Author: Mahesh Rathod

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मुंबई में नशीली दवाओं के बड़े नेटवर्क पर ANC की कार्रवाई, ₹2.53 करोड़ की 9,800 गोलियां जब्त

मुंबई में नशीली दवाओं के बड़े नेटवर्क पर ANC की कार्रवाई, ₹2.53 करोड़ की 9,800 गोलियां जब्त

मुंबई में नशीली दवाओं के बड़े नेटवर्क पर ANC की कार्रवाई, ₹2.53 करोड़ की 9,800 गोलियां जब्त मुंबई: मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने शहर में Psychotropic Drugs की कथित अवैध बिक्री और वितरण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गोवंडी इलाके से करीब ₹2.53 करोड़ कीमत की 9,800 गोलियां बरामद की हैं। इस कार्रवाई में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई गोवंडी के डॉ. जाकिर हुसैन नगर इलाके में एक आवासीय परिसर में की गई। ANC की वर्ली यूनिट को कथित तौर पर नशीली और प्रतिबंधित ‘बटन’ गोलियों की अवैध बिक्री की सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर टीम ने छापेमारी की। ₹1.98 करोड़ की Nitrazepam गोलियां बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने 4,500 Nitrazepam टैबलेट बरामद कीं। ये गोलियां NITCOR-10 ब्रांड नाम से बताई गई हैं। पुलिस के अनुसार, जब्त Nitrazepam का कुल वजन करीब 2.475 किलोग्राम था और इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹1.98 करोड़ बताई गई है। Nitrazepam एक Psychotropic substance है और इसके अनधिकृत कब्जे, बिक्री तथा वितरण पर NDPS Act के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है। Alprazolam की 5,300 गोलियां भी मिलीं कार्रवाई के दौरान ANC टीम को Alprazolam की 5,300 टैबलेट भी बरामद हुईं। ये PROCALM-1 ब्रांड नाम से बताई गई हैं। पुलिस के अनुसार, इन गोलियों का कुल वजन करीब 689 ग्राम है और इनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹55.12 लाख है। इस तरह Nitrazepam और Alprazolam को मिलाकर कुल 9,800 टैबलेट बरामद हुईं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹2.53 करोड़ से अधिक बताई गई है। NDPS Act के तहत मामला दर्ज बरामदगी के बाद पुलिस ने Deonar Police Station में मामला दर्ज किया है। मामले में Narcotic Drugs and Psychotropic Substances (NDPS) Act, 1985 की धारा 8(c) और 22(c) के तहत कार्रवाई की गई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद गोलियां आरोपी तक कहां से पहुंचीं और इन्हें आगे किसे सप्लाई किया जाना था। सप्लाई नेटवर्क की तलाश में पुलिस पुलिस जांच का दायरा केवल बरामद गोलियों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित ड्रग सप्लाई नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग जुड़े हैं। जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर फोकस किया जा रहा है: पुलिस बरामद सामग्री, संभावित संपर्कों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई मुंबई पुलिस के मुताबिक, पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। ऑपरेशन की निगरानी मुंबई पुलिस आयुक्त दीन भारती, Joint Commissioner of Police (Crime) अनिल कुंभारे, Additional Commissioner of Police (Crime) कृष्णकांत उपाध्याय और DCP (ANC) पौर्णिमा चौगुले-शृंगी के मार्गदर्शन में हुई। वर्ली यूनिट के प्रभारी PI संतोष सालुंखे के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। टीम में PI दिगंबर पाटील, PSI रोहित साली सहित ANC के अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। अब आगे क्या? ₹2.53 करोड़ से अधिक कीमत की Psychotropic Tablets की इस बरामदगी के बाद मुंबई पुलिस की जांच अब कथित सप्लाई चेन तक पहुंचने पर केंद्रित है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद दवाओं का स्रोत क्या था, इनके संभावित खरीदार कौन थे और इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है या नहीं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।  
बाणगंगा तालाब में फिर सैकड़ों मछलियों की मौत, BMC ने बुलाई स्थानीय लोगों और पुजारियों की बैठक

बाणगंगा तालाब में फिर सैकड़ों मछलियों की मौत, BMC ने बुलाई स्थानीय लोगों और पुजारियों की बैठक

