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शिवसेना का ‘Mission Gen Z’: 250+ युवा जनप्रतिनिधियों के साथ युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति

शिवसेना का ‘Mission Gen Z’: 250+ युवा जनप्रतिनिधियों के साथ युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति

शिवसेना का ‘Mission Gen Z’: 250+ युवा जनप्रतिनिधियों के साथ युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति मुंबई: युवाओं के बीच अपनी सीधी पहुंच मजबूत करने के उद्देश्य से शिवसेना ने बुधवार, 26 अगस्त को मुंबई में ‘मिशन Gen Z’ की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य Gen Z और Gen Alpha की प्राथमिकताओं को शासन और सार्वजनिक नीतियों से जोड़ना है। अभियान के पहले चरण में आयोजित युवा सम्मेलन में महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से 20 से 30 वर्ष की आयु के 250 से अधिक युवा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, खेल, कौशल विकास और महिला सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे सामने रखे। युवा प्रतिनिधियों ने खेल परिसरों और मैदानों के विकास, बेहतर पुस्तकालय एवं स्टडी स्पेस, करियर गाइडेंस, रोजगार सहायता, रोजगार पोर्टल और स्किल डेवलपमेंट सेंटर की जरूरत पर जोर दिया। इसके अलावा कॉलेजों में युवा महोत्सव, नशामुक्ति अभियान, महिलाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों के जिला परिषद स्कूलों में विदेशी भाषाओं की शिक्षा जैसे सुझाव भी दिए गए। पार्टी ने कहा कि Gen Z, Gen Alpha और युवाओं के साथ लंबे समय तक संवाद बनाए रखने के लिए शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म रणनीति तैयार की जाएगी। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अभियान का उद्देश्य यह समझना है कि युवा वास्तव में क्या चाहते हैं और उनकी समस्याओं को किस तरह ठोस कार्रवाई में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं तक पहुंचने के लिए पार्टी अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सीधे संवाद को बढ़ावा देगी। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग आयु वर्ग के युवाओं की चुनौतियां अलग हैं, इसलिए उनके लिए संवाद और समाधान भी उनकी जरूरतों के अनुरूप होने चाहिए। श्रीकांत शिंदे के मुताबिक, युवाओं की समस्याओं का समाधान तुरंत संभव नहीं है, लेकिन सरकार और पार्टी लगातार उनसे संवाद कर उनकी चिंताओं को समझने और सकारात्मक समाधान की दिशा में काम करेगी। शिवसेना का कहना है कि युवाओं से मिले सुझावों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और संबंधित मुद्दों पर कार्रवाई की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। ‘मिशन Gen Z’ के जरिए पार्टी अब युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के साथ-साथ उनकी भागीदारी को शासन और नीति निर्माण से जोड़ने की कोशिश कर रही है।  
पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी, आज मुंबई में मंत्री से मुलाकात

पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी, आज मुंबई में मंत्री से मुलाकात

पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी, आज मुंबई में मंत्री से मुलाकात छात्र प्रतिनिधिमंडल की आदिवासी विकास मंत्री से मुलाकात, छात्रावासों की सुरक्षा और ₹1 करोड़ बीमा समेत कई मांगें पुणे/मुंबई: पुणे के आदिवासी सरकारी छात्रावास में छात्रों का आंदोलन सोमवार को 11वें दिन भी जारी रहा। अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए 10 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल आज मुंबई पहुंचकर आदिवासी विकास मंत्री प्रो. डॉ. अशोक रामाजी उईके से मंत्रालय में मुलाकात करेगा। छात्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात कर अपनी मांगें रखने की कोशिश करेंगे। हड़ताल में शामिल छह छात्र—श्वेता गिरनाक (26), निकिता मेचकर (22), शरद थोकल (26), विजय भांदबल (25), राहुल धनवे (26) और राजाराम पाडवी (20)—पुणे के हडपसर-मांजरी सीमा के पास स्थित आदिवासी सरकारी बालक छात्रावास में अनशन जारी रखे हुए हैं। सरकार के 14 अगस्त के GR को वापस लेने की मांग छात्रों की प्रमुख मांगों में महाराष्ट्र सरकार द्वारा 14 अगस्त 2026 को जारी आदिवासी छात्रावासों से संबंधित शासन निर्णय (GR) को वापस लेना शामिल है। छात्र संगठन का कहना है कि नया आदेश मौजूदा परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए। छात्रों ने 11 नवंबर 2011 के GR के आधार पर संशोधित आदेश जारी करने की मांग की है। साथ ही छात्रावासों में मिलने वाले भत्तों और अन्य आर्थिक सुविधाओं को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जोड़ने की मांग की गई है, ताकि महंगाई के अनुसार इन सुविधाओं में हर साल बढ़ोतरी हो सके। छात्रावासों में सुरक्षा और ₹1 करोड़ बीमा की मांग आदिवासी छात्रों ने छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। इसके अलावा प्रत्येक आदिवासी छात्र के लिए ₹1 करोड़ का बीमा कवर देने की मांग भी रखी गई है। यह मांग गडचिरोली में सांप के जहर से तीन आदिवासी छात्रों की हालिया मौत के बाद और महत्वपूर्ण हो गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मृत छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की भी मांग की है। महिला छात्रों के लिए सुरक्षित छात्रावास की मांग छात्रों ने पुणे में आदिवासी छात्राओं के लिए सुरक्षित और सभी जरूरी सुविधाओं से लैस केंद्रीय छात्रावास भवन बनाने की मांग भी की है। इसके अलावा छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में खाली पड़े पदों को तत्काल भरने की मांग की गई है। इनमें चपरासी, सुरक्षा गार्ड और सफाई कर्मचारियों के पद शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि नियमित भर्ती पूरी होने तक इन पदों पर स्थायी या अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। पहले भी हो चुकी है मंत्री और अधिकारियों से बैठक छात्र प्रतिनिधियों ने 18 अगस्त को आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके से मुलाकात की थी। इसके बाद 22 अगस्त को आदिवासी विकास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त और अन्य अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई। हालांकि, मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद छात्रों का आंदोलन और अनशन जारी है। अब छात्रों की नजर आज मुंबई में होने वाली बैठक पर है। प्रदर्शनकारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर आदिवासी छात्रों की सुरक्षा, शिक्षा और छात्रावासों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान करेगी।  
मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरी, आज से नियम लागू; जानिए उल्लंघन पर क्या होगा

मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरी, आज से नियम लागू; जानिए उल्लंघन पर क्या होगा

मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरी, आज से नियम लागू; जानिए उल्लंघन पर क्या होगा मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा से जुड़ी शर्तों को लेकर सरकार ने अब सख्ती शुरू कर दी है। मंगलवार से नियम लागू होने के बाद जिन चालकों को मराठी का आवश्यक ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, नियम का उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किया जाएगा। सरकार ने चालकों को मराठी सीखने और आवश्यक प्रशिक्षण पूरा करने के लिए पहले पर्याप्त समय दिया था। अब यह समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, मराठी की आवश्यक जानकारी प्रदर्शित नहीं कर पाने वाले चालकों को सबसे पहले 30 दिन का नोटिस दिया जाएगा। नियम नहीं मानने पर लाइसेंस निलंबित हो सकता है नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि चालक मराठी भाषा की निर्धारित शर्त पूरी नहीं करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बावजूद नियम का पालन नहीं करने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाने का प्रावधान है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि चालकों को नियमों का पालन करने के लिए कुल मिलाकर करीब चार महीने तक का समय मिल सकता है। 1.25 लाख चालकों को राहत इस नियम के तहत करीब 1.25 लाख ऑटो और टैक्सी चालकों को राहत मिलेगी। इन चालकों ने सरकार द्वारा आयोजित मराठी भाषा पाठ्यक्रम पूरा कर परीक्षा पास की है और प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। ऐसे चालकों पर इस प्रावधान के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी। ठाणे में आयोजित ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा पाठ्यक्रम अभियान’ के समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी को “भक्ति की भाषा, मजबूरी की नहीं” के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो लोग मराठी सीख रहे हैं, उनका मजाक उड़ाने के बजाय उनसे मराठी में बातचीत कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। शिंदे के मुताबिक, 105 दिनों के अभियान के दौरान करीब 1.25 लाख ऑटो और टैक्सी चालकों ने मराठी सीखी, परीक्षा दी और प्रमाणपत्र हासिल किए। परिवहन मंत्री ने अपनाया सख्त रुख परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “मैं मराठी नहीं बोलूंगा” जैसी मानसिकता अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अभियान के पीछे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की राजनीतिक पहल को महत्वपूर्ण बताया। सरनाईक ने यह भी कहा कि अभियान के लिए उद्योग विभाग की ओर से 1 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी। सरकार का क्या कहना है? मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में बड़ी संख्या में गैर-मराठी भाषी लोग रहते हैं और ऑटो-टैक्सी क्षेत्र में भी दूसरे राज्यों से आए लोग बड़ी संख्या में काम करते हैं। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य गैर-मराठी लोगों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। अब नियम लागू होने के बाद आने वाले महीनों में इसका पालन किस तरह कराया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।  
मुंबई के नेवी नगर में नौसेना के जवान समेत परिवार के चार लोगों की मौत, पुलिस को हत्या-आत्महत्या की आशंका

