग-अलग दिनों की रिपोर्ट में आ रहे बदलाव को देखना महत्वपूर्ण है। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दोबारा रक्त जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट देखकर खुद से दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें? डेंगू से उबर रहे मरीज को यदि निम्न में से कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए: विशेष रूप से डेंगू के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। मच्छरों से बचाव के लिए क्या करें? डॉक्टरों ने लोगों से घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की है। इसके लिए: Aedes मच्छर दिन के समय भी काट सकते हैं, इसलिए मच्छरों से बचाव को केवल रात या शाम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। डेंगू का शक हो तो क्या करें? तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, त्वचा पर दाने, मतली या उल्टी जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, खासकर जब इलाके में डेंगू के मामले बढ़ रहे हों। डेंगू की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ, आराम, आवश्यक जांच और मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ सकती है। बुखार उतरते ही भारी व्यायाम, लंबे समय तक काम या ज्यादा शारीरिक मेहनत शुरू करना उचित नहीं है। मुंबई में डेंगू का बढ़ता खतरा शहरवासियों के लिए साफ संकेत है कि मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने के साथ-साथ संदिग्ध लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए। वहीं, डेंगू या मलेरिया से उबर रहे मरीजों को शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए पर्याप्त आराम देना चाहिए और सामान्य गतिविधियों में धीरे-धीरे लौटना चाहिए।  
दिशा सालियान मौत केस में CBI की FIR, आदित्य ठाकरे समेत कई नाम जांच के दायरे में

दिशा सालियान मौत केस में CBI की FIR, आदित्य ठाकरे समेत कई नाम जांच के दायरे में

दिशा सालियान मौत केस में CBI की FIR, आदित्य ठाकरे समेत कई नाम जांच के दायरे में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद छह साल पुराने मामले में नई जांच शुरू; FIR में रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली समेत कई लोगों के नाम का उल्लेख नई दिल्ली/मुंबई: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के करीब छह साल बाद मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार, 14 सितंबर को FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। FIR में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, अभिनेता डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों के नाम जांच के संदर्भ में दर्ज किए गए हैं। FIR में आदित्य ठाकरे के कथित बॉडीगार्ड्स, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर और तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समेत कई पुलिस अधिकारियों, फोरेंसिक अधिकारियों, डॉक्टरों तथा अन्य लोगों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति का FIR में नाम होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने या उसे आरोपी ठहराए जाने के बराबर नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश देते समय स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए। FIR में साजिश और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच CBI की FIR में कथित मुख्य अपराधों के अलावा आपराधिक साजिश, घटना को आत्महत्या के रूप में पेश किए जाने और सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें कथित हेरफेर जैसे पहलुओं की जांच का भी उल्लेख है। FIR में मालवणी पुलिस स्टेशन से जुड़े अधिकारियों, पोस्टमार्टम में शामिल डॉक्टरों एवं कर्मचारियों, कालिना स्थित फोरेंसिक साइंस लैब के अधिकारियों, रीजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड्स और पहले गठित विशेष जांच दल से जुड़े लोगों का भी उल्लेख किया गया है। अब CBI इन सभी पहलुओं की नए सिरे से जांच करेगी और यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दिशा सालियान की मौत की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्यों CBI जांच का आदेश दिया? दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने उनकी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 2 सितंबर को हाईकोर्ट ने मामले की CBI जांच का आदेश दिया और एजेंसी को FIR दर्ज करने तथा सतीश सालियान का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने शुरुआती पुलिस जांच में कई विसंगतियों का उल्लेख करते हुए कहा था कि जांच से कुछ सवालों के जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े हुए हैं। कोर्ट ने साथ ही यह महत्वपूर्ण निर्देश दिया कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा। दिशा सालियान की मौत और सुशांत सिंह राजपूत केस दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने मामले में Accidental Death Report (ADR) दर्ज की थी। इसके छह दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच कम अंतर होने के कारण कई तरह की अटकलें सामने आईं, हालांकि दोनों मामलों की जांच अलग-अलग की गई थी। दिशा सालियान की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की पिछली जांच ने इसे आत्महत्या माना था। पिता ने CBI के सामने कई नामों का किया उल्लेख CBI जांच शुरू होने से पहले दिशा के पिता सतीश सालियान ने एजेंसी के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने जांचकर्ताओं को अपनी जानकारी के अनुसार घटनाक्रम बताया और आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया तथा कुछ अन्य लोगों के नामों की जांच करने की मांग की थी। अब CBI पुराने केस रिकॉर्ड, पुलिस दस्तावेज, तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ-साथ संबंधित लोगों के बयान भी जांचेगी। मुंबई पुलिस से केस से जुड़े दस्तावेज CBI को सौंपने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। छह साल पुराने इस मामले में अब CBI की नई जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दिशा सालियान की मौत किन परिस्थितियों में हुई और शुरुआती जांच में उठे सवालों का वास्तविक जवाब क्या है। फिलहाल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को जांच पूरी होने से पहले अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।  
अमित शाह बोले- ‘डीकोलोनाइजेशन’ का मतलब इतिहास मिटाना नहीं, भारतीय नजरिए से सच्चाई दुनिया के सामने रखना

अमित शाह बोले- ‘डीकोलोनाइजेशन’ का मतलब इतिहास मिटाना नहीं, भारतीय नजरिए से सच्चाई दुनिया के सामने रखना

अमित शाह बोले- ‘डीकोलोनाइजेशन’ का मतलब इतिहास मिटाना नहीं, भारतीय नजरिए से सच्चाई दुनिया के सामने रखना मुंबई के एशियाटिक सोसाइटी में पांडुलिपि प्रदर्शनी का उद्घाटन; शाह ने भारतीय ज्ञान, इतिहास, भाषाओं और परंपराओं के संरक्षण पर दिया जोर मुंबई: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत में ‘डीकोलोनाइजेशन’ यानी उपनिवेशवाद से ज्ञान को मुक्त करने का मतलब इतिहास को मिटाना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई को प्रामाणिक तरीके से भारतीय दृष्टिकोण से दुनिया के सामने रखना है। शाह ने यह बात मुंबई की एशियाटिक सोसाइटी में एक पांडुलिपि प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद कही। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास, संस्कृति, भाषाओं, पांडुलिपियों और अभिलेखों को संरक्षित करने तथा उन्हें देश और दुनिया के लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। ‘इतिहास मिटाना नहीं, सही नजरिए से प्रस्तुत करना’ अमित शाह ने कहा कि डीकोलोनाइजेशन को इतिहास को मिटाने या अतीत को नकारने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य ऐतिहासिक तथ्यों को प्रामाणिक रूप से और भारतीय दृष्टिकोण से दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत के ज्ञान और इतिहास को औपनिवेशिक नजरिए के ढांचे में देखा गया। अब आवश्यकता है कि ज्ञान को उस ढांचे से बाहर निकालकर भारतीय परंपरा और दृष्टिकोण के आधार पर व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाए। भारतीय ज्ञान और विरासत को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर शाह ने भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के इतिहास, परंपराओं, भाषाओं, पांडुलिपियों और अभिलेखों को संरक्षित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल इन ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों और दुनिया के लोगों तक पहुंचाना भी आवश्यक है, ताकि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा व्यापक स्तर पर सामने आ सके। औपनिवेशिक दौर में ज्ञान और सत्ता के संबंध का जिक्र अमित शाह ने ब्रिटिश शासन के दौरान ज्ञान और सत्ता के बीच बने संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश व्यवस्था में ज्ञान और सत्ता आपस में जुड़े हुए थे और अब भारत ज्ञान को उस ढांचे से मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि डीकोलोनाइजेशन की प्रक्रिया का उद्देश्य भारतीय ज्ञान को उसके मूल संदर्भ में समझना और उसे आधुनिक दुनिया के सामने प्रामाणिक तरीके से प्रस्तुत करना है। एशियाटिक सोसाइटी में आयोजित पांडुलिपि प्रदर्शनी को इसी व्यापक विरासत और ज्ञान संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।  
जुहू में ISKCON के 3 रेस्टोरेंट पर FDA की बड़ी कार्रवाई, गंभीर स्वच्छता खामियों के चलते लाइसेंस निलंबित