बाणगंगा तालाब में फिर सैकड़ों मछलियों की मौत, BMC ने बुलाई स्थानीय लोगों और पुजारियों की बैठक मुंबई: दक्षिण मुंबई के वॉकश्वर इलाके में स्थित ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब में एक बार फिर सैकड़ों मछलियों के मृत मिलने से चिंता बढ़ गई है। हर साल इसी अवधि के आसपास मछलियों के मरने की घटनाएं सामने आने के बाद अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस समस्या को रोकने के लिए स्थानीय निवासियों और मंदिर के पुजारियों के साथ बैठक करने का फैसला किया है। BMC के अधिकारियों के मुताबिक, बैठक इस सप्ताह D वार्ड कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य तालाब के पानी को प्रदूषित होने से बचाने और जलीय जीवों की सुरक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करना है। पितृपक्ष के दौरान बढ़ जाती है चिंता BMC अधिकारियों के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए बाणगंगा तालाब पहुंचते हैं। इस दौरान कुछ लोग पानी में आटे और दूध से बनी सामग्री तथा अन्य पूजन सामग्री डालते हैं। BMC का कहना है कि ऐसी सामग्री पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। जैविक सामग्री के बढ़ने से पानी में घुली ऑक्सीजन कम होने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर पड़ सकता है। हालांकि, मछलियों की मौत का सटीक कारण निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक और पर्यावरणीय जांच महत्वपूर्ण होगी। हर साल सामने आ रहा है मछलियों की मौत का मामला BMC अधिकारियों के अनुसार, बाणगंगा तालाब में मछलियों के मरने की समस्या लगभग हर वर्ष इसी समय के आसपास सामने आती है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई हैं। इसे देखते हुए BMC अब केवल सफाई अभियान तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय लोगों और पुजारियों को जागरूक करने पर जोर दे रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, बैठक में लोगों को समझाया जाएगा कि धार्मिक आस्था और परंपराओं के साथ-साथ तालाब के जल और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा भी जरूरी है। पिछले साल हटाया गया था करीब 10,000 किलो कचरा बाणगंगा तालाब में पिछले वर्ष भी बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई थीं। उस समय BMC ने सफाई अभियान चलाकर करीब 10,000 किलोग्राम मृत मछलियां और पुष्प कचरा तालाब से हटाया था। इस घटना के बाद BMC ने तालाब परिसर में फूलों और खाद्य सामग्री के लिए संग्रहण डिब्बे भी लगाए थे, ताकि श्रद्धालुओं द्वारा छोड़ी जाने वाली सामग्री सीधे पानी में न जाए। इसके अलावा नियमित सफाई अभियान भी शुरू किए गए थे। BMC की बैठक में क्या होगा? इस सप्ताह होने वाली बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है: ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है बाणगंगा तालाब दक्षिण मुंबई के वॉकश्वर क्षेत्र में स्थित बाणगंगा तालाब का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान राम ने यहां जमीन पर बाण चलाकर गंगा की धारा प्रकट की थी, जिसके कारण इसका नाम बाणगंगा पड़ा। यह जलाशय मुंबई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है और इसका संरक्षण लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। तालाब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण एवं नियंत्रण से जुड़े क्षेत्र में स्थित है। इसी वजह से तालाब में बार-बार मछलियों के मरने की घटनाएं केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत से जुड़ा मुद्दा भी बन जाती हैं। सफाई से आगे अब जागरूकता पर जोर BMC की पिछली कार्रवाई में मृत मछलियों और कचरे को हटाने पर जोर दिया गया था। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए इस बार प्रशासन रोकथाम और जन-जागरूकता पर अधिक ध्यान देना चाहता है। धार्मिक गतिविधियों के दौरान पानी में जाने वाली सामग्री की मात्रा कम करना, फूलों और खाद्य सामग्री के लिए उपलब्ध संग्रहण डिब्बों का इस्तेमाल करना और तालाब में कचरा नहीं डालना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। बाणगंगा तालाब में मछलियों की मौत का मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि मुंबई की ऐतिहासिक जलधरोहरों को धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन के साथ कैसे सुरक्षित रखा जाए। BMC की प्रस्तावित बैठक के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर इस समस्या को रोकने के लिए कौन से स्थायी कदम उठाते हैं।  
मुंबई के CJP प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी पर NHRC का सख्त रुख, पुलिस से जांच के आदेश

मुंबई के CJP प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी पर NHRC का सख्त रुख, पुलिस से जांच के आदेश

