लेखक: Mahesh Rathod

Contrary to popular belief, Lorem Ipsum is not simply random text. It has roots in a piece of classical Latin literature from 45 BC, making it over 2000 years old. Richard McClintock, a Latin professor

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर राज्यपाल का छात्रों से संवाद, बीएमसी स्कूल में मनाया गया स्कूल रीओपनिंग उत्सव

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर राज्यपाल का छात्रों से संवाद, बीएमसी स्कूल में मनाया गया स्कूल रीओपनिंग उत्सव

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर राज्यपाल का छात्रों से संवाद, बीएमसी स्कूल में मनाया गया स्कूल रीओपनिंग उत्सव मुंबई में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने बीएमसी द्वारा संचालित मुंबई पब्लिक स्कूल, भायखला में आयोजित “स्कूल रीओपनिंग फेस्टिवल” में भाग लिया। 🎒 छात्रों के साथ संवाद, बांटे स्कूल किट और भोजन कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उन्हें स्कूल किट तथा पौष्टिक भोजन वितरित किया। इस अवसर पर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। 🏫 स्कूल की सुविधाओं का लिया जायजा राज्यपाल ने स्कूल की विभिन्न आधुनिक सुविधाओं का निरीक्षण भी किया। उन्होंने खगोल विज्ञान प्रयोगशाला, प्री-प्राइमरी (बालवाड़ी) कक्षाएं, स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) लैब का दौरा किया और व्यवस्थाओं की सराहना की। 👥 कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद इस कार्यक्रम में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की आयुक्त अश्विनी भिडे, बीएमसी शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवाडकर, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नरनवरे, अतिरिक्त आयुक्त (शिक्षा) डॉ. अविनाश ढकने, महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षण परिषद (MPSP) के राज्य परियोजना निदेशक संजय यादव सहित कई गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। 📚 शिक्षा के प्रति सकारात्मक पहल इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों को नए सत्र के लिए प्रेरित करना और शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाना था। राज्यपाल की उपस्थिति ने बच्चों का उत्साह और भी बढ़ा दिया। 👉 निष्कर्ष: मुंबई के बीएमसी स्कूलों में इस तरह के आयोजन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और छात्रों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।  
नालासोपारा में 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने की आत्महत्या, इंडस्ट्री में शोक

नालासोपारा में 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने की आत्महत्या, इंडस्ट्री में शोक

