श्रेणी: CRIME

Contrary to popular belief, Lorem Ipsum is not simply random text. It has roots in a piece of classical Latin literature from 45 BC, making it over 2000 years old. Richard McClintock, a Latin professor

मुंबई में बड़ी साजिश नाकाम: मुहर्रम जुलूस में जहर बांटने वाला आरोपी गिरफ्तार, 15 हजार लोगों को मारने की थी योजना

मुंबई में बड़ी साजिश नाकाम: मुहर्रम जुलूस में जहर बांटने वाला आरोपी गिरफ्तार, 15 हजार लोगों को मारने की थी योजना

मुंबई में बड़ी साजिश नाकाम: मुहर्रम जुलूस में जहर बांटने वाला आरोपी गिरफ्तार, 15 हजार लोगों को मारने की थी योजना मुंबई | विशेष रिपोर्ट मुंबई में मुहर्रम के जुलूस के दौरान एक बेहद खौफनाक साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया। पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर जुलूस में शामिल लोगों के बीच जहरीली गोलियां बांट रहा था। आरोपी की पहचान फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जिसने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि वह करीब 15,000 लोगों को जहर देकर मारना चाहता था। यह घटना शुक्रवार को भायखला इलाके में सामने आई, जहां रे रोड स्थित रहमताबाद कब्रिस्तान के पास आशूरा जुलूस चल रहा था। आरोपी भीड़ का फायदा उठाकर लोगों को ये कैप्सूल “इम्युनिटी बूस्टर” और “दर्द निवारक” बताकर बांट रहा था। जहरीले केमिकल से भरे थे कैप्सूल पुलिस जांच में सामने आया है कि इन कैप्सूल में जिंक फॉस्फाइड नामक बेहद खतरनाक रसायन मिला हुआ था, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर चूहा मारने के जहर में किया जाता है। यह पदार्थ शरीर में पहुंचते ही जहरीली गैस बनाता है, जो दिल, फेफड़े, लिवर, किडनी और दिमाग पर घातक असर डालता है। 11 लोग हुए बीमार, सभी खतरे से बाहर सूत्रों के अनुसार, कम से कम 11 लोगों ने ये गोलियां खा ली थीं, जिसके बाद उन्हें उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई। सभी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। महिला स्वयंसेवकों की सतर्कता से टली बड़ी त्रासदी इस पूरे मामले में तीन महिला स्वयंसेवकों की सतर्कता ने हजारों लोगों की जान बचा ली। उन्होंने आरोपी को संदिग्ध तरीके से गोलियां बांटते हुए देखा और तुरंत उसे रोककर पुलिस को सूचना दी। साथ ही लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को चेतावनी भी दी गई कि वे कोई भी गोली न लें। जब स्वयंसेवकों ने एक कैप्सूल खोलकर देखा, तो उसमें मौजूद पाउडर को देखकर उन्हें शक हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस को अलर्ट किया। पुलिस ने 14,900 गोलियां की बरामद पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए आरोपी के पास से करीब 14,900 कैप्सूल जब्त किए हैं। इसके अलावा आरोपी ने 30,000 खाली कैप्सूल और 50 किलो फॉस्फोरस का ऑर्डर भी दिया था। कोर्ट ने आरोपी को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। आतंकी एंगल की जांच जारी पुलिस इस मामले में किसी बड़े साजिश या आतंकी कनेक्शन की भी जांच कर रही है। आरोपी की विदेश यात्रा का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। मामला भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। सुरक्षा पर बड़ा सवाल यह घटना एक बार फिर भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर समय रहते यह साजिश पकड़ में नहीं आती, तो एक बड़ी त्रासदी हो सकती थी।  
मुंबई लोकल ट्रेन हत्या मामला: आरोपी ने किया जुर्म कबूल, 29 जून तक पुलिस हिरासत में

मुंबई लोकल ट्रेन हत्या मामला: आरोपी ने किया जुर्म कबूल, 29 जून तक पुलिस हिरासत में