मुंबई के CJP प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी पर NHRC का सख्त रुख, पुलिस से जांच के आदेश मुंबई: मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन को लेकर अब मानवाधिकार से जुड़ा मामला सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों की कथित मौजूदगी, उनके इस्तेमाल और प्रदर्शन से जुड़े फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस को मामले की जांच करने और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। NHRC ने मुंबई पुलिस के अलावा X Corp, MeitY और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को भी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। आखिर NHRC ने क्यों लिया संज्ञान? जानकारी के मुताबिक, दिल्ली स्थित Sewa Nyaya Uthan Foundation के Intervention Head सतिश वैद की शिकायत के आधार पर आयोग के समक्ष यह मामला पहुंचा। शिकायत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आए कुछ पोस्ट और वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में बच्चों को शामिल किया गया। शिकायत में कथित ग्रुप चैट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें प्रदर्शन की तैयारी और नाबालिगों की भागीदारी से संबंधित चर्चा होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने CJP से जुड़े अजिंक्य शिंदे, अभिजीत दिपके और सौरव दास समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और NHRC ने इन आरोपों की जांच के निर्देश दिए हैं। अभी यह अंतिम रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि आयोजकों ने जानबूझकर बच्चों का इस्तेमाल किया था। बच्चों को लेकर आयोग ने क्या चिंता जताई? NHRC की ओर से मामले को केवल किसी सार्वजनिक प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी तक सीमित नहीं माना गया। आयोग ने इस बात की जांच के निर्देश दिए हैं कि कहीं नाबालिगों को उनकी उम्र और संवेदनशीलता को देखते हुए किसी राजनीतिक प्रदर्शन में योजनाबद्ध तरीके से तो शामिल नहीं किया गया। आयोग ने कथित तौर पर इस पहलू की भी जांच करने को कहा है कि क्या बच्चों की मौजूदगी का इस्तेमाल पुलिस की संभावित कार्रवाई से बचने के लिए किया गया था। साथ ही, प्रदर्शन के दौरान बच्चों के फोटो और वीडियो बनाए जाने तथा बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के पहलू की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। मुंबई पुलिस को क्या जांच करनी होगी? NHRC ने मुंबई पुलिस को उपलब्ध वीडियो, फोटो, सोशल मीडिया सामग्री और कथित चैट रिकॉर्ड की जांच करने को कहा है। जांच में यह पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि: NHRC ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान संज्ञेय अपराध सामने आता है तो कानून के अनुसार FIR दर्ज की जाए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। X Corp और MeitY को भी निर्देश मामले में सिर्फ मुंबई पुलिस ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है। X Corp से संबंधित अकाउंट और कंटेंट रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा बच्चों की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को Information Technology Act और IT Rules के तहत लागू होने वाले प्रावधानों, विशेष रूप से डिजिटल सामग्री से जुड़ी due-diligence और रिकॉर्ड संरक्षण संबंधी जिम्मेदारियों की जांच करने को कहा गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की भी भूमिका महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान संबंधित नाबालिगों के हित और उनकी सुरक्षा प्रभावित न हो। कानून में बच्चों के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर क्या प्रावधान हैं? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में ऐसा कोई सामान्य प्रावधान नहीं है जो हर परिस्थिति में बच्चों को किसी सार्वजनिक सभा या शांतिपूर्ण प्रदर्शन में मौजूद रहने से प्रतिबंधित करता हो। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि इस अधिकार पर अनुच्छेद 19(3) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मामला तब गंभीर कानूनी सवाल खड़ा कर सकता है जब किसी बच्चे की मौजूदगी को क्रूरता, शोषण या किसी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल से जोड़ा जाए। Juvenile Justice Act की धारा 75 Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 75 बच्चे के साथ क्रूरता से संबंधित है। इसमें बच्चे की देखभाल या नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति द्वारा बच्चे को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक पीड़ा पहुंचाने की स्थिति में सजा का प्रावधान है। धारा 83(2) भी जांच के दायरे में NHRC ने पुलिस को JJ Act की धारा 83(2) की लागू होने की संभावना की भी जांच करने को कहा है। यह प्रावधान वयस्कों द्वारा बच्चों को गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने से संबंधित है। इसलिए जांच का मुख्य सवाल यह होगा कि प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी केवल संयोगवश थी या किसी ने उन्हें जानबूझकर किसी उद्देश्य से शामिल किया था। पहले भी राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों को लेकर उठे हैं सवाल राजनीतिक अभियानों और विरोध प्रदर्शनों में बच्चों की भागीदारी को लेकर इससे पहले भी बाल अधिकार संस्थाएं चिंता जताती रही हैं। 2019 में चुनावी प्रचार से जुड़े एक वीडियो को लेकर तत्कालीन NCPCR नेतृत्व ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से बच्चों की मौजूदगी के संबंध में जानकारी मांगी थी। CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी बच्चों की मौजूदगी को लेकर NCPCR ने चिंता जताई थी। इसके अलावा 2022 में भारत जोड़ो यात्रा और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी को लेकर भी बाल अधिकारों से जुड़े सवाल उठे थे। 2024 में भी राजनीतिक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी से संबंधित मामलों में NHRC की ओर से चिंता जताई गई थी। अब जांच के बाद क्या होगा? फिलहाल NHRC का कदम जांच के निर्देश...
मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी

मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी

मुंबई में ठाकरे बंधुओं की ‘विराट गर्जना’: SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब लंबे समय बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने मुंबई में ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। यह मार्च दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय के पास पहुंचा। मोर्चे में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शन में पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की गई थी। SIR रद्द करने की मांग, EVM के बजाय बैलेट पेपर की पैरवी मोर्चे को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। राज ठाकरे ने मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए SIR की प्रक्रिया और उसके प्रभाव पर सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, मतदाताओं की संख्या में इस तरह की बड़ी कमी को लेकर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। हालांकि, ये सभी दावे और आरोप राजनीतिक नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में बदलाव को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया गया है। उद्धव ठाकरे का CEC पर हमला उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने यह सवाल भी उठाया कि यदि SIR का उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को मतदाता सूची से हटाना था, तो इस प्रक्रिया में ऐसे कितने लोगों की पहचान हुई। उद्धव ठाकरे के इन आरोपों का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में किया गया है। वहीं, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं। महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.06 करोड़ नाम शामिल नहीं ठाकरे बंधुओं के विरोध प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े भी चर्चा के केंद्र में हैं। राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार, SIR से पहले महाराष्ट्र में 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 7,71,65,562 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल किए गए हैं, जबकि 2,06,88,487 नाम इस चरण में ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाए। यह संख्या पुराने मतदाता आधार की करीब 21.14 प्रतिशत है। ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाताओं में लगभग 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड-जेंडर मतदाता शामिल हैं। क्या 2 करोड़ से ज्यादा वोट हमेशा के लिए हट गए? यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 2.06 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इन मतदाताओं के Enumeration Forms उपलब्ध नहीं हो पाए थे। इसके पीछे मतदाता का अपने पते पर नहीं मिलना, स्थायी रूप से स्थान बदलना, मृत्यु, कहीं और पहले से पंजीकरण या अन्य कारण शामिल बताए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम फिर शामिल किए जा सकते हैं। इसलिए अंतिम मतदाता सूची में यह आंकड़ा बदल सकता है। पुणे, ठाणे और मुंबई में सबसे ज्यादा नाम प्रभावित राज्य के आंकड़ों में बड़े शहरों और जिलों में बड़ी संख्या में Enumeration Forms के उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। पुणे में करीब 28.6 लाख, ठाणे में 28.5 लाख, मुंबई उपनगर में 26.5 लाख, नागपुर में 14.43 लाख, नासिक में 10.27 लाख और मुंबई शहर में करीब 9.5 लाख नाम इस श्रेणी में बताए गए हैं। ठाकरे बंधुओं के एक मंच पर आने से बढ़ी राजनीतिक हलचल उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ मंच साझा करना इस पूरे प्रदर्शन का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू रहा। दोनों नेता लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक राह पर रहे हैं, लेकिन SIR और चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर दोनों ने संयुक्त रूप से मोर्चा निकाला। मोर्चे में कांग्रेस और NCP (SP) के नेताओं की मौजूदगी ने भी इसे विपक्षी दलों के साझा प्रदर्शन का रूप दिया। इस प्रदर्शन से साफ है कि महाराष्ट्र में SIR, मतदाता सूची में नामों की कमी और EVM बनाम बैलेट पेपर जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं। हालांकि, मतदाता सूची में अंतिम बदलाव दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।  
शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, 10 हजार से ज्यादा लोग जुटे; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग मुंबई: गांधी जयंती के मौके पर शुक्रवार को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच और चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई। पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए। Times of India के अनुसार, मुंबई पुलिस की Special Branch ने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू होने के समय भीड़ का अनुमान लगभग 9,000 से 10,000 लगाया था, जबकि बाद की रिपोर्टों में प्रदर्शन में 10,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। वाहनों को प्रदर्शन स्थल के करीब जाने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे और पुलिसकर्मी भीड़ तथा यातायात को नियंत्रित कर रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान माहौल मुख्यतः शांतिपूर्ण रहा और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति सामान्य बनी रही। मुंबई पुलिस ने इससे पहले CJP को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस ने Bombay High Court के निर्देशों, क्षेत्र के Silence Zone होने तथा संभावित यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था। CEC के इस्तीफे की मांग CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग पक्ष मौजूद हैं और मतदाता सूची से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों तथा जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है। राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी निशाना अपने भाषण में Dipke ने राजनीतिक दलों में नेताओं के दलबदल और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों ने पार्टियां बदली हैं और इस पर राजनीतिक व्यवस्था में जवाबदेही की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगा और दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी करेगा। फिल्म और सामाजिक क्षेत्र से भी पहुंचे लोग शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में फिल्म और कला जगत से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, विशाल भारद्वाज और विशाल ददलानी समेत कई चर्चित हस्तियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। विशाल ददलानी ने अपने संबोधन में दावा किया कि उनका नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है। ऐसे व्यक्तिगत दावों की आधिकारिक स्थिति संबंधित चुनावी रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है। हिंदू-मुस्लिम एकता पर Dipke का बयान प्रदर्शन के दौरान Abhijeet Dipke ने धर्म के आधार पर विभाजन की राजनीति की आलोचना करते हुए हिंदू-मुस्लिम एकता की बात कही। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसी विभाजनकारी राजनीति काम नहीं करेगी। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू के योगदान का भी उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक भागीदारी पर जोर दिया। स्थानीय निवासियों ने भी जताई आपत्ति जहां प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, वहीं शिवाजी पार्क के कुछ स्थानीय निवासियों ने कार्यक्रम से होने वाले शोर, यातायात और रोजमर्रा की गतिविधियों में व्यवधान को लेकर आपत्ति जताई। गीतकार जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर स्थानीय निवासियों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के कारण होने वाली परेशानियों पर आवाज उठाना उचित है और राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों के समय भी इसी तरह के सवाल उठाए जाने चाहिए। आंदोलन आगे बढ़ाने का ऐलान CJP ने संकेत दिया है कि यदि उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को मुंबई से आगे अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। संगठन ने Goa, Bengaluru और Kolkata समेत अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन की योजना की बात कही है। इस बीच चुनावी सूची, SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। मामले में अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष आगे की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।  
मुंबई में CNG फिर महंगी, ₹1 प्रति किलो बढ़ा दाम; अब ₹89, इस साल पांचवीं बढ़ोतरी

