लेखक: Mahesh Rathod

Contrary to popular belief, Lorem Ipsum is not simply random text. It has roots in a piece of classical Latin literature from 45 BC, making it over 2000 years old. Richard McClintock, a Latin professor

जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन LIVE: ‘युवा अब नहीं डरेंगे’, अभिजीत दिपके के नेतृत्व में छात्रों का हुंकार

जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन LIVE: ‘युवा अब नहीं डरेंगे’, अभिजीत दिपके के नेतृत्व में छात्रों का हुंकार

जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन LIVE: ‘युवा अब नहीं डरेंगे’, अभिजीत दिपके के नेतृत्व में छात्रों का हुंकार नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर शनिवार (6 जून 2026) को ‘Cockroach Janta Party (CJP)’ के बैनर तले बड़ा प्रदर्शन शुरू हुआ, जिसमें देशभर से आए छात्रों और युवाओं ने हिस्सा लिया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके कर रहे हैं, जो हाल ही में अमेरिका से भारत लौटे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को शहर के कई संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। अभिजीत दिपके ने जंतर मंतर पहुंचने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “हम इस आंदोलन को प्यार और शांति के साथ आगे बढ़ाएंगे। देश का युवा अब डरने वाला नहीं है।” उनके इस संदेश के बाद बड़ी संख्या में छात्र और युवा प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे। यह प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हाल के परीक्षा संबंधित मामलों में गंभीर लापरवाही हुई है, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इस बीच, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि यदि 5 जून तक मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वह भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। जंतर मंतर पर जुटी भीड़ में छात्रों का गुस्सा और निराशा साफ नजर आ रही है। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। हालांकि, प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि इसमें युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।  
BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी

BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी

BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी मुंबई के भांडुप इलाके में हुए दर्दनाक BEST बस हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन मृतक प्रशांत शिंदे के परिवार की मुश्किलें आज भी खत्म नहीं हुई हैं। इस हादसे में 43 वर्षीय प्रशांत शिंदे की मौत हो गई थी, जो अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके निधन के बाद परिवार गहरे आर्थिक संकट में फंस गया है। प्रशांत की पत्नी कंचन शिंदे और उनका 11 वर्षीय बेटा सोहम आज रोजमर्रा के खर्चों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बढ़ते किराए और स्थायी आय के अभाव ने उनकी स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। कंचन शिंदे का कहना है कि पति की अचानक मौत ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है और अब आर्थिक तंगी ने जीवन और कठिन बना दिया है। कंचन ने बताया, “जब मुझे मेरे पति की मौत की खबर मिली, तो मैं पूरी तरह टूट गई थी। हम आज तक उस सदमे से बाहर नहीं आ पाए हैं। अब हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या रोजी-रोटी की है, क्योंकि वही घर के इकलौते कमाने वाले थे।” हादसे के बाद BEST प्रशासन की ओर से परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी, लेकिन कंचन का कहना है कि यह राशि उनके भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इसे “मुंह बंद रखने की कीमत” जैसा बताया। कंचन के अनुसार, इस राशि का बड़ा हिस्सा उन्होंने अपने बेटे के भविष्य के लिए सुरक्षित रखा है, जो आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहता है। घर चलाने के लिए कंचन ने मजबूरी में घरेलू काम (कुक) करना शुरू किया है, लेकिन उनकी आय इतनी नहीं है कि वह परिवार का खर्च आसानी से उठा सकें। उन्होंने BEST प्रशासन और स्थानीय नेताओं से नौकरी की मांग की है, ताकि उन्हें एक स्थायी आय का स्रोत मिल सके। “मैंने BEST और स्थानीय नेताओं से नौकरी की मांग की है। अगर मुझे सरकारी नौकरी मिल जाए, तो मेरे परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सकता है,” कंचन ने कहा। इस बीच, परिवार की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। मकान मालिक द्वारा किराया बढ़ाए जाने के कारण उन्हें अब नया घर ढूंढना पड़ रहा है। कंचन को डर है कि अगर उन्हें दूर जाना पड़ा, तो उनके बेटे को स्कूल जाने में काफी परेशानी होगी। “हमारा किराया बढ़ा दिया गया है और अब हमें नया घर ढूंढना पड़ रहा है। अगर हमें भांडुप से बाहर जाना पड़ा, तो मेरे बेटे को अकेले स्कूल जाना पड़ेगा, जो मेरे लिए चिंता का विषय है,” उन्होंने कहा। हालांकि यह हादसा उस समय सुर्खियों में रहा था, लेकिन समय बीतने के साथ इस परिवार की परेशानियां लोगों की नजरों से ओझल हो गई हैं। छह महीने बाद भी उन्हें वह स्थायी मदद नहीं मिल पाई है, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि हादसों के बाद पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक सहारा देने के लिए मजबूत व्यवस्था की कितनी जरूरत है।  
📰 मुंबई में 30 मिनट की बारिश ने खोली सिस्टम की पोल: अंधेरी सबवे फिर डूबा, ट्रैफिक ठप