मुंबई लोकल ट्रेन हत्या मामला: आरोपी ने किया जुर्म कबूल, 29 जून तक पुलिस हिरासत में मुंबई | विशेष रिपोर्ट मुंबई की लोकल ट्रेन में हुए सनसनीखेज हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी सचिन रमेश सुवर्णा ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। बोरीवली कोर्ट ने उसे 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि मामले की गहराई से जांच की जा सके। पुलिस के अनुसार, घटना 24 जून की रात चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल में अंधेरी और बोरीवली स्टेशन के बीच हुई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह उस समय शराब के नशे में था। ट्रेन के डिब्बे में बारिश का पानी आ रहा था, जिसे लेकर मृतक मयंक लोहार ने उसे दरवाजा बंद करने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोपी के बयान के मुताबिक, बहस के दौरान मयंक लोहार ने उसे मुक्का मारा। इसके बाद डिब्बे में मौजूद अन्य यात्रियों ने भी लोहार का समर्थन करते हुए आरोपी के साथ मारपीट की। इस घटना से आहत और नशे की हालत में आरोपी ने अपने बैग से चाकू निकाला और मयंक लोहार पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में गंभीर रूप से घायल मयंक लोहार को रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की मदद से तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी बोरीवली स्टेशन पहुंचने से पहले ही ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था। हालांकि, पुलिस ने बाद में उसे हिरासत में ले लिया। अदालत में पेशी के दौरान पुलिस ने हथियार बरामद करने और अन्य साक्ष्य जुटाने के लिए हिरासत की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। रेलवे प्रशासन ने बताया कि ट्रेन रात 11:04 बजे बोरीवली स्टेशन पहुंची और तीन मिनट के भीतर GRP और RPF मौके पर पहुंच गए थे। घायल को प्राथमिक उपचार के बाद कांडिवली स्थित शताब्दी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित किया गया। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड पहले से रहा है या नहीं। यह घटना मुंबई लोकल में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है और यह भी दर्शाती है कि छोटी-सी बहस किस तरह हिंसक रूप ले सकती है।  
खामोश तीस: मुंबई लोकल में हुई हत्या और मूकदर्शक बने यात्री

खामोश तीस: मुंबई लोकल में हुई हत्या और मूकदर्शक बने यात्री

खामोश तीस: मुंबई लोकल में हुई हत्या और मूकदर्शक बने यात्री मुंबई | विशेष रिपोर्ट मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार रात एक 22 वर्षीय युवक की कथित रूप से चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि उसी डिब्बे में मौजूद 30 से अधिक यात्री इस भयावह घटना के गवाह बने रहे। चौंकाने वाली बात यह है कि किसी ने भी हमले को रोकने या पीड़ित की मदद करने की कोशिश नहीं की। घटना अंधेरी और बोरीवली स्टेशन के बीच फर्स्ट क्लास डिब्बे में हुई। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों को सूचना जरूर दी, लेकिन कई लोग पूरी घटना के दौरान वीडियो बनाते रहे। यही वीडियो अब जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं और सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गए हैं। डर या संवेदनहीनता? सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के अधिकारियों का कहना है कि हमलावर के पास हथियार था और वह बेहद आक्रामक स्थिति में दिख रहा था, जिससे यात्री भयभीत हो गए। यही कारण हो सकता है कि किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या डर के कारण इंसानियत भी खत्म हो गई? एक अधिकारी ने बताया, “अगर उसी समय किसी ने तुरंत हस्तक्षेप किया होता या तेजी से सूचना दी होती, तो ट्रेन को रोका जा सकता था और पीड़ित को समय पर इलाज मिल सकता था।” वीडियो बने अहम सबूत जांच में सामने आए वीडियो क्लिप्स ने आरोपी की पहचान और उसके भागने के रास्ते का पता लगाने में अहम भूमिका निभाई है। एक वीडियो में आरोपी घटना के बाद शांत तरीके से चलता हुआ नजर आता है, मानो कुछ हुआ ही न हो। गवाहों की तलाश जारी पुलिस अब फेस रिकग्निशन तकनीक और अन्य डिजिटल माध्यमों की मदद से उन यात्रियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जो घटना के दौरान मौजूद थे। अभी तक कोई भी प्रत्यक्षदर्शी आगे आकर बयान देने के लिए सामने नहीं आया है। समाज के लिए बड़ा सवाल यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर सवाल भी खड़ा करती है—क्या हम आपात स्थिति में सिर्फ दर्शक बनकर रह जाएंगे? क्या तकनीक और सोशल मीडिया के इस दौर में संवेदनशीलता कम होती जा रही है? मुंबई जैसी तेज रफ्तार जिंदगी में यह “खामोश तीस” हमें सोचने पर मजबूर करता है कि इंसानियत की असली परीक्षा ऐसे ही पलों में होती है।  
व्हाट्सएप पर ‘बॉस’ बनकर भेजा मैसेज, कंपनी से 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी — 4 आरोपी गिरफ्तार

