Category: Politics

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दिल्ली में CJP नेता अभिजीत दीपके हिरासत में, नेहा बोरा रिहा; SIR के खिलाफ प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली में CJP नेता अभिजीत दीपके हिरासत में, नेहा बोरा रिहा; SIR के खिलाफ प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली में CJP नेता अभिजीत दीपके हिरासत में, नेहा बोरा रिहा; SIR के खिलाफ प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले कार्रवाई, अभिजीत दीपके को SEM कोर्ट में किया जाएगा पेश नई दिल्ली: दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने एहतियाती हिरासत में लिया है, जबकि अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, अभिजीत दीपके को शुक्रवार शाम मार्च में शामिल होने के लिए निकलते समय झंडेवालान, करोल बाग इलाके में हिरासत में लिया गया। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई की है। पुलिस ने बताया कि दीपके को शनिवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत के सामने पेश किया जाएगा। मार्च से पहले हिरासत में लिए गए दीपके पुलिस के मुताबिक, दीपके जिस स्थान पर ठहरे हुए थे, वहां से निकलकर सेंट्रल पार्क की ओर मार्च में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह पहली बार नहीं है जब CJP से जुड़े नेताओं पर प्रदर्शन से पहले कार्रवाई हुई है। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के दौरान विमान से हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें शांति भंग न करने के बांड पर रिहा किया गया था। सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल में पुलिस के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका को इस सप्ताह जंतर-मंतर पहुंचने और राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन करने के बाद दोबारा गिरफ्तार किया गया। उन पर बांड की शर्तों के उल्लंघन, अतिक्रमण और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने सहित आरोप लगाए गए हैं। दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं। CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को शांति बनाए रखने के लिए बांड पर पाबंद किया गया है। नेहा बोरा की हिरासत के बाद रिहाई इस बीच AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भी दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, उन्हें दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत की गई कार्रवाई से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। हालांकि, AISA ने आरोप लगाया कि हिरासत के बाद नेहा बोरा को करीब पांच घंटे तक दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया और बाद में आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। संगठन का यह भी दावा है कि देर रात थाने पहुंचे वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। SIR और CEC के खिलाफ जारी है विरोध नेहा बोरा की रिहाई के बाद AISA और अन्य विपक्षी संगठनों की ओर से विरोध जारी रहने की बात कही गई। CPI(ML) से जुड़े और पूर्व AISA नेता एन. साई बालाजी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने का आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना अभी बाकी है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि निवारक कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। Undercover Editor News Channel | Mahesh Rathod, Editor  
रुबियो की मुंबई में भारतीय अधिकारियों से प्रस्तावित मुलाकात पर राहुल गांधी का सरकार से सवाल

रुबियो की मुंबई में भारतीय अधिकारियों से प्रस्तावित मुलाकात पर राहुल गांधी का सरकार से सवाल

