श्रेणी: Health

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मुंबई में FDA की बड़ी कार्रवाई: 564 लीटर दूध नष्ट, 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई में FDA की बड़ी कार्रवाई: 564 लीटर दूध नष्ट, 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई में FDA की बड़ी कार्रवाई: 564 लीटर दूध नष्ट, 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर महाराष्ट्र FDA का शिकंजा; राज्यभर में ₹1.56 करोड़ का खाद्य स्टॉक जब्त या नष्ट मुंबई: खाद्य पदार्थों में मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने राज्यभर में बड़ा अभियान चलाया है। मुंबई में 23 और 24 अक्टूबर को की गई कार्रवाई के दौरान FDA अधिकारियों ने अलग-अलग डेयरियों और खाद्य प्रतिष्ठानों से संबंधित 564 लीटर दूध नष्ट किया। FDA के मुताबिक, राज्यभर में चलाए गए इस अभियान के दौरान करीब 43.56 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए गए, जबकि कुल 719.2 लीटर दूध और घी जब्त या नष्ट किया गया। इन कार्रवाईयों में शामिल खाद्य सामग्री की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹1.56 करोड़ बताई गई है। अभियान के दौरान संदिग्ध मिलावट, घटिया गुणवत्ता, गलत लेबलिंग, अस्वच्छ तरीके से खाद्य पदार्थ रखने और प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों की बिक्री जैसे मामलों पर कार्रवाई की गई। मुंबई की कई डेयरियों पर कार्रवाई FDA अधिकारियों ने मुंबई के गोवंडी और मानखुर्द इलाके में कई डेयरियों का निरीक्षण किया। गोवंडी स्थित Sainath Dairy & Farsan Mart से संदिग्ध घटिया गुणवत्ता वाला 45 लीटर खुला दूध नष्ट किया गया। वहीं मानखुर्द की Maharana Dairy से भी 40 लीटर दूध नष्ट किया गया। दोनों मामलों में दूध के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं और संबंधित प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। मानखुर्द स्थित Agasti Milk Agency में स्वच्छता और सैनिटेशन से जुड़े नियमों का उल्लंघन मिलने के बाद लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई शुरू की गई। वहीं गोवंडी ईस्ट में Yadav Dairy के खिलाफ बिना वैध लाइसेंस कारोबार करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। एंटॉप हिल में 250 लीटर दूध नष्ट 24 अक्टूबर को FDA अधिकारियों ने एंटॉप हिल स्थित Sagar Milk Centre का निरीक्षण किया। यहां दूध को निर्धारित भंडारण नियमों का पालन किए बिना प्लास्टिक की थैलियों और डिब्बों में रखने और बेचने की बात सामने आई। FDA ने मौके पर ही 250 लीटर दूध नष्ट कर दिया। इस दूध की अनुमानित कीमत ₹11,625 बताई गई है। धारावी और माहिम में भी कार्रवाई 23 अक्टूबर को की गई अलग कार्रवाई में धारावी स्थित Shakti Dairy से 31 लीटर खुला गाय का दूध नष्ट किया गया। वहीं माहिम वेस्ट स्थित Rahul Milk Centre से 198 लीटर दूध नष्ट किया गया। दोनों प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुंबई के 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन निलंबित FDA ने अलग-अलग निरीक्षणों में खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन निलंबित किए हैं। इनमें शामिल हैं: FDA के अनुसार, इन प्रतिष्ठानों में गंदे किचन और ड्रेनेज सिस्टम, शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण, बिना अनुमति वाले खाद्य रंगों का इस्तेमाल और कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं होने जैसी कमियां पाई गईं। नल बाजार में ₹4.22 लाख के प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ जब्त 22 अक्टूबर को मुंबई के नल बाजार इलाके में FDA ने एक अन्य कार्रवाई में प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों का स्टॉक जब्त किया। यह कार्रवाई 24 वर्षीय मुक़रदाली मुलाहिज अंसारी से जुड़े एक परिसर में की गई। अधिकारियों ने यहां से करीब ₹4.22 लाख मूल्य के प्रतिबंधित खाद्य उत्पाद जब्त किए और सात नमूने जांच के लिए लिए। इसके बाद 23 अक्टूबर को जे.जे. मार्ग पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Food Safety and Standards Act, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी बड़ी कार्रवाई FDA का अभियान केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहा। राज्य के विभिन्न विभागों में भी बड़े पैमाने पर खाद्य पदार्थ जब्त किए गए। कोंकण विभाग में करीब 10 टन खाद्य पदार्थ जब्त कोंकण विभाग में लगभग 9.99 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत ₹53.55 लाख बताई गई है। इनमें मसाले, सूखे मेवे और अन्य ऐसे खाद्य उत्पाद शामिल थे, जिनकी गुणवत्ता संदिग्ध थी या जिन पर लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया था। वाशी स्थित APMC मार्केट में Sakhibaba Traders से करीब 1,487.6 किलो कच्ची हींग जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग ₹22.31 लाख बताई गई है। इसके अलावा वाशी की Shree Jalaram Spices से जीरा और सरसों का स्टॉक तथा महापे के एक प्रतिष्ठान से अन्य खाद्य सामग्री जब्त की गई। छत्रपति संभाजीनगर विभाग में 26.84 टन से ज्यादा जब्ती सबसे बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री छत्रपति संभाजीनगर विभाग में जब्त की गई। यहां करीब 26.84 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत ₹64 लाख बताई गई है। हिंगोली जिले की Ganraj Industries से कथित मिलावट के संदेह में करीब 23.7 टन हल्दी पाउडर जब्त किया गया। इसकी कीमत लगभग ₹59.50 लाख बताई गई है। पुणे में 2.11 टन खाद्य सामग्री जब्त पुणे विभाग में अधिकारियों ने करीब 2.11 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए, जिनकी कीमत लगभग ₹7.93 लाख थी। इनमें पुणे-पंढरपुर रोड पर परिवहन किए जा रहे करीब 1,337 किलो खोया भी शामिल था। इसके अलावा प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों के खिलाफ अलग अभियान में पुणे में 22 अक्टूबर को छह प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इस कार्रवाई में करीब ₹19.56 लाख का स्टॉक जब्त किया गया। पांच प्रतिष्ठानों के खिलाफ FIR दर्ज की गई, सात लोगों को गिरफ्तार किया गया और पांच प्रतिष्ठानों को सील किया गया। FDA ने इस कार्रवाई के दौरान करीब ₹11 लाख मूल्य के दो वाहन भी जब्त किए। नासिक और नागपुर में भी कार्रवाई नासिक विभाग में करीब 4,069 किलो खाद्य पदार्थ और 62.2 लीटर घी जब्त किया गया, जिसकी कुल अनुमानित कीमत करीब ₹8.25 लाख है। वहीं नागपुर विभाग में चंद्रपुर जिले के एक प्रतिष्ठान से 883.3 किलो खाद्य तेल जब्त किया गया। इसकी कीमत करीब ₹1.77 लाख बताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, यह तेल दोबारा इस्तेमाल किए गए कंटेनरों में रखा गया था। नासिक विभाग में प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों के खिलाफ अलग कार्रवाई में ₹19,090 का स्टॉक जब्त किया गया। इस मामले में एक FIR दर्ज की गई और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। FDA की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी महाराष्ट्र FDA ने कहा...
मुंबई के सायन अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव; कार्यभार को लेकर पहले जताई थी चिंता