नालासोपारा में 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने की आत्महत्या, इंडस्ट्री में शोक मुंबई से सटे नालासोपारा में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां 22 वर्षीय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने टीवी इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। 🚨 घर में बंद होकर उठाया खौफनाक कदम पुलिस के अनुसार, यह घटना नालासोपारा ईस्ट के आचोले इलाके स्थित साई संतोषी बिल्डिंग में हुई। संचिता ने रविवार शाम करीब 7 से 7:30 बजे के बीच अपने कमरे को अंदर से बंद कर लिया और कथित तौर पर साड़ी के सहारे पंखे से लटककर अपनी जान दे दी। 🏥 अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और आसपास के लोगों ने तुरंत उन्हें वसई-विरार म्युनिसिपल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। 📄 पुलिस जांच जारी, कारण अब तक स्पष्ट नहीं संचिता के पिता की शिकायत के आधार पर आचोले पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है, हालांकि आत्महत्या के पीछे की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। 🎬 उभरती हुई कलाकार थीं संचिता संचिता उगले टीवी इंडस्ट्री में तेजी से पहचान बना रही थीं। उन्होंने लोकप्रिय शो “कुमकुम भाग्य” में दिया टंडन का किरदार निभाकर खास पहचान हासिल की थी। इसके अलावा वह “वागले की दुनिया” और “दिलवाली दुल्हा ले जाएगी” जैसे शोज में भी नजर आई थीं। 🎥 फिल्मों और OTT में भी बनाई जगह संचिता ने फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी काम किया था। वह फिल्म “छावा” में तारा रानी के युवा किरदार में नजर आई थीं और “साइलेंस 2” जैसे प्रोजेक्ट्स में भी उन्होंने काम किया था। 🗣️ इंडस्ट्री और फैंस में शोक की लहर उनकी अचानक मौत से टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर फैंस और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। ⚠️ जरूरी संदेश यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया मदद लेने में संकोच न करें। किसी भरोसेमंद व्यक्ति, डॉक्टर या हेल्पलाइन से संपर्क करना बेहद जरूरी है। 👉 निष्कर्ष: संचिता उगले की यह दुखद घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की भी एक गंभीर याद दिलाती है।  
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद मुंबई को मिलेगा नया समुद्री फ्रंट—कोस्टल रोड प्रोजेक्ट को मिली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद मुंबई को मिलेगा नया समुद्री फ्रंट—कोस्टल रोड प्रोजेक्ट को मिली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद मुंबई को मिलेगा नया समुद्री फ्रंट—कोस्टल रोड प्रोजेक्ट को मिली बड़ी राहत मुंबई के लिए एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने कोस्टल रोड साउथ प्रोजेक्ट के तहत विकसित हो रहे 130 एकड़ के सी-फ्रंट पब्लिक स्पेस को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के साथ ही परियोजना के विकास में आ रही अंतिम बाधा भी दूर हो गई है, जिससे अब काम तेजी से आगे बढ़ सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस विशाल सार्वजनिक क्षेत्र का अधिकतर हिस्सा आम जनता के लिए मुफ्त रहेगा, जबकि केवल 15 प्रतिशत क्षेत्र में ही टिकट आधारित आकर्षण विकसित किए जा सकेंगे। जनता के लिए खुला रहेगा बड़ा हिस्सा इस परियोजना के तहत बनाए जाने वाले समुद्री किनारे पर प्रोमेनेड, गार्डन, पार्क, साइकिल ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक और अन्य सुविधाएं पूरी तरह से जनता के लिए निशुल्क उपलब्ध होंगी। यह क्षेत्र मुंबई के सबसे बड़े और आधुनिक वॉटरफ्रंट स्पेस में से एक बनने जा रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज को मिली जिम्मेदारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस परियोजना के लैंडस्केपिंग और रखरखाव का काम रिलायंस इंडस्ट्रीज को सौंपा है, जिसे कंपनी अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत विकसित करेगी। इस प्रोजेक्ट पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और कंपनी अगले 30 वर्षों तक इसकी देखरेख करेगी। कोर्ट ने रखी शर्तें सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का आवासीय या व्यावसायिक निर्माण बिक्री या लीज के लिए नहीं किया जाएगा। साथ ही, टिकट वाले आकर्षणों का दायरा कुल क्षेत्रफल के 15 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगा, ताकि आम जनता की पहुंच बनी रहे। जल्द शुरू होगा विकास कार्य बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रोजेक्ट के सभी लंबित कार्यों को गति मिलेगी। पहले से ही कुछ हिस्सों में तैयारी शुरू हो चुकी है, जिसमें वर्ली इलाके में पौधों की नर्सरी भी तैयार की गई है। पर्यावरण और सौंदर्यीकरण पर जोर यह प्रोजेक्ट न केवल शहर के सौंदर्यीकरण में अहम भूमिका निभाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुंबई को एक विश्वस्तरीय समुद्री तट विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है। यह प्रोजेक्ट शहरवासियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ एक खुला और हरित सार्वजनिक स्थान प्रदान करेगा, जो आने वाले समय में मुंबई की पहचान बन सकता  
मुंबई स्टार्टअप की अनोखी पहल: 64 वर्षीय इंटर्न ने जीता दिल, अनुभव को मिली नई पहचान

मुंबई स्टार्टअप की अनोखी पहल: 64 वर्षीय इंटर्न ने जीता दिल, अनुभव को मिली नई पहचान