📰 मुंबई में 30 मिनट की बारिश ने खोली सिस्टम की पोल: अंधेरी सबवे फिर डूबा, ट्रैफिक ठप

📰 मुंबई में 30 मिनट की बारिश ने खोली सिस्टम की पोल: अंधेरी सबवे फिर डूबा, ट्रैफिक ठप मुंबई में मानसून से पहले ही बारिश ने शहर की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। बुधवार सुबह महज 30 मिनट में करीब 48 मिमी बारिश ने अंधेरी सबवे को पूरी तरह जलमग्न कर दिया, जिससे यह अहम ईस्ट-वेस्ट कनेक्टर दो घंटे से अधिक समय तक बंद रहा और ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। 🚧 अचानक बारिश, तुरंत असर बारिश इतनी तेज और स्थानीय स्तर पर केंद्रित थी कि सबवे के नीचे मौजूद ड्रेनेज सिस्टम कुछ ही मिनटों में ओवरलोड हो गया। पानी तेजी से भरने लगा, जिसके चलते ट्रैफिक पुलिस को सुरक्षा के मद्देनजर सबवे को बंद करना पड़ा। वाहनों को गोखले ब्रिज के जरिए डायवर्ट किया गया, जिससे कुछ हद तक यातायात सुचारु रखने की कोशिश की गई। 🌧️ ड्रेनेज क्षमता बनी बड़ी समस्या नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, सबवे के नीचे से गुजरने वाले नाले की क्षमता केवल 15 से 18 मिमी प्रति घंटा बारिश संभालने की है। ऐसे में जब 30 मिनट में 48 मिमी बारिश हुई, तो सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया। इसके अलावा, सबवे समुद्र तल से लगभग आधा फुट नीचे स्थित है, जिससे पानी का जमा होना और भी तेज हो जाता है। 🏗️ डिसिल्टिंग पर फिर उठे सवाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों ने एक बार फिर बीएमसी की प्री-मानसून तैयारियों और डिसिल्टिंग (नालों की सफाई) पर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह समस्या सफाई की कमी नहीं बल्कि संरचनात्मक सीमाओं के कारण है। 🗣️ प्रशासन का पक्ष अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने स्पष्ट किया कि इस समस्या का समाधान आसान नहीं है। उनके अनुसार, “करीब 500 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी मनचाहा परिणाम नहीं मिल सकता। इसलिए बेहतर समाधान के लिए IIT मुंबई से सलाह ली जाएगी।” 🧠 जटिल समस्या, स्थायी समाधान अभी दूर यह घटना बताती है कि मुंबई की पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती तीव्र बारिश के बीच तालमेल की कमी अब एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। हर साल अंधेरी सबवे का डूबना एक आम समस्या बन गई है, जिसका स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है। ⚠️ मानसून से पहले ही चेतावनी गौर करने वाली बात यह है कि यह स्थिति तब बनी जब मानसून पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान शहर को और बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 👉 निष्कर्ष: मुंबई जैसे महानगर में बुनियादी ढांचे की मजबूती और आधुनिक समाधान की जरूरत अब पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है। अंधेरी सबवे की यह घटना सिर्फ एक जगह की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए एक चेतावनी है।  
मुंबई में प्री-मानसून बारिश की दस्तक: गर्मी से राहत, कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश

मुंबई में प्री-मानसून बारिश की दस्तक: गर्मी से राहत, कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश

मुंबई में प्री-मानसून बारिश की दस्तक: गर्मी से राहत, कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश मुंबई | विशेष रिपोर्ट: मुंबई में मानसून से पहले ही बारिश ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है। बुधवार (3 जून 2026) को शहर के पश्चिमी उपनगरों में प्री-मानसून बारिश देखने को मिली, जिससे मौसम सुहावना हो गया। बोरीवली, सांताक्रूज़, वर्सोवा, अंधेरी, दहिसर, बांद्रा और खार जैसे इलाकों में बारिश की हल्की से मध्यम फुहारें पड़ीं। अचानक बदले मौसम ने जहां एक ओर लोगों को राहत दी, वहीं सड़कों पर कुछ स्थानों पर जलभराव और ट्रैफिक की धीमी गति भी देखी गई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही इस बदलाव का संकेत देते हुए येलो अलर्ट जारी किया था। विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। मंगलवार को सांताक्रूज़ और कोलाबा में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया था, जिससे उमस और गर्मी का असर साफ महसूस किया जा रहा था। हालांकि, बुधवार को बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 27 डिग्री के आसपास रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, कोंकण क्षेत्र में 6 जून तक प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी। वहीं दक्षिण-पश्चिम मानसून के 4 जून को केरल पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद धीरे-धीरे यह मुंबई की ओर बढ़ेगा। फिलहाल, मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में हल्की बारिश और उमस भरा मौसम बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है, जिससे मानसून की औपचारिक एंट्री का रास्ता साफ होगा। मुंबईकरों के लिए यह बारिश राहत के साथ-साथ मानसून की आहट भी लेकर आई है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था।  
बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई

बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई

बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई मुंबई | विशेष रिपोर्ट: मुंबई के सबसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल इलाकों में से एक बांद्रा वेस्ट में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कमर्शियल शूट के दौरान बिना किसी अनुमति के एक साथ 200 से ज्यादा ड्रोन उड़ाए गए, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। घटना 28 मई की रात की है, जब बांद्रा पुलिस को सूचना मिली कि इलाके में बड़े पैमाने पर ड्रोन ऑपरेशन चल रहा है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम उस समय हैरान रह गई जब आसमान में सैकड़ों ड्रोन एक साथ उड़ते दिखाई दिए। तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ड्रोन गतिविधि को बंद कराया और मौके पर मौजूद संचालक को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी की पहचान दिल्ली निवासी गोपाल नारायण सिंह के रूप में हुई, जो एक मार्केटिंग कंपनी में मैनेजर बताया जा रहा है। उसने पुलिस को बताया कि यह पूरा ड्रोन शो एक विज्ञापन शूट का हिस्सा था। हालांकि, जब उससे अनुमति और दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई वैध परमिशन पेश नहीं कर सका। जांच में सामने आया कि इस ऑपरेशन के लिए आवश्यक अनुमति लेने की जिम्मेदारी एक अन्य अधिकारी सुनील गुप्ता के पास थी, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बिना किसी अधिकृत मंजूरी के यह गतिविधि शुरू कर दी गई थी। पुलिस ने मौके से कई हाई-टेक कैमरा युक्त ड्रोन, जिनकी कीमत करीब 80 हजार रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है, जब्त किए हैं। इसके अलावा, ड्रोन ऑपरेशन को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया गया लैपटॉप और अन्य तकनीकी उपकरण भी फॉरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में ड्रोन उड़ाने के लिए कड़े नियम लागू हैं, खासकर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में। सुरक्षा कारणों से किसी भी ड्रोन गतिविधि के लिए कई एजेंसियों से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इस मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और आरोपियों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह की अवैध ड्रोन गतिविधियां अन्य जगहों पर भी की गई थीं और क्या इसमें किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है। डीसीपी (जोन IX) डॉ. मोहित गर्ग ने पुष्टि की है कि मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जांच जारी है। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि नियमों की अनदेखी कर ऐसे बड़े पैमाने पर ऑपरेशन कैसे संभव हो पाए। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और भी खुलासे होने की संभावना है।  
मुंबई में फर्जी लैब्स पर सख्ती की मांग: बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट रिपोर्ट जारी करने पर FIR दर्ज करने की अपील

मुंबई में फर्जी लैब्स पर सख्ती की मांग: बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट रिपोर्ट जारी करने पर FIR दर्ज करने की अपील