मुंबई के सायन अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव; कार्यभार को लेकर पहले जताई थी चिंता

मुंबई के सायन अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव; कार्यभार को लेकर पहले जताई थी चिंता मुंबई: मुंबई के सायन अस्पताल में प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. शिवशरण पाटिल शनिवार शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल के हॉस्टल के बाथरूम में मृत पाए गए। वह मूल रूप से कर्नाटक के निवासी थे और अस्पताल में सर्जरी विभाग में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर कार्यरत थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, वह आत्महत्या से मृत पाए गए हैं। मामले की पुलिस जांच और पोस्टमार्टम से जुड़ी आगे की जानकारी का इंतजार है। कई घंटों तक नहीं मिले, रूममेट ने अधिकारियों को दी सूचना       अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को डॉ. पाटिल कई घंटों तक दिखाई नहीं दिए। इसके बाद उनके रूममेट से उनकी तलाश करने को कहा गया। रूममेट ने जब उनके मोबाइल फोन पर कॉल किया, तो फोन की घंटी बाथरूम के भीतर सुनाई दी। इसके बाद उसने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। बताया गया है कि डॉ. पाटिल के पास एक इंजेक्शन लगाने में इस्तेमाल होने वाला चिकित्सा उपकरण मिला था। हालांकि, घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पहले भी कार्यभार को लेकर जताई थी चिंता अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार, डॉ. पाटिल ने पहले काम के अधिक दबाव को लेकर शिकायत की थी। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में इस संबंध में कोई नई शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई थी। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित यूनिट में काम का दबाव पहले की तुलना में कम हुआ था। अस्पताल प्रशासन ने उनके परिवार को सूचना दे दी है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। अस्पताल को फिलहाल पुलिस की ओर से किसी सुसाइड नोट की बरामदगी के संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी। रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटों पर फिर बहस इस घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटों, अत्यधिक कार्यभार और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं। खबर में उद्धृत जानकारी के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों में रेजिडेंट डॉक्टरों के साप्ताहिक कार्य समय को 48 घंटे तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, अस्पतालों में वास्तविक कामकाज के दौरान इन सीमाओं का पालन कितना होता है, यह एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। रिपोर्ट में नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के पुराने आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें एक प्रशिक्षु डॉक्टर के एक महीने में 540 घंटे से अधिक काम करने की बात सामने आई थी। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में कम से कम 25 रेजिडेंट डॉक्टरों की आत्महत्या से मौत होने का भी उल्लेख किया गया है। डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी डॉ. शिवशरण पाटिल की मौत चिकित्सा संस्थानों में काम करने वाले युवा डॉक्टरों की परिस्थितियों और उनकी मानसिक सेहत पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत को सामने लाती है। लंबे काम के घंटे, नींद की कमी, मरीजों की जिम्मेदारी और लगातार काम का दबाव डॉक्टरों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, इस मामले में कार्यभार को लेकर पहले की गई शिकायतों के बावजूद, मौत का कारण केवल काम का दबाव था—ऐसा निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा। घटना के कारणों और परिस्थितियों की स्पष्ट जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।  
मुंबई में 71% लोगों ने कहा- केमिस्ट ने कभी या बहुत कम मांगा डॉक्टर का पर्चा, FDA ने 880 लाइसेंसधारियों पर की कार्रवाई

मुंबई में 71% लोगों ने कहा- केमिस्ट ने कभी या बहुत कम मांगा डॉक्टर का पर्चा, FDA ने 880 लाइसेंसधारियों पर की कार्रवाई