मुंबई स्टार्टअप की अनोखी पहल: 64 वर्षीय इंटर्न ने जीता दिल, अनुभव को मिली नई पहचान मुंबई से एक प्रेरणादायक और सकारात्मक खबर सामने आई है, जहां एक स्टार्टअप के फैसले ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। इस स्टार्टअप ने 64 वर्षीय व्यक्ति को इंटर्न के रूप में शामिल किया, और यह कदम अब एक मिसाल बनता जा रहा है। इस पहल को लेकर कंपनी के फाउंडर ने इसे “अब तक का सबसे बेहतरीन  निर्णय” बताया है। उनका मानना है कि अनुभव किसी उम्र का मोहताज नहीं होता, बल्कि यह किसी भी संगठन को नई दिशा दे सकता है। अनुभव की ताकत बनी टीम की ताकत सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा गया कि 64 वर्षीय इंटर्न युवा टीम के साथ काम करते हुए अपने वर्षों के अनुभव साझा कर रहे हैं। वह न केवल कंपनी को व्यावसायिक समझ दे रहे हैं, बल्कि टीम के अंदर सकारात्मक माहौल और मोटिवेशन भी बढ़ा रहे हैं। वीडियो में यह भी बताया गया कि वह कंपनी को “बिल्ड और स्केल” करने के अपने अनुभव से मार्गदर्शन दे रहे हैं और संगठन की कार्य संस्कृति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्यों चुना इंटर्नशिप? लोगों के मन में यह सवाल उठा कि इतनी उम्र और अनुभव के बावजूद उन्होंने इंटर्न की भूमिका क्यों चुनी। इस पर कंपनी के फाउंडर ने बताया कि वह व्यक्ति सक्रिय रहना चाहते थे और अपने अनुभव को नई पीढ़ी के साथ साझा करना चाहते थे। वह घर बैठने के बजाय कुछ नया करना चाहते थे। सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ इस अनोखी पहल को सोशल मीडिया पर खूब सराहा जा रहा है। यूजर्स ने इसे “अनुभव का सम्मान” बताते हुए कहा कि ज्ञान कभी पुराना नहीं होता। कई लोगों ने यह भी कहा कि कंपनियों को उम्र के बजाय काबिलियत और अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए। एक नई सोच की शुरुआत यह घटना न केवल एक स्टार्टअप की कहानी है, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी है कि सीखने और सिखाने की कोई उम्र नहीं होती। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सही अवसर मिलने पर अनुभव और ऊर्जा का मेल किसी भी संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। निष्कर्ष मुंबई की इस पहल ने एक नई सोच को जन्म दिया है—जहां उम्र नहीं, बल्कि अनुभव और जज्बा मायने रखता है। यह कदम आने वाले समय में अन्य कंपनियों को भी प्रेरित कर सकता है कि वे विविधता और अनुभव को अपनाएं।
अंधेरी में इमारत में लगी आग से हड़कंप: 8 लोग घायल, सभी की हालत स्थिर

अंधेरी में इमारत में लगी आग से हड़कंप: 8 लोग घायल, सभी की हालत स्थिर

अंधेरी में इमारत में लगी आग से हड़कंप: 8 लोग घायल, सभी की हालत स्थिर मुंबई के अंधेरी इलाके में गुरुवार सुबह एक रिहायशी इमारत में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में कम से कम 8 लोग घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह है कि सभी घायलों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। यह आग अंधेरी पश्चिम के जुहू इलाके में स्थित मनीषा बिल्डिंग में लगी, जो आरोग्य निधि अस्पताल के पास स्थित है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, आग 11 मंजिला इमारत की छठी मंजिल पर लगे एसी यूनिट तक ही सीमित रही। सुबह 7:53 बजे लगी आग, करीब 4 घंटे में पाया काबू बीएमसी ने इस घटना को लेवल-1 फायर घोषित किया है। आग सुबह करीब 7:53 बजे लगी थी और दमकल विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब 11:30 बजे तक इसे पूरी तरह नियंत्रित कर लिया। तुरंत पहुंची रेस्क्यू टीम घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस, एंबुलेंस, वार्ड स्टाफ, पीडब्ल्यूडी और अडानी इलेक्ट्रिक की टीम मौके पर पहुंच गई। सभी एजेंसियों ने मिलकर राहत और बचाव कार्य को तेजी से अंजाम दिया। अस्पताल में चल रहा इलाज घायलों को तुरंत भारती आरोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि सभी 8 लोग अब खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्थिर है। समय रहते टला बड़ा हादसा प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। समय पर आग पर काबू पा लेने के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। निष्कर्ष इस घटना ने एक बार फिर इमारतों में अग्नि सुरक्षा उपायों की जरूरत को उजागर किया है। प्रशासन और नागरिकों दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।  
मुंबई का नया फ्लाईओवर ‘पिघल रहा’? वायरल वीडियो पर मचा हंगामा, विशेषज्ञों ने बताया असली कारण