मुंबई के नेवी नगर में नौसेना के जवान समेत परिवार के चार लोगों की मौत, पुलिस को हत्या-आत्महत्या की आशंका

मुंबई के नेवी नगर में नौसेना के जवान समेत परिवार के चार लोगों की मौत, पुलिस को हत्या-आत्महत्या की आशंका मुंबई: दक्षिण मुंबई के हाई-सिक्योरिटी इलाके नेवी नगर, कोलाबा में भारतीय नौसेना के एक जवान समेत उनके परिवार के चार सदस्यों की मौत से सनसनी फैल गई। मृतकों में जवान, उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे शामिल हैं। पुलिस मामले की जांच हत्या-आत्महत्या के एंगल से कर रही है। मृतक नौसेना कर्मी की पहचान 30 वर्षीय पुरनमल शंभूलाल मेहरा के रूप में हुई है। उनके साथ उनकी 28 वर्षीय पत्नी ओमा पुरनमल मेहरा, तीन वर्षीय बेटे यश और दो महीने के शिशु की भी मौत हुई है। पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में नौसेना कर्मी की मौत आत्महत्या से होने की आशंका है, जबकि उनकी पत्नी और दोनों बच्चों की मौत संदिग्ध जहर सेवन से होने की बात सामने आई है। हालांकि, मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। चारों शवों को मुंबई के जेजे अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। डीसीपी मनीष कलवानिया ने बताया कि शुरुआती जांच में जवान की मौत आत्महत्या से और उनकी पत्नी व बच्चों की मौत जहर के कारण होने की आशंका सामने आई है। मामले की आगे की जांच जारी है। भारतीय नौसेना ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि 15 अगस्त 2026 को नेवी नगर में एक नौसेना कर्मी, उनकी पत्नी और दो बच्चे अपने आवास पर मृत पाए गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है और नौसेना की ओर से जांच में हर संभव सहायता दी जा रही है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही मौतों की वास्तविक वजह और घटनाक्रम स्पष्ट हो पाएगा।  
मुंबई को 2027 तक मिलेंगी नई AC लोकल ट्रेनें, सीएम फडणवीस ने किया बड़ा ऐलान