मुंबई में 71% लोगों ने कहा- केमिस्ट ने कभी या बहुत कम मांगा डॉक्टर का पर्चा, FDA ने 880 लाइसेंसधारियों पर की कार्रवाई LocalCircles सर्वे में दवा बिक्री और फार्मासिस्ट की निगरानी को लेकर सामने आई तस्वीर; केंद्र ने Schedule H, H1 और X दवाओं की बिक्री पर CCTV अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा मुंबई: दवाओं की बिक्री में डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जांच और योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी को लेकर मुंबई में किए गए एक सर्वे ने कई सवाल खड़े किए हैं। LocalCircles के 18 सितंबर 2026 को जारी सर्वे के मुताबिक, मुंबई में सर्वे में शामिल 71% उपभोक्ताओं ने बताया कि केमिस्ट ने डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन कभी नहीं मांगा या बहुत कम मौकों पर मांगा। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 64% था। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब केंद्र सरकार ने Schedule H, H1 और X दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करने के लिए मेडिकल स्टोर्स में CCTV लगाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं महाराष्ट्र FDA ने भी जून से अगस्त 2026 के बीच दवा प्रतिष्ठानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। 3,697 मुंबईकरों से प्रिस्क्रिप्शन को लेकर सवाल LocalCircles के अनुसार, प्रिस्क्रिप्शन जांच से जुड़े सवाल का जवाब देने वाले मुंबई के 3,697 लोगों में से 36% ने कहा कि केमिस्ट ने बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा देने से कभी इनकार नहीं किया, जबकि 35% ने कहा कि ऐसा बहुत कम हुआ। इसके विपरीत, सिर्फ 9% लोगों ने बताया कि केमिस्ट ज्यादातर मौकों पर बिना पर्चे दवा देने से मना करते हैं और 5% ने कहा कि वे हमेशा प्रिस्क्रिप्शन मांगते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े उपभोक्ताओं द्वारा बताए गए अनुभवों पर आधारित सर्वे के नतीजे हैं, इन्हें हर मेडिकल स्टोर के प्रत्यक्ष निरीक्षण के बराबर नहीं माना जा सकता। होम डिलीवरी में भी प्रिस्क्रिप्शन जांच पर सवाल दवा की होम डिलीवरी को लेकर भी सर्वे में ऐसी ही तस्वीर सामने आई। मुंबई के 3,122 उत्तरदाताओं में 18% ने कहा कि ऑर्डर या डिलीवरी के दौरान उनसे कभी डॉक्टर का पर्चा नहीं मांगा गया, जबकि 40% ने कहा कि ऐसा बहुत कम हुआ। सिर्फ 23% लोगों ने बताया कि फोन या होम डिलीवरी के दौरान उनसे ज्यादातर या हमेशा प्रिस्क्रिप्शन मांगा गया। मुंबई में दवा खरीदने के लिए स्थानीय केमिस्ट अब भी सबसे प्रमुख माध्यम हैं। सर्वे में 57% लोगों ने बताया कि वे खुद या किसी अन्य व्यक्ति के जरिए स्थानीय मेडिकल स्टोर से दवा लेते हैं, जबकि 26% लोग फोन या WhatsApp के जरिए अपने केमिस्ट से होम डिलीवरी कराते हैं। केवल 17% ने ई-फार्मेसी ऐप्स को अपना प्रमुख माध्यम बताया। योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी पर भी सवाल सर्वे में दवा दुकानों पर योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी को लेकर भी आंकड़े सामने आए। मुंबई में केवल 28% उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें ज्यादातर समय या हमेशा योग्य फार्मासिस्ट से सहायता मिली। वहीं 21% ने बताया कि उन्हें ऐसे व्यक्ति ने दवा दी या मदद की, जो योग्य फार्मासिस्ट नहीं था। महाराष्ट्र FDA ने 3 महीने में 880 लाइसेंसधारियों पर कार्रवाई की सर्वे के बीच महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) की कार्रवाई भी चर्चा में है। जून से अगस्त 2026 के बीच FDA ने राज्य में 2,902 दवा प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इनमें 2,295 बिक्री प्रतिष्ठान और 607 विनिर्माण इकाइयां शामिल थीं। इस दौरान 880 लाइसेंसधारियों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई शुरू की गई। इनमें 677 लाइसेंस निलंबित और 203 लाइसेंस रद्द किए गए। कुल कार्रवाई में 740 मामले रिटेलर और होलसेलर से जुड़े थे। FDA ने इसी अवधि में 104 सर्च और सीजर ऑपरेशन भी किए, जिसमें करीब ₹11.41 करोड़ मूल्य की अवैध दवाएं और कॉस्मेटिक्स जब्त किए गए। 20 FIR दर्ज की गईं और 21 गिरफ्तारियां की गईं। FDA की जांच में बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट की निगरानी दवा बिक्री, वैध प्रिस्क्रिप्शन के बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की बिक्री, Schedule H1 रिकॉर्ड में कमियां और उचित बिल नहीं देने जैसी अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। कुछ मामलों में एक्सपायर्ड दवाओं के स्टॉक में रखे जाने और इंसुलिन व वैक्सीन जैसी दवाओं के लिए पर्याप्त तापमान नियंत्रण नहीं होने की कमियां भी बताई गई हैं। मेडिकल स्टोर्स में CCTV लगाने का प्रस्ताव इन घटनाक्रमों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। 8 सितंबर 2026 के G.S.R. 791(E) के तहत प्रस्तावित बदलाव में प्रिस्क्रिप्शन पर मिलने वाली Schedule H, H1 और X दवाओं की खुदरा बिक्री के लिए मेडिकल स्टोर में CCTV निगरानी का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का कहना है कि प्रस्ताव का उद्देश्य इन दवाओं की अनधिकृत पहुंच और बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर निगरानी मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। प्रस्ताव पर हितधारकों और आम लोगों से आपत्तियां एवं सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं। बिलिंग व्यवस्था में भी सामने आई कमी सर्वे में दवाओं की खरीद के बिल को लेकर भी सवाल सामने आए। मुंबई में 76% लोगों ने कहा कि उन्हें आम तौर पर प्रिंटेड GST बिल मिलता है, जबकि 3% को मैन्युअल GST बिल मिलने की बात कही गई। वहीं करीब 20% लोगों ने प्रभावी रूप से उचित GST बिल नहीं मिलने की जानकारी दी। LocalCircles ने कहा है कि मुंबई से जुड़े निष्कर्ष महाराष्ट्र FDA, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और CDSCO के साथ साझा किए जाएंगे। संस्था ने पंजीकृत फार्मासिस्टों की जांच, फोन और WhatsApp से होने वाली दवा बिक्री में प्रिस्क्रिप्शन की पुष्टि और दवा बिक्री का बेहतर रिकॉर्ड रखने की जरूरत पर जोर दिया है। सर्वे के आंकड़े जहां दवा खरीदने के उपभोक्ता अनुभवों की तस्वीर दिखाते हैं, वहीं FDA की कार्रवाई और केंद्र का प्रस्ताव यह संकेत देते हैं कि दवा बिक्री की निगरानी को लेकर नियामकीय स्तर पर भी सख्ती बढ़ाई जा रही है।  
मुंबई में डेंगू के मामलों में 28% बढ़ोतरी, बारिश के बीच बढ़ा खतरा; डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

