दिल्ली जिमखाना विवाद का असर मुंबई तक: एलीट क्लबों में बढ़ी चिंता, नीति बदलाव को लेकर आज अहम बैठक मुंबई: देश की राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित जिमखाना क्लब को लेकर हुए हालिया विवाद की गूंज अब मुंबई तक पहुंच गई है। शहर के दक्षिण मुंबई स्थित कई ऐतिहासिक और एलीट जिमखाना क्लबों में राज्य सरकार की संभावित नई नीति को लेकर चिंता का माहौल है। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी एक पत्र के बाद क्लब प्रबंधन सतर्क हो गए हैं और अपने दस्तावेज़ तथा लीज रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में आज इस्लाम जिमखाना में कई प्रमुख क्लबों के पदाधिकारी एक अहम बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें वे सरकार के सामने अपनी साझा रणनीति तैयार करेंगे। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार ने दिल्ली के प्रसिद्ध जिमखाना क्लब को 5 जून तक अपनी लीज वाली जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद मुंबई के क्लबों में भी आशंका बढ़ गई है कि कहीं यहां भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई या नियमों में बदलाव न किया जाए। हालांकि, कलेक्टर कार्यालय ने इस मामले में किसी भी प्रकार की सख्ती से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह बैठक केवल जिमखाना नीति में संभावित बदलावों और क्लबों की समस्याओं पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक समिति भी गठित की है, जो सरकारी जमीन पर चल रहे जिमखाना क्लबों की स्थिति और नीतिगत पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसके बावजूद क्लब प्रबंधन के बीच कई मुद्दों को लेकर चिंता बनी हुई है। इनमें लीज रेंट में हर साल 4 प्रतिशत की वृद्धि, भारी-भरकम स्टाम्प ड्यूटी, फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) के उपयोग पर प्रतिबंध और क्लब परिसरों को सामाजिक या व्यावसायिक आयोजनों के लिए किराए पर देने की सीमाएं शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, क्लब प्रतिनिधि सरकार से इन शर्तों में राहत की मांग करेंगे। उनका कहना है कि पुराने हेरिटेज ढांचे और खेल सुविधाओं के रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में लीज रेंट और अन्य शुल्कों में कमी जरूरी है। इसके अलावा, क्लबों की आय का एक बड़ा स्रोत शादी और अन्य सामाजिक कार्यक्रम होते हैं, जिन पर लगी पाबंदियों को भी कम करने की मांग की जाएगी। महामारी से पहले जहां साल में 40 से अधिक आयोजनों की अनुमति थी, वहीं अब यह संख्या घटाकर 20-30 के बीच कर दी गई है। मुंबई के कई जिमखाना क्लब ब्रिटिश काल से सरकारी जमीन पर लीज पर संचालित हो रहे हैं और समय के साथ ये सिर्फ खेल संस्थान ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र भी बन चुके हैं। ऐसे में किसी भी नीति बदलाव का सीधा असर उनके संचालन और वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की नजर 29 मई को होने वाली बैठक पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि सरकार और क्लब प्रबंधन के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है। मुंबई के एलीट सर्किल में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।