व्हाट्सएप पर ‘बॉस’ बनकर भेजा मैसेज, कंपनी से 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी — 4 आरोपी गिरफ्तार

व्हाट्सएप पर ‘बॉस’ बनकर भेजा मैसेज, कंपनी से 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी — 4 आरोपी गिरफ्तार नई दिल्ली/मुंबई से एक चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जहां एक निजी कंपनी को व्हाट्सएप पर आए एक फर्जी मैसेज के जरिए 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। यह घटना INOX ग्रुप से जुड़ी बताई जा रही है। 📱 फर्जी ‘बॉस’ बनकर किया गया संपर्क जानकारी के अनुसार, 3 जून को कंपनी के अकाउंट्स विभाग में डिप्टी जनरल मैनेजर गिरीश अमीन को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज मिला। मैसेज भेजने वाले ने खुद को कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिद्धार्थ जैन बताया और नंबर को “पर्सनल” बताकर किसी से साझा न करने को कहा। 🔍 डीपी देखकर हुआ भरोसा मैसेज भेजने वाले ने सिद्धार्थ जैन की फोटो को प्रोफाइल पिक्चर के रूप में इस्तेमाल किया था, जिससे गिरीश अमीन को यकीन हो गया कि यह मैसेज उनके वरिष्ठ अधिकारी का ही है। 💸 63 ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर हुए करोड़ों रुपये फर्जी ‘बॉस’ ने खुद को मीटिंग में व्यस्त बताकर कॉल न करने को कहा और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। अमीन ने निर्देशों का पालन करते हुए 3 जून से 15 जून के बीच 63 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 10,40,71,924 रुपये ट्रांसफर कर दिए। ⚠️ शक होने पर खुला पूरा मामला जब अमीन ने आधिकारिक माध्यम से सिद्धार्थ जैन से इन ट्रांजैक्शन के इनवॉइस मांगे, तो उन्होंने ऐसे किसी निर्देश से इनकार कर दिया। इसके बाद पूरे फ्रॉड का खुलासा हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। 👮 पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी मुंबई पुलिस की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को संबंधित बैंक खातों की जानकारी मिली। जसौला स्थित IDFC FIRST बैंक में संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विकास और वंश नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो 8 लाख रुपये निकालने पहुंचे थे। 🔗 नेटवर्क का खुलासा पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कमीशन के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। उन्हें 20,000 से 30,000 रुपये तक का लालच दिया गया था। आगे की जांच में फैयाज आलम और अमित नाम के दो अन्य आरोपी भी गिरफ्तार किए गए। 🧠 मास्टरमाइंड की तलाश जारी पुलिस अब इस पूरे साइबर फ्रॉड के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह का संबंध किसी बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क से तो नहीं है। 🛡️ ‘ऑपरेशन CyHawk’ से मिली मदद दिल्ली पुलिस के “ऑपरेशन CyHawk” के तहत बैंक अधिकारियों को संदिग्ध लेन-देन की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। इसी सतर्कता के चलते यह मामला सामने आया। 👉 निष्कर्ष: यह घटना एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। कंपनियों और कर्मचारियों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने और किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि आधिकारिक माध्यम से करने की सख्त जरूरत है।  
नालासोपारा में 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने की आत्महत्या, इंडस्ट्री में शोक

नालासोपारा में 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने की आत्महत्या, इंडस्ट्री में शोक