मुंबई को 2027 तक मिलेंगी नई AC लोकल ट्रेनें, सीएम फडणवीस ने किया बड़ा ऐलान

मुंबई को 2027 तक मिलेंगी नई AC लोकल ट्रेनें, सीएम फडणवीस ने किया बड़ा ऐलान मुंबई | मुंबई हेड रिपोर्टर: शकुर जमादार मुंबईकरों के लिए लोकल ट्रेन सफर को और बेहतर बनाने की दिशा में बड़ी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि मुंबई की उपनगरीय रेलवे को 2027 तक नई AC लोकल ट्रेन रेक की पहली खेप मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने देश की तीन कोच फैक्ट्रियों में 238 नई AC लोकल रेक तैयार करने का फैसला किया है। इनमें चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री (RCF) और रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) शामिल हैं। सभी रेक वर्ष 2029 तक तैयार होने का लक्ष्य है। फडणवीस ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मुंबई की उपनगरीय रेल सेवाओं को मेट्रो जैसी सुगम और आरामदायक बनाना है। SCLR एक्सटेंशन से BKC को मिलेगी राहत मुंबई में कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया गया। इनमें भारत नगर रोड से वकोला जंक्शन तक का SCLR-2 एलिवेटेड कॉरिडोर प्रमुख है। करीब ₹645 करोड़ की लागत से बना 1.2 किलोमीटर लंबा यह मार्ग वकोला, अंबेडकर चौक और यूनिवर्सिटी जंक्शन को जोड़ता है। इससे BKC, वकोला, कलिना और खार जैसे इलाकों में ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है। Metro Line 2B को भी बढ़ावा मेट्रो लाइन 2B के चेंबूर स्टेशन का भी उद्घाटन किया गया। इसके साथ चेंबूर में मेट्रो, लोकल ट्रेन और मोनोरेल जैसी परिवहन सुविधाएं एक-दूसरे के करीब उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल मुंबई में 60 से 70 किलोमीटर नई मेट्रो लाइनें चालू करने का लक्ष्य है। ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल से सफर होगा आसान ठाणे और बोरीवली के बीच बन रही 11.85 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल परियोजना में दूसरी टनल मशीन ‘अर्जुन’ को भी लॉन्च किया गया। यह परियोजना संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से होकर गुजरेगी। परियोजना पूरी होने के बाद ठाणे और बोरीवली के बीच की दूरी करीब 12 किलोमीटर कम होगी और यात्रा में लगभग एक घंटे की बचत होने की उम्मीद है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹16,600 करोड़ से अधिक है। BKC फ्लाईओवर का नाम बदला इस दौरान BKC के G Block को ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जोड़ने वाले फ्लाईओवर का नाम ‘वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री बैरिस्टर बाबासाहेब अनंतराव भोसले फ्लाईओवर’ रखा गया। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा का समय कम करना, ट्रैफिक घटाना और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना है।  
मुंबई में नशे के खिलाफ NCB की बड़ी कार्रवाई: 15 हजार से ज्यादा कोडीन सिरप की बोतलें और 1 किलो से अधिक चरस जब्त, दो गिरफ्तार

मुंबई में नशे के खिलाफ NCB की बड़ी कार्रवाई: 15 हजार से ज्यादा कोडीन सिरप की बोतलें और 1 किलो से अधिक चरस जब्त, दो गिरफ्तार