मुंबई में डेंगू के मामलों में 28% बढ़ोतरी, बारिश के बीच बढ़ा खतरा; डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

मुंबई में डेंगू के मामलों में 28% बढ़ोतरी, बारिश के बीच बढ़ा खतरा; डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह गर्म और उमस भरे मौसम के साथ जगह-जगह जमा पानी बना मच्छरों के प्रजनन का कारण; डेंगू के बाद बुखार उतरने पर भी कई दिनों तक रह सकती है कमजोरी मुंबई: मुंबई में डेंगू के मामलों में पिछले साल की तुलना में करीब 28 प्रतिशत बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। गर्म और उमस भरे मौसम के साथ बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी Aedes मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शहरवासियों से मच्छरों से बचाव के साथ डेंगू के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। डॉक्टरों के मुताबिक, डेंगू से ठीक होने के बाद भी मरीज को तुरंत पहले जैसी ऊर्जा महसूस हो, यह जरूरी नहीं है। बुखार खत्म होने के बाद भी थकान, कमजोरी, चक्कर, कम स्टैमिना और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी कई दिनों या कुछ मामलों में कुछ हफ्तों तक रह सकती है। क्यों बढ़ रहा है मुंबई में डेंगू का खतरा? डेंगू संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर अक्सर घरों और आसपास मौजूद छोटे-छोटे पानी जमा होने वाले स्थानों में पनपते हैं। फूलों के गमले और उनकी ट्रे, बाल्टी, कूलर, पुराने टायर, फेंके गए कंटेनर, छत, निर्माणाधीन इमारतों और अन्य जगहों पर जमा बारिश का पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। Zynova Shalby Hospital, Mumbai के Internal Medicine Expert डॉ. निमित्त नागड़ा के अनुसार, मुंबई में इस समय डेंगू के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। गर्म और उमस भरा मौसम Aedes मच्छरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करता है। डेंगू का खतरा किसी एक उम्र तक सीमित नहीं है। बच्चे, युवा, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग सभी संक्रमित मच्छर के काटने से डेंगू की चपेट में आ सकते हैं। बुखार उतरने के बाद भी कमजोरी क्यों? विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार खत्म होना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता। डॉ. विमल जे. पाहुजा, MD (Internal Medicine), Metabolic Physician एवं Diabetologist, Dr LH Hiranandani Hospital के मुताबिक, डेंगू और मलेरिया के बाद मरीज की रिपोर्ट बेहतर होने के बावजूद कुछ समय तक काफी कमजोरी महसूस हो सकती है। डेंगू में शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तेज हो सकती है और कई मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं तथा प्लेटलेट्स में कमी देखी जाती है। गंभीर मामलों में डिहाइड्रेशन, शरीर में तरल पदार्थों का असंतुलन और कुछ अंगों पर प्रभाव भी पड़ सकता है। वहीं मलेरिया लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इनके नष्ट होने से कुछ मरीजों में एनीमिया हो सकता है, जिससे थकान और शारीरिक क्षमता कम हो सकती है। डेंगू के सामान्य लक्षण क्या हैं? डेंगू या मलेरिया के दौरान मरीजों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: बुखार खत्म होने के बाद भी कुछ मरीजों को थोड़ी दूर चलने पर थकान, पैरों में भारीपन, चक्कर, कम स्टैमिना, ध्यान लगाने में परेशानी और सामान्य काम करने में कमजोरी महसूस हो सकती है। प्लेटलेट कम होने पर घबराएं नहीं, लेकिन निगरानी जरूरी डॉक्टरों के अनुसार डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ एक प्लेटलेट रिपोर्ट देखकर स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जाना चाहिए। मरीज की पूरी क्लिनिकल स्थिति, हाइड्रेशन, ब्लीडिंग के लक्षण और अलग-अलग दिनों की रिपोर्ट में आ रहे बदलाव को देखना महत्वपूर्ण है। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दोबारा रक्त जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट देखकर खुद से दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें? डेंगू से उबर रहे मरीज को यदि निम्न में से कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए: विशेष रूप से डेंगू के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। मच्छरों से बचाव के लिए क्या करें? डॉक्टरों ने लोगों से घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की है। इसके लिए: Aedes मच्छर दिन के समय भी काट सकते हैं, इसलिए मच्छरों से बचाव को केवल रात या शाम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। डेंगू का शक हो तो क्या करें? तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, त्वचा पर दाने, मतली या उल्टी जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, खासकर जब इलाके में डेंगू के मामले बढ़ रहे हों। डेंगू की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ, आराम, आवश्यक जांच और मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ सकती है। बुखार उतरते ही भारी व्यायाम, लंबे समय तक काम या ज्यादा शारीरिक मेहनत शुरू करना उचित नहीं है। मुंबई में डेंगू का बढ़ता खतरा शहरवासियों के लिए साफ संकेत है कि मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने के साथ-साथ संदिग्ध लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए। वहीं, डेंगू या मलेरिया से उबर रहे मरीजों को शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए पर्याप्त आराम देना चाहिए और सामान्य गतिविधियों में धीरे-धीरे लौटना चाहिए।  
नवी मुंबई में बड़ा फूड टैंपरिंग रैकेट बेनकाब, एक्सपायर्ड Lay’s, Kurkure और Maggi की बदली जा रही थी तारीख

