करीब डेढ़ घंटे तक चले इस दौरे के दौरान उन्होंने वेस्ट सेग्रीगेशन सेंटर, कंपोस्टिंग यूनिट, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और बायो-रिएक्टर लैंडफिल साइट का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों को बदबू नियंत्रण और कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
🌫️ बदबू रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?
BMC के अनुसार, कचरे से निकलने वाली दुर्गंध को कम करने के लिए साइट पर बायो-एंजाइम लिक्विड का छिड़काव किया जा रहा है। इसके अलावा, फ्रेगरेंस बेस्ड मिस्टिंग सिस्टम के जरिए भी आसपास के इलाकों में बदबू कम करने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल इस परियोजना में 11 मिस्टिंग कैनन सिस्टम सक्रिय हैं। साथ ही, स्थानीय निवासियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक हेल्पलाइन भी शुरू की गई है।
♻️ हर दिन 6000 टन से ज्यादा कचरे का निपटान
करीब 118 हेक्टेयर में फैली इस विशाल परियोजना में रोजाना 5200 मीट्रिक टन कचरे को बायो-रिएक्टर तकनीक से प्रोसेस किया जाता है, जबकि 1000 टन कचरा कंपोस्टिंग के जरिए निपटाया जाता है।
प्रक्रिया के दौरान बनने वाली मीथेन गैस का उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाता है, जबकि अतिरिक्त गैस को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाता है।
🧹 विखरोली में सफाई व्यवस्था का भी लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने विक्रोली के कन्नमवार नगर स्थित सफाई कर्मियों के आउटपोस्ट का भी दौरा किया। उन्होंने सफाई कर्मचारियों से बातचीत की और शहर में स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
📢 जनजागरूकता और आधुनिक तकनीक पर जोर
आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर में कचरा डंपिंग स्पॉट्स को खत्म करने के लिए जनजागरूकता बढ़ाई जाए और आधुनिक मशीनों का अधिकतम उपयोग किया जाए।
📌 निष्कर्ष:
मुंबई में स्वच्छता और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए BMC अब ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है। कांजुरमार्ग प्लांट का यह निरीक्षण साफ संकेत देता है कि प्रशासन बदबू और कचरा प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठा रहा है।
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