मुंबई में नशे के खिलाफ NCB की बड़ी कार्रवाई: 15 हजार से ज्यादा कोडीन सिरप की बोतलें और 1 किलो से अधिक चरस जब्त, दो गिरफ्तार मुंबई | मुंबई हेड रिपोर्टर: शाकुर जमादार मुंबई में नशे के कारोबार के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग ऑपरेशनों में भारी मात्रा में कोडीन आधारित कफ सिरप, ट्रामाडोल टैबलेट और चरस बरामद की है। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। गुजरात-मुंबई ड्रग्स नेटवर्क पर शिकंजा NCB मुंबई के अनुसार, पहली कार्रवाई में 8 अगस्त को मुंबई में एक यात्री बस से 1,080 बोतल कोडीन आधारित कफ सिरप बरामद किया गया। इन बोतलों का कुल वजन करीब 108 किलोग्राम बताया गया है। इस मामले में एन. शेख को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर यह खेप गुजरात से मुंबई लाई जा रही थी और इसे मुंबई, भिवंडी तथा आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाना था। पूछताछ के दौरान अधिकारियों को गुजरात स्थित एक कथित सप्लायर के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद NCB की टीम ने गुजरात में निगरानी बढ़ाई और वडोदरा में एक गोदाम तक पहुंची। वडोदरा के गोदाम से हजारों बोतलें और ट्रामाडोल बरामद NCB के मुताबिक, वडोदरा स्थित गोदाम से 13,938 अतिरिक्त कोडीन आधारित कफ सिरप की बोतलें और 12,240 ट्रामाडोल टैबलेट बरामद की गईं। जांच के दौरान कई कफ सिरप की बोतलों के बैच नंबर में कथित तौर पर छेड़छाड़ के सबूत मिले। अधिकारियों ने आशंका जताई कि दवाओं के कथित डायवर्जन को छिपाने के लिए ऐसा किया गया होगा। मामले में फर्जी इनवॉइस और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। NCB के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी एन. शेख मुख्य रूप से ठाणे जिले के भिवंडी इलाके में सक्रिय था और इससे पहले भी महाराष्ट्र पुलिस द्वारा एक NDPS मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। गुजरात से जुड़े कथित वितरक के खिलाफ भी NDPS के मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। घाटकोपर में चरस की अलग कार्रवाई दूसरी कार्रवाई 12 अगस्त को मुंबई के घाटकोपर इलाके में की गई। NCB ने एक घर की तलाशी के दौरान 1.060 किलोग्राम चरस बरामद करने का दावा किया है। इस मामले में ए. जे. शेख को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, चरस को कथित तौर पर घरेलू सामान के बीच छिपाकर रखा गया था और इसे मुंबई तथा आसपास के इलाकों में आगे बेचने की तैयारी थी। पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि आरोपी और उसके कुछ सहयोगी त्योहारी सीजन से पहले चरस की उपलब्धता कम होने का फायदा उठाकर इसे ऊंची कीमत पर बेचने की योजना बना रहे थे। NCB ने बताया कि मामले में कुछ अन्य संदिग्धों की पहचान की गई है और उन्हें पकड़ने के लिए जांच जारी है। दवाओं के गलत इस्तेमाल पर NCB की चेतावनी NCB ने स्पष्ट किया कि कोडीन आधारित दवाओं और ट्रामाडोल का चिकित्सकीय इस्तेमाल होता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इनका सेवन या इनका दुरुपयोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। इससे निर्भरता और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, चरस में THC पाया जाता है, जिसके लंबे समय तक इस्तेमाल से याददाश्त और संज्ञानात्मक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश दोनों मामलों में NCB की जांच अभी जारी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इन्हें मुंबई तथा आसपास के इलाकों में किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। लगातार हुई इन कार्रवाइयों को मुंबई में संगठित ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ NCB की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। एजेंसी ने दोहराया है कि नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध सप्लाई से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।  
स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक: महाराष्ट्र FDA के फैसले की डॉक्टरों ने की सराहना, बोले—“बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम”

स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक: महाराष्ट्र FDA के फैसले की डॉक्टरों ने की सराहना, बोले—“बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम”

स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक: महाराष्ट्र FDA के फैसले की डॉक्टरों ने की सराहना, बोले—“बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम” मुंबई: महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले को डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम बताया है। राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की इस कार्रवाई का मकसद बच्चों में बढ़ती मोटापा और अस्वस्थ खानपान की समस्या पर लगाम लगाना है। 🍔 स्कूलों के पास जंक फूड पर सख्त प्रतिबंध नए नियमों के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में वड़ा पाव, समोसा और अन्य तले-भुने व अधिक वसा, नमक और शक्कर (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लिए FSSAI लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है और नियमित निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा। 👨‍⚕️ डॉक्टरों ने बताया ‘पब्लिक हेल्थ के लिए बड़ा कदम’ मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस फैसले को केवल एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल बताया है। डॉक्टरों का मानना है कि यह कदम बच्चों के खानपान की आदतों में सुधार लाने और मोटापे जैसी समस्याओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। 📊 करोड़ों बच्चों पर पड़ेगा असर यह फैसला पूरे महाराष्ट्र के 1.08 लाख से अधिक स्कूलों और करीब 2 करोड़ छात्रों पर लागू होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को ध्यान में रखते हुए यह नीति व्यापक स्तर पर बदलाव ला सकती है। 🧠 छोटी उम्र में बनती हैं खानपान की आदतें डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की खाने की आदतें कम उम्र में ही बन जाती हैं और स्कूल का माहौल इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। अगर स्कूल के आसपास जंक फूड आसानी से उपलब्ध रहेगा, तो बच्चे उसे सामान्य और रोजमर्रा का हिस्सा मानने लगते हैं। इस रोक से इस ‘नॉर्मलाइजेशन’ को तोड़ने में मदद मिलेगी। 🥗 सिर्फ प्रतिबंध नहीं, बेहतर विकल्पों पर भी जोर इस नीति में केवल जंक फूड पर रोक ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार को बढ़ावा देने की भी योजना है। स्कूलों में फल, दालें और साबुत अनाज जैसे हेल्दी विकल्पों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके। ⚖️ सफलता निर्भर करेगी सख्ती और सहयोग पर हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी कहा कि इस नीति की सफलता पूरी तरह इसके सही क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। ये सभी कारक मिलकर ही इस पहल को सफल बना पाएंगे। 🔍 निष्कर्ष: महाराष्ट्र सरकार का यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक मजबूत शुरुआत माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा जब इसे जमीनी स्तर पर पूरी सख्ती से लागू किया जाए और समाज के सभी वर्ग इसमें सक्रिय भूमिका निभाएं।  
भिवंडी में बड़ा हादसा: मरम्मत के दौरान इमारत ढही, 9 की मौत, कई लोग मलबे में दबे होने की आशंका

