मुंबई में फर्जी लैब्स पर सख्ती की मांग: बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट रिपोर्ट जारी करने पर FIR दर्ज करने की अपील

मुंबई में फर्जी लैब्स पर सख्ती की मांग: बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट रिपोर्ट जारी करने पर FIR दर्ज करने की अपील

मुंबई | विशेष रिपोर्ट:

मुंबई में संदिग्ध और नियमों का उल्लंघन करने वाली पैथोलॉजी लैब्स के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ प्रैक्टिसिंग पैथोलॉजिस्ट्स (MAPPM) ने ऐसे लैब्स के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्राधिकरणों को कड़ा कदम उठाने का आग्रह किया है।

एसोसिएशन का कहना है कि कई लैब्स बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट की निगरानी के रिपोर्ट जारी कर रही हैं, जो न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। डॉ. यादव ने कहा कि “लोग पैथोलॉजी रिपोर्ट पर पूरा भरोसा करते हैं क्योंकि उसी के आधार पर इलाज तय होता है। ऐसे में बिना विशेषज्ञ निगरानी के रिपोर्ट जारी करना बेहद खतरनाक है।”

MAPPM ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाएगी और स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए तथ्यों पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग करेगी। साथ ही, संगठन ने मेडिकल एजुकेशन विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि पहले की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

एसोसिएशन का कहना है कि वह यह जानना चाहती है कि कितनी लैब्स की जांच की गई, किन-किन जगहों पर उल्लंघन पाया गया और दोषी संस्थानों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पैथोलॉजी रिपोर्ट निदान, इलाज और बीमारी की निगरानी का आधार होती है, इसलिए इसमें योग्य डॉक्टर की भूमिका अनिवार्य है।

डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि “हर रिपोर्ट डॉक्टर के इलाज के फैसले को प्रभावित करती है, चाहे वह दवा हो, सर्जरी हो या कैंसर का इलाज। ऐसे में रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति पूरी जिम्मेदारी लेने वाला होना चाहिए—इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”

यह मामला सामने आने के बाद इसे मुंबई में पैथोलॉजी सेवाओं को लेकर पहली बड़ी संस्थागत प्रतिक्रिया माना जा रहा है। आने वाले समय में शहरभर की लैब्स पर जांच और निगरानी बढ़ने की संभावना है।

हालांकि एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश पैथोलॉजिस्ट ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं, लेकिन कुछ संस्थानों की लापरवाही पूरे पेशे की साख को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में सख्त नियमों का पालन और कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।

 

Undercover Editor

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