मुंबई में 71% लोगों ने कहा- केमिस्ट ने कभी या बहुत कम मांगा डॉक्टर का पर्चा, FDA ने 880 लाइसेंसधारियों पर की कार्रवाई

मुंबई में 71% लोगों ने कहा- केमिस्ट ने कभी या बहुत कम मांगा डॉक्टर का पर्चा, FDA ने 880 लाइसेंसधारियों पर की कार्रवाई

LocalCircles सर्वे में दवा बिक्री और फार्मासिस्ट की निगरानी को लेकर सामने आई तस्वीर; केंद्र ने Schedule H, H1 और X दवाओं की बिक्री पर CCTV अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा

मुंबई: दवाओं की बिक्री में डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जांच और योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी को लेकर मुंबई में किए गए एक सर्वे ने कई सवाल खड़े किए हैं। LocalCircles के 18 सितंबर 2026 को जारी सर्वे के मुताबिक, मुंबई में सर्वे में शामिल 71% उपभोक्ताओं ने बताया कि केमिस्ट ने डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन कभी नहीं मांगा या बहुत कम मौकों पर मांगा। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 64% था।

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब केंद्र सरकार ने Schedule H, H1 और X दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करने के लिए मेडिकल स्टोर्स में CCTV लगाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं महाराष्ट्र FDA ने भी जून से अगस्त 2026 के बीच दवा प्रतिष्ठानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है।

3,697 मुंबईकरों से प्रिस्क्रिप्शन को लेकर सवाल

LocalCircles के अनुसार, प्रिस्क्रिप्शन जांच से जुड़े सवाल का जवाब देने वाले मुंबई के 3,697 लोगों में से 36% ने कहा कि केमिस्ट ने बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा देने से कभी इनकार नहीं किया, जबकि 35% ने कहा कि ऐसा बहुत कम हुआ।

इसके विपरीत, सिर्फ 9% लोगों ने बताया कि केमिस्ट ज्यादातर मौकों पर बिना पर्चे दवा देने से मना करते हैं और 5% ने कहा कि वे हमेशा प्रिस्क्रिप्शन मांगते हैं।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े उपभोक्ताओं द्वारा बताए गए अनुभवों पर आधारित सर्वे के नतीजे हैं, इन्हें हर मेडिकल स्टोर के प्रत्यक्ष निरीक्षण के बराबर नहीं माना जा सकता।

होम डिलीवरी में भी प्रिस्क्रिप्शन जांच पर सवाल

दवा की होम डिलीवरी को लेकर भी सर्वे में ऐसी ही तस्वीर सामने आई। मुंबई के 3,122 उत्तरदाताओं में 18% ने कहा कि ऑर्डर या डिलीवरी के दौरान उनसे कभी डॉक्टर का पर्चा नहीं मांगा गया, जबकि 40% ने कहा कि ऐसा बहुत कम हुआ।

सिर्फ 23% लोगों ने बताया कि फोन या होम डिलीवरी के दौरान उनसे ज्यादातर या हमेशा प्रिस्क्रिप्शन मांगा गया।

मुंबई में दवा खरीदने के लिए स्थानीय केमिस्ट अब भी सबसे प्रमुख माध्यम हैं। सर्वे में 57% लोगों ने बताया कि वे खुद या किसी अन्य व्यक्ति के जरिए स्थानीय मेडिकल स्टोर से दवा लेते हैं, जबकि 26% लोग फोन या WhatsApp के जरिए अपने केमिस्ट से होम डिलीवरी कराते हैं। केवल 17% ने ई-फार्मेसी ऐप्स को अपना प्रमुख माध्यम बताया।

योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी पर भी सवाल

सर्वे में दवा दुकानों पर योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी को लेकर भी आंकड़े सामने आए। मुंबई में केवल 28% उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें ज्यादातर समय या हमेशा योग्य फार्मासिस्ट से सहायता मिली। वहीं 21% ने बताया कि उन्हें ऐसे व्यक्ति ने दवा दी या मदद की, जो योग्य फार्मासिस्ट नहीं था।

महाराष्ट्र FDA ने 3 महीने में 880 लाइसेंसधारियों पर कार्रवाई की

सर्वे के बीच महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) की कार्रवाई भी चर्चा में है। जून से अगस्त 2026 के बीच FDA ने राज्य में 2,902 दवा प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इनमें 2,295 बिक्री प्रतिष्ठान और 607 विनिर्माण इकाइयां शामिल थीं।

इस दौरान 880 लाइसेंसधारियों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई शुरू की गई। इनमें 677 लाइसेंस निलंबित और 203 लाइसेंस रद्द किए गए। कुल कार्रवाई में 740 मामले रिटेलर और होलसेलर से जुड़े थे।

FDA ने इसी अवधि में 104 सर्च और सीजर ऑपरेशन भी किए, जिसमें करीब ₹11.41 करोड़ मूल्य की अवैध दवाएं और कॉस्मेटिक्स जब्त किए गए। 20 FIR दर्ज की गईं और 21 गिरफ्तारियां की गईं।

FDA की जांच में बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट की निगरानी दवा बिक्री, वैध प्रिस्क्रिप्शन के बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की बिक्री, Schedule H1 रिकॉर्ड में कमियां और उचित बिल नहीं देने जैसी अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। कुछ मामलों में एक्सपायर्ड दवाओं के स्टॉक में रखे जाने और इंसुलिन व वैक्सीन जैसी दवाओं के लिए पर्याप्त तापमान नियंत्रण नहीं होने की कमियां भी बताई गई हैं।

मेडिकल स्टोर्स में CCTV लगाने का प्रस्ताव

इन घटनाक्रमों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। 8 सितंबर 2026 के G.S.R. 791(E) के तहत प्रस्तावित बदलाव में प्रिस्क्रिप्शन पर मिलने वाली Schedule H, H1 और X दवाओं की खुदरा बिक्री के लिए मेडिकल स्टोर में CCTV निगरानी का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

सरकार का कहना है कि प्रस्ताव का उद्देश्य इन दवाओं की अनधिकृत पहुंच और बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर निगरानी मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। प्रस्ताव पर हितधारकों और आम लोगों से आपत्तियां एवं सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं।

बिलिंग व्यवस्था में भी सामने आई कमी

सर्वे में दवाओं की खरीद के बिल को लेकर भी सवाल सामने आए। मुंबई में 76% लोगों ने कहा कि उन्हें आम तौर पर प्रिंटेड GST बिल मिलता है, जबकि 3% को मैन्युअल GST बिल मिलने की बात कही गई। वहीं करीब 20% लोगों ने प्रभावी रूप से उचित GST बिल नहीं मिलने की जानकारी दी।

LocalCircles ने कहा है कि मुंबई से जुड़े निष्कर्ष महाराष्ट्र FDA, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और CDSCO के साथ साझा किए जाएंगे। संस्था ने पंजीकृत फार्मासिस्टों की जांच, फोन और WhatsApp से होने वाली दवा बिक्री में प्रिस्क्रिप्शन की पुष्टि और दवा बिक्री का बेहतर रिकॉर्ड रखने की जरूरत पर जोर दिया है।

सर्वे के आंकड़े जहां दवा खरीदने के उपभोक्ता अनुभवों की तस्वीर दिखाते हैं, वहीं FDA की कार्रवाई और केंद्र का प्रस्ताव यह संकेत देते हैं कि दवा बिक्री की निगरानी को लेकर नियामकीय स्तर पर भी सख्ती बढ़ाई जा रही है।

 

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