मुंबई में CNG फिर महंगी, ₹1 प्रति किलो बढ़ा दाम; अब ₹89, इस साल पांचवीं बढ़ोतरी

मुंबई में CNG फिर महंगी, ₹1 प्रति किलो बढ़ा दाम; अब ₹89, इस साल पांचवीं बढ़ोतरी मुंबई: मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG से वाहन चलाने वाले लोगों के लिए ईंधन खर्च एक बार फिर बढ़ गया है। Mahanagar Gas Limited (MGL) ने 1 अक्टूबर 2026 से CNG की कीमत में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG की नई कीमत ₹89 प्रति किलो हो गई है। MGL ने कीमत बढ़ाने के पीछे इनपुट गैस की बढ़ती लागत को प्रमुख कारण बताया है। कंपनी के अनुसार, घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस की लागत के साथ-साथ आयातित Regasified Liquefied Natural Gas (RLNG) की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता और पश्चिम एशिया संकट का असर भी आयातित गैस की लागत पर पड़ा है। इस साल पांचवीं बार बढ़े CNG के दाम मुंबई में इस साल CNG की कीमत में यह पांचवीं बढ़ोतरी बताई जा रही है। अप्रैल के बाद से कीमत में कुल मिलाकर करीब ₹8 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। ताजा ₹1 की बढ़ोतरी के बाद CNG ₹89 प्रति किलो पर पहुंच गया है। लगातार बढ़ती कीमतों का असर खास तौर पर उन लोगों पर पड़ सकता है जो रोजाना CNG से चलने वाले ऑटो रिक्शा, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। ईंधन की लागत बढ़ने से वाहन संचालन का खर्च भी बढ़ सकता है। ऑटो और टैक्सी चालकों के खर्च पर असर CNG की कीमत बढ़ने का सीधा असर कमर्शियल वाहन चालकों की रोजाना की परिचालन लागत पर पड़ता है। मुंबई में बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा और टैक्सियां CNG पर निर्भर हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ऑटो यूनियनों ने भी लगातार बढ़ रही CNG कीमतों को लेकर बढ़ते परिचालन खर्च पर चिंता जताई है। अगर ईंधन खर्च आगे भी बढ़ता है, तो किराए में बदलाव की मांग का मुद्दा उठ सकता है। हालांकि, फिलहाल CNG की कीमत बढ़ने के साथ ही ऑटो या टैक्सी किराए में तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं हुई है। MGL का बड़ा CNG और PNG नेटवर्क Mahanagar Gas Limited मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG तथा PNG की आपूर्ति करने वाली प्रमुख गैस कंपनियों में से एक है। कंपनी का नेटवर्क बड़ी संख्या में वाहन चालकों और घरेलू PNG उपभोक्ताओं तक फैला हुआ है। CNG की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता बनी हुई है। MGL ने कहा है कि बढ़ती इनपुट लागत को देखते हुए कीमत में संशोधन जरूरी था, ताकि गैस की आपूर्ति को बनाए रखा जा सके। आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा दबाव? CNG की कीमत में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी पहली नजर में छोटी लग सकती है, लेकिन रोजाना वाहन चलाने वाले लोगों और व्यावसायिक वाहन संचालकों के लिए लगातार हो रही बढ़ोतरी का कुल प्रभाव ज्यादा हो सकता है। अब मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG की कीमत ₹89 प्रति किलो हो गई है। आगे अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों और घरेलू गैस लागत में होने वाले बदलावों पर CNG की कीमतों की दिशा निर्भर कर सकती है।  
उड़ान के बीच कॉकपिट में खूनी झड़प! को-पायलट के हमले के बाद 14,000 फीट नीचे आया विमान, भारतीय कैप्टन ने बचाई 174 यात्रियों की जान