मुंबई में फर्जी लैब्स पर सख्ती की मांग: बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट रिपोर्ट जारी करने पर FIR दर्ज करने की अपील मुंबई | विशेष रिपोर्ट: मुंबई में संदिग्ध और नियमों का उल्लंघन करने वाली पैथोलॉजी लैब्स के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ प्रैक्टिसिंग पैथोलॉजिस्ट्स (MAPPM) ने ऐसे लैब्स के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्राधिकरणों को कड़ा कदम उठाने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि कई लैब्स बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट की निगरानी के रिपोर्ट जारी कर रही हैं, जो न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। डॉ. यादव ने कहा कि “लोग पैथोलॉजी रिपोर्ट पर पूरा भरोसा करते हैं क्योंकि उसी के आधार पर इलाज तय होता है। ऐसे में बिना विशेषज्ञ निगरानी के रिपोर्ट जारी करना बेहद खतरनाक है।” MAPPM ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाएगी और स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए तथ्यों पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग करेगी। साथ ही, संगठन ने मेडिकल एजुकेशन विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि पहले की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। एसोसिएशन का कहना है कि वह यह जानना चाहती है कि कितनी लैब्स की जांच की गई, किन-किन जगहों पर उल्लंघन पाया गया और दोषी संस्थानों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पैथोलॉजी रिपोर्ट निदान, इलाज और बीमारी की निगरानी का आधार होती है, इसलिए इसमें योग्य डॉक्टर की भूमिका अनिवार्य है। डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि “हर रिपोर्ट डॉक्टर के इलाज के फैसले को प्रभावित करती है, चाहे वह दवा हो, सर्जरी हो या कैंसर का इलाज। ऐसे में रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति पूरी जिम्मेदारी लेने वाला होना चाहिए—इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” यह मामला सामने आने के बाद इसे मुंबई में पैथोलॉजी सेवाओं को लेकर पहली बड़ी संस्थागत प्रतिक्रिया माना जा रहा है। आने वाले समय में शहरभर की लैब्स पर जांच और निगरानी बढ़ने की संभावना है। हालांकि एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश पैथोलॉजिस्ट ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं, लेकिन कुछ संस्थानों की लापरवाही पूरे पेशे की साख को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में सख्त नियमों का पालन और कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।  
मुंबई में ‘एयर इंडिया कॉलोनियों’ का अंत: 70 साल पुरानी विरासत हुई इतिहास, कलिना से आखिरी परिवार भी विदा

मुंबई में ‘एयर इंडिया कॉलोनियों’ का अंत: 70 साल पुरानी विरासत हुई इतिहास, कलिना से आखिरी परिवार भी विदा

मुंबई में ‘एयर इंडिया कॉलोनियों’ का अंत: 70 साल पुरानी विरासत हुई इतिहास, कलिना से आखिरी परिवार भी विदा मुंबई | विशेष रिपोर्ट: हर शुरुआत जहां जश्न और उम्मीदों के साथ होती है, वहीं अंत अक्सर खामोश और भावुक होता है। मुंबई के कलिना इलाके में स्थित एयर इंडिया की ऐतिहासिक कॉलोनियों का अध्याय भी अब ऐसे ही एक शांत अंत के साथ बंद हो गया है। दशकों से हजारों कर्मचारियों का घर रही ये कॉलोनियां अब इतिहास बन चुकी हैं। करीब 184 एकड़ में फैली इन कॉलोनियों का निर्माण 1955 में शुरू हुआ था। समय के साथ यहां चार बड़ी स्टाफ कॉलोनियां बनीं, जिनमें कुल 106 इमारतों में 1,683 फ्लैट्स थे। लेकिन अब इन घरों के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में बचे हुए करीब 150 परिवारों ने भी अपने घर खाली कर दिए, और अब इस जमीन का कब्जा मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) को सौंप दिया जाएगा। एयर इंडिया, जो कभी मुंबई की पहचान का अहम हिस्सा रही, अब इस शहर में अपनी आखिरी रिहायशी मौजूदगी भी खो चुकी है। 1970 के दशक में बना प्रतिष्ठित एयर इंडिया टावर पहले ही 2024 में बेच दिया गया था, और अब कॉलोनियों के खाली होने के साथ एक पूरा युग समाप्त हो गया है। 2022 में एयर इंडिया के निजीकरण के बाद से ही इन कॉलोनियों को लेकर विवाद शुरू हो गया था। कर्मचारियों और यूनियनों ने अपने रहने के अधिकार के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जो लेबर कोर्ट से होते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने निवासियों को 30 नवंबर 2025 तक घर खाली करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्हें शैक्षणिक सत्र खत्म होने तक अतिरिक्त समय दिया गया। आज जब इन कॉलोनियों को देखा जाता है, तो यहां वीरानी और यादों का मिश्रण नजर आता है। जर्जर हो चुकी इमारतें, टूटी सीढ़ियां, छतों से गिरता कंक्रीट और खाली पड़े गलियारे इस बात के गवाह हैं कि यहां कभी जिंदगी बसती थी। वहीं दूसरी ओर, पुराने पेड़ों और हरियाली के बीच अब भी बीते समय की झलक दिखाई देती है। इन कॉलोनियों का महत्व सिर्फ आवास तक सीमित नहीं था। यहां के क्रिकेट और फुटबॉल मैदानों ने देश को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए, जबकि स्कूलों में हजारों बच्चों ने शिक्षा प्राप्त की। आपात स्थितियों में भी यहां के कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई—चाहे 2018 की बाढ़ हो या कोविड-19 के दौरान मेडिकल सप्लाई का संचालन। अब जब आखिरी परिवार भी यहां से जा चुका है, तो यह सिर्फ एक जगह का खाली होना नहीं, बल्कि मुंबई के एविएशन इतिहास के एक सुनहरे अध्याय का अंत है। एयर इंडिया आज भी उड़ान भर रही है, लेकिन मुंबई में उसका ‘घर’ अब हमेशा के लिए खो गया है।
‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए 9 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया, जिनका संबंध दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी दिल्ली में “अत्यंत संवेदनशील स्थानों, सुरक्षा बलों और धार्मिक स्थलों” को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। कार्रवाई के दौरान उनके पास से हथियार, विस्फोटक सामग्री और कई हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए हैं, जिससे एक बड़े हमले की आशंका जताई जा रही थी। सूत्रों का कहना है कि इस आतंकी मॉड्यूल को लंबे समय से तैयार किया जा रहा था और इसके तार पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से जुड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में कुछ नेपाली मूल के लोग भी शामिल थे, जिन्हें ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई से राजधानी पर मंडरा रहा एक बड़ा खतरा टल गया है। फिलहाल एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग, भर्ती प्रक्रिया और लॉजिस्टिक सपोर्ट की गहराई से जांच कर रही हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच जारी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है। दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए हर थाने में काउंटर टेरर यूनिट (CTU) बनाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, विदेशी आतंकी संगठन अब एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और लोकल स्लीपर सेल के जरिए युवाओं को गुमराह कर उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां अब जमीनी स्तर पर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां हर चुनौती का सामना करने के लिए सतर्क और सक्षम हैं, और किसी भी आतंकी साजिश को सफल नहीं होने देंगी।  
मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार

मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार

मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार मुंबई, प्रतिनिधि: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नशे के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने ₹50 करोड़ से अधिक कीमत के ड्रग्स का भंडाफोड़ किया है। दक्षिण मुंबई के अग्रिपाड़ा इलाके में स्थित एक हाई-राइज इमारत में छापेमारी कर पुलिस ने मेफेड्रोन (MD) बनाने की पूरी फैक्ट्री का पर्दाफाश किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 26 मई को ‘यासमीन टॉवर’ की 10वीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में की गई। कांडिवली यूनिट को मिली गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने जाल बिछाकर फ्लैट नंबर 1004 पर छापा मारा। तलाशी के दौरान वहां ड्रग्स बनाने का पूरा सेटअप मिला, जिसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। छापेमारी में कुल 14.493 किलोग्राम मेफेड्रोन और उससे जुड़े कच्चे माल बरामद किए गए। इनमें 8.305 किलोग्राम लिक्विड एमडी (लगभग ₹29.08 करोड़) और 6.188 किलोग्राम पाउडर एमडी (लगभग ₹21.65 करोड़) शामिल हैं। इसके अलावा, ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स, मशीनरी, एक देसी पिस्टल और 19 जिंदा कारतूस भी जब्त किए गए। जांच में सामने आया है कि आरोपी फ्लैट के अंदर गैस स्टोव पर केमिकल्स उबालकर और फिर उन्हें सुखाकर ड्रग्स तैयार करते थे। इस प्रक्रिया से निकलने वाली तेज गंध को छिपाने के लिए वे पूरे दिन एयर कंडीशनर चालू रखते थे और अगरबत्ती व फ्रेगरेंस स्प्रे का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने यह तकनीक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीखी थी। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि वे उत्पादन बढ़ाने के लिए किसी फार्महाउस की तलाश में थे, जिससे इस अवैध कारोबार को बड़े स्तर पर फैलाया जा सके। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शोएब मंसूरी (33), सूफियान मंसूरी (29) और मामुनी सरकार (23) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, शोएब के खिलाफ पहले से लूट, छिनैती और मारपीट के कई मामले दर्ज हैं। वहीं, मामुनी सरकार को शोएब की गर्लफ्रेंड बताया जा रहा है, जो बांग्लादेश की नागरिक बताई जा रही है। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने उन्हें 3 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब इस नेटवर्क के पीछे के बड़े गिरोह और सप्लाई चेन की जांच में जुटी है। इस कार्रवाई को मुंबई में ड्रग्स के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।  
दिल्ली जिमखाना विवाद का असर मुंबई तक: एलीट क्लबों में बढ़ी चिंता, नीति बदलाव को लेकर आज अहम बैठक

