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मुंबई में FDA की बड़ी कार्रवाई: 564 लीटर दूध नष्ट, 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई में FDA की बड़ी कार्रवाई: 564 लीटर दूध नष्ट, 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

मुंबई में FDA की बड़ी कार्रवाई: 564 लीटर दूध नष्ट, 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर महाराष्ट्र FDA का शिकंजा; राज्यभर में ₹1.56 करोड़ का खाद्य स्टॉक जब्त या नष्ट मुंबई: खाद्य पदार्थों में मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने राज्यभर में बड़ा अभियान चलाया है। मुंबई में 23 और 24 अक्टूबर को की गई कार्रवाई के दौरान FDA अधिकारियों ने अलग-अलग डेयरियों और खाद्य प्रतिष्ठानों से संबंधित 564 लीटर दूध नष्ट किया। FDA के मुताबिक, राज्यभर में चलाए गए इस अभियान के दौरान करीब 43.56 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए गए, जबकि कुल 719.2 लीटर दूध और घी जब्त या नष्ट किया गया। इन कार्रवाईयों में शामिल खाद्य सामग्री की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹1.56 करोड़ बताई गई है। अभियान के दौरान संदिग्ध मिलावट, घटिया गुणवत्ता, गलत लेबलिंग, अस्वच्छ तरीके से खाद्य पदार्थ रखने और प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों की बिक्री जैसे मामलों पर कार्रवाई की गई। मुंबई की कई डेयरियों पर कार्रवाई FDA अधिकारियों ने मुंबई के गोवंडी और मानखुर्द इलाके में कई डेयरियों का निरीक्षण किया। गोवंडी स्थित Sainath Dairy & Farsan Mart से संदिग्ध घटिया गुणवत्ता वाला 45 लीटर खुला दूध नष्ट किया गया। वहीं मानखुर्द की Maharana Dairy से भी 40 लीटर दूध नष्ट किया गया। दोनों मामलों में दूध के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं और संबंधित प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। मानखुर्द स्थित Agasti Milk Agency में स्वच्छता और सैनिटेशन से जुड़े नियमों का उल्लंघन मिलने के बाद लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई शुरू की गई। वहीं गोवंडी ईस्ट में Yadav Dairy के खिलाफ बिना वैध लाइसेंस कारोबार करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। एंटॉप हिल में 250 लीटर दूध नष्ट 24 अक्टूबर को FDA अधिकारियों ने एंटॉप हिल स्थित Sagar Milk Centre का निरीक्षण किया। यहां दूध को निर्धारित भंडारण नियमों का पालन किए बिना प्लास्टिक की थैलियों और डिब्बों में रखने और बेचने की बात सामने आई। FDA ने मौके पर ही 250 लीटर दूध नष्ट कर दिया। इस दूध की अनुमानित कीमत ₹11,625 बताई गई है। धारावी और माहिम में भी कार्रवाई 23 अक्टूबर को की गई अलग कार्रवाई में धारावी स्थित Shakti Dairy से 31 लीटर खुला गाय का दूध नष्ट किया गया। वहीं माहिम वेस्ट स्थित Rahul Milk Centre से 198 लीटर दूध नष्ट किया गया। दोनों प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुंबई के 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन निलंबित FDA ने अलग-अलग निरीक्षणों में खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन निलंबित किए हैं। इनमें शामिल हैं: FDA के अनुसार, इन प्रतिष्ठानों में गंदे किचन और ड्रेनेज सिस्टम, शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण, बिना अनुमति वाले खाद्य रंगों का इस्तेमाल और कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं होने जैसी कमियां पाई गईं। नल बाजार में ₹4.22 लाख के प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ जब्त 22 अक्टूबर को मुंबई के नल बाजार इलाके में FDA ने एक अन्य कार्रवाई में प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों का स्टॉक जब्त किया। यह कार्रवाई 24 वर्षीय मुक़रदाली मुलाहिज अंसारी से जुड़े एक परिसर में की गई। अधिकारियों ने यहां से करीब ₹4.22 लाख मूल्य के प्रतिबंधित खाद्य उत्पाद जब्त किए और सात नमूने जांच के लिए लिए। इसके बाद 23 अक्टूबर को जे.जे. मार्ग पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Food Safety and Standards Act, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी बड़ी कार्रवाई FDA का अभियान केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहा। राज्य के विभिन्न विभागों में भी बड़े पैमाने पर खाद्य पदार्थ जब्त किए गए। कोंकण विभाग में करीब 10 टन खाद्य पदार्थ जब्त कोंकण विभाग में लगभग 9.99 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत ₹53.55 लाख बताई गई है। इनमें मसाले, सूखे मेवे और अन्य ऐसे खाद्य उत्पाद शामिल थे, जिनकी गुणवत्ता संदिग्ध थी या जिन पर लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया था। वाशी स्थित APMC मार्केट में Sakhibaba Traders से करीब 1,487.6 किलो कच्ची हींग जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग ₹22.31 लाख बताई गई है। इसके अलावा वाशी की Shree Jalaram Spices से जीरा और सरसों का स्टॉक तथा महापे के एक प्रतिष्ठान से अन्य खाद्य सामग्री जब्त की गई। छत्रपति संभाजीनगर विभाग में 26.84 टन से ज्यादा जब्ती सबसे बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री छत्रपति संभाजीनगर विभाग में जब्त की गई। यहां करीब 26.84 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत ₹64 लाख बताई गई है। हिंगोली जिले की Ganraj Industries से कथित मिलावट के संदेह में करीब 23.7 टन हल्दी पाउडर जब्त किया गया। इसकी कीमत लगभग ₹59.50 लाख बताई गई है। पुणे में 2.11 टन खाद्य सामग्री जब्त पुणे विभाग में अधिकारियों ने करीब 2.11 टन खाद्य पदार्थ जब्त किए, जिनकी कीमत लगभग ₹7.93 लाख थी। इनमें पुणे-पंढरपुर रोड पर परिवहन किए जा रहे करीब 1,337 किलो खोया भी शामिल था। इसके अलावा प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों के खिलाफ अलग अभियान में पुणे में 22 अक्टूबर को छह प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इस कार्रवाई में करीब ₹19.56 लाख का स्टॉक जब्त किया गया। पांच प्रतिष्ठानों के खिलाफ FIR दर्ज की गई, सात लोगों को गिरफ्तार किया गया और पांच प्रतिष्ठानों को सील किया गया। FDA ने इस कार्रवाई के दौरान करीब ₹11 लाख मूल्य के दो वाहन भी जब्त किए। नासिक और नागपुर में भी कार्रवाई नासिक विभाग में करीब 4,069 किलो खाद्य पदार्थ और 62.2 लीटर घी जब्त किया गया, जिसकी कुल अनुमानित कीमत करीब ₹8.25 लाख है। वहीं नागपुर विभाग में चंद्रपुर जिले के एक प्रतिष्ठान से 883.3 किलो खाद्य तेल जब्त किया गया। इसकी कीमत करीब ₹1.77 लाख बताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, यह तेल दोबारा इस्तेमाल किए गए कंटेनरों में रखा गया था। नासिक विभाग में प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों के खिलाफ अलग कार्रवाई में ₹19,090 का स्टॉक जब्त किया गया। इस मामले में एक FIR दर्ज की गई और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। FDA की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी महाराष्ट्र FDA ने कहा...
शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई

शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई

शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करने के मामले में 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे के नाम भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, यह प्रदर्शन उन लोगों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में किया गया था, जो चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज उठा रहे थे। मामले में पुलिस ने गैरकानूनी जमावड़े और प्रतिबंधात्मक आदेशों के कथित उल्लंघन से संबंधित धाराएं लगाई हैं। FIR में कई राजनीतिक नेताओं के नाम इस मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे के अलावा मनसे नेता एस. संदीप देशपांडे तथा शिवसेना (UBT) के नेताओं वरुण सरदेसाई और महेश सावंत के नाम भी FIR में शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) के साथ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1), 37(3) और 135 के तहत मामला दर्ज किया है। ये प्रावधान कथित गैरकानूनी जमावड़े और लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन से संबंधित हैं। FIR दर्ज होने का अर्थ अपने आप में आरोप साबित होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के दौरान तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। मतदाता सूची के SIR को लेकर विरोध प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे ने रविवार को प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार का मुद्दा उठाया। आदित्य ठाकरे ने BJP पर साधा निशाना प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सड़क पर उतरकर विरोध करने वाले नागरिकों से डरती है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार देशभक्त नागरिकों को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है। उन्होंने एकनाथ शिंदे और भाजपा के साथ गए नेताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनके बयान पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। 4 अक्टूबर के मार्च को लेकर भी दर्ज हुई थी FIR यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब मुंबई पुलिस ने 4 अक्टूबर को मनसे और शिवसेना (UBT) की ओर से निकाले गए संयुक्त मार्च के आयोजकों के खिलाफ भी अलग FIR दर्ज की थी। यह मामला आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, दक्षिण मुंबई में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों के बीच कथित तौर पर आवश्यक पुलिस अनुमति के बिना बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय की ओर मार्च निकाला गया था। इस मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और मतदाता सूची के SIR में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे थे। राजनीतिक टकराव के बीच बढ़ी हलचल मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विरोध प्रदर्शनों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस ने प्रदर्शनों के दौरान नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कानूनी कार्रवाई की है। अब इस मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।  
मुंबई के CJP प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी पर NHRC का सख्त रुख, पुलिस से जांच के आदेश

मुंबई के CJP प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी पर NHRC का सख्त रुख, पुलिस से जांच के आदेश

मुंबई के CJP प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी पर NHRC का सख्त रुख, पुलिस से जांच के आदेश मुंबई: मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन को लेकर अब मानवाधिकार से जुड़ा मामला सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों की कथित मौजूदगी, उनके इस्तेमाल और प्रदर्शन से जुड़े फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस को मामले की जांच करने और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। NHRC ने मुंबई पुलिस के अलावा X Corp, MeitY और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को भी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। आखिर NHRC ने क्यों लिया संज्ञान? जानकारी के मुताबिक, दिल्ली स्थित Sewa Nyaya Uthan Foundation के Intervention Head सतिश वैद की शिकायत के आधार पर आयोग के समक्ष यह मामला पहुंचा। शिकायत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आए कुछ पोस्ट और वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में बच्चों को शामिल किया गया। शिकायत में कथित ग्रुप चैट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें प्रदर्शन की तैयारी और नाबालिगों की भागीदारी से संबंधित चर्चा होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने CJP से जुड़े अजिंक्य शिंदे, अभिजीत दिपके और सौरव दास समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और NHRC ने इन आरोपों की जांच के निर्देश दिए हैं। अभी यह अंतिम रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि आयोजकों ने जानबूझकर बच्चों का इस्तेमाल किया था। बच्चों को लेकर आयोग ने क्या चिंता जताई? NHRC की ओर से मामले को केवल किसी सार्वजनिक प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी तक सीमित नहीं माना गया। आयोग ने इस बात की जांच के निर्देश दिए हैं कि कहीं नाबालिगों को उनकी उम्र और संवेदनशीलता को देखते हुए किसी राजनीतिक प्रदर्शन में योजनाबद्ध तरीके से तो शामिल नहीं किया गया। आयोग ने कथित तौर पर इस पहलू की भी जांच करने को कहा है कि क्या बच्चों की मौजूदगी का इस्तेमाल पुलिस की संभावित कार्रवाई से बचने के लिए किया गया था। साथ ही, प्रदर्शन के दौरान बच्चों के फोटो और वीडियो बनाए जाने तथा बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के पहलू की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। मुंबई पुलिस को क्या जांच करनी होगी? NHRC ने मुंबई पुलिस को उपलब्ध वीडियो, फोटो, सोशल मीडिया सामग्री और कथित चैट रिकॉर्ड की जांच करने को कहा है। जांच में यह पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि: NHRC ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान संज्ञेय अपराध सामने आता है तो कानून के अनुसार FIR दर्ज की जाए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। X Corp और MeitY को भी निर्देश मामले में सिर्फ मुंबई पुलिस ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है। X Corp से संबंधित अकाउंट और कंटेंट रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा बच्चों की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को Information Technology Act और IT Rules के तहत लागू होने वाले प्रावधानों, विशेष रूप से डिजिटल सामग्री से जुड़ी due-diligence और रिकॉर्ड संरक्षण संबंधी जिम्मेदारियों की जांच करने को कहा गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की भी भूमिका महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान संबंधित नाबालिगों के हित और उनकी सुरक्षा प्रभावित न हो। कानून में बच्चों के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर क्या प्रावधान हैं? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में ऐसा कोई सामान्य प्रावधान नहीं है जो हर परिस्थिति में बच्चों को किसी सार्वजनिक सभा या शांतिपूर्ण प्रदर्शन में मौजूद रहने से प्रतिबंधित करता हो। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि इस अधिकार पर अनुच्छेद 19(3) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मामला तब गंभीर कानूनी सवाल खड़ा कर सकता है जब किसी बच्चे की मौजूदगी को क्रूरता, शोषण या किसी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल से जोड़ा जाए। Juvenile Justice Act की धारा 75 Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 75 बच्चे के साथ क्रूरता से संबंधित है। इसमें बच्चे की देखभाल या नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति द्वारा बच्चे को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक पीड़ा पहुंचाने की स्थिति में सजा का प्रावधान है। धारा 83(2) भी जांच के दायरे में NHRC ने पुलिस को JJ Act की धारा 83(2) की लागू होने की संभावना की भी जांच करने को कहा है। यह प्रावधान वयस्कों द्वारा बच्चों को गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने से संबंधित है। इसलिए जांच का मुख्य सवाल यह होगा कि प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी केवल संयोगवश थी या किसी ने उन्हें जानबूझकर किसी उद्देश्य से शामिल किया था। पहले भी राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों को लेकर उठे हैं सवाल राजनीतिक अभियानों और विरोध प्रदर्शनों में बच्चों की भागीदारी को लेकर इससे पहले भी बाल अधिकार संस्थाएं चिंता जताती रही हैं। 2019 में चुनावी प्रचार से जुड़े एक वीडियो को लेकर तत्कालीन NCPCR नेतृत्व ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से बच्चों की मौजूदगी के संबंध में जानकारी मांगी थी। CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी बच्चों की मौजूदगी को लेकर NCPCR ने चिंता जताई थी। इसके अलावा 2022 में भारत जोड़ो यात्रा और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी को लेकर भी बाल अधिकारों से जुड़े सवाल उठे थे। 2024 में भी राजनीतिक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी से संबंधित मामलों में NHRC की ओर से चिंता जताई गई थी। अब जांच के बाद क्या होगा? फिलहाल NHRC का कदम जांच के निर्देश...
मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी

मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी

मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब लंबे समय बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने मुंबई में ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। यह मार्च दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय के पास पहुंचा। मोर्चे में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शन में पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की गई थी। SIR रद्द करने की मांग, EVM के बजाय बैलेट पेपर की पैरवी मोर्चे को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। राज ठाकरे ने मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए SIR की प्रक्रिया और उसके प्रभाव पर सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, मतदाताओं की संख्या में इस तरह की बड़ी कमी को लेकर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। हालांकि, ये सभी दावे और आरोप राजनीतिक नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में बदलाव को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया गया है। उद्धव ठाकरे का CEC पर हमला उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने यह सवाल भी उठाया कि यदि SIR का उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को मतदाता सूची से हटाना था, तो इस प्रक्रिया में ऐसे कितने लोगों की पहचान हुई। उद्धव ठाकरे के इन आरोपों का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में किया गया है। वहीं, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं। महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.06 करोड़ नाम शामिल नहीं ठाकरे बंधुओं के विरोध प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े भी चर्चा के केंद्र में हैं। राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार, SIR से पहले महाराष्ट्र में 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 7,71,65,562 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल किए गए हैं, जबकि 2,06,88,487 नाम इस चरण में ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाए। यह संख्या पुराने मतदाता आधार की करीब 21.14 प्रतिशत है। ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाताओं में लगभग 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड-जेंडर मतदाता शामिल हैं। क्या 2 करोड़ से ज्यादा वोट हमेशा के लिए हट गए? यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 2.06 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इन मतदाताओं के Enumeration Forms उपलब्ध नहीं हो पाए थे। इसके पीछे मतदाता का अपने पते पर नहीं मिलना, स्थायी रूप से स्थान बदलना, मृत्यु, कहीं और पहले से पंजीकरण या अन्य कारण शामिल बताए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम फिर शामिल किए जा सकते हैं। इसलिए अंतिम मतदाता सूची में यह आंकड़ा बदल सकता है। पुणे, ठाणे और मुंबई में सबसे ज्यादा नाम प्रभावित राज्य के आंकड़ों में बड़े शहरों और जिलों में बड़ी संख्या में Enumeration Forms के उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। पुणे में करीब 28.6 लाख, ठाणे में 28.5 लाख, मुंबई उपनगर में 26.5 लाख, नागपुर में 14.43 लाख, नासिक में 10.27 लाख और मुंबई शहर में करीब 9.5 लाख नाम इस श्रेणी में बताए गए हैं। ठाकरे बंधुओं के एक मंच पर आने से बढ़ी राजनीतिक हलचल उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ मंच साझा करना इस पूरे प्रदर्शन का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू रहा। दोनों नेता लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक राह पर रहे हैं, लेकिन SIR और चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर दोनों ने संयुक्त रूप से मोर्चा निकाला। मोर्चे में कांग्रेस और NCP (SP) के नेताओं की मौजूदगी ने भी इसे विपक्षी दलों के साझा प्रदर्शन का रूप दिया। इस प्रदर्शन से साफ है कि महाराष्ट्र में SIR, मतदाता सूची में नामों की कमी और EVM बनाम बैलेट पेपर जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं। हालांकि, मतदाता सूची में अंतिम बदलाव दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।  
शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग मुंबई: गांधी जयंती के मौके पर शुक्रवार को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच और चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई। पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए। Times of India के अनुसार, मुंबई पुलिस की Special Branch ने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू होने के समय भीड़ का अनुमान लगभग 9,000 से 10,000 लगाया था, जबकि बाद की रिपोर्टों में प्रदर्शन में 10,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। वाहनों को प्रदर्शन स्थल के करीब जाने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे और पुलिसकर्मी भीड़ तथा यातायात को नियंत्रित कर रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान माहौल मुख्यतः शांतिपूर्ण रहा और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति सामान्य बनी रही। मुंबई पुलिस ने इससे पहले CJP को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस ने Bombay High Court के निर्देशों, क्षेत्र के Silence Zone होने तथा संभावित यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था। CEC के इस्तीफे की मांग CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग पक्ष मौजूद हैं और मतदाता सूची से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों तथा जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है। राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी निशाना अपने भाषण में Dipke ने राजनीतिक दलों में नेताओं के दलबदल और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों ने पार्टियां बदली हैं और इस पर राजनीतिक व्यवस्था में जवाबदेही की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगा और दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी करेगा। फिल्म और सामाजिक क्षेत्र से भी पहुंचे लोग शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में फिल्म और कला जगत से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, विशाल भारद्वाज और विशाल ददलानी समेत कई चर्चित हस्तियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। विशाल ददलानी ने अपने संबोधन में दावा किया कि उनका नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है। ऐसे व्यक्तिगत दावों की आधिकारिक स्थिति संबंधित चुनावी रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है। हिंदू-मुस्लिम एकता पर Dipke का बयान प्रदर्शन के दौरान Abhijeet Dipke ने धर्म के आधार पर विभाजन की राजनीति की आलोचना करते हुए हिंदू-मुस्लिम एकता की बात कही। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसी विभाजनकारी राजनीति काम नहीं करेगी। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू के योगदान का भी उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक भागीदारी पर जोर दिया। स्थानीय निवासियों ने भी जताई आपत्ति जहां प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, वहीं शिवाजी पार्क के कुछ स्थानीय निवासियों ने कार्यक्रम से होने वाले शोर, यातायात और रोजमर्रा की गतिविधियों में व्यवधान को लेकर आपत्ति जताई। गीतकार जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर स्थानीय निवासियों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के कारण होने वाली परेशानियों पर आवाज उठाना उचित है और राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों के समय भी इसी तरह के सवाल उठाए जाने चाहिए। आंदोलन आगे बढ़ाने का ऐलान CJP ने संकेत दिया है कि यदि उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को मुंबई से आगे अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। संगठन ने Goa, Bengaluru और Kolkata समेत अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन की योजना की बात कही है। इस बीच चुनावी सूची, SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। मामले में अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष आगे की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।  
मुंबई में CNG फिर महंगी, ₹1 प्रति किलो बढ़ा दाम; अब ₹89, इस साल पांचवीं बढ़ोतरी

मुंबई में CNG फिर महंगी, ₹1 प्रति किलो बढ़ा दाम; अब ₹89, इस साल पांचवीं बढ़ोतरी

मुंबई में CNG फिर महंगी, ₹1 प्रति किलो बढ़ा दाम; अब ₹89, इस साल पांचवीं बढ़ोतरी मुंबई: मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG से वाहन चलाने वाले लोगों के लिए ईंधन खर्च एक बार फिर बढ़ गया है। Mahanagar Gas Limited (MGL) ने 1 अक्टूबर 2026 से CNG की कीमत में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG की नई कीमत ₹89 प्रति किलो हो गई है। MGL ने कीमत बढ़ाने के पीछे इनपुट गैस की बढ़ती लागत को प्रमुख कारण बताया है। कंपनी के अनुसार, घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस की लागत के साथ-साथ आयातित Regasified Liquefied Natural Gas (RLNG) की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता और पश्चिम एशिया संकट का असर भी आयातित गैस की लागत पर पड़ा है। इस साल पांचवीं बार बढ़े CNG के दाम मुंबई में इस साल CNG की कीमत में यह पांचवीं बढ़ोतरी बताई जा रही है। अप्रैल के बाद से कीमत में कुल मिलाकर करीब ₹8 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। ताजा ₹1 की बढ़ोतरी के बाद CNG ₹89 प्रति किलो पर पहुंच गया है। लगातार बढ़ती कीमतों का असर खास तौर पर उन लोगों पर पड़ सकता है जो रोजाना CNG से चलने वाले ऑटो रिक्शा, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। ईंधन की लागत बढ़ने से वाहन संचालन का खर्च भी बढ़ सकता है। ऑटो और टैक्सी चालकों के खर्च पर असर CNG की कीमत बढ़ने का सीधा असर कमर्शियल वाहन चालकों की रोजाना की परिचालन लागत पर पड़ता है। मुंबई में बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा और टैक्सियां CNG पर निर्भर हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ऑटो यूनियनों ने भी लगातार बढ़ रही CNG कीमतों को लेकर बढ़ते परिचालन खर्च पर चिंता जताई है। अगर ईंधन खर्च आगे भी बढ़ता है, तो किराए में बदलाव की मांग का मुद्दा उठ सकता है। हालांकि, फिलहाल CNG की कीमत बढ़ने के साथ ही ऑटो या टैक्सी किराए में तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं हुई है। MGL का बड़ा CNG और PNG नेटवर्क Mahanagar Gas Limited मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG तथा PNG की आपूर्ति करने वाली प्रमुख गैस कंपनियों में से एक है। कंपनी का नेटवर्क बड़ी संख्या में वाहन चालकों और घरेलू PNG उपभोक्ताओं तक फैला हुआ है। CNG की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता बनी हुई है। MGL ने कहा है कि बढ़ती इनपुट लागत को देखते हुए कीमत में संशोधन जरूरी था, ताकि गैस की आपूर्ति को बनाए रखा जा सके। आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा दबाव? CNG की कीमत में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी पहली नजर में छोटी लग सकती है, लेकिन रोजाना वाहन चलाने वाले लोगों और व्यावसायिक वाहन संचालकों के लिए लगातार हो रही बढ़ोतरी का कुल प्रभाव ज्यादा हो सकता है। अब मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG की कीमत ₹89 प्रति किलो हो गई है। आगे अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों और घरेलू गैस लागत में होने वाले बदलावों पर CNG की कीमतों की दिशा निर्भर कर सकती है।  
मुंबई में 4 साल तक फ्रीजर में रखा रहा पिता का शव, बदबू से खुला राज; बेटी ने अंतिम संस्कार के बजाय शरीर सुरक्षित रखा

मुंबई में 4 साल तक फ्रीजर में रखा रहा पिता का शव, बदबू से खुला राज; बेटी ने अंतिम संस्कार के बजाय शरीर सुरक्षित रखा