उड़ान के बीच कॉकपिट में खूनी झड़प! को-पायलट के हमले के बाद 14,000 फीट नीचे आया विमान, भारतीय कैप्टन ने बचाई 174 यात्रियों की जान

उड़ान के बीच कॉकपिट में खूनी झड़प! को-पायलट के हमले के बाद 14,000 फीट नीचे आया विमान, भारतीय कैप्टन ने बचाई 174 यात्रियों की जान दुबई/तबुक: Dubai से Tel Aviv जा रही Flydubai की एक उड़ान बुधवार को उस समय गंभीर संकट में फंस गई, जब विमान के कॉकपिट में पायलटों के बीच कथित तौर पर हिंसक झड़प हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला किया और विमान को नियंत्रित करने की कोशिश की। इसी दौरान विमान करीब 14,000 फीट की ऊंचाई तेजी से नीचे आया, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई। घटना Flydubai Flight FZ1073 में हुई, जो Dubai International Airport से Tel Aviv के Ben Gurion Airport के लिए रवाना हुई थी। विमान में करीब 174 यात्री सवार थे। संकट के बाद विमान को Saudi Arabia के Tabuk Regional Airport की ओर मोड़ा गया और वहां सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। भारतीय कैप्टन पर कथित तौर पर चाकू से हमला इस घटना में भारतीय नागरिक कैप्टन Smit Machchhar घायल हुए। रिपोर्टों के अनुसार, हमले के बावजूद उन्होंने विमान को बचाने की कोशिश जारी रखी और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। दरवाजा खुलने के बाद कुछ यात्रियों और क्रू सदस्यों ने कथित हमलावर को काबू करने में मदद की। इसके बाद विमान में मौजूद Flydubai के अन्य पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला और उसे Tabuk में सुरक्षित उतारा। भारतीय दूतावास ने बताया कि कैप्टन Smit Machchhar का Tabuk के अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। कुछ ही सेकंड में 14,000 फीट नीचे आया विमान Flight tracking data के अनुसार, विमान ने उड़ान के दौरान बहुत तेजी से ऊंचाई खोई। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान करीब 14,000 फीट नीचे आया, जिसके बाद यात्रियों को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ। आपातकालीन संकेत भी जारी किए गए। विमान से पहले सामान्य आपातकालीन कोड 7700 और बाद में कथित अवैध हस्तक्षेप से संबंधित कोड 7500 प्रसारित हुआ। कुछ यात्रियों ने बताया कि विमान अचानक नीचे जाने लगा और स्थिति को समझने के बाद कुछ लोग कॉकपिट की ओर पहुंचे। यात्रियों ने कथित हमलावर को काबू किया रिपोर्टों के अनुसार, कैप्टन के घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों और क्रू ने कथित तौर पर को-पायलट को काबू कर लिया। विमान में मौजूद यात्रियों की मदद और दूसरे Flydubai पायलटों के हस्तक्षेप से विमान को सुरक्षित नियंत्रण में लिया गया। इसके बाद विमान ने Saudi Arabia के Tabuk Airport पर आपातकालीन लैंडिंग की। Flydubai ने अपने आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि FZ1073 विमान में उड़ान के दौरान एक घटना हुई और विमान Tabuk Airport में सुरक्षित उतर गया। कंपनी के अनुसार सभी यात्री सुरक्षित हैं। हमले की वजह अभी साफ नहीं घटना के पीछे की वजह और कथित हमले की मंशा अभी स्पष्ट नहीं है। UAE के Attorney General Hamad Saif al-Shamsi ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच टीम घटना से जुड़े सबूत और जानकारी जुटाकर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि घटना के पीछे क्या कारण था और क्या इसमें पहले से कोई योजना या किसी अन्य गतिविधि का संबंध था। Israel के अधिकारियों ने घटना को गंभीर सुरक्षा घटना के तौर पर देखा है। कुछ इजरायली अधिकारियों ने इसे संभावित आतंकी हमले के रूप में वर्णित किया है, लेकिन हमले का मकसद और किसी संगठन या देश से संबंध अभी आधिकारिक जांच का विषय है। इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी कहा है कि इस स्तर पर मकसद के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। भारतीय पायलट की बहादुरी की तारीफ घटना के बाद भारतीय कैप्टन Smit Machchhar की भूमिका की भारत और Israel में सराहना हुई। भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी उनकी बहादुरी की प्रशंसा की। Israel के प्रधानमंत्री Netanyahu ने भी कहा कि कैप्टन ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यात्रियों को सुरक्षित Israel पहुंचाया गया Tabuk में सुरक्षित लैंडिंग के बाद यात्रियों को बाद में एक वैकल्पिक उड़ान के जरिए Tel Aviv पहुंचाया गया। इस पूरी घटना ने विमान के कॉकपिट की सुरक्षा और पायलटों की सुरक्षा जांच से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। इस बीच Israel ने घटना के बाद Israel आने वाली उड़ानों के पायलटों की सुरक्षा और पहचान संबंधी जांच को और सख्त करने की बात कही है। फिलहाल जांच जारी है और घटना के पीछे की वास्तविक वजह, कथित हमले की मंशा तथा अन्य संभावित पहलुओं पर संबंधित अधिकारी जानकारी जुटा रहे हैं।  
मुंबई में 4 साल तक फ्रीजर में रखा रहा पिता का शव, बदबू से खुला राज; बेटी ने अंतिम संस्कार के बजाय शरीर सुरक्षित रखा

