बाणगंगा तालाब में फिर सैकड़ों मछलियों की मौत, BMC ने बुलाई स्थानीय लोगों और पुजारियों की बैठक

बाणगंगा तालाब में फिर सैकड़ों मछलियों की मौत, BMC ने बुलाई स्थानीय लोगों और पुजारियों की बैठक

मुंबई: दक्षिण मुंबई के वॉकश्वर इलाके में स्थित ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब में एक बार फिर सैकड़ों मछलियों के मृत मिलने से चिंता बढ़ गई है। हर साल इसी अवधि के आसपास मछलियों के मरने की घटनाएं सामने आने के बाद अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस समस्या को रोकने के लिए स्थानीय निवासियों और मंदिर के पुजारियों के साथ बैठक करने का फैसला किया है।

BMC के अधिकारियों के मुताबिक, बैठक इस सप्ताह D वार्ड कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य तालाब के पानी को प्रदूषित होने से बचाने और जलीय जीवों की सुरक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करना है।

पितृपक्ष के दौरान बढ़ जाती है चिंता

BMC अधिकारियों के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए बाणगंगा तालाब पहुंचते हैं। इस दौरान कुछ लोग पानी में आटे और दूध से बनी सामग्री तथा अन्य पूजन सामग्री डालते हैं।

BMC का कहना है कि ऐसी सामग्री पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। जैविक सामग्री के बढ़ने से पानी में घुली ऑक्सीजन कम होने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर पड़ सकता है।

हालांकि, मछलियों की मौत का सटीक कारण निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक और पर्यावरणीय जांच महत्वपूर्ण होगी।

हर साल सामने आ रहा है मछलियों की मौत का मामला

BMC अधिकारियों के अनुसार, बाणगंगा तालाब में मछलियों के मरने की समस्या लगभग हर वर्ष इसी समय के आसपास सामने आती है।

इस वर्ष भी बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई हैं। इसे देखते हुए BMC अब केवल सफाई अभियान तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय लोगों और पुजारियों को जागरूक करने पर जोर दे रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, बैठक में लोगों को समझाया जाएगा कि धार्मिक आस्था और परंपराओं के साथ-साथ तालाब के जल और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा भी जरूरी है।

पिछले साल हटाया गया था करीब 10,000 किलो कचरा

बाणगंगा तालाब में पिछले वर्ष भी बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई थीं। उस समय BMC ने सफाई अभियान चलाकर करीब 10,000 किलोग्राम मृत मछलियां और पुष्प कचरा तालाब से हटाया था।

इस घटना के बाद BMC ने तालाब परिसर में फूलों और खाद्य सामग्री के लिए संग्रहण डिब्बे भी लगाए थे, ताकि श्रद्धालुओं द्वारा छोड़ी जाने वाली सामग्री सीधे पानी में न जाए।

इसके अलावा नियमित सफाई अभियान भी शुरू किए गए थे।

BMC की बैठक में क्या होगा?

इस सप्ताह होने वाली बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है:

  • तालाब में फूल और अन्य पूजा सामग्री सीधे पानी में न डालने के लिए जागरूकता।
  • खाद्य सामग्री और पुष्प कचरे के लिए लगाए गए संग्रहण डिब्बों का इस्तेमाल बढ़ाना।
  • पानी की गुणवत्ता और ऑक्सीजन स्तर पर नजर रखना।
  • तालाब में मछलियों और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के उपाय।
  • स्थानीय पुजारियों और निवासियों को पर्यावरणीय प्रभावों की जानकारी देना।
  • भविष्य में मछलियों की सामूहिक मौत की घटनाओं को रोकने के लिए नियमित निगरानी।

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है बाणगंगा तालाब

दक्षिण मुंबई के वॉकश्वर क्षेत्र में स्थित बाणगंगा तालाब का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान राम ने यहां जमीन पर बाण चलाकर गंगा की धारा प्रकट की थी, जिसके कारण इसका नाम बाणगंगा पड़ा।

यह जलाशय मुंबई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है और इसका संरक्षण लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। तालाब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण एवं नियंत्रण से जुड़े क्षेत्र में स्थित है।

इसी वजह से तालाब में बार-बार मछलियों के मरने की घटनाएं केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत से जुड़ा मुद्दा भी बन जाती हैं।

सफाई से आगे अब जागरूकता पर जोर

BMC की पिछली कार्रवाई में मृत मछलियों और कचरे को हटाने पर जोर दिया गया था। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए इस बार प्रशासन रोकथाम और जन-जागरूकता पर अधिक ध्यान देना चाहता है।

धार्मिक गतिविधियों के दौरान पानी में जाने वाली सामग्री की मात्रा कम करना, फूलों और खाद्य सामग्री के लिए उपलब्ध संग्रहण डिब्बों का इस्तेमाल करना और तालाब में कचरा नहीं डालना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

बाणगंगा तालाब में मछलियों की मौत का मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि मुंबई की ऐतिहासिक जलधरोहरों को धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन के साथ कैसे सुरक्षित रखा जाए।

BMC की प्रस्तावित बैठक के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर इस समस्या को रोकने के लिए कौन से स्थायी कदम उठाते हैं।

 

Undercover Editor

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