मुंबई का नया फ्लाईओवर ‘पिघल रहा’? वायरल वीडियो पर मचा हंगामा, विशेषज्ञों ने बताया असली कारण

मुंबई का नया फ्लाईओवर ‘पिघल रहा’? वायरल वीडियो पर मचा हंगामा, विशेषज्ञों ने बताया असली कारण मुंबई में हाल ही में शुरू हुआ मृणालताई गोरे फ्लाईओवर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। फ्लाईओवर के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद इसके सड़क सतह के “पिघलने” जैसे वीडियो सामने आए, जिससे लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई जा रही है। यह 750 मीटर लंबा फ्लाईओवर, जिसकी लागत करीब 247.97 करोड़ रुपये बताई जा रही है, शहर के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी लिंक है। यह गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड को वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड से जोड़ने का काम करेगा। वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में फ्लाईओवर की सड़क पर पिघलती हुई परत, ढीले पत्थर (ग्रेवल) और कुछ जगहों पर गड्ढे जैसे दृश्य दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में तो बाइक के स्टैंड के दबाव से सड़क का हिस्सा धंसता हुआ भी नजर आया। विशेषज्ञों की राय: सामान्य प्रक्रिया शहरी योजनाकार और विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाईओवर की सड़क पर “मास्टिक एस्फाल्ट” का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें बिटुमेन गर्मी में नरम हो सकता है। उनका कहना है कि मुंबई में इस समय तापमान अधिक होने के कारण बिटुमेन की ऊपरी परत थोड़ी पिघलती हुई दिखाई दे रही है, जो एक सामान्य प्रक्रिया है। सड़क पर दिखाई देने वाले छोटे-छोटे पत्थर भी किसी खराब निर्माण का संकेत नहीं हैं। इन्हें जानबूझकर डाला जाता है ताकि सड़क पर घर्षण (फ्रिक्शन) बना रहे और वाहन फिसलने से बचें। ट्रैफिक के दबाव से ये पत्थर धीरे-धीरे सतह में बैठ जाते हैं। फ्लाईओवर की डिजाइन में घर्षण जरूरी मृणालताई गोरे फ्लाईओवर में कई मोड़ (curves) हैं, जिसके कारण यहां हाई फ्रिक्शन वाली सतह जरूरी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, खासकर बारिश के मौसम में फिसलन रोकने के लिए यह तकनीक बेहद जरूरी होती है। असली परीक्षा मानसून में हालांकि, फिलहाल स्थिति को सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन असली परीक्षण मानसून के दौरान होगा। अगर सड़क की परत बारिश में बहने लगे या खराब हो जाए, तब निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठेंगे। बीएमसी अधिकारियों का भी कहना है कि अभी केवल वीडियो के आधार पर फ्लाईओवर को खराब कहना सही नहीं होगा। आने वाले दिनों में बारिश के दौरान इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। निष्कर्ष मुंबई के इस नए फ्लाईओवर को लेकर फिलहाल जो हंगामा हो रहा है, वह आंशिक रूप से भ्रम पर आधारित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी दृष्टि से यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अंतिम फैसला मानसून के बाद ही लिया जा सकेगा। फिलहाल, शहरवासियों को कुछ समय इंतजार करना होगा कि यह फ्लाईओवर अपनी गुणवत्ता की परीक्षा में कितना खरा उतरता है।  
मुंबई में तेज रफ्तार BEST बस का कहर: कंदिवली में दो पैदल यात्रियों को मारी टक्कर, एक की हालत गंभीर

मुंबई में तेज रफ्तार BEST बस का कहर: कंदिवली में दो पैदल यात्रियों को मारी टक्कर, एक की हालत गंभीर