मुंबई में 4 साल तक फ्रीजर में रखा रहा पिता का शव, बदबू से खुला राज; बेटी ने अंतिम संस्कार के बजाय शरीर सुरक्षित रखा

मुंबई में 4 साल तक फ्रीजर में रखा रहा पिता का शव, बदबू से खुला राज; बेटी ने अंतिम संस्कार के बजाय शरीर सुरक्षित रखा मुंबई: मुंबई के मलाड ईस्ट में एक बंद पड़े क्लिनिक से करीब चार साल पुराना शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पड़ोसियों को परिसर से लगातार तेज बदबू आ रही थी। जब बदबू असहनीय हो गई, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने और परिसर का दरवाजा खुलने के बाद अंदर जो मिला, उसने पूरे मामले को चौंकाने वाला बना दिया। पुलिस को परिसर के अंदर रखे एक फ्रीजर में 80 वर्षीय बुजुर्ग का शव मिला। जांच में सामने आया कि बुजुर्ग की मौत जून 2022 में हार्ट अटैक के कारण हुई थी। पिता को अपने पास रखने की चाहत में लिया शव सुरक्षित रखने का फैसला पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, बुजुर्ग की मौत के बाद उनकी बेटी अपने पिता को लंबे समय तक अपने करीब रखना चाहती थी। परिवार ने कथित तौर पर शव का तत्काल अंतिम संस्कार कराने के बजाय उसे सुरक्षित रखने का रास्ता चुना। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार ने विदेश में मौजूद ऐसी संस्थाओं के बारे में जानकारी जुटाई जो मृत शरीर को बेहद कम तापमान में संरक्षित रखने की क्रायोनिक्स तकनीक से जुड़ी सेवाएं प्रदान करती हैं। परिवार ने अमेरिका स्थित एक संस्था से भी संपर्क करने की कोशिश की थी। बंद पड़ा था क्लिनिक, बदबू के बाद पुलिस को मिली जानकारी यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब परिसर पिछले कुछ समय से बंद था और वहां से निकल रही तेज बदबू ने आसपास के लोगों की परेशानी बढ़ा दी। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और परिसर की तलाशी ली। पुलिस को फ्रीजर के अंदर शव मिला। इसके बाद मृतक के परिवार से संपर्क किया गया। पुलिस ने परिवार के सदस्यों के साथ-साथ क्लिनिक प्रबंधन और संपत्ति के मालिक के बयान भी दर्ज किए हैं। क्या शव को इस तरह सुरक्षित रखना कानूनी है? अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि किसी मृत व्यक्ति के शरीर को इतने लंबे समय तक इस तरह सुरक्षित रखने की कानूनी अनुमति थी या नहीं। पुलिस इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। फिलहाल पुलिस ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि परिवार या किसी अन्य व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने इस मामले में कानूनी सलाह भी ली थी और महिला ने अपनी ओर से वकीलों को नियुक्त किया है। पुलिस जांच जारी, अंतिम संस्कार पर अभी फैसला नहीं कुरार पुलिस इस मामले के कानूनी और पारिवारिक दोनों पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल शव के अंतिम संस्कार को लेकर भी पुलिस की ओर से अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सबसे अहम सवाल यही है कि 2022 में हुई मौत के बाद शव को इतने लंबे समय तक किस प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया और स्थानीय प्रशासन या पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। पुलिस जांच पूरी होने और उपलब्ध दस्तावेजों व विशेषज्ञों की राय के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। Undercover Editor News Channel इस मामले से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने पर अपने पाठकों तक अपडेट पहुंचाएगा।  
सांताक्रूज में सीवर सफाई के दौरान बड़ा हादसा: 47 वर्षीय मजदूर की मौत, एक घायल; सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप

सांताक्रूज में सीवर सफाई के दौरान बड़ा हादसा: 47 वर्षीय मजदूर की मौत, एक घायल; सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप

सांताक्रूज में सीवर सफाई के दौरान बड़ा हादसा: 47 वर्षीय मजदूर की मौत, एक घायल; सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप मुंबई: सांताक्रूज ईस्ट में सोमवार, 28 सितंबर 2026 की सुबह सीवर सफाई के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक हाउसिंग सोसायटी की ड्रेनेज लाइन की सफाई के लिए सीवर चैंबर में उतरे दो मजदूरों में से एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा सुबह करीब 11 बजे 8th Golibar Road स्थित Bhavya Niketan Society के पास, V.N. Desai Hospital के सामने हुआ। पुलिस ने मृतक की पहचान संतोष गणपत काश्ते (47) के रूप में की है, जबकि घायल मजदूर की पहचान अजय ध्यानचंद ठाकुर (26) के तौर पर हुई है। सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाने का आरोप Vakola Police Station के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नवनाथ घुगे के अनुसार, दोनों मजदूरों को कथित तौर पर सीवर सफाई के दौरान आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। पुलिस के मुताबिक, Bhavya Niketan Society के सचिव ने जाम हुई सीवेज लाइन को साफ कराने के लिए जाधव नामक एक सेवानिवृत्त BMC अधिकारी से संपर्क किया था। आरोप है कि जाधव ने आगे दोनों मजदूरों को इस काम के लिए लगाया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि मजदूरों को किस परिस्थिति में काम पर लगाया गया और उन्हें काम के दौरान आवश्यक सुरक्षा इंतजाम क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए। BMC ने बताई अलग स्थिति BMC के अनुसार, सोसायटी ने अपनी आंतरिक सीवर लाइन की सफाई के लिए निजी कर्मचारियों को लगाया था। ये कर्मचारी BMC के कर्मचारी नहीं थे। BMC का कहना है कि सफाई के दौरान सड़क पर स्थित नगरपालिका के सीवर मैनहोल को कथित तौर पर BMC कर्मचारियों को सूचना दिए बिना खोला गया, जिसके बाद दोनों मजदूर उस चैंबर में प्रवेश कर गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस और 108 एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया। फायर ब्रिगेड के जवानों ने दोनों मजदूरों को चैंबर से बाहर निकाला। अस्पताल में एक की मौत रेस्क्यू के बाद दोनों मजदूरों को V.N. Desai Hospital ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने संतोष गणपत काश्ते को ‘बrought dead’ घोषित कर दिया। वहीं, अजय ध्यानचंद ठाकुर को इलाज के लिए Medical Intensive Care Unit (MICU) में भर्ती कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नवनाथ घुगे के अनुसार, पुलिस फिलहाल मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद मामले में FIR दर्ज करने की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि दोनों मजदूरों को किसने काम पर लगाया, सुरक्षा उपकरण क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए और नगरपालिका के सीवर चैंबर में उन्हें किस परिस्थिति में प्रवेश कराया गया। फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  
नवी मुंबई में तेज रफ्तार टैक्सी ने ऑटो को मारी टक्कर, बैंक कर्मचारी की मौत; 5 घायल

नवी मुंबई में तेज रफ्तार टैक्सी ने ऑटो को मारी टक्कर, बैंक कर्मचारी की मौत; 5 घायल

नवी मुंबई में तेज रफ्तार टैक्सी ने ऑटो को मारी टक्कर, बैंक कर्मचारी की मौत; 5 घायल नवी मुंबई: Seawoods इलाके में तेