मुंबई का नया फ्लाईओवर ‘पिघल रहा’? वायरल वीडियो पर मचा हंगामा, विशेषज्ञों ने बताया असली कारण

मुंबई का नया फ्लाईओवर ‘पिघल रहा’? वायरल वीडियो पर मचा हंगामा, विशेषज्ञों ने बताया असली कारण

मुंबई में हाल ही में शुरू हुआ मृणालताई गोरे फ्लाईओवर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। फ्लाईओवर के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद इसके सड़क सतह के “पिघलने” जैसे वीडियो सामने आए, जिससे लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई जा रही है।

यह 750 मीटर लंबा फ्लाईओवर, जिसकी लागत करीब 247.97 करोड़ रुपये बताई जा रही है, शहर के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी लिंक है। यह गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड को वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड से जोड़ने का काम करेगा।

वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में फ्लाईओवर की सड़क पर पिघलती हुई परत, ढीले पत्थर (ग्रेवल) और कुछ जगहों पर गड्ढे जैसे दृश्य दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में तो बाइक के स्टैंड के दबाव से सड़क का हिस्सा धंसता हुआ भी नजर आया।

विशेषज्ञों की राय: सामान्य प्रक्रिया

शहरी योजनाकार और विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाईओवर की सड़क पर “मास्टिक एस्फाल्ट” का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें बिटुमेन गर्मी में नरम हो सकता है।

उनका कहना है कि मुंबई में इस समय तापमान अधिक होने के कारण बिटुमेन की ऊपरी परत थोड़ी पिघलती हुई दिखाई दे रही है, जो एक सामान्य प्रक्रिया है।

सड़क पर दिखाई देने वाले छोटे-छोटे पत्थर भी किसी खराब निर्माण का संकेत नहीं हैं। इन्हें जानबूझकर डाला जाता है ताकि सड़क पर घर्षण (फ्रिक्शन) बना रहे और वाहन फिसलने से बचें। ट्रैफिक के दबाव से ये पत्थर धीरे-धीरे सतह में बैठ जाते हैं।

फ्लाईओवर की डिजाइन में घर्षण जरूरी

मृणालताई गोरे फ्लाईओवर में कई मोड़ (curves) हैं, जिसके कारण यहां हाई फ्रिक्शन वाली सतह जरूरी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, खासकर बारिश के मौसम में फिसलन रोकने के लिए यह तकनीक बेहद जरूरी होती है।

असली परीक्षा मानसून में

हालांकि, फिलहाल स्थिति को सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन असली परीक्षण मानसून के दौरान होगा। अगर सड़क की परत बारिश में बहने लगे या खराब हो जाए, तब निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठेंगे।

बीएमसी अधिकारियों का भी कहना है कि अभी केवल वीडियो के आधार पर फ्लाईओवर को खराब कहना सही नहीं होगा। आने वाले दिनों में बारिश के दौरान इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

निष्कर्ष

मुंबई के इस नए फ्लाईओवर को लेकर फिलहाल जो हंगामा हो रहा है, वह आंशिक रूप से भ्रम पर आधारित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी दृष्टि से यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अंतिम फैसला मानसून के बाद ही लिया जा सकेगा। फिलहाल, शहरवासियों को कुछ समय इंतजार करना होगा कि यह फ्लाईओवर अपनी गुणवत्ता की परीक्षा में कितना खरा उतरता है।

 

Undercover Editor

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