जुहू में ISKCON के 3 रेस्टोरेंट पर FDA की बड़ी कार्रवाई, गंभीर स्वच्छता खामियों के चलते लाइसेंस निलंबित

जुहू में ISKCON के 3 रेस्टोरेंट पर FDA की बड़ी कार्रवाई, गंभीर स्वच्छता खामियों के चलते लाइसेंस निलंबित Govinda’s Restaurant समेत तीन फूड यूनिट्स में पानी की जांच से लेकर ड्रेनेज, कीट नियंत्रण और फूड हैंडलर्स की हाइजीन तक कई कमियां मिलीं; ISKCON ने सुधारात्मक कदम शुरू करने की बात कही मुंबई: मुंबई के जुहू स्थित ISKCON के हरे कृष्णा लैंड परिसर में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता नियमों के कथित गंभीर उल्लंघन को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। FDA ने परिसर में संचालित तीन रेस्टोरेंट/फूड यूनिट्स के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई 3 सितंबर को की गई जांच के बाद सामने आई है। FDA के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान ISKCON के Govinda’s Restaurant, Food Services Restaurant और परिसर में संचालित एक अन्य फूड प्रतिष्ठान में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, कीट नियंत्रण, खाद्य भंडारण और व्यक्तिगत साफ-सफाई से जुड़ी कई खामियां पाई गईं। Govinda’s Restaurant में क्या मिला? FDA की जांच टीम के अनुसार, Govinda’s Restaurant में पीने के पानी की नियमित जांच नहीं की जा रही थी। इसके अलावा, भोजन तैयार करने से पहले कच्चे खाद्य पदार्थों की उचित सफाई नहीं किए जाने की बात भी सामने आई। FDA के मुताबिक, कोल्ड स्टोरेज रूम में पानी जमा था और ड्रेनेज सिस्टम जाम मिला। ड्रेनों में ग्रीस ट्रैप और कॉकरोच ट्रैप भी नहीं थे। निरीक्षण के दौरान परिसर में कीटों के संक्रमण के संकेत मिलने की बात FDA ने कही। इसके अलावा, कुछ फूड हैंडलर्स कथित तौर पर एप्रन और दस्ताने के बिना काम करते हुए पाए गए। Food Services में भी कई गंभीर कमियां FDA के अनुसार, Food Services Restaurant में कच्चे और पके हुए खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने की उचित व्यवस्था नहीं थी। स्टोर रूम में कीटों के मल के अवशेष मिलने की बात भी FDA ने अपनी रिपोर्ट में कही। जांच के दौरान खाद्य पदार्थों की आवश्यक जांच नहीं किए जाने की बात सामने आई। प्रतिष्ठान और स्टोर रूम में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं थी। FDA ने यह भी बताया कि इस्तेमाल किए जा रहे खाद्य तेल की रंग, स्वाद और उसमें तैर रहे कणों के आधार पर नियमित जांच नहीं की जा रही थी। वहीं, फूड हैंडलर्स के मेडिकल चेकअप और वैक्सीनेशन से जुड़े रिकॉर्ड/प्रक्रिया में भी कमियां पाई गईं। तीसरे फूड प्रतिष्ठान में भी खामियां परिसर में संचालित एक अन्य फूड यूनिट में भी FDA टीम ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी गंभीर कमियां दर्ज कीं। इनमें सैनिटेशन, पेस्ट कंट्रोल, व्यक्तिगत स्वच्छता, खाद्य भंडारण, उपकरणों के रखरखाव, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और रिकॉर्ड मैनेजमेंट से जुड़ी खामियां शामिल थीं। ISKCON ने क्या कहा? FDA की कार्रवाई के बाद ISKCON Juhu ने बयान जारी कर कहा कि 3 सितंबर को उनकी किचन और फूड ऑपरेशंस का निरीक्षण किया गया था। संगठन के मुताबिक, FDA ने मौजूदा अनुपालन स्तर को 70 प्रतिशत आंका और कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत बताई। ISKCON ने कहा कि उसके प्रतिनिधि FDA के साथ संपर्क में हैं और अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार आवश्यक सुधारात्मक कदम शुरू कर दिए गए हैं। संगठन ने यह भी कहा कि भक्तों और मेहमानों की सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य उसकी प्राथमिकता है। ISKCON Juhu के अनुसार, जब तक आवश्यक सुधार पूरे नहीं हो जाते और सभी खाद्य सुरक्षा एवं नियामकीय मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक जुहू परिसर की किचन गतिविधियां बंद रहेंगी। फिलहाल FDA की कार्रवाई के बाद तीनों फूड यूनिट्स में संचालन बंद है और आगे की प्रक्रिया संबंधित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर निर्भर करेगी।  
‘भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ मुंबई पुलिस से कुणाल कामरा का सवाल, वापसी शो से पहले बढ़ी हलचल