भिवंडी में बड़ा हादसा: मरम्मत के दौरान इमारत ढही, 9 की मौत, कई लोग मलबे में दबे होने की आशंका

भिवंडी में बड़ा हादसा: मरम्मत के दौरान इमारत ढही, 9 की मौत, कई लोग मलबे में दबे होने की आशंका ठाणे (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार देर रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब एक चार मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। 🚨 मरम्मत के दौरान हुआ हादसा यह हादसा भिवंडी के बालाजी नगर इलाके में स्थित कोहिनूर बिल्डिंग में हुआ। जानकारी के अनुसार, इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था, तभी रात करीब 11:30 बजे अचानक इसका एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। 🏢 पहले से जर्जर घोषित थी इमारत नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, यह इमारत पहले ही खतरनाक घोषित की जा चुकी थी। चार मंजिला इस बिल्डिंग में कुल 48 कमरे थे, जिनमें कई परिवार रहते थे। ⚠️ पहले ही मिल गए थे संकेत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से कुछ घंटे पहले ही इमारत से तेज दरारों और टूटने जैसी आवाजें आ रही थीं। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए स्थानीय लोगों ने कई परिवारों को समय रहते बाहर निकाल लिया, लेकिन कुछ लोग अभी भी बाहर निकल ही रहे थे कि बिल्डिंग का ‘बी’ विंग अचानक ढह गया। 🚑 राहत और बचाव कार्य जारी हादसे के बाद मौके पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। इस ऑपरेशन में शामिल हैं: मौके पर डॉग स्क्वॉड, चार फायर इंजन, दो एंबुलेंस और भारी मशीनरी तैनात की गई है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। 😢 इलाके में शोक का माहौल इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। प्रशासन ने घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। 🔍 निष्कर्ष: भिवंडी की यह घटना एक बार फिर जर्जर इमारतों में रहने के खतरे को उजागर करती है। प्रशासन की ओर से समय रहते चेतावनी के बावजूद ऐसे हादसे गंभीर सवाल खड़े करते हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें बचाव कार्य पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
महाराष्ट्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 5 जिलों में विशेष अदालतें, मुंबई लोकल को बड़ा बूस्ट, खेती में AI का इस्तेमाल

महाराष्ट्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 5 जिलों में विशेष अदालतें, मुंबई लोकल को बड़ा बूस्ट, खेती में AI का इस्तेमाल