मुंबई में 4 साल तक फ्रीजर में रखा रहा पिता का शव, बदबू से खुला राज; बेटी ने अंतिम संस्कार के बजाय शरीर सुरक्षित रखा मुंबई: मुंबई के मलाड ईस्ट में एक बंद पड़े क्लिनिक से करीब चार साल पुराना शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पड़ोसियों को परिसर से लगातार तेज बदबू आ रही थी। जब बदबू असहनीय हो गई, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने और परिसर का दरवाजा खुलने के बाद अंदर जो मिला, उसने पूरे मामले को चौंकाने वाला बना दिया। पुलिस को परिसर के अंदर रखे एक फ्रीजर में 80 वर्षीय बुजुर्ग का शव मिला। जांच में सामने आया कि बुजुर्ग की मौत जून 2022 में हार्ट अटैक के कारण हुई थी। पिता को अपने पास रखने की चाहत में लिया शव सुरक्षित रखने का फैसला पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, बुजुर्ग की मौत के बाद उनकी बेटी अपने पिता को लंबे समय तक अपने करीब रखना चाहती थी। परिवार ने कथित तौर पर शव का तत्काल अंतिम संस्कार कराने के बजाय उसे सुरक्षित रखने का रास्ता चुना। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार ने विदेश में मौजूद ऐसी संस्थाओं के बारे में जानकारी जुटाई जो मृत शरीर को बेहद कम तापमान में संरक्षित रखने की क्रायोनिक्स तकनीक से जुड़ी सेवाएं प्रदान करती हैं। परिवार ने अमेरिका स्थित एक संस्था से भी संपर्क करने की कोशिश की थी। बंद पड़ा था क्लिनिक, बदबू के बाद पुलिस को मिली जानकारी यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब परिसर पिछले कुछ समय से बंद था और वहां से निकल रही तेज बदबू ने आसपास के लोगों की परेशानी बढ़ा दी। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और परिसर की तलाशी ली। पुलिस को फ्रीजर के अंदर शव मिला। इसके बाद मृतक के परिवार से संपर्क किया गया। पुलिस ने परिवार के सदस्यों के साथ-साथ क्लिनिक प्रबंधन और संपत्ति के मालिक के बयान भी दर्ज किए हैं। क्या शव को इस तरह सुरक्षित रखना कानूनी है? अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि किसी मृत व्यक्ति के शरीर को इतने लंबे समय तक इस तरह सुरक्षित रखने की कानूनी अनुमति थी या नहीं। पुलिस इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। फिलहाल पुलिस ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि परिवार या किसी अन्य व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने इस मामले में कानूनी सलाह भी ली थी और महिला ने अपनी ओर से वकीलों को नियुक्त किया है। पुलिस जांच जारी, अंतिम संस्कार पर अभी फैसला नहीं कुरार पुलिस इस मामले के कानूनी और पारिवारिक दोनों पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल शव के अंतिम संस्कार को लेकर भी पुलिस की ओर से अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सबसे अहम सवाल यही है कि 2022 में हुई मौत के बाद शव को इतने लंबे समय तक किस प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया और स्थानीय प्रशासन या पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। पुलिस जांच पूरी होने और उपलब्ध दस्तावेजों व विशेषज्ञों की राय के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। Undercover Editor News Channel इस मामले से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने पर अपने पाठकों तक अपडेट पहुंचाएगा।  
सांताक्रूज में सीवर सफाई के दौरान बड़ा हादसा: 47 वर्षीय मजदूर की मौत, एक घायल; सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप

सांताक्रूज में सीवर सफाई के दौरान बड़ा हादसा: 47 वर्षीय मजदूर की मौत, एक घायल; सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप

सांताक्रूज में सीवर सफाई के दौरान बड़ा हादसा: 47 वर्षीय मजदूर की मौत, एक घायल; सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप मुंबई: सांताक्रूज ईस्ट में सोमवार, 28 सितंबर 2026 की सुबह सीवर सफाई के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक हाउसिंग सोसायटी की ड्रेनेज लाइन की सफाई के लिए सीवर चैंबर में उतरे दो मजदूरों में से एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा सुबह करीब 11 बजे 8th Golibar Road स्थित Bhavya Niketan Society के पास, V.N. Desai Hospital के सामने हुआ। पुलिस ने मृतक की पहचान संतोष गणपत काश्ते (47) के रूप में की है, जबकि घायल मजदूर की पहचान अजय ध्यानचंद ठाकुर (26) के तौर पर हुई है। सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाने का आरोप Vakola Police Station के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नवनाथ घुगे के अनुसार, दोनों मजदूरों को कथित तौर पर सीवर सफाई के दौरान आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। पुलिस के मुताबिक, Bhavya Niketan Society के सचिव ने जाम हुई सीवेज लाइन को साफ कराने के लिए जाधव नामक एक सेवानिवृत्त BMC अधिकारी से संपर्क किया था। आरोप है कि जाधव ने आगे दोनों मजदूरों को इस काम के लिए लगाया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि मजदूरों को किस परिस्थिति में काम पर लगाया गया और उन्हें काम के दौरान आवश्यक सुरक्षा इंतजाम क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए। BMC ने बताई अलग स्थिति BMC के अनुसार, सोसायटी ने अपनी आंतरिक सीवर लाइन की सफाई के लिए निजी कर्मचारियों को लगाया था। ये कर्मचारी BMC के कर्मचारी नहीं थे। BMC का कहना है कि सफाई के दौरान सड़क पर स्थित नगरपालिका के सीवर मैनहोल को कथित तौर पर BMC कर्मचारियों को सूचना दिए बिना खोला गया, जिसके बाद दोनों मजदूर उस चैंबर में प्रवेश कर गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस और 108 एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया। फायर ब्रिगेड के जवानों ने दोनों मजदूरों को चैंबर से बाहर निकाला। अस्पताल में एक की मौत रेस्क्यू के बाद दोनों मजदूरों को V.N. Desai Hospital ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने संतोष गणपत काश्ते को ‘बrought dead’ घोषित कर दिया। वहीं, अजय ध्यानचंद ठाकुर को इलाज के लिए Medical Intensive Care Unit (MICU) में भर्ती कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नवनाथ घुगे के अनुसार, पुलिस फिलहाल मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद मामले में FIR दर्ज करने की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि दोनों मजदूरों को किसने काम पर लगाया, सुरक्षा उपकरण क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए और नगरपालिका के सीवर चैंबर में उन्हें किस परिस्थिति में प्रवेश कराया गया। फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  
नवी मुंबई में तेज रफ्तार टैक्सी ने ऑटो को मारी टक्कर, बैंक कर्मचारी की मौत; 5 घायल

नवी मुंबई में तेज रफ्तार टैक्सी ने ऑटो को मारी टक्कर, बैंक कर्मचारी की मौत; 5 घायल

नवी मुंबई में तेज रफ्तार टैक्सी ने ऑटो को मारी टक्कर, बैंक कर्मचारी की मौत; 5 घायल नवी मुंबई: Seawoods इलाके में तेज रफ्तार टैक्सी और ऑटो रिक्शा के बीच हुई जोरदार टक्कर में एक बैंक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार, हादसे में Seawoods के NRI Complex के निवासी एक बैंक कर्मचारी को गंभीर चोटें आई थीं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे में टैक्सी में सवार पांच लोगों को भी चोटें आईं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उनकी चोटों की स्थिति को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। टैक्सी चालक गिरफ्तार पुलिस ने हादसे के बाद टैक्सी चालक Mobin Asif Shaikh (35) को गिरफ्तार किया है। वह मुंबई के Mankhurd इलाके का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत लापरवाही से वाहन चलाने के कारण मौत, धारा 125(b) के तहत दूसरे व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालते हुए गंभीर चोट पहुंचाने और धारा 281 के तहत सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाने से संबंधित मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। हादसे की जांच जारी फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। हादसा किस परिस्थिति में हुआ, टैक्सी की रफ्तार कितनी थी और टक्कर के पीछे अन्य कोई कारण था या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Undercover Editor News Channel हादसे से जुड़ी आगे की आधिकारिक जानकारी सामने आने पर अपने पाठकों तक अपडेट पहुंचाएगा।
मुंबई के गोरेगांव में पब्लिक टॉयलेट में संदिग्ध केमिकल लीकेज से हड़कंप, दम घुटने से 2 युवकों की मौत

मुंबई के गोरेगांव में पब्लिक टॉयलेट में संदिग्ध केमिकल लीकेज से हड़कंप, दम घुटने से 2 युवकों की मौत

मुंबई के गोरेगांव में पब्लिक टॉयलेट में संदिग्ध केमिकल लीकेज से हड़कंप, दम घुटने से 2 युवकों की मौत मुंबई: मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में रविवार, 27 सितंबर 2026 की तड़के एक सार्वजनिक शौचालय में संदिग्ध केमिकल लीकेज की घटना सामने आई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शौचालय के अंदर तेज केमिकल गंध के संपर्क में आने के बाद दो युवकों की तबीयत बिगड़ गई। दोनों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान प्रभाकर धनिवार (24) और भाविन देसाई (18) के रूप में हुई है। दोनों को इलाज के लिए ट्रॉमा केयर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें सुबह 3:49 बजे ‘बrought dead’ घोषित किया। तेज केमिकल गंध के बाद बिगड़ी तबीयत प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों युवक Mrunaltai Gore Bridge के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय में गए थे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि शौचालय के अंदर उन्हें तेज केमिकल जैसी गंध महसूस हुई, जिसके बाद कथित तौर पर उनका दम घुटने लगा। घटना की सूचना मिलने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। केमिकल कौन सा था, इसकी जांच जारी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शौचालय के अंदर कौन सा रसायन मौजूद था और वह वहां किस वजह से पहुंचा। नागरिक अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध केमिकल की प्रकृति और उसके स्रोत की जांच की जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि शौचालय में किसी रसायन का इस्तेमाल या भंडारण किया गया था या किसी अन्य वजह से वहां जहरीली या दम घोंटने वाली गैस/गंध पैदा हुई। BMC ने दर्ज की घटना BMC की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों युवकों को Trauma Care Hospital ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। घटना के बाद संबंधित विभागों द्वारा मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दोनों युवकों की मौत का वास्तविक कारण क्या था और शौचालय के अंदर मौजूद संदिग्ध रसायन की भूमिका कितनी थी। जांच के बाद सामने आएगा हादसे का पूरा कारण फिलहाल घटना को संदिग्ध केमिकल लीकेज और दम घुटने से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन मौत का अंतिम कारण संबंधित चिकित्सकीय और जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। घटना ने सार्वजनिक शौचालयों में रसायनों के इस्तेमाल, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, घटना के पीछे वास्तविक कारण और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।  

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