‘भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ मुंबई पुलिस से कुणाल कामरा का सवाल, वापसी शो से पहले बढ़ी हलचल

‘भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ मुंबई पुलिस से कुणाल कामरा का सवाल, वापसी शो से पहले बढ़ी हलचल कॉमेडियन ने पूछा—अगर 40-50 लोग शो रोकने पहुंचें तो क्या पुलिस उन्हें रोकने देगी? कहा, कार्यक्रम बंद कमरे में कानून के मुताबिक होगा मुंबई: स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने मुंबई में अपने आगामी कॉमेडी शो को लेकर मुंबई पुलिस से सीधे सवाल किया है। कामरा ने पूछा कि अगर कुछ लोग उनके कार्यक्रम को रोकने या बाधित करने के लिए भीड़ के रूप में पहुंचते हैं, तो क्या पुलिस कानून-व्यवस्था के पक्ष में खड़ी होगी या प्रदर्शनकारियों को शो रोकने की अनुमति दी जाएगी। कामरा ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुंबई पुलिस को टैग करते हुए कहा कि उनका प्रस्तावित कार्यक्रम बंद परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा, जहां करीब 100 सहमति देने वाले वयस्क दर्शक मौजूद होंगे। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम सभी लागू कानूनों और नियमों के अनुरूप आयोजित किया जाएगा। ‘क्या आप भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ कामरा ने मुंबई पुलिस की जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए अपने पोस्ट में तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध रोकने और ट्रैफिक संभालने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 40-50 लोग शो को रद्द कराने या बाधित करने के लिए पहुंचते हैं, या कार्यक्रम स्थल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, तो क्या उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जाएगी। कामरा का सवाल था कि ऐसी स्थिति में पुलिस “भीड़ के साथ होगी या कानून के साथ?” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रदर्शन करने वालों को शो रोकने का अधिकार मिल जाएगा। 2025 के ‘नया भारत’ शो के बाद हुआ था विवाद कुणाल कामरा का मुंबई में पिछला बड़ा स्टैंड-अप कार्यक्रम 2025 में खार स्थित द हैबिटैट कॉमेडी क्लब में ‘नया भारत’ शो था। शो की कुछ क्लिप सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। कार्यक्रम में कामरा ने फिल्म दिल तो पागल है के एक लोकप्रिय गीत की पैरोडी करते हुए महाराष्ट्र के तत्कालीन राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी की थी और एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ कहकर संबोधित किया था। उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में हुए राजनीतिक विभाजन को लेकर भी मजाक किया था। इसके बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं के विरोध की खबरें सामने आई थीं। प्रदर्शन के दौरान कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ हुई थी और बाद में उस इमारत को लेकर BMC की कार्रवाई भी हुई थी। BJP MLC की ओर से विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव कामरा को इस विवाद के सिलसिले में BJP MLC प्रवीण दरेकर की ओर से लाए गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ रहा है। अब मुंबई में दोबारा स्टैंड-अप करने की उनकी इच्छा ने पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। कामरा का कहना है कि उनका अगला शो कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। ऐसे में अब उनकी नजर मुंबई पुलिस की प्रतिक्रिया पर है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर पुलिस की ओर से क्या सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्था की जाती है।  
मुंबई में दही हांडी का जश्न पड़ा भारी: 7 साल के बच्चे की मौत, 376 गोविंदा घायल