महाराष्ट्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 5 जिलों में विशेष अदालतें, मुंबई लोकल को बड़ा बूस्ट, खेती में AI का इस्तेमाल मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की बैठक में आज कई अहम और जनहित से जुड़े बड़े फैसले लिए गए। इन निर्णयों का सीधा असर कानून व्यवस्था, परिवहन और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ेगा। ⚖️ न्याय व्यवस्था को मजबूती: 5 जिलों में विशेष अदालते राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मामलों की सुनवाई के लिए 5 जिलों—अहिल्यानगर, परभणी, सोलापुर, नांदेड और यवतमाल—में विशेष अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है। इसके अलावा, मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई के लिए पुणे में भी एक विशेष अदालत बनाई जाएगी। 🚫 अवैध खनन पर सख्ती: 10 गुना जुर्माना सरकार ने अवैध खनन और रेत माफिया पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब अवैध उत्खनन करने वालों से रॉयल्टी का 10 गुना तक जुर्माना वसूला जाएगा। इससे इस अवैध कारोबार पर कड़ी रोक लगने की उम्मीद है। 🚆 मुंबई लोकल के लिए बड़ा फंड मुंबईकरों के लिए राहत भरी खबर है। मुंबई रेलवे विकास महामंडल (MRVC) के अधिकृत पूंजी को ₹25 करोड़ से बढ़ाकर ₹500 करोड़ कर दिया गया है। इस फैसले से मुंबई लोकल ट्रेन नेटवर्क के विस्तार और सुधार के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। 🌾 खेती में AI की एंट्री: ‘महा-अग्री AI’ नीति लागू राज्य सरकार ने खेती को आधुनिक बनाने के लिए ‘महा-अग्री AI’ नीति को मंजूरी दी है। इसके तहत एग्रीटेक इनोवेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो किसानों को नई तकनीक और स्मार्ट खेती के लिए सहायता प्रदान करेगा। 🏛️ नई अदालतें और प्रशासनिक फैसले 🔍 निष्कर्ष: महाराष्ट्र सरकार के ये फैसले राज्य में न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने, अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने और कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन फैसलों का असर आम जनता के जीवन में साफ तौर पर दिखाई देगा।  
दूध नहीं जहर का धंधा: डिटर्जेंट से बनी मिलावटी लहर में डूबा महाराष्ट्र, करोड़ों लीटर का काला सच उजागर

दूध नहीं जहर का धंधा: डिटर्जेंट से बनी मिलावटी लहर में डूबा महाराष्ट्र, करोड़ों लीटर का काला सच उजागर

दूध नहीं जहर का धंधा: डिटर्जेंट से बनी मिलावटी लहर में डूबा महाराष्ट्र, करोड़ों लीटर का काला सच उजागर धाराशिव (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के भूम तालुका से एक चौंकाने वाला सिंथेटिक दूध घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की जांच में खुलासा हुआ है कि बड़े पैमाने पर डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल और घटिया केमिकल मिलाकर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। करोड़ों लीटर नकली दूध का खेल जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पिछले छह महीनों में करीब 2,30,470 किलोग्राम घटिया मिल्क पाउडर का इस्तेमाल किया। इससे लगभग 23 लाख लीटर से ज्यादा सिंथेटिक दूध तैयार किया गया, जिसकी कीमत करीब 9.21 करोड़ रुपये आंकी गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस नकली दूध को असली दूध में 10% की मात्रा में मिलाकर बाजार में बेचा जा रहा था। इसी आधार पर अधिकारियों को आशंका है कि 2.3 करोड़ लीटर से ज्यादा मिलावटी दूध महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किया गया। डिटर्जेंट और केमिकल से बनता था ‘दूध’ जांच में यह भी सामने आया कि दूध को असली जैसा दिखाने और फैट की मात्रा बनाए रखने के लिए डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल और सस्ते केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता था, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। सात आरोपियों पर केस, अभी फरार इस गंभीर मामले में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, लेकिन घटना के कई दिन बाद भी सभी आरोपी फरार हैं। उन्हें पकड़ने के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है और लगातार छापेमारी की जा रही है। स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के केमिकलयुक्त दूध का सेवन लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। कानूनी कार्रवाई होगी सख्त फूड सेफ्टी कानून के तहत इस तरह की खतरनाक मिलावट करने वालों को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। जांच में और खुलासे संभव पुलिस के अनुसार, यह रैकेट भूम क्षेत्र के कई दूध संग्रह केंद्रों से संचालित हो रहा था। इस मामले में अभी और बड़े खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि हजारों लीटर नकली दूध खरीदने वाले लोगों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। निष्कर्ष: यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि आम लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के खतरनाक घोटाले पर रोक लग सके।  

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