मुंबई में तेज रफ्तार BEST बस का कहर: कंदिवली में दो पैदल यात्रियों को मारी टक्कर, एक की हालत गंभीर मुंबई में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटना कंधिवली इलाके की है, जहां एक तेज रफ्तार BEST बस ने सड़क पार कर रहे दो लोगों को टक्कर मार दी। इस हादसे में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई है, जबकि युवक को मामूली चोटें आई हैं। खास बात यह है कि इस सप्ताह में यह दूसरा ऐसा मामला है, जिसने शहर में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना सोमवार सुबह करीब 11:40 बजे पोइसर डिपो के पास हुई। जानकारी के मुताबिक, इलेक्ट्रिक BEST बस (रूट नंबर A-277/38) गोराई डिपो से आ रही थी, तभी सड़क पार कर रहे दो पैदल यात्रियों को उसने जोरदार टक्कर मार दी। CCTV में कैद हुआ हादसा पूरी घटना पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आदर्श हीरालाल यादव (24) और सोनम मौर्या (24) सड़क पार कर रहे थे, तभी अचानक बस ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के तुरंत बाद बस कंडक्टर ने दोनों घायलों को नजदीकी शताब्दी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, सोनम मौर्या को सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें ICU में भर्ती किया गया है। वहीं, आदर्श यादव को कंधे और आंख के पास हल्की चोटें आई हैं। बस को भी हुआ भारी नुकसान टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का आगे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसका विंडस्क्रीन भी टूट गया। BEST बसों पर फिर उठे सवाल इस घटना के बाद BEST बसों की सुरक्षा और तकनीकी स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पहले भी कई मामलों में ब्रेक फेल और तकनीकी खराबी जैसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पिछले साल भांडुप में एक BEST बस ने रिवर्स लेते समय चार लोगों को कुचल दिया था। वहीं मुलुंड में एक बुजुर्ग महिला की मौत बस की चपेट में आने से हो गई थी। इसके अलावा, प्रभादेवी में एक फूड डिलीवरी बॉय की भी इसी तरह की दुर्घटना में जान चली गई थी। निष्कर्ष लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि शहर में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि वह बसों की तकनीकी जांच और ड्राइवरों की ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मुंबई में इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव पर संकट: शाडू मिट्टी की सप्लाई में देरी से मूर्तिकार परेशान

मुंबई में इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव पर संकट: शाडू मिट्टी की सप्लाई में देरी से मूर्तिकार परेशान