नालासोपारा में 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने की आत्महत्या, इंडस्ट्री में शोक मुंबई से सटे नालासोपारा में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने टीवी इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। 🚨 घर में बंद होकर उठाया खौफनाक कदम पुलिस के अनुसार, यह घटना नालासोपारा ईस्ट के आचोले इलाके स्थित साई संतोषी बिल्डिंग में हुई। संचिता ने रविवार शाम करीब 7 से 7:30 बजे के बीच अपने कमरे को अंदर से बंद कर लिया और कथित तौर पर साड़ी के सहारे पंखे से लटककर अपनी जान दे दी। 🏥 अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और आसपास के लोगों ने तुरंत उन्हें वसई-विरार म्युनिसिपल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। 📄 पुलिस जांच जारी, कारण अब तक स्पष्ट नहीं संचिता के पिता की शिकायत के आधार पर आचोले पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है, हालांकि आत्महत्या के पीछे की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। 🎬 उभरती हुई कलाकार थीं संचिता संचिता उगले टीवी इंडस्ट्री में तेजी से पहचान बना रही थीं। उन्होंने लोकप्रिय शो “कुमकुम भाग्य” में दिया टंडन का किरदार निभाकर खास पहचान हासिल की थी। इसके अलावा वह “वागले की दुनिया” और “दिलवाली दुल्हा ले जाएगी” जैसे शोज में भी नजर आई थीं। 🎥 फिल्मों और OTT में भी बनाई जगह संचिता ने फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी काम किया था। वह फिल्म “छावा” में तारा रानी के युवा किरदार में नजर आई थीं और “साइलेंस 2” जैसे प्रोजेक्ट्स में भी उन्होंने काम किया था। 🗣️ इंडस्ट्री और फैंस में शोक की लहर उनकी अचानक मौत से टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर फैंस और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। ⚠️ जरूरी संदेश यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया मदद लेने में संकोच न करें। किसी भरोसेमंद व्यक्ति, डॉक्टर या हेल्पलाइन से संपर्क करना बेहद जरूरी है। 👉 निष्कर्ष: संचिता उगले की यह दुखद घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की भी एक गंभीर याद दिलाती है।  
BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी

BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी

BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी मुंबई के भांडुप इलाके में हुए दर्दनाक BEST बस हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन मृतक प्रशांत शिंदे के परिवार की मुश्किलें आज भी खत्म नहीं हुई हैं। इस हादसे में 43 वर्षीय प्रशांत शिंदे की मौत हो गई थी, जो अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके निधन के बाद परिवार गहरे आर्थिक संकट में फंस गया है। प्रशांत की पत्नी कंचन शिंदे और उनका 11 वर्षीय बेटा सोहम आज रोजमर्रा के खर्चों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बढ़ते किराए और स्थायी आय के अभाव ने उनकी स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। कंचन शिंदे का कहना है कि पति की अचानक मौत ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है और अब आर्थिक तंगी ने जीवन और कठिन बना दिया है। कंचन ने बताया, “जब मुझे मेरे पति की मौत की खबर मिली, तो मैं पूरी तरह टूट गई थी। हम आज तक उस सदमे से बाहर नहीं आ पाए हैं। अब हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या रोजी-रोटी की है, क्योंकि वही घर के इकलौते कमाने वाले थे।” हादसे के बाद BEST प्रशासन की ओर से परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी, लेकिन कंचन का कहना है कि यह राशि उनके भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इसे “मुंह बंद रखने की कीमत” जैसा बताया। कंचन के अनुसार, इस राशि का बड़ा हिस्सा उन्होंने अपने बेटे के भविष्य के लिए सुरक्षित रखा है, जो आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहता है। घर चलाने के लिए कंचन ने मजबूरी में घरेलू काम (कुक) करना शुरू किया है, लेकिन उनकी आय इतनी नहीं है कि वह परिवार का खर्च आसानी से उठा सकें। उन्होंने BEST प्रशासन और स्थानीय नेताओं से नौकरी की मांग की है, ताकि उन्हें एक स्थायी आय का स्रोत मिल सके। “मैंने BEST और स्थानीय नेताओं से नौकरी की मांग की है। अगर मुझे सरकारी नौकरी मिल जाए, तो मेरे परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सकता है,” कंचन ने कहा। इस बीच, परिवार की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। मकान मालिक द्वारा किराया बढ़ाए जाने के कारण उन्हें अब नया घर ढूंढना पड़ रहा है। कंचन को डर है कि अगर उन्हें दूर जाना पड़ा, तो उनके बेटे को स्कूल जाने में काफी परेशानी होगी। “हमारा किराया बढ़ा दिया गया है और अब हमें नया घर ढूंढना पड़ रहा है। अगर हमें भांडुप से बाहर जाना पड़ा, तो मेरे बेटे को अकेले स्कूल जाना पड़ेगा, जो मेरे लिए चिंता का विषय है,” उन्होंने कहा। हालांकि यह हादसा उस समय सुर्खियों में रहा था, लेकिन समय बीतने के साथ इस परिवार की परेशानियां लोगों की नजरों से ओझल हो गई हैं। छह महीने बाद भी उन्हें वह स्थायी मदद नहीं मिल पाई है, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि हादसों के बाद पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक सहारा देने के लिए मजबूत व्यवस्था की कितनी जरूरत है।  
बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई

बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई

बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई मुंबई | विशेष रिपोर्ट: मुंबई के सबसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल इलाकों में से एक बांद्रा वेस्ट में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कमर्शियल शूट के दौरान बिना किसी अनुमति के एक साथ 200 से ज्यादा ड्रोन उड़ाए गए, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। घटना 28 मई की रात की है, जब बांद्रा पुलिस को सूचना मिली कि इलाके में बड़े पैमाने पर ड्रोन ऑपरेशन चल रहा है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम उस समय हैरान रह गई जब आसमान में सैकड़ों ड्रोन एक साथ उड़ते दिखाई दिए। तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ड्रोन गतिविधि को बंद कराया और मौके पर मौजूद संचालक को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी की पहचान दिल्ली निवासी गोपाल नारायण सिंह के रूप में हुई, जो एक मार्केटिंग कंपनी में मैनेजर बताया जा रहा है। उसने पुलिस को बताया कि यह पूरा ड्रोन शो एक विज्ञापन शूट का हिस्सा था। हालांकि, जब उससे अनुमति और दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई वैध परमिशन पेश नहीं कर सका। जांच में सामने आया कि इस ऑपरेशन के लिए आवश्यक अनुमति लेने की जिम्मेदारी एक अन्य अधिकारी सुनील गुप्ता के पास थी, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बिना किसी अधिकृत मंजूरी के यह गतिविधि शुरू कर दी गई थी। पुलिस ने मौके से कई हाई-टेक कैमरा युक्त ड्रोन, जिनकी कीमत करीब 80 हजार रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है, जब्त किए हैं। इसके अलावा, ड्रोन ऑपरेशन को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया गया लैपटॉप और अन्य तकनीकी उपकरण भी फॉरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में ड्रोन उड़ाने के लिए कड़े नियम लागू हैं, खासकर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में। सुरक्षा कारणों से किसी भी ड्रोन गतिविधि के लिए कई एजेंसियों से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इस मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और आरोपियों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह की अवैध ड्रोन गतिविधियां अन्य जगहों पर भी की गई थीं और क्या इसमें किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है। डीसीपी (जोन IX) डॉ. मोहित गर्ग ने पुष्टि की है कि मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जांच जारी है। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि नियमों की अनदेखी कर ऐसे बड़े पैमाने पर ऑपरेशन कैसे संभव हो पाए। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और भी खुलासे होने की संभावना है।  
‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए 9 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया, जिनका संबंध दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी दिल्ली में “अत्यंत संवेदनशील स्थानों, सुरक्षा बलों और धार्मिक स्थलों” को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। कार्रवाई के दौरान उनके पास से हथियार, विस्फोटक सामग्री और कई हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए हैं, जिससे एक बड़े हमले की आशंका जताई जा रही थी। सूत्रों का कहना है कि इस आतंकी मॉड्यूल को लंबे समय से तैयार किया जा रहा था और इसके तार पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से जुड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में कुछ नेपाली मूल के लोग भी शामिल थे, जिन्हें ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई से राजधानी पर मंडरा रहा एक बड़ा खतरा टल गया है। फिलहाल एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग, भर्ती प्रक्रिया और लॉजिस्टिक सपोर्ट की गहराई से जांच कर रही हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच जारी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है। दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए हर थाने में काउंटर टेरर यूनिट (CTU) बनाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, विदेशी आतंकी संगठन अब एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और लोकल स्लीपर सेल के जरिए युवाओं को गुमराह कर उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां अब जमीनी स्तर पर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां हर चुनौती का सामना करने के लिए सतर्क और सक्षम हैं, और किसी भी आतंकी साजिश को सफल नहीं होने देंगी।  
मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार

मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार

मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार मुंबई, प्रतिनिधि: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नशे के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने ₹50 करोड़ से अधिक कीमत के ड्रग्स का भंडाफोड़ किया है। दक्षिण मुंबई के अग्रिपाड़ा इलाके में स्थित एक हाई-राइज इमारत में छापेमारी कर पुलिस ने मेफेड्रोन (MD) बनाने की पूरी फैक्ट्री का पर्दाफाश किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 26 मई को ‘यासमीन टॉवर’ की 10वीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में की गई। कांडिवली यूनिट को मिली गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने जाल बिछाकर फ्लैट नंबर 1004 पर छापा मारा। तलाशी के दौरान वहां ड्रग्स बनाने का पूरा सेटअप मिला, जिसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। छापेमारी में कुल 14.493 किलोग्राम मेफेड्रोन और उससे जुड़े कच्चे माल बरामद किए गए। इनमें 8.305 किलोग्राम लिक्विड एमडी (लगभग ₹29.08 करोड़) और 6.188 किलोग्राम पाउडर एमडी (लगभग ₹21.65 करोड़) शामिल हैं। इसके अलावा, ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स, मशीनरी, एक देसी पिस्टल और 19 जिंदा कारतूस भी जब्त किए गए। जांच में सामने आया है कि आरोपी फ्लैट के अंदर गैस स्टोव पर केमिकल्स उबालकर और फिर उन्हें सुखाकर ड्रग्स तैयार करते थे। इस प्रक्रिया से निकलने वाली तेज गंध को छिपाने के लिए वे पूरे दिन एयर कंडीशनर चालू रखते थे और अगरबत्ती व फ्रेगरेंस स्प्रे का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने यह तकनीक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीखी थी। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि वे उत्पादन बढ़ाने के लिए किसी फार्महाउस की तलाश में थे, जिससे इस अवैध कारोबार को बड़े स्तर पर फैलाया जा सके। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शोएब मंसूरी (33), सूफियान मंसूरी (29) और मामुनी सरकार (23) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, शोएब के खिलाफ पहले से लूट, छिनैती और मारपीट के कई मामले दर्ज हैं। वहीं, मामुनी सरकार को शोएब की गर्लफ्रेंड बताया जा रहा है, जो बांग्लादेश की नागरिक बताई जा रही है। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने उन्हें 3 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब इस नेटवर्क के पीछे के बड़े गिरोह और सप्लाई चेन की जांच में जुटी है। इस कार्रवाई को मुंबई में ड्रग्स के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।  
मुंबई में तेज रफ्तार का कहर: मरीन ड्राइव पर मर्सिडीज ने ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों को कुचला, आरोपी गिरफ्तार

मुंबई में तेज रफ्तार का कहर: मरीन ड्राइव पर मर्सिडीज ने ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों को कुचला, आरोपी गिरफ्तार

मुंबई में तेज रफ्तार का कहर: मरीन ड्राइव पर मर्सिडीज ने ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों को कुचला, आरोपी गिरफ्तार मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बार फिर तेज रफ्तार का खौफनाक चेहरा सामने आया है। मरीन ड्राइव जैसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके में देर रात एक तेज रफ्तार मर्सिडीज कार ने ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों को टक्कर मार दी, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक नियमों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा रविवार तड़के मरीन ड्राइव स्थित वानखेड़े स्टेडियम के पास हुआ, जहां नियमित चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने एक तेज रफ्तार मर्सिडीज कार को रुकने का इशारा किया। लेकिन कार चला रहा 29 वर्षीय युवक निहाल सोलंकी ने पुलिस के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए गाड़ी को और तेज कर दिया और सीधे पुलिसकर्मियों की ओर बढ़ा दी। इस टक्कर में दोनों पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें तुरंत इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है। हादसे के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सर्च ऑपरेशन शुरू किया और कुछ ही घंटों में आरोपी को पालघर जिले के नालासोपारा इलाके से गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में पुलिस को शक है कि आरोपी शराब के नशे में वाहन चला रहा था। इसकी पुष्टि के लिए उसके ब्लड सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कुछ लोग ट्रैफिक नियमों और मानव जीवन की सुरक्षा को किस तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और नशे की हालत में वाहन चलाने से बचें, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। मुंबई जैसे महानगर में जहां हर दिन लाखों लोग सड़कों पर निकलते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की जिम्मेदारी भी तय करती हैं।  

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