दिल्ली जिमखाना विवाद का असर मुंबई तक: एलीट क्लबों में बढ़ी चिंता, नीति बदलाव को लेकर आज अहम बैठक

दिल्ली जिमखाना विवाद का असर मुंबई तक: एलीट क्लबों में बढ़ी चिंता, नीति बदलाव को लेकर आज अहम बैठक मुंबई: देश की राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित जिमखाना क्लब को लेकर हुए हालिया विवाद की गूंज अब मुंबई तक पहुंच गई है। शहर के दक्षिण मुंबई स्थित कई ऐतिहासिक और एलीट जिमखाना क्लबों में राज्य सरकार की संभावित नई नीति को लेकर चिंता का माहौल है। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी एक पत्र के बाद क्लब प्रबंधन सतर्क हो गए हैं और अपने दस्तावेज़ तथा लीज रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में आज इस्लाम जिमखाना में कई प्रमुख क्लबों के पदाधिकारी एक अहम बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें वे सरकार के सामने अपनी साझा रणनीति तैयार करेंगे। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार ने दिल्ली के प्रसिद्ध जिमखाना क्लब को 5 जून तक अपनी लीज वाली जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद मुंबई के क्लबों में भी आशंका बढ़ गई है कि कहीं यहां भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई या नियमों में बदलाव न किया जाए। हालांकि, कलेक्टर कार्यालय ने इस मामले में किसी भी प्रकार की सख्ती से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह बैठक केवल जिमखाना नीति में संभावित बदलावों और क्लबों की समस्याओं पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक समिति भी गठित की है, जो सरकारी जमीन पर चल रहे जिमखाना क्लबों की स्थिति और नीतिगत पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसके बावजूद क्लब प्रबंधन के बीच कई मुद्दों को लेकर चिंता बनी हुई है। इनमें लीज रेंट में हर साल 4 प्रतिशत की वृद्धि, भारी-भरकम स्टाम्प ड्यूटी, फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) के उपयोग पर प्रतिबंध और क्लब परिसरों को सामाजिक या व्यावसायिक आयोजनों के लिए किराए पर देने की सीमाएं शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, क्लब प्रतिनिधि सरकार से इन शर्तों में राहत की मांग करेंगे। उनका कहना है कि पुराने हेरिटेज ढांचे और खेल सुविधाओं के रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में लीज रेंट और अन्य शुल्कों में कमी जरूरी है। इसके अलावा, क्लबों की आय का एक बड़ा स्रोत शादी और अन्य सामाजिक कार्यक्रम होते हैं, जिन पर लगी पाबंदियों को भी कम करने की मांग की जाएगी। महामारी से पहले जहां साल में 40 से अधिक आयोजनों की अनुमति थी, वहीं अब यह संख्या घटाकर 20-30 के बीच कर दी गई है। मुंबई के कई जिमखाना क्लब ब्रिटिश काल से सरकारी जमीन पर लीज पर संचालित हो रहे हैं और समय के साथ ये सिर्फ खेल संस्थान ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र भी बन चुके हैं। ऐसे में किसी भी नीति बदलाव का सीधा असर उनके संचालन और वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की नजर 29 मई को होने वाली बैठक पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि सरकार और क्लब प्रबंधन के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है। मुंबई के एलीट सर्किल में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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