इस बीच BMC मेयर रितु तावड़े ने इस प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर कहा कि उन्हें फिलहाल इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के साथ चर्चा करने के बाद ही वह अपना रुख स्पष्ट करेंगी। मेयर की इस टिप्पणी के बाद BMC प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
1 अक्टूबर से शुरू होना है तीन महीने का अभियान
BMC ने 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों में किए गए कथित अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण के खिलाफ विशेष अभियान की घोषणा की है। यह अभियान 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक चलाया जाना है।
BMC के आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में कुल करीब 2,23,150 झोपड़ी संरचनाएं हैं। इनमें से 39,111 संरचनाओं को 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई के आधार पर कार्रवाई के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें 3,348 मुंबई शहर, 4,536 पश्चिमी उपनगर और 31,227 पूर्वी उपनगरों में हैं।
BMC ने संबंधित निवासियों से कार्रवाई शुरू होने से पहले अनधिकृत हिस्से स्वयं हटाने की अपील की है। प्रशासन के अनुसार ऐसा नहीं करने पर आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
स्थायी समिति की बैठक में उठे सवाल
23 सितंबर को हुई BMC स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्तावित कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को पर्याप्त जानकारी दिए बिना कार्रवाई की घोषणा कर दी।
बैठक में पार्षदों ने मांग की कि कार्रवाई शुरू करने से पहले पूरे मामले को निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने रखा जाए और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े नियमों तथा व्यवस्था को स्पष्ट किया जाए। स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने भी प्रशासन से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है।
पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की मांग
BMC के सदन के नेता एवं बीजेपी समूह नेता गणेश खणकर और शिवसेना के वरिष्ठ पार्षद यशोधर फणसे समेत कई प्रतिनिधियों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि प्रभावित झोपड़ीवासियों के लिए पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की ठोस व्यवस्था स्पष्ट किए बिना व्यापक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया है। नेताओं ने कहा है कि कार्रवाई से पहले प्रभावित निवासियों को विश्वास में लिया जाए और पुनर्वास नीति को स्पष्ट किया जाए।
प्रशासन का तर्क क्या है?
BMC की ओर से प्रस्तावित अभियान का आधार अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण के खिलाफ कार्रवाई बताया गया है। यह अभियान ऐसे समय में प्रस्तावित है जब इस साल मुंबई में अनधिकृत और असुरक्षित संरचनाओं से जुड़े हादसों के बाद सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। BMC ने कहा है कि चिन्हित संरचनाओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, प्रभावित निवासियों और उनके प्रतिनिधियों की मुख्य चिंता यह है कि कार्रवाई की स्थिति में परिवारों के रहने की व्यवस्था क्या होगी और पुनर्वास की प्रक्रिया किस आधार पर की जाएगी।
39,111 संरचनाओं पर कार्रवाई का मामला
BMC के मुताबिक अब तक 4,584 संरचनाओं पर कार्रवाई की जा चुकी है और 611 अन्य संरचनाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। बाकी चिन्हित संरचनाओं के संबंध में प्रशासन ने अनधिकृत हिस्से स्वयं हटाने को कहा है।
अब मेयर के मामले से अनभिज्ञ होने वाले बयान और स्थायी समिति में उठे सवालों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BMC प्रशासन आगे की कार्रवाई को लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रभावित निवासियों के साथ किस तरह समन्वय करता है।
फिलहाल 1 अक्टूबर से प्रस्तावित अभियान को लेकर BMC प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। आगे की कार्रवाई पुनर्वास व्यवस्था, प्रशासनिक स्पष्टीकरण और संबंधित नियमों पर होने वाली चर्चा के बाद किस दिशा में जाती है, इस पर नजर बनी हुई है।
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