मुंबई में इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव पर संकट: शाडू मिट्टी की सप्लाई में देरी से मूर्तिकार परेशान मुंबई में इस साल गणेशोत्सव से पहले पर्यावरण अनुकूल (इको-फ्रेंडली) मूर्तियों के निर्माण पर बड़ा संकट मंडराता नजर आ रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से मूर्तिकारों को मुफ्त शाडू (प्राकृतिक) मिट्टी देने की योजना इस बार देरी का शिकार हो गई है, जिससे शहरभर के पारंपरिक मूर्तिकारों में चिंता बढ़ गई है। हर साल की तरह इस बार भी बीएमसी ने इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा देने के लिए पंजीकृत मूर्तिकारों को शाडू मिट्टी मुफ्त देने का ऐलान किया था। योजना के तहत प्रत्येक कलाकार को लगभग 1,000 किलोग्राम (40 बैग) मिट्टी उपलब्ध कराई जानी थी। लेकिन मानसून शुरू होने और मूर्ति निर्माण का समय आने के बावजूद अभी तक कई मूर्तिकारों को एक भी बैग नहीं मिला है। समय पर सप्लाई न मिलने से बढ़ी परेशानी श्री गणेश मूर्तिकला समिति के अध्यक्ष वसंत राजे का कहना है कि मूर्ति बनाने के लिए अप्रैल और मई का समय सबसे उपयुक्त होता है। “अब तक हमें मिट्टी नहीं मिली है, जबकि यही समय मूर्तियों को तैयार करने के लिए बेहद अहम होता है,” उन्होंने बताया। मूर्तिकारों के अनुसार, शाडू मिट्टी से बनी मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की तुलना में ज्यादा समय लेती हैं, खासकर मानसून में जब नमी अधिक होती है। ऐसे में देरी से सप्लाई मिलने पर मूर्तियों को सुखाने और तैयार करने में काफी दिक्कत होती है। मानसून ने बढ़ाई चुनौती मूर्तिकार भूषण पारुलेकर ने कहा, “बरसात में मूर्तियां सूखने में हफ्तों लग जाते हैं, जबकि गर्मी में यह प्रक्रिया तेज होती है। अगर जल्द मिट्टी नहीं मिली, तो हमें खुद ही खरीदनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ेगी।” वहीं, MyBMC पोर्टल पर पंजीकृत मूर्तिकार अनुश्का गुजर का कहना है कि इस देरी से उनके सीजनल व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है और काम करना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन ने माना, जल्द सप्लाई का भरोसा बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस समस्या को स्वीकार करते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रों में मिट्टी की खरीद और आपूर्ति में दिक्कतें आई हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सप्लाई चेन की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही सभी मूर्तिकारों को शाडू मिट्टी उपलब्ध करा दी जाएगी। इको-फ्रेंडली पहल पर पड़ सकता है असर पिछले साल बीएमसी ने करीब 990 मीट्रिक टन शाडू मिट्टी 500 पंजीकृत मूर्तिकारों को वितरित की थी। मुंबई में 1.81 लाख घरेलू गणेश मूर्तियों में से लगभग 30 से 40 हजार मूर्तियां शाडू मिट्टी की थीं। मूर्तिकारों का मानना है कि अगर इस साल समय पर मिट्टी की सप्लाई नहीं हुई, तो इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा देने की यह पहल कमजोर पड़ सकती है। निष्कर्ष मुंबई में जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक देरी इस प्रयास पर सवाल खड़े कर रही है। अब सबकी नजर बीएमसी पर है कि वह कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान करती है, ताकि मूर्तिकार समय पर अपनी कला को अंतिम रूप दे सकें और शहर में हरित गणेशोत्सव सफलतापूर्वक मनाया जा सके।  
मुंबई की जर्जर इमारतों में जिंदगी का जुआ: हर मानसून में हजारों परिवार खतरे में