नवी मुंबई में बड़ा फूड टैंपरिंग रैकेट बेनकाब, एक्सपायर्ड Lay’s, Kurkure और Maggi की बदली जा रही थी तारीख

नवी मुंबई में बड़ा फूड टैंपरिंग रैकेट बेनकाब, एक्सपायर्ड Lay’s, Kurkure और Maggi की बदली जा रही थी तारीख नवी मुंबई: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और नवी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तुर्भे के TTC इंडस्ट्रियल एरिया में एक गोदाम पर कार्रवाई कर कथित तौर पर एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों को दोबारा पैक कर उनकी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डिटेल बदलने वाले रैकेट का खुलासा किया है। 24 से 29 अगस्त के बीच की गई कार्रवाई में 8,442 कार्टन संदिग्ध रूप से बदले गए खाद्य उत्पाद जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹75.52 लाख बताई गई है। कार्रवाई साधना एंटरप्राइजेज के गोदाम में की गई। अधिकारियों के अनुसार, यहां एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों पर मौजूद मूल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी जानकारी को हटाकर नई जानकारी चिपकाने का कथित काम किया जा रहा था। इसके लिए इंकजेट प्रिंटर, केमिकल थिनर और विशेष रूप से तैयार किए गए स्टिकर बरामद किए गए। Lay’s, Kurkure और Maggi समेत कई उत्पाद जब्त जांच के दौरान कई लोकप्रिय ब्रांडों के खाद्य एवं पेय पदार्थ मिले। जब्त सामान में Lay’s, Kurkure, Fun Flips, Bingo Mad Angles, Maggi Masala Noodles, Maggi Atta Noodles और Knorr Mushroom Soup शामिल हैं। इसके अलावा Rasoi ब्रांड के Amritsari Paneer Tikka Masala, Dum Aloo और Dal Makhni जैसे रेडी-टू-ईट उत्पाद भी बरामद किए गए। अधिकारियों ने Thums Up, Limca और Hellmann’s Mayonnaise के उत्पाद भी जब्त किए हैं। घरेलू बाजार और एक्सपोर्ट तक पहुंचने का आरोप अधिकारियों को आशंका है कि बदले गए खाद्य उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी सप्लाई किया जा रहा था। मामले की जांच अब कथित वितरण नेटवर्क तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। FDA अधिकारियों के मुताबिक, मुंबई, नोएडा और दिल्ली में काम करने वाली करीब 10 एक्सपोर्ट कंपनियों से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि ऐसे उत्पादों की सप्लाई कहां-कहां की गई और इस नेटवर्क में कितनी अन्य कंपनियां या लोग शामिल हैं। FIR दर्ज, कंपनी का लाइसेंस निलंबित मामले में तुर्भे पुलिस स्टेशन में Food Safety and Standards Act, 2006 और Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। कार्रवाई के बाद Sadhana Enterprises का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और वितरण नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों एवं कंपनियों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है। फिलहाल जांच जारी है और जब्त किए गए उत्पादों तथा कथित हेराफेरी से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।  
मुंबई-बेंगलुरु के किचन पर FDA की सख्ती: सड़ा मांस, एक्सपायर्ड डेयरी और कॉकरोच ने खोली फूड सेफ्टी की पोल

मुंबई-बेंगलुरु के किचन पर FDA की सख्ती: सड़ा मांस, एक्सपायर्ड डेयरी और कॉकरोच ने खोली फूड सेफ्टी की पोल

मुंबई-बेंगलुरु के किचन पर FDA की सख्ती: सड़ा मांस, एक्सपायर्ड डेयरी और कॉकरोच ने खोली फूड सेफ्टी की पोल मुंबई/बेंगलुरु: रेस्तरां की चमकदार डाइनिंग टेबल और महंगे मेन्यू के पीछे किचन की हकीकत हमेशा उतनी साफ-सुथरी हो, यह जरूरी नहीं। मुंबई और बेंगलुरु में हालिया फूड सेफ्टी कार्रवाई के दौरान एक्सपायर्ड डेयरी उत्पाद, सड़ा हुआ मांस, फंगस लगी सब्जियां, इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल, खराब स्टोरेज और अस्वच्छ किचन जैसी गंभीर खामियां सामने आई हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्रवाई ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रेस्तरां और होटल अपने किचन में आने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्टोरेज, एक्सपायरी और इस्तेमाल से पहले उनकी जांच किस तरह करते हैं। बेंगलुरु में 60 बड़े होटल जांच के दायरे में बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान तीन और पांच सितारा श्रेणी के करीब 60 होटलों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान 1,089 किलोग्राम खाद्य पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की। इससे पहले की गई जांच में भी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री और इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल जब्त किया गया था। निरीक्षण के दौरान सड़े हुए मांस, मछली और सब्जियों के साथ-साथ फंगस लगी खाद्य सामग्री और खराब स्टोरेज की स्थिति सामने आने की जानकारी दी गई। एक अन्य कार्रवाई में अधिकारियों ने 105 किलोग्राम एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, 32 लीटर दूध और करीब 50 किलोग्राम चिकन व खराब सब्जियां जब्त कीं। मुंबई में भी बढ़ी फूड सेफ्टी जांच बेंगलुरु की तरह मुंबई और महाराष्ट्र में भी खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। मुंबई FDA की ओर से 4 से 6 अगस्त के बीच चलाए गए तीन दिवसीय अभियान में 10 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और गंभीर उल्लंघनों के चलते चार लाइसेंस निलंबित किए गए। इससे पहले मुंबई के कई प्रमुख जिमखाना और क्लबों में भी FDA की जांच के दौरान कॉकरोच, अस्वच्छ स्टोरेज, कीटों की मौजूदगी और किचन से जुड़ी अन्य खामियां सामने आई थीं। रेस्तरां ही नहीं, वेयरहाउस भी जांच के दायरे में खाद्य सुरक्षा की निगरानी अब केवल होटल और रेस्तरां तक सीमित नहीं है। मुंबई के मालाड वेस्ट में एक खाद्य सामग्री के वेयरहाउस पर भी कार्रवाई की गई, जहां अधिकारियों को अस्वच्छ परिस्थितियों और कॉकरोच की मौजूदगी जैसी समस्याएं मिलीं। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भोजन की सुरक्षा सिर्फ किचन में खाना पकाने तक सीमित नहीं होती। सप्लायर से लेकर ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउस, रेफ्रिजरेशन और अंततः रेस्तरां की प्लेट तक पूरी सप्लाई चेन में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। एक्सपायर्ड सामान किचन तक कैसे पहुंच रहा है? खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि बड़े रेस्तरां और होटल अपने किचन में आने वाली सामग्री की जांच किस तरह करते हैं। मांस, दूध, डेयरी उत्पाद, समुद्री भोजन और ताजी सब्जियों जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के लिए तापमान की निगरानी, तारीख की लेबलिंग, स्टॉक रोटेशन और नियमित गुणवत्ता जांच बेहद जरूरी होती है। यदि पुराने स्टॉक को नए सामान के पीछे रख दिया जाए या एक्सपायरी डेट की निगरानी न हो, तो खराब खाद्य सामग्री ग्राहक की प्लेट तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। फाइव-स्टार होटल भी जांच से बाहर नहीं हालिया कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जांच सिर्फ छोटे रेस्तरां या स्ट्रीट फूड प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रही। बड़े और महंगे होटलों की किचन भी जांच के दायरे में आई हैं। महंगे मेन्यू, शानदार इंटीरियर और बड़े ब्रांड का नाम अपने आप में खाद्य सुरक्षा की गारंटी नहीं है। असली सवाल यह है कि किचन के अंदर खाद्य सामग्री किस तापमान पर रखी जा रही है, स्टोरेज कितना साफ है और खराब सामान को समय पर हटाया जा रहा है या नहीं। हालांकि, किसी एक प्रतिष्ठान में मिली खामी के आधार पर पूरे होटल या रेस्तरां उद्योग को असुरक्षित बताना उचित नहीं होगा। लेकिन ऐसी जांच यह जरूर बताती है कि खाद्य सुरक्षा के लिए नियमित और स्वतंत्र निगरानी क्यों जरूरी है। भारत में करोड़ों खाद्य कारोबार, निगरानी बड़ी चुनौती भारत में रेस्तरां, होटल, निर्माता, रिटेलर, वेयरहाउस और अन्य खाद्य कारोबारों की संख्या बहुत बड़ी है। ऐसे में हर प्रतिष्ठान तक नियमित निगरानी पहुंचाना खाद्य सुरक्षा नियामकों के लिए बड़ी चुनौती है। FSSAI के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए देशभर के विभिन्न प्रकार के खाद्य कारोबारों को नियामकीय दायरे में लाया गया है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े निरीक्षण, सैंपल जांच और फूड हैंडलर्स की ट्रेनिंग लगातार की जा रही है। लेकिन सिर्फ निरीक्षण और कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। प्रतिष्ठानों को भी अपनी आंतरिक व्यवस्था मजबूत करनी होगी। कार्रवाई के बाद फॉलो-अप सबसे जरूरी किसी होटल से खराब खाद्य सामग्री जब्त होना या लाइसेंस निलंबित होना खबर बन जाता है, लेकिन असली सवाल इसके बाद शुरू होता है। क्या प्रतिष्ठान ने अपनी स्टोरेज व्यवस्था सुधारी? क्या कर्मचारियों को खाद्य सुरक्षा नियमों की ट्रेनिंग दी गई? क्या तापमान और सफाई के रिकॉर्ड नियमित रखे जा रहे हैं? क्या खराब या एक्सपायर्ड सामान को समय पर नष्ट किया जा रहा है? और क्या दोबारा निरीक्षण में वही खामियां फिर सामने नहीं आएंगी? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि हालिया कार्रवाई सिर्फ कुछ दिनों की सुर्खियां बनकर रह जाती है या वास्तव में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार लाती है। खाने की सुरक्षा प्लेट तक पहुंचने से बहुत पहले शुरू होती है मुंबई और बेंगलुरु में हुई हालिया कार्रवाई एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—फूड सेफ्टी सिर्फ यह नहीं है कि खाना अच्छी तरह पकाया गया या नहीं। भोजन की सुरक्षा सप्लायर से शुरू होती है और ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, रेफ्रिजरेशन, किचन हाइजीन, स्टॉक मैनेजमेंट और सही तरीके से पकाने के बाद ग्राहक की प्लेट तक पहुंचती है। इस पूरी श्रृंखला की एक भी कड़ी कमजोर हुई, तो उसका असर सीधे उपभोक्ता की सेहत पर पड़ सकता है। इसलिए नियामक कार्रवाई के साथ-साथ रेस्तरां और होटल संचालकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।  
स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक: महाराष्ट्र FDA के फैसले की डॉक्टरों ने की सराहना, बोले—“बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम”

स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक: महाराष्ट्र FDA के फैसले की डॉक्टरों ने की सराहना, बोले—“बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम”

स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक: महाराष्ट्र FDA के फैसले की डॉक्टरों ने की सराहना, बोले—“बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम” मुंबई: महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले को डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम बताया है। राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की इस कार्रवाई का मकसद बच्चों में बढ़ती मोटापा और अस्वस्थ खानपान की समस्या पर लगाम लगाना है। 🍔 स्कूलों के पास जंक फूड पर सख्त प्रतिबंध नए नियमों के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में वड़ा पाव, समोसा और अन्य तले-भुने व अधिक वसा, नमक और शक्कर (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लिए FSSAI लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है और नियमित निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा। 👨‍⚕️ डॉक्टरों ने बताया ‘पब्लिक हेल्थ के लिए बड़ा कदम’ मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस फैसले को केवल एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल बताया है। डॉक्टरों का मानना है कि यह कदम बच्चों के खानपान की आदतों में सुधार लाने और मोटापे जैसी समस्याओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। 📊 करोड़ों बच्चों पर पड़ेगा असर यह फैसला पूरे महाराष्ट्र के 1.08 लाख से अधिक स्कूलों और करीब 2 करोड़ छात्रों पर लागू होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को ध्यान में रखते हुए यह नीति व्यापक स्तर पर बदलाव ला सकती है। 🧠 छोटी उम्र में बनती हैं खानपान की आदतें डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की खाने की आदतें कम उम्र में ही बन जाती हैं और स्कूल का माहौल इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। अगर स्कूल के आसपास जंक फूड आसानी से उपलब्ध रहेगा, तो बच्चे उसे सामान्य और रोजमर्रा का हिस्सा मानने लगते हैं। इस रोक से इस ‘नॉर्मलाइजेशन’ को तोड़ने में मदद मिलेगी। 🥗 सिर्फ प्रतिबंध नहीं, बेहतर विकल्पों पर भी जोर इस नीति में केवल जंक फूड पर रोक ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार को बढ़ावा देने की भी योजना है। स्कूलों में फल, दालें और साबुत अनाज जैसे हेल्दी विकल्पों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके। ⚖️ सफलता निर्भर करेगी सख्ती और सहयोग पर हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी कहा कि इस नीति की सफलता पूरी तरह इसके सही क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। ये सभी कारक मिलकर ही इस पहल को सफल बना पाएंगे। 🔍 निष्कर्ष: महाराष्ट्र सरकार का यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक मजबूत शुरुआत माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा जब इसे जमीनी स्तर पर पूरी सख्ती से लागू किया जाए और समाज के सभी वर्ग इसमें सक्रिय भूमिका निभाएं।  
“हम भारत में हैं, टेबल पर मक्खी आ ही सकती है”: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, FDA की कार्रवाई पर उठाए सवाल

“हम भारत में हैं, टेबल पर मक्खी आ ही सकती है”: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, FDA की कार्रवाई पर उठाए सवाल