रुबियो की मुंबई में भारतीय अधिकारियों से प्रस्तावित मुलाकात पर राहुल गांधी का सरकार से सवाल कांग्रेस नेता ने कहा- विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी ‘भ्रमित’; प्रधानमंत्री मोदी से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग नई दिल्ली/मुंबई: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अगले सप्ताह मुंबई में भारतीय अधिकारियों के साथ प्रस्तावित मुलाकात को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी इस बैठक को लेकर असमंजस में हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले पर स्पष्टीकरण देने को कहा। राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए यह सवाल उठाया। उनकी यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि रुबियो मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उन्हें उम्मीद है कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी बैठक में मौजूद रहेंगे। राहुल गांधी ने क्या कहा? राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सरकार से सवाल करते हुए कहा कि रुबियो ने भारतीय अधिकारियों को मुंबई बुलाया है और विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस घटनाक्रम को लेकर भ्रमित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। राहुल गांधी की टिप्पणी पर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। मुंबई में होगी रुबियो की अहम बैठक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत यात्रा पर रहेंगे। उनकी यात्रा में मुंबई और गुजरात के जामनगर का दौरा शामिल है। रुबियो जामनगर में रिलायंस की एक इकाई का दौरा करेंगे। इसके बाद मुंबई में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित है। अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने कहा था कि इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा दिल्ली से अन्य अधिकारी भी मुंबई पहुंच सकते हैं। कांग्रेस ने पहले भी उठाए थे सवाल राहुल गांधी की टिप्पणी से पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी रुबियो की प्रस्तावित मुंबई बैठक को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। जयराम रमेश ने पूछा था कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी आखिर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा क्यों दी जा रही है, जबकि ऐसी आधिकारिक जानकारी आमतौर पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से जारी की जाती है। उन्होंने विदेश मंत्रालय की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठाया था। रुबियो की भारत यात्रा पर निगाहें मार्को रुबियो की आगामी भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न रणनीतिक, व्यापारिक और कूटनीतिक मुद्दों पर बातचीत जारी है। उनकी मुंबई और जामनगर यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों पर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर रहेगी। फिलहाल मुंबई में रुबियो और भारतीय अधिकारियों के बीच प्रस्तावित बैठक के एजेंडे और प्रतिभागियों को लेकर आधिकारिक विस्तृत जानकारी का इंतजार है। Undercover Editor News Channel महेश .एम. राठोड, एडिटर  
मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका नई दिल्ली: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर केंद्र की राजनीति में जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में रिट याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने SIR से संबंधित फैसलों और उनकी प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड उपलब्ध कराने तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही, मामले का अंतिम निर्णय होने तक देशभर में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। याचिका में कौन-कौन हैं शामिल? राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा याचिका में INDIA गठबंधन से जुड़े विभिन्न दलों के नेताओं को याचिकाकर्ता बनाया गया है। इनमें शामिल हैं: याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। SIR के फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग याचिका में चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया से संबंधित फाइलें, बैठक की कार्यवाही, आधिकारिक टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियों का विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही ECINET और ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं ने 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के चुनाव आयोग के फैसले से संबंधित पूरी फाइल पेश करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि प्रक्रिया में लिए गए फैसलों की वैधानिकता और पारदर्शिता की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 तथा टी. एन. शेषन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के संदर्भ में भी सवाल उठाए गए हैं। हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण सार्वजनिक करने की मांग याचिका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि हटाए गए मतदाताओं के नाम बूथवार प्रकाशित किए जाएं और प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताया जाए। इसके अलावा, हटाए गए मतदाताओं का आयु और लिंग के आधार पर विवरण उपलब्ध कराने तथा पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र मतदाताओं को नाम शामिल कराने के लिए आवेदन का अवसर देने की मांग भी उठाई गई है। सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रस्ताव विपक्षी नेताओं ने SIR के तहत हटाए गए नामों और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने की मांग की है। याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से संबंधित प्रक्रियाओं की अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के आधार पर समीक्षा करने का अनुरोध भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि मामले के लंबित रहने के दौरान SIR से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाएं और उनकी कार्यवाही का उचित रिकॉर्ड रखा जाए। ऑनलाइन फॉर्म-6 को मौजूदा मतदाता पंजीकरण नियमों के अनुरूप बनाने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले दायर हुई याचिका यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR तथा चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगा था। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए अनुरोध स्वीकार नहीं किया कि संबंधित मुद्दे पहले से ही अदालत में विचाराधीन हैं। हालांकि, उन्होंने नेताओं को उचित राहत के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया था कि विपक्षी नेताओं की ओर से दायर नई याचिका पर भी लंबित मामलों के साथ विचार किया जा सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं की इस याचिका से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद को नया कानूनी मोड़ मिला है। विपक्षी दल जहां प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं याचिका पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उसके आदेशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, SIR पर रोक लगाने और अन्य राहतों की मांग याचिका का हिस्सा है। इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार या मंजूर किया गया अंतिम आदेश नहीं माना जाना चाहिए।  
शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई

शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई

शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करने के मामले में 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे के नाम भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, यह प्रदर्शन उन लोगों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में किया गया था, जो चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज उठा रहे थे। मामले में पुलिस ने गैरकानूनी जमावड़े और प्रतिबंधात्मक आदेशों के कथित उल्लंघन से संबंधित धाराएं लगाई हैं। FIR में कई राजनीतिक नेताओं के नाम इस मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे के अलावा मनसे नेता एस. संदीप देशपांडे तथा शिवसेना (UBT) के नेताओं वरुण सरदेसाई और महेश सावंत के नाम भी FIR में शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) के साथ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1), 37(3) और 135 के तहत मामला दर्ज किया है। ये प्रावधान कथित गैरकानूनी जमावड़े और लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन से संबंधित हैं। FIR दर्ज होने का अर्थ अपने आप में आरोप साबित होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के दौरान तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। मतदाता सूची के SIR को लेकर विरोध प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे ने रविवार को प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार का मुद्दा उठाया। आदित्य ठाकरे ने BJP पर साधा निशाना प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सड़क पर उतरकर विरोध करने वाले नागरिकों से डरती है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार देशभक्त नागरिकों को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है। उन्होंने एकनाथ शिंदे और भाजपा के साथ गए नेताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनके बयान पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। 4 अक्टूबर के मार्च को लेकर भी दर्ज हुई थी FIR यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब मुंबई पुलिस ने 4 अक्टूबर को मनसे और शिवसेना (UBT) की ओर से निकाले गए संयुक्त मार्च के आयोजकों के खिलाफ भी अलग FIR दर्ज की थी। यह मामला आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, दक्षिण मुंबई में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों के बीच कथित तौर पर आवश्यक पुलिस अनुमति के बिना बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय की ओर मार्च निकाला गया था। इस मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और मतदाता सूची के SIR में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे थे। राजनीतिक टकराव के बीच बढ़ी हलचल मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विरोध प्रदर्शनों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस ने प्रदर्शनों के दौरान नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कानूनी कार्रवाई की है। अब इस मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।  
CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तुषार गांधी हिरासत में, मुंबई पुलिस की कार्रवाई; 200 से अधिक लोगों को भी लिया गया था हिरासत में

CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तुषार गांधी हिरासत में, मुंबई पुलिस की कार्रवाई; 200 से अधिक लोगों को भी लिया गया था हिरासत में

CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तुषार गांधी हिरासत में, मुंबई पुलिस की कार्रवाई; 200 से अधिक लोगों को भी लिया गया था हिरासत में मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के समर्थन में मुंबई में होने वाली सभा से पहले पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी और कुछ अन्य आयोजकों को हिरासत में ले लिया। तुषार गांधी महात्मा गांधी के परपोते और ‘Hum Bharat Ke Log’ संगठन के अध्यक्ष हैं। यह कार्रवाई शनिवार, 10 अक्टूबर को मुंबई के बांद्रा इलाके में हुई। तुषार गांधी को पहले नेशनल कॉलेज चौराहे के पास रोके जाने की जानकारी सामने आई। बाद में उन्हें DN नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। आयोजकों के अनुसार, कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। अगस्त क्रांति मैदान में सभा का किया था आह्वान तुषार गांधी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन के समर्थन में मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में सभा आयोजित करने की अपील की थी। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध से जुड़ा था। आयोजकों ने सोशल मीडिया पर लोगों से शनिवार दोपहर सभा में पहुंचने की अपील की थी। हालांकि, पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संबंधित सभा के लिए अनुमति का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था और आधिकारिक अनुमति भी नहीं दी गई थी। हिरासत के बावजूद प्रदर्शन जारी रखने की अपील तुषार गांधी और अन्य आयोजकों की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि हिरासत के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रखने का उनका इरादा है। उन्होंने लोगों से अगस्त क्रांति मैदान पहुंचने की अपील की। तुषार गांधी ने सोशल मीडिया पर बताया कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उन्हें पहले सांताक्रूज पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में DN नगर पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। वहीं, मीडिया रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से कहा गया कि तुषार गांधी को हिरासत में लिया गया था, औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था। फिरोज मितिबोरवाला समेत अन्य आयोजकों पर भी कार्रवाई रिपोर्टों के मुताबिक, सामाजिक कार्यकर्ता फिरोज मितिबोरवाला को भी हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें उनके निवास से हिरासत में लेकर MIDC पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इन कार्रवाइयों के पीछे पुलिस की ओर से सभा के लिए अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया गया है। 9 अक्टूबर को 200 से अधिक लोग हिरासत में इससे एक दिन पहले, शुक्रवार 9 अक्टूबर को भी मुंबई पुलिस ने दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था, ताकि वे राजधानी में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आगे न जा सकें। महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में भी पुलिस सतर्कता बढ़ाए जाने की खबरें सामने आईं। यह कार्रवाई दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले की गई व्यापक सुरक्षा तैयारियों के बीच हुई। दिल्ली में CJP का प्रदर्शन क्यों? Cockroach Janta Party (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। आंदोलन से जुड़े लोगों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नामों के हटने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की जांच हो। ये आरोप राजनीतिक और आंदोलनकारी पक्षों की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें जांच या आधिकारिक निष्कर्ष से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने भी प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और कई आयोजकों तथा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। अब आगे क्या? मुंबई में तुषार गांधी और अन्य आयोजकों की हिरासत के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगस्त क्रांति मैदान पर प्रस्तावित सभा किस रूप में आगे बढ़ती है और पुलिस आगे क्या कदम उठाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदर्शन की अनुमति, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर बहस को तेज कर दिया है। फिलहाल, हिरासत और प्रस्तावित सभा से जुड़े घटनाक्रम पर आगे की जानकारी का इंतजार है।  
मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी

मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी

मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब लंबे समय बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने मुंबई में ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। यह मार्च दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय के पास पहुंचा। मोर्चे में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शन में पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की गई थी। SIR रद्द करने की मांग, EVM के बजाय बैलेट पेपर की पैरवी मोर्चे को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। राज ठाकरे ने मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए SIR की प्रक्रिया और उसके प्रभाव पर सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, मतदाताओं की संख्या में इस तरह की बड़ी कमी को लेकर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। हालांकि, ये सभी दावे और आरोप राजनीतिक नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में बदलाव को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया गया है। उद्धव ठाकरे का CEC पर हमला उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने यह सवाल भी उठाया कि यदि SIR का उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को मतदाता सूची से हटाना था, तो इस प्रक्रिया में ऐसे कितने लोगों की पहचान हुई। उद्धव ठाकरे के इन आरोपों का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में किया गया है। वहीं, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं। महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.06 करोड़ नाम शामिल नहीं ठाकरे बंधुओं के विरोध प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े भी चर्चा के केंद्र में हैं। राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार, SIR से पहले महाराष्ट्र में 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 7,71,65,562 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल किए गए हैं, जबकि 2,06,88,487 नाम इस चरण में ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाए। यह संख्या पुराने मतदाता आधार की करीब 21.14 प्रतिशत है। ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाताओं में लगभग 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड-जेंडर मतदाता शामिल हैं। क्या 2 करोड़ से ज्यादा वोट हमेशा के लिए हट गए? यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 2.06 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इन मतदाताओं के Enumeration Forms उपलब्ध नहीं हो पाए थे। इसके पीछे मतदाता का अपने पते पर नहीं मिलना, स्थायी रूप से स्थान बदलना, मृत्यु, कहीं और पहले से पंजीकरण या अन्य कारण शामिल बताए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम फिर शामिल किए जा सकते हैं। इसलिए अंतिम मतदाता सूची में यह आंकड़ा बदल सकता है। पुणे, ठाणे और मुंबई में सबसे ज्यादा नाम प्रभावित राज्य के आंकड़ों में बड़े शहरों और जिलों में बड़ी संख्या में Enumeration Forms के उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। पुणे में करीब 28.6 लाख, ठाणे में 28.5 लाख, मुंबई उपनगर में 26.5 लाख, नागपुर में 14.43 लाख, नासिक में 10.27 लाख और मुंबई शहर में करीब 9.5 लाख नाम इस श्रेणी में बताए गए हैं। ठाकरे बंधुओं के एक मंच पर आने से बढ़ी राजनीतिक हलचल उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ मंच साझा करना इस पूरे प्रदर्शन का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू रहा। दोनों नेता लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक राह पर रहे हैं, लेकिन SIR और चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर दोनों ने संयुक्त रूप से मोर्चा निकाला। मोर्चे में कांग्रेस और NCP (SP) के नेताओं की मौजूदगी ने भी इसे विपक्षी दलों के साझा प्रदर्शन का रूप दिया। इस प्रदर्शन से साफ है कि महाराष्ट्र में SIR, मतदाता सूची में नामों की कमी और EVM बनाम बैलेट पेपर जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं। हालांकि, मतदाता सूची में अंतिम बदलाव दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।  
शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग मुंबई: गांधी जयंती के मौके पर शुक्रवार को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच और चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई। पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए। Times of India के अनुसार, मुंबई पुलिस की Special Branch ने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू होने के समय भीड़ का अनुमान लगभग 9,000 से 10,000 लगाया था, जबकि बाद की रिपोर्टों में प्रदर्शन में 10,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। वाहनों को प्रदर्शन स्थल के करीब जाने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे और पुलिसकर्मी भीड़ तथा यातायात को नियंत्रित कर रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान माहौल मुख्यतः शांतिपूर्ण रहा और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति सामान्य बनी रही। मुंबई पुलिस ने इससे पहले CJP को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस ने Bombay High Court के निर्देशों, क्षेत्र के Silence Zone होने तथा संभावित यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था। CEC के इस्तीफे की मांग CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग पक्ष मौजूद हैं और मतदाता सूची से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों तथा जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है। राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी निशाना अपने भाषण में Dipke ने राजनीतिक दलों में नेताओं के दलबदल और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों ने पार्टियां बदली हैं और इस पर राजनीतिक व्यवस्था में जवाबदेही की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगा और दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी करेगा। फिल्म और सामाजिक क्षेत्र से भी पहुंचे लोग शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में फिल्म और कला जगत से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, विशाल भारद्वाज और विशाल ददलानी समेत कई चर्चित हस्तियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। विशाल ददलानी ने अपने संबोधन में दावा किया कि उनका नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है। ऐसे व्यक्तिगत दावों की आधिकारिक स्थिति संबंधित चुनावी रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है। हिंदू-मुस्लिम एकता पर Dipke का बयान प्रदर्शन के दौरान Abhijeet Dipke ने धर्म के आधार पर विभाजन की राजनीति की आलोचना करते हुए हिंदू-मुस्लिम एकता की बात कही। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसी विभाजनकारी राजनीति काम नहीं करेगी। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू के योगदान का भी उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक भागीदारी पर जोर दिया। स्थानीय निवासियों ने भी जताई आपत्ति जहां प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, वहीं शिवाजी पार्क के कुछ स्थानीय निवासियों ने कार्यक्रम से होने वाले शोर, यातायात और रोजमर्रा की गतिविधियों में व्यवधान को लेकर आपत्ति जताई। गीतकार जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर स्थानीय निवासियों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के कारण होने वाली परेशानियों पर आवाज उठाना उचित है और राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों के समय भी इसी तरह के सवाल उठाए जाने चाहिए। आंदोलन आगे बढ़ाने का ऐलान CJP ने संकेत दिया है कि यदि उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को मुंबई से आगे अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। संगठन ने Goa, Bengaluru और Kolkata समेत अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन की योजना की बात कही है। इस बीच चुनावी सूची, SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। मामले में अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष आगे की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।  
‘भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ मुंबई पुलिस से कुणाल कामरा का सवाल, वापसी शो से पहले बढ़ी हलचल