मुंबई में दही हांडी का जश्न पड़ा भारी: 7 साल के बच्चे की मौत, 376 गोविंदा घायल

मुंबई में दही हांडी का जश्न पड़ा भारी: 7 साल के बच्चे की मौत, 376 गोविंदा घायल मालवणी में ईंटों का खंभा गिरने से मासूम की जान गई; मानव पिरामिड के दौरान घायल हुए सैकड़ों गोविंदा, 53 अब भी अस्पताल में भर्ती मुंबई: जन्माष्टमी के मौके पर शनिवार को मुंबई और महाराष्ट्र में दही हांडी का उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया गया, लेकिन मुंबई में यह जश्न कई परिवारों के लिए दर्दनाक याद बन गया। दही हांडी समारोह के दौरान एक 7 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि 376 गोविंदा घायल हो गए। यह जानकारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों ने रविवार को दी। दही हांडी के दौरान गोविंदा पथक कई स्तरों वाला मानव पिरामिड बनाकर हवा में लटकाई गई दही से भरी मिट्टी की हांडी फोड़ते हैं। इस दौरान ऊंचाई से गिरने और चोट लगने की घटनाएं सामने आती हैं। मालवणी में ईंटों का खंभा गिरने से मासूम की मौत सबसे दर्दनाक घटना मुंबई के मालवणी इलाके के चिकुवाड़ी स्थित एकता वेलफेयर सोसायटी में हुई। शनिवार दोपहर कुछ बच्चे अपने स्तर पर दही हांडी का आयोजन कर रहे थे। इसी दौरान एक ईंटों का खंभा अचानक गिर गया, जिसकी चपेट में 7 वर्षीय बच्चा आ गया। हादसे में बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। मुंबई में 376 गोविंदा घायल BMC के मुताबिक, दही हांडी समारोह के दौरान कुल 376 गोविंदाओं को चोटें आईं। सबसे ज्यादा घायल गोविंदाओं को मुंबई के द्वीप शहर के अस्पतालों में इलाज के लिए लाया गया, जहां 183 मामले सामने आए। इसके बाद पश्चिमी उपनगरों में 126 और पूर्वी उपनगरों में 62 गोविंदाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई। घायलों में से 53 लोग फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 37 अन्य का भी इलाज चल रहा है। वहीं, 286 घायलों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। KEM अस्पताल में सबसे ज्यादा घायल पहुंचे BMC के आंकड़ों के अनुसार, परेल के KEM अस्पताल में सबसे ज्यादा 76 घायल गोविंदाओं का इलाज किया गया। इसके बाद: दही हांडी के दौरान मानव पिरामिड बनाते समय संतुलन बिगड़ने और गिरने की वजह से कई गोविंदाओं को चोटें आईं। उत्सव के बीच सुरक्षा पर फिर उठे सवाल दही हांडी मुंबई की सांस्कृतिक पहचान और जन्माष्टमी के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में गोविंदा पथक इसमें हिस्सा लेते हैं। हालांकि, ऊंचे मानव पिरामिड और भीड़ के बीच होने वाली गतिविधियों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। इस बार एक मासूम की मौत और सैकड़ों गोविंदाओं के घायल होने की घटना ने उत्सव के दौरान सुरक्षा इंतजामों और सावधानी की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। BMC अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है और बड़ी संख्या में लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है।  
मुंबई में दही हांडी के दौरान 22 गोविंदा घायल, 21 को इलाज के बाद मिली छुट्टी

मुंबई में दही हांडी के दौरान 22 गोविंदा घायल, 21 को इलाज के बाद मिली छुट्टी

मुंबई में दही हांडी के दौरान 22 गोविंदा घायल, 21 को इलाज के बाद मिली छुट्टी मानव पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ने के दौरान हादसे; पश्चिमी उपनगर का एक गोविंदा अब भी अस्पताल में भर्ती मुंबई: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में दही हांडी उत्सव पूरे उत्साह और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया गया। मुंबई में दही हांडी फोड़ने के लिए बनाए गए बहुस्तरीय मानव पिरामिड के दौरान कुल 22 गोविंदा घायल हुए हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों के मुताबिक, मुंबई शहर में घायल हुए 20 गोविंदाओं को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। वहीं, मुंबई के पूर्वी उपनगर में घायल हुए एक गोविंदा को भी इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। पश्चिमी उपनगर में घायल एक अन्य गोविंदा का अभी अस्पताल में इलाज चल रहा है। मानव पिरामिड बनाकर फोड़ी जाती है दही हांडी दही हांडी उत्सव के दौरान गोविंदा पथक एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर कई स्तरों वाला मानव पिरामिड बनाते हैं। इसके बाद सबसे ऊपर पहुंचने वाला गोविंदा हवा में लटकाई गई दही से भरी मिट्टी की हांडी को फोड़ता है। मानव पिरामिड बनाते समय संतुलन बिगड़ने या ऊंचाई से गिरने के कारण चोट लगने का खतरा रहता है। इसे देखते हुए इस बार भी प्रशासन और अस्पतालों की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। BMC ने अस्पतालों में किए विशेष इंतजाम दही हांडी उत्सव को देखते हुए BMC ने गोविंदाओं के इलाज के लिए व्यापक चिकित्सा व्यवस्था की थी। नगर निकाय के मुताबिक, 16 उपनगरीय नागरिक अस्पतालों के अलावा सायन स्थित लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल हॉस्पिटल, परेल का KEM अस्पताल और मुंबई सेंट्रल का नायर अस्पताल में 100 से अधिक बेड तैयार रखे गए थे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य दही हांडी के दौरान घायल होने वाले गोविंदाओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर उतरने को देखते हुए मुंबई पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया, ताकि दही हांडी कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। फिलहाल सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, घायल हुए 22 गोविंदाओं में से 21 को उपचार के बाद छुट्टी मिल चुकी है, जबकि एक गोविंदा का अस्पताल में इलाज जारी है।  
मुंबई-वापी ट्रेन में सीटों पर कब्जा और कथित जुए का वीडियो वायरल, यात्रियों में नाराजगी

मुंबई-वापी ट्रेन में सीटों पर कब्जा और कथित जुए का वीडियो वायरल, यात्रियों में नाराजगी

मुंबई-वापी ट्रेन में सीटों पर कब्जा और कथित जुए का वीडियो वायरल, यात्रियों में नाराजगी भीड़भाड़ वाली 59023 मुंबई सेंट्रल-वापी फास्ट पैसेंजर का बताया जा रहा वीडियो; यात्रियों ने GRP और RPF से जांच की मांग की मुंबई: मुंबई सेंट्रल से वलसाड जाने वाली 59023 मुंबई सेंट्रल-वलसाड फास्ट पैसेंजर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ यात्री कथित तौर पर एक से ज्यादा सीटों पर कब्जा किए हुए और पैसों से जुड़े ताश के खेल में शामिल नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यात्रियों में नाराजगी है और रेलवे व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना ट्रेन में पीक ऑवर की भीड़ के दौरान हुई, जब बड़ी संख्या में यात्री सफर कर रहे थे। वायरल वीडियो में एक समूह द्वारा कई सीटों पर कब्जा किए जाने का दावा किया जा रहा है। यात्रियों का आरोप है कि ऐसे समय में जब ट्रेन पहले से ही खचाखच भरी थी, कुछ लोगों के कई सीटों पर बैठने से दूसरे यात्रियों को बैठने की जगह तक नहीं मिल पा रही थी। भीड़ में सीटों को लेकर बढ़ी परेशानी कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया है कि कुछ पासधारक नियमित रूप से ऐसी सीटों पर कब्जा कर लेते हैं, जो दूसरे यात्रियों के लिए भी उपलब्ध होनी चाहिए। उनका कहना है कि भीड़भाड़ के दौरान एक व्यक्ति या समूह द्वारा कई सीटों को घेरकर रखना यात्रियों की परेशानी और बढ़ा देता है। वायरल वीडियो में पैसों से जुड़े ताश के खेल का भी कथित तौर पर दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियों और उसमें शामिल लोगों के बारे में अभी तक रेलवे या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। GRP और RPF से जांच की मांग वीडियो वायरल होने के बाद यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने और इसकी जांच कराने की मांग की है। यात्रियों का कहना है कि यदि ट्रेन में वास्तव में जुए से जुड़ी गतिविधियां चल रही थीं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा, यात्रियों ने Government Railway Police (GRP) और Railway Protection Force (RPF) से भी वायरल वीडियो की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि रेलवे परिसर और ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा तथा सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमों का प्रभावी तरीके से पालन जरूरी है। वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि बाकी फिलहाल रेलवे अधिकारियों की ओर से इस विशेष वीडियो और उसमें लगाए गए आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है। यह मामला एक बार फिर मुंबई से चलने वाली व्यस्त यात्री ट्रेनों में ओवरक्राउडिंग, सीटों पर कथित कब्जे और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े करता है। यात्रियों को अब उम्मीद है कि रेलवे प्रशासन वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर तथ्यों की जांच करेगा और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई करेगा।  
मालाड में बेकाबू MG Windsor ने उड़ाए स्कूटर और ऑटो, 34 वर्षीय महिला की मौत; 6 घायल

