30 साल से हिमालय की राह पर थे डॉ. मिलिंद चितले; नेपाल में आई बाढ़ के बाद पत्नी समेत लापता मुंबई: नेपाल में अचानक आई बाढ़ और खराब मौसम के बीच कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया भारतीय श्रद्धालुओं का एक समूह संपर्क से बाहर हो गया है। लापता लोगों में मुंबई के जाने-माने पर्वतारोही और डॉक्टर डॉ. मिलिंद पी. चितले भी शामिल हैं। उनके साथ उनकी पत्नी जान्हवी चितले और करीब 40 यात्रियों का समूह भी लापता बताया जा रहा है। डॉ. चितले के लिए चिकित्सा केवल पेशा था, जबकि पर्वतारोहण उनका जुनून बन गया था। उन्होंने वर्ष 1983 में ग्रांट मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि, पहाड़ों और साहसिक अभियानों के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण उन्होंने मेडिकल प्रैक्टिस छोड़कर अपना जीवन पर्वतारोहण को समर्पित कर दिया। वर्ष 1997 में उन्होंने Hills and Trails नाम की मुंबई स्थित एडवेंचर कंपनी की सह-स्थापना की। इसके जरिए उन्होंने पिछले तीन दशकों में सैकड़ों लोगों को हिमालय, लद्दाख और पश्चिमी घाटों में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और धार्मिक यात्राओं पर ले जाया। डॉ. चितले का पर्वतारोहण अनुभव बेहद व्यापक रहा है। उन्होंने हिमालय की 3,000 से अधिक ट्रेल्स और अभियानों में हिस्सा लिया और कंचनजंगा पर 23,000 फीट से अधिक ऊंचाई तक चढ़ाई की। वह 1997 के एवरेस्ट अभियान की आयोजन समिति का हिस्सा भी रहे। इसके अलावा उन्होंने 8,000 मीटर से अधिक ऊंचे पर्वत पर पहले भारतीय नागरिक अभियान में क्लाइम्बिंग डॉक्टर के रूप में भी काम किया। पर्वतीय सुरक्षा, रेस्क्यू तकनीक और फर्स्ट एड को लेकर उन्होंने कई प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित कीं। उन्होंने माउंटेन फर्स्ट एड और रेस्क्यू पर एक पुस्तक भी लिखी। पर्वतारोहण में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2005 में गिरिमित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। कैलाश-मानसरोवर यात्रा डॉ. चितले के लिए कोई नया अनुभव नहीं था। करीबी लोगों के मुताबिक, वह इस यात्रा को 25 से अधिक बार कर चुके थे। आमतौर पर वह ऐसी यात्राओं पर अकेले जाते थे, लेकिन इस बार उनकी पत्नी जान्हवी भी उनके साथ थीं। करीब 40 यात्रियों का समूह संपर्क से बाहर Hills and Trails के माध्यम से यह समूह 23 अगस्त को यात्रा पर निकला था और 6 सितंबर को लौटने वाला था। यात्रा का संचालन नेपाल की Richa Tours and Travels के साथ मिलकर किया जा रहा था। लापता यात्रियों में मुंबई की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गायत्री देशपांडे और उनके पति डॉ. आनंद देशपांडे भी शामिल हैं। इसके अलावा 68 वर्षीय सुनील एस. सुबेदार और 64 वर्षीय चेतना गुप्ता समेत कई वरिष्ठ नागरिकों के भी संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है। डॉ. गायत्री देशपांडे के परिवार के मुताबिक, उन्होंने दंपति से आखिरी बार रविवार को बात की थी। परिवार ने इसके बाद कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन पर संपर्क नहीं हो सका। वहीं, सुनील सुबेदार के बेटे स्वानंद ने बताया कि उन्होंने अपने पिता से 26 अगस्त को आखिरी बार बात की थी। उस समय वह तिमुरे में थे और कैलाश-मानसरोवर यात्रा के अगले चरण के लिए चीन की ओर जाने की तैयारी कर रहे थे। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। चेतना गुप्ता भी इस यात्रा को लेकर काफी उत्साहित थीं। उनके पति आनंद गुप्ता के मुताबिक, उन्होंने उन्हें भी यात्रा में साथ चलने के लिए कहा था, लेकिन अधिक ऊंचाई और कम ऑक्सीजन को लेकर चिंता के कारण उन्होंने यात्रा नहीं की। परिवार के तीन सदस्य अब काठमांडू पहुंचकर चेतना गुप्ता और अन्य लापता यात्रियों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद कई भारतीय यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की खबरों ने उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल परिजन और संबंधित एजेंसियां लापता यात्रियों की जानकारी और सुरक्षित वापसी की उम्मीद में लगातार प्रयास कर रहे हैं।