स्लम-फ्री मुंबई पर बड़ा सवाल: Bombay High Court की सख्त टिप्पणी, 55 साल पुराने कानून का ऑडिट अनिवार्य

स्लम-फ्री मुंबई पर बड़ा सवाल: Bombay High Court की सख्त टिप्पणी, 55 साल पुराने कानून का ऑडिट अनिवार्य

Bombay High Court ने मुंबई को स्लम-फ्री बनाने के लक्ष्य पर गंभीर चिंता जताते हुए 1971 के स्लम कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस कानून का परफॉर्मेंस ऑडिट कराने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी गठित करे।

जस्टिस Girish Kulkarni और जस्टिस Advait Sethna की बेंच ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि 55 साल बाद भी मुंबई को स्लम-फ्री बनाने का सपना अधूरा है और शहर में टाउन प्लानिंग की स्थिति बेहद खराब है।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में आज भी बड़े हिस्से स्लम में तब्दील हैं, जो यह दर्शाता है कि कानून और उसकी लागू करने वाली एजेंसियां अपने उद्देश्य में असफल रही हैं।

⚖️ कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां:

  • स्लम पुनर्विकास कानून का क्रियान्वयन बेहद कमजोर रहा है
  • स्लम खत्म करने की बजाय समय के साथ उनकी संख्या बढ़ती गई
  • सरकारी नीतियों में ढिलाई और बार-बार कटऑफ डेट बढ़ाने से समस्या और बढ़ी
  • टाउन प्लानिंग में वैज्ञानिक और क्षेत्रवार दृष्टिकोण की कमी

🏗️ सरकार को क्या निर्देश दिए गए?

कोर्ट ने राज्य सरकार को 4 हफ्तों के भीतर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का आदेश दिया है, जिसमें टाउन प्लानिंग विशेषज्ञ, आर्किटेक्ट, सरकारी अधिकारी और स्वतंत्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यह कमेटी स्लम कानून की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर सरकार आगे की नीति तय करेगी।

⚠️ अहम मुद्दों पर कोर्ट की सख्त राय:

1. कटऑफ डेट पर रोक:

कोर्ट ने कहा कि स्लम के लिए बार-बार कटऑफ डेट बढ़ाना बंद होना चाहिए, क्योंकि इससे अवैध कब्जों को बढ़ावा मिलता है।

2. एयरपोर्ट के आसपास स्लम:

मुंबई एयरपोर्ट के आसपास फैले स्लम को लेकर कोर्ट ने कहा कि यह शहर की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाता है।

3. डेवलपर चयन प्रक्रिया:

स्लम सोसाइटी द्वारा डेवलपर चुनने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और विवादों को लेकर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की।

4. वर्टिकल स्लम पर रोक:

कोर्ट ने कहा कि पुनर्विकास के नाम पर ऊंची इमारतों में भीड़भाड़ बढ़ाना ‘वर्टिकल स्लम’ बनाना है, जिसे रोका जाना चाहिए।

🏙️ कोर्ट की बड़ी टिप्पणी:

कोर्ट ने कहा कि मुंबई में स्लम खत्म करना “मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं”, बशर्ते सरकार और प्रशासन ईमानदारी और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ काम करें।

📌 निष्कर्ष:

इस फैसले ने साफ कर दिया है कि मुंबई में स्लम समस्या केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि नीति और प्लानिंग की बड़ी विफलता भी है। अब नजरें इस पर टिकी हैं कि महाराष्ट्र सरकार इस परफॉर्मेंस ऑडिट के बाद क्या ठोस कदम उठाती है और क्या वाकई “स्लम-फ्री मुंबई” का सपना कभी हकीकत बन पाएगा।

Undercover Editor

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