“हम भारत में हैं, टेबल पर मक्खी आ ही सकती है”: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, FDA की कार्रवाई पर उठाए सवाल मुंबई: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रही सख्त कार्रवाई के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कदमों पर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि केवल एक-दो कीड़े या मक्खी दिखने के आधार पर किसी होटल का लाइसेंस निलंबित करना “व्यावहारिक” नहीं है और कार्रवाई संतुलित होनी चाहिए। ⚖️ कोर्ट की टिप्पणी ने खींचा ध्यान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान हल्के अंदाज में कहा, “हम भारत में हैं, मैडम… मेरे टेबल पर भी अभी मक्खी है। पिछले हफ्ते भी एक बड़ा कीड़ा सामने बैठा था, तो हम क्या कर सकते हैं?” हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है, लेकिन कार्रवाई “व्यावहारिक और न्यायसंगत” होनी चाहिए। 🏨 किस मामले पर हो रही थी सुनवाई? यह टिप्पणी नवी मुंबई के Park Inn by Radisson होटल की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। होटल ने 3 जुलाई को FDA द्वारा अपने FSSAI लाइसेंस निलंबन के फैसले को चुनौती दी है। होटल का कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए सीधे लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। 📋 कोर्ट ने FDA से पूछा—प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं? कोर्ट ने FDA से सवाल किया कि पहले सुधार (Improvement Notice) का नोटिस देना चाहिए था। यदि होटल नियमों का पालन नहीं करता, तभी लाइसेंस निलंबित किया जाना चाहिए था। पीठ ने कहा, “आपको पहले नोटिस देना चाहिए था, लेकिन आपने सीधे लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।” 🗣️ दोनों पक्षों की दलीलें वकील ने दलील दी कि कार्रवाई न्यायसंगत और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। केवल चेकलिस्ट या छोटे उल्लंघनों के आधार पर लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने FDA की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान पूरे राज्य में चल रहा है और इसमें BMC, KEM अस्पताल और क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया जैसे बड़े संस्थानों पर भी कार्रवाई की गई है। 📊 राज्य से मांगी गई रिपोर्ट हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 31 जुलाई तक एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे, जिसमें पूरे महाराष्ट्र में किए गए निरीक्षणों की जानकारी हो—खासकर सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों के कैंटीनों की। ⏳ अगली सुनवाई जल्द कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में जल्द आदेश जारी करेगा और अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है। 🔍 निष्कर्ष: बॉम्बे हाई कोर्ट की यह टिप्पणी साफ संकेत देती है कि खाद्य सुरक्षा के मामलों में सख्ती के साथ-साथ संतुलन और उचित प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है। अब सबकी नजर इस मामले में आने वाले कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों के लिए दिशा तय कर सकता है।  
मुंबई के नामी क्लबों पर FDA की बड़ी कार्रवाई: गंदगी, कॉकरोच और खराब खाने के चलते 5 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई के नामी क्लबों पर FDA की बड़ी कार्रवाई: गंदगी, कॉकरोच और खराब खाने के चलते 5 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई के नामी क्लबों पर FDA की बड़ी कार्रवाई: गंदगी, कॉकरोच और खराब खाने के चलते 5 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित मुंबई: मुंबई में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने शहर के कई नामी क्लबों और प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इस कार्रवाई में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI), MIG क्रिकेट क्लब समेत कुल पांच प्रतिष्ठान शामिल हैं। 🚨 जांच में सामने आई चौंकाने वाली लापरवाही FDA की जांच के दौरान इन प्रतिष्ठानों की रसोई में बेहद खराब स्वच्छता व्यवस्था पाई गई। अधिकारियों को किचन में कॉकरोच, मक्खियां और जाले मिले, जो सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) के किचन में खाने के पास बड़ी संख्या में कीड़े-मकोड़े पाए गए। इसके अलावा: ⚠️ MIG क्रिकेट क्लब में भी गंभीर अनियमितताएं बांद्रा स्थित MIG क्रिकेट क्लब में भी हालात बेहद खराब पाए गए। यहां: 📉 खाद्य सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन FDA के अनुसार, कई जगहों पर FIFO/FEFO (First In First Out / First Expired First Out) नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा: 🏢 अन्य क्लब भी कार्रवाई की जद में इस कार्रवाई में आरके जुहू जिमखाना, अपर्णा जुहू जिमखाना और विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब के लाइसेंस भी विभिन्न उल्लंघनों के चलते निलंबित किए गए हैं। 👨‍⚖️ FDA की सख्ती जारी नए आयुक्त तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में FDA पिछले दो महीनों से राज्यभर में सख्त कार्रवाई कर रहा है। इस अभियान का मकसद लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है। 🔍 निष्कर्ष: मुंबई जैसे महानगर में नामी क्लबों में इस तरह की लापरवाही सामने आना चिंता का विषय है। FDA की यह कार्रवाई न केवल अन्य प्रतिष्ठानों के लिए चेतावनी है, बल्कि उपभोक्ताओं की सेहत को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
दूध नहीं जहर का धंधा: डिटर्जेंट से बनी मिलावटी लहर में डूबा महाराष्ट्र, करोड़ों लीटर का काला सच उजागर

दूध नहीं जहर का धंधा: डिटर्जेंट से बनी मिलावटी लहर में डूबा महाराष्ट्र, करोड़ों लीटर का काला सच उजागर

दूध नहीं जहर का धंधा: डिटर्जेंट से बनी मिलावटी लहर में डूबा महाराष्ट्र, करोड़ों लीटर का काला सच उजागर धाराशिव (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के भूम तालुका से एक चौंकाने वाला सिंथेटिक दूध घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की जांच में खुलासा हुआ है कि बड़े पैमाने पर डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल और घटिया केमिकल मिलाकर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। करोड़ों लीटर नकली दूध का खेल जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पिछले छह महीनों में करीब 2,30,470 किलोग्राम घटिया मिल्क पाउडर का इस्तेमाल किया। इससे लगभग 23 लाख लीटर से ज्यादा सिंथेटिक दूध तैयार किया गया, जिसकी कीमत करीब 9.21 करोड़ रुपये आंकी गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस नकली दूध को असली दूध में 10% की मात्रा में मिलाकर बाजार में बेचा जा रहा था। इसी आधार पर अधिकारियों को आशंका है कि 2.3 करोड़ लीटर से ज्यादा मिलावटी दूध महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किया गया। डिटर्जेंट और केमिकल से बनता था ‘दूध’ जांच में यह भी सामने आया कि दूध को असली जैसा दिखाने और फैट की मात्रा बनाए रखने के लिए डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल और सस्ते केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता था, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। सात आरोपियों पर केस, अभी फरार इस गंभीर मामले में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, लेकिन घटना के कई दिन बाद भी सभी आरोपी फरार हैं। उन्हें पकड़ने के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है और लगातार छापेमारी की जा रही है। स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के केमिकलयुक्त दूध का सेवन लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। कानूनी कार्रवाई होगी सख्त फूड सेफ्टी कानून के तहत इस तरह की खतरनाक मिलावट करने वालों को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। जांच में और खुलासे संभव पुलिस के अनुसार, यह रैकेट भूम क्षेत्र के कई दूध संग्रह केंद्रों से संचालित हो रहा था। इस मामले में अभी और बड़े खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि हजारों लीटर नकली दूध खरीदने वाले लोगों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। निष्कर्ष: यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि आम लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के खतरनाक घोटाले पर रोक लग सके।  

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