मुंबई की जर्जर इमारतों में जिंदगी का जुआ: हर मानसून में हजारों परिवार खतरे में

मुंबई की जर्जर इमारतों में जिंदगी का जुआ: हर मानसून में हजारों परिवार खतरे में मुंबई, जिसे सपनों का शहर कहा जाता है, वहीं हर साल मानसून के साथ एक कड़वी सच्चाई भी सामने आती है—हजारों लोग ऐसी जर्जर इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं। चेतावनियों, नोटिस और खतरे के बावजूद लोग अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं, क्योंकि उनके सामने उससे भी बड़ा डर खड़ा है—बेघर होने का। मझगांव के हाथी बाग इलाके में रहने वाले 43 वर्षीय मयूर मिस्त्री की कहानी इस संकट की सच्ची तस्वीर पेश करती है। बचपन से जिस 120 स्क्वायर फीट के घर में उन्होंने जीवन बिताया, आज वही घर उनके लिए खतरा बन चुका है। हाल ही में उन्हें इमारत खाली करने का नोटिस मिला, लेकिन वे और उनके जैसे कई परिवार अब भी वहीं रहने को मजबूर हैं। दरअसल, यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि मुंबई के हजारों ‘सेस्ड बिल्डिंग्स’ में रहने वाले करीब 4 लाख लोगों की हकीकत है। ये वे इमारतें हैं जो 1969 से पहले बनी थीं और अब बेहद जर्जर हालत में हैं। सरकारी सर्वे के अनुसार, शहर में 12,000 से ज्यादा ऐसी इमारतें हैं, जिनमें से कई को ‘खतरनाक’ घोषित किया जा चुका है। हर मानसून में यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। दीवारों में दरारें, छत से पानी टपकना, लकड़ी और लोहे के सहारे खड़ी इमारतें—ये सब आम दृश्य बन चुके हैं। इसके बावजूद लोग यहां से नहीं जाना चाहते, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वे घर छोड़ देंगे, तो उनका वर्षों पुराना हक और मकान दोनों छिन जाएंगे। पुनर्विकास (redevelopment) इस समस्या का समाधान हो सकता था, लेकिन यही प्रक्रिया सबसे बड़ी रुकावट बन गई है। कई परियोजनाएं सालों से अटकी हुई हैं। कहीं बिल्डर गायब हैं, तो कहीं कानूनी विवाद चल रहे हैं। कुछ मामलों में जमीन के मालिक ही सामने नहीं आते, जिससे पूरा प्रोजेक्ट ठप हो जाता है। सरकार ने 2022 में MHADA एक्ट के तहत सेक्शन 79A लागू कर राहत देने की कोशिश की थी, जिससे किरायेदार खुद पुनर्विकास शुरू कर सकते थे। लेकिन इस कानून पर भी कोर्ट में विवाद होने के कारण फिलहाल यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। इस बीच, कई जगहों पर बिल्डरों द्वारा केवल सहमति लेकर प्रोजेक्ट शुरू नहीं किए गए, जिससे इमारतें और भी खराब हालत में पहुंच गईं। गिरगांव की एक 100 साल पुरानी चाल इसका उदाहरण है, जहां 10 साल पहले पुनर्विकास का वादा किया गया था, लेकिन आज तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। स्थिति इतनी गंभीर है कि बॉम्बे हाई कोर्ट की एक समिति ने इसे “चमत्कार” बताया है कि इतने लोग अब भी इन इमारतों में सुरक्षित रह पा रहे हैं। लेकिन यह चमत्कार कब तक चलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर लोग घर छोड़ते हैं, तो उन्हें न तो किराए की पूरी गारंटी मिलती है, न ही यह भरोसा कि नया घर कब मिलेगा। कई परिवार सालों से किराए पर रह रहे हैं, बिना किसी निश्चित भविष्य के। ऐसे में, लोगों के सामने दो ही रास्ते हैं—या तो जान जोखिम में डालकर उसी जर्जर घर में रहें, या अनिश्चित भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं। यही मजबूरी हर साल मानसून के दौरान मुंबई को एक बड़े हादसे के इंतजार में खड़ा कर देती है। मुंबई की यह तस्वीर सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर की नहीं, बल्कि एक गहरे सामाजिक और प्रशासनिक संकट की ओर इशारा करती है—जहां लोगों के पास “सुरक्षित जीवन” और “अपना घर” के बीच चुनाव करने की मजबूरी  
मुंबई म्यूजिक इवेंट में दर्दनाक हादसा: अत्यधिक शराब सेवन से युवक की मौत, महिला अस्पताल में भर्ती

मुंबई म्यूजिक इवेंट में दर्दनाक हादसा: अत्यधिक शराब सेवन से युवक की मौत, महिला अस्पताल में भर्ती

मुंबई म्यूजिक इवेंट में दर्दनाक हादसा: अत्यधिक शराब सेवन से युवक की मौत, महिला अस्पताल में भर्ती मुंबई के वर्ली इलाके में आयोजित एक म्यूजिक इवेंट के दौरान रविवार तड़के एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां कथित रूप से अत्यधिक शराब के सेवन के कारण एक 35 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि एक महिला को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना ‘Klangkuenstler All Night Long’ नामक म्यूजिकल शो के दौरान NSCI डोम में हुई। पुलिस के अनुसार, मृतक युवक और महिला दोनों इस इवेंट में शामिल हुए थे और डांस के दौरान उन्होंने कथित तौर पर अत्यधिक मात्रा में शराब, विशेष रूप से कॉकटेल्स का सेवन किया। कुछ समय बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। युवक को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं महिला का इलाज जारी है और उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अत्यधिक शराब सेवन के साथ-साथ डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) भी युवक की मौत का कारण हो सकता है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण का पता विस्तृत जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। ताड़देव पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु (ADR) का मामला दर्ज कर लिया है और सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में भी मुंबई के गोरेगांव स्थित NESCO एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान ड्रग ओवरडोज के कारण दो MBA छात्रों की मौत हो गई थी। उस मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। यह ताजा घटना एक बार फिर बड़े म्यूजिक इवेंट्स में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। साथ ही यह भी संकेत देती है कि ऐसे आयोजनों में शराब और अन्य पदार्थों के सेवन पर सख्त नियंत्रण की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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