व्हाट्सएप पर ‘बॉस’ बनकर भेजा मैसेज, कंपनी से 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी — 4 आरोपी गिरफ्तार

व्हाट्सएप पर ‘बॉस’ बनकर भेजा मैसेज, कंपनी से 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी — 4 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली/मुंबई से एक चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जहां एक निजी कंपनी को व्हाट्सएप पर आए एक फर्जी मैसेज के जरिए 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। यह घटना INOX ग्रुप से जुड़ी बताई जा रही है।

📱 फर्जी ‘बॉस’ बनकर किया गया संपर्क

जानकारी के अनुसार, 3 जून को कंपनी के अकाउंट्स विभाग में डिप्टी जनरल मैनेजर गिरीश अमीन को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज मिला। मैसेज भेजने वाले ने खुद को कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिद्धार्थ जैन बताया और नंबर को “पर्सनल” बताकर किसी से साझा न करने को कहा।

🔍 डीपी देखकर हुआ भरोसा

मैसेज भेजने वाले ने सिद्धार्थ जैन की फोटो को प्रोफाइल पिक्चर के रूप में इस्तेमाल किया था, जिससे गिरीश अमीन को यकीन हो गया कि यह मैसेज उनके वरिष्ठ अधिकारी का ही है।

💸 63 ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर हुए करोड़ों रुपये

फर्जी ‘बॉस’ ने खुद को मीटिंग में व्यस्त बताकर कॉल न करने को कहा और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। अमीन ने निर्देशों का पालन करते हुए 3 जून से 15 जून के बीच 63 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 10,40,71,924 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

⚠️ शक होने पर खुला पूरा मामला

जब अमीन ने आधिकारिक माध्यम से सिद्धार्थ जैन से इन ट्रांजैक्शन के इनवॉइस मांगे, तो उन्होंने ऐसे किसी निर्देश से इनकार कर दिया। इसके बाद पूरे फ्रॉड का खुलासा हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

👮 पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

मुंबई पुलिस की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को संबंधित बैंक खातों की जानकारी मिली। जसौला स्थित IDFC FIRST बैंक में संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विकास और वंश नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो 8 लाख रुपये निकालने पहुंचे थे।

🔗 नेटवर्क का खुलासा

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कमीशन के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। उन्हें 20,000 से 30,000 रुपये तक का लालच दिया गया था। आगे की जांच में फैयाज आलम और अमित नाम के दो अन्य आरोपी भी गिरफ्तार किए गए।

🧠 मास्टरमाइंड की तलाश जारी

पुलिस अब इस पूरे साइबर फ्रॉड के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह का संबंध किसी बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क से तो नहीं है।

🛡️ ‘ऑपरेशन CyHawk’ से मिली मदद

दिल्ली पुलिस के “ऑपरेशन CyHawk” के तहत बैंक अधिकारियों को संदिग्ध लेन-देन की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। इसी सतर्कता के चलते यह मामला सामने आया।

👉 निष्कर्ष:

यह घटना एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। कंपनियों और कर्मचारियों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने और किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि आधिकारिक माध्यम से करने की सख्त जरूरत है।

 

Undercover Editor

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