मालाड में बेकाबू MG Windsor ने उड़ाए स्कूटर और ऑटो, 34 वर्षीय महिला की मौत; 6 घायल

मालाड में बेकाबू MG Windsor ने उड़ाए स्कूटर और ऑटो, 34 वर्षीय महिला की मौत; 6 घायल सिग्नल पर खड़े थे वाहन, 10 सेकंड बाद तेज रफ्तार कार ने मचाया कहर; CCTV में कैद हुआ खौफनाक हादसा मुंबई: मुंबई के मालाड पश्चिम में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सनसनी मचा दी। SV Road जंक्शन पर ट्रैफिक सिग्नल के पास तेज रफ्तार MG Windsor कार ने एक स्कूटर और तीन ऑटो-रिक्शा समेत कई वाहनों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटर पर अपने पति के साथ जा रही 34 वर्षीय प्रियंका मयंक सत्रा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति मयंक समेत छह लोग घायल हुए हैं। हादसे का CCTV वीडियो सामने आया है, जिसमें पूरी घटना का खौफनाक मंजर कैद है। वीडियो में दिखाई देता है कि रविवार रात करीब 8 बजे सिग्नल पर वाहन लाल बत्ती के कारण रुके हुए थे। एक ऑटो-रिक्शा भी जेब्रा क्रॉसिंग के पास खड़ा था। कुछ ही सेकंड बाद पीछे से आती MG Windsor अचानक तेज रफ्तार में आगे बढ़ती है और रास्ते में खड़े वाहनों को अपनी चपेट में ले लेती है। स्कूटर पर सवार दंपती को जोरदार टक्कर CCTV के मुताबिक, बेकाबू कार ने पहले सड़क पार कर रही एक महिला को टक्कर मारी और इसके बाद स्कूटर पर सवार दंपती को जोरदार टक्कर लगी। इसके बाद कार ने लगातार तीन ऑटो-रिक्शा को भी अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई लोग हवा में उछलते हुए दिखाई दिए। कुछ ही पलों में सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और लोग घायलों की मदद के लिए दौड़ पड़े। स्कूटर पर पीछे बैठी प्रियंका मयंक सत्रा (34) को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उनके पति मयंक को भी गंभीर चोटें लगी हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनके फ्रैक्चर और रीढ़ की हड्डी में चोट की जानकारी सामने आई है। हादसे में तीन ऑटो-रिक्शा चालक सुभेदार चंद्र गौतम, रामकेश राजभर और अब्दुल रहमान शेख भी घायल हुए हैं। वहीं, 48 वर्षीय जैतून बी इमाम को सिर में गंभीर चोट लगी है और उन्हें बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल ले जाया गया। ड्राइवर ने कहा- गलती से ब्रेक की जगह एक्सीलेटर दब गया पुलिस ने हादसे के सिलसिले में 70 वर्षीय कृष्ण शांताराम चामनकर को हिरासत में लिया है। पुलिस जांच के दौरान चालक ने कथित तौर पर बताया कि ब्रेक की जगह गलती से एक्सीलेटर दब गया, जिसके बाद कार अचानक तेज गति से आगे बढ़ गई। हादसे के बाद मालाड पुलिस स्टेशन के बाहर स्थानीय व्यापारियों, वकीलों, घायलों के परिजनों और अन्य लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर आरोपी के साथ कथित तौर पर नरमी बरतने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि आरोपी को निजी मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई और पुलिस स्टेशन के अंदर कुछ समय के लिए एयर-कंडीशन कमरे में रखा गया। इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष भी मामले में महत्वपूर्ण रहेगा। शराब के नशे में नहीं था आरोपी पुलिस के अनुसार, आरोपी चालक का ब्लड-अल्कोहल टेस्ट कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट नकारात्मक आई है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत लापरवाही से वाहन चलाने और मौत का कारण बनने का मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। फिलहाल पुलिस हादसे की परिस्थितियों, वाहन की गति, चालक की प्रतिक्रिया और CCTV फुटेज समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। CCTV में कैद हादसे की तस्वीरें एक बार फिर मुंबई की सड़कों पर तेज रफ्तार और वाहन नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।  
मुंबई में कल से महंगा होगा भैंस का दूध, ₹110-112 प्रति लीटर तक पहुंचेंगे दाम

मुंबई में कल से महंगा होगा भैंस का दूध, ₹110-112 प्रति लीटर तक पहुंचेंगे दाम

मुंबई में कल से महंगा होगा भैंस का दूध, ₹110-112 प्रति लीटर तक पहुंचेंगे दाम 1 सितंबर से लागू होगी नई दर, थोक कीमत में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी; दक्षिण मुंबई में ₹112 तक पहुंच सकता है भाव मुंबई: मुंबईवासियों को 1 सितंबर से भैंस के दूध के लिए अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी। Bombay Milk Producers’ Association ने भैंस के दूध की थोक कीमत में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके बाद थोक दर ₹93 से बढ़कर ₹102 प्रति लीटर हो जाएगी। थोक कीमत में बढ़ोतरी का सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ने की संभावना है। शहर में भैंस के दूध की खुदरा कीमत मौजूदा ₹100-104 प्रति लीटर से बढ़कर करीब ₹110-112 प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। हालांकि, अंतिम कीमत इलाके, दूध विक्रेता और सप्लायर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। दक्षिण मुंबई में ₹112 तक पहुंचेगा भाव Association के अनुसार, दक्षिण मुंबई में भैंस के दूध की कीमत मौजूदा ₹104 से बढ़कर करीब ₹112 प्रति लीटर हो सकती है। वहीं मुंबई के अन्य इलाकों में यह दर करीब ₹100 से बढ़कर ₹110 प्रति लीटर होने की संभावना है। Association के पदाधिकारी सी.के. सिंह ने बताया कि ईंधन और परिवहन लागत में बढ़ोतरी, पशु चारे की कीमत, मजदूरी और रखरखाव खर्च बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत लगातार बढ़ी है। उनके मुताबिक, वर्तमान में एक लीटर दूध के उत्पादन पर करीब ₹98 खर्च आ रहा है। इसी वजह से थोक कीमत को ₹93 से बढ़ाकर ₹102 प्रति लीटर करने का फैसला लिया गया है। फरवरी 2027 तक लागू रहेगी नई थोक दर Association के मुताबिक, संशोधित थोक दर 1 सितंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य मौजूदा उत्पादन लागत के अनुरूप दूध की कीमत तय करना है। मुंबई में रोजाना करीब 40 लाख लीटर भैंस का दूध वितरित किया जाता है। हालांकि थोक कीमत में बढ़ोतरी एक समान है, लेकिन खुदरा बाजार में इसका असर पूरे शहर में समान नहीं होगा। दक्षिण मुंबई में आमतौर पर दूध की कीमत उत्तर मुंबई की तुलना में अधिक रहती है। त्योहारों से पहले बढ़ी दूध की कीमत दूध की कीमत में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान दूध और उससे बने उत्पादों की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में नई कीमतों का असर मुंबई के लाखों परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। भांडुप निवासी धनंजय पवार ने कहा कि दूध की कीमत में बढ़ोतरी से परिवार के बजट पर असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उनका परिवार स्वाद के कारण तबेले का दूध लेना पसंद करता है। 1 सितंबर से नई दरें लागू होने के बाद मुंबई के अलग-अलग इलाकों में खुदरा कीमतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।  

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