‘भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ मुंबई पुलिस से कुणाल कामरा का सवाल, वापसी शो से पहले बढ़ी हलचल

‘भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ मुंबई पुलिस से कुणाल कामरा का सवाल, वापसी शो से पहले बढ़ी हलचल कॉमेडियन ने पूछा—अगर 40-50 लोग शो रोकने पहुंचें तो क्या पुलिस उन्हें रोकने देगी? कहा, कार्यक्रम बंद कमरे में कानून के मुताबिक होगा मुंबई: स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने मुंबई में अपने आगामी कॉमेडी शो को लेकर मुंबई पुलिस से सीधे सवाल किया है। कामरा ने पूछा कि अगर कुछ लोग उनके कार्यक्रम को रोकने या बाधित करने के लिए भीड़ के रूप में पहुंचते हैं, तो क्या पुलिस कानून-व्यवस्था के पक्ष में खड़ी होगी या प्रदर्शनकारियों को शो रोकने की अनुमति दी जाएगी। कामरा ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुंबई पुलिस को टैग करते हुए कहा कि उनका प्रस्तावित कार्यक्रम बंद परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा, जहां करीब 100 सहमति देने वाले वयस्क दर्शक मौजूद होंगे। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम सभी लागू कानूनों और नियमों के अनुरूप आयोजित किया जाएगा। ‘क्या आप भीड़ के साथ हैं या कानून के?’ कामरा ने मुंबई पुलिस की जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए अपने पोस्ट में तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध रोकने और ट्रैफिक संभालने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 40-50 लोग शो को रद्द कराने या बाधित करने के लिए पहुंचते हैं, या कार्यक्रम स्थल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, तो क्या उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जाएगी। कामरा का सवाल था कि ऐसी स्थिति में पुलिस “भीड़ के साथ होगी या कानून के साथ?” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रदर्शन करने वालों को शो रोकने का अधिकार मिल जाएगा। 2025 के ‘नया भारत’ शो के बाद हुआ था विवाद कुणाल कामरा का मुंबई में पिछला बड़ा स्टैंड-अप कार्यक्रम 2025 में खार स्थित द हैबिटैट कॉमेडी क्लब में ‘नया भारत’ शो था। शो की कुछ क्लिप सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। कार्यक्रम में कामरा ने फिल्म दिल तो पागल है के एक लोकप्रिय गीत की पैरोडी करते हुए महाराष्ट्र के तत्कालीन राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी की थी और एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ कहकर संबोधित किया था। उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में हुए राजनीतिक विभाजन को लेकर भी मजाक किया था। इसके बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं के विरोध की खबरें सामने आई थीं। प्रदर्शन के दौरान कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ हुई थी और बाद में उस इमारत को लेकर BMC की कार्रवाई भी हुई थी। BJP MLC की ओर से विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव कामरा को इस विवाद के सिलसिले में BJP MLC प्रवीण दरेकर की ओर से लाए गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ रहा है। अब मुंबई में दोबारा स्टैंड-अप करने की उनकी इच्छा ने पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। कामरा का कहना है कि उनका अगला शो कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। ऐसे में अब उनकी नजर मुंबई पुलिस की प्रतिक्रिया पर है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर पुलिस की ओर से क्या सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्था की जाती है।  
शिवसेना का ‘Mission Gen Z’: 250+ युवा जनप्रतिनिधियों के साथ युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति

शिवसेना का ‘Mission Gen Z’: 250+ युवा जनप्रतिनिधियों के साथ युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति

शिवसेना का ‘Mission Gen Z’: 250+ युवा जनप्रतिनिधियों के साथ युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति मुंबई: युवाओं के बीच अपनी सीधी पहुंच मजबूत करने के उद्देश्य से शिवसेना ने बुधवार, 26 अगस्त को मुंबई में ‘मिशन Gen Z’ की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य Gen Z और Gen Alpha की प्राथमिकताओं को शासन और सार्वजनिक नीतियों से जोड़ना है। अभियान के पहले चरण में आयोजित युवा सम्मेलन में महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से 20 से 30 वर्ष की आयु के 250 से अधिक युवा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, खेल, कौशल विकास और महिला सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे सामने रखे। युवा प्रतिनिधियों ने खेल परिसरों और मैदानों के विकास, बेहतर पुस्तकालय एवं स्टडी स्पेस, करियर गाइडेंस, रोजगार सहायता, रोजगार पोर्टल और स्किल डेवलपमेंट सेंटर की जरूरत पर जोर दिया। इसके अलावा कॉलेजों में युवा महोत्सव, नशामुक्ति अभियान, महिलाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों के जिला परिषद स्कूलों में विदेशी भाषाओं की शिक्षा जैसे सुझाव भी दिए गए। पार्टी ने कहा कि Gen Z, Gen Alpha और युवाओं के साथ लंबे समय तक संवाद बनाए रखने के लिए शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म रणनीति तैयार की जाएगी। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अभियान का उद्देश्य यह समझना है कि युवा वास्तव में क्या चाहते हैं और उनकी समस्याओं को किस तरह ठोस कार्रवाई में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं तक पहुंचने के लिए पार्टी अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सीधे संवाद को बढ़ावा देगी। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग आयु वर्ग के युवाओं की चुनौतियां अलग हैं, इसलिए उनके लिए संवाद और समाधान भी उनकी जरूरतों के अनुरूप होने चाहिए। श्रीकांत शिंदे के मुताबिक, युवाओं की समस्याओं का समाधान तुरंत संभव नहीं है, लेकिन सरकार और पार्टी लगातार उनसे संवाद कर उनकी चिंताओं को समझने और सकारात्मक समाधान की दिशा में काम करेगी। शिवसेना का कहना है कि युवाओं से मिले सुझावों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और संबंधित मुद्दों पर कार्रवाई की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। ‘मिशन Gen Z’ के जरिए पार्टी अब युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के साथ-साथ उनकी भागीदारी को शासन और नीति निर्माण से जोड़ने की कोशिश कर रही है।  
मुंबई में Gen Z की बुलंद आवाज़, विरोध प्रदर्शनों से राजनीति तक पर खुली चर्चा

मुंबई में Gen Z की बुलंद आवाज़, विरोध प्रदर्शनों से राजनीति तक पर खुली चर्चा

मुंबई में Gen Z की बुलंद आवाज़, विरोध प्रदर्शनों से राजनीति तक पर खुली चर्चा दिल से बोल: मुंबई विद Gen Z राइजिंग’ में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी, हालिया प्रदर्शनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर विचार-विमर्श मुंबई: मुंबई में सोमवार को युवाओं की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को लेकर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों, कलाकारों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों ने हालिया विरोध प्रदर्शनों और भारतीय राजनीति में Gen Z की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। ‘Dil Se Bol: Mumbai with Gen Z Rising’ नामक यह कार्यक्रम वाई.बी. चव्हाण सेंटर में DIL Se Bol की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी स्टैंड-अप कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने की। कवि पुनीत शर्मा और कॉमेडियन अबिश मैथ्यू की प्रस्तुतियों के बाद पैनल चर्चा हुई, जिसमें एनसीपी (एसपी) प्रवक्ता अनिश गावंडे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रिया अहिर और रघुराम शामिल हुए। कई अन्य कलाकारों और कवियों ने भी स्वतंत्रता और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। हालिया छात्र प्रदर्शनों पर चर्चा कार्यक्रम के दौरान हालिया Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े छात्र प्रदर्शनों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। रिया अहिर ने 20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि पुलिस वाहन के सामने हाथ उठाए उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्होंने विरोध में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने का फैसला किया। अहिर ने दावा किया कि उन्होंने घटनास्थल पर एक पुलिस वाहन की नंबर प्लेट की तस्वीर ली और पाया कि उस पर अनिवार्य हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नहीं थी। उन्होंने ऐसे नौ अन्य वाहनों की भी पहचान करने का दावा किया। प्रदर्शनकारियों की एकजुटता का जिक्र अनिश गावंडे ने प्रदर्शनों के दौरान दिखाई दी एकजुटता का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई लोग रातभर प्रदर्शन स्थल पर रुके रहे और स्वयंसेवकों ने प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन तथा अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया। गावंडे ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग जगहों से लोग समर्थन देने पहुंचे। उनके अनुसार, बुजुर्गों से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों तक ने प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। शबाना आजमी ने युवाओं की भूमिका पर कही बात कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा कि हालिया प्रदर्शनों ने युवाओं के राजनीति से दूर रहने की धारणा को चुनौती दी है। उन्होंने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज को युवा पीढ़ी की आवाज़ को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने जुलाई में हुए प्रदर्शनों का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां का माहौल उनके लिए बेहद प्रभावशाली था और युवाओं ने अपनी अहमियत का एहसास कराया। आंसू गैस और मीडिया कवरेज पर सवाल कार्यक्रम के समापन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 20 जुलाई के प्रदर्शनों और जंतर-मंतर पर कथित तौर पर आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं में मौजूद असंतोष की जड़ें देश में लंबे समय से चली आ रही सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं से जुड़ी हैं। बोरा ने मुख्यधारा के टेलीविजन मीडिया के कवरेज की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने प्रदर्शनों की वास्तविक स्थिति को सही तरीके से पेश नहीं किया। उन्होंने युवाओं से राजनीतिक प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भागीदारी की अपील की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि Gen Z अब केवल सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने वाली पीढ़ी नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी भूमिका को लेकर भी मुखर हो रही है। युवाओं की यह बढ़ती राजनीतिक भागीदारी आने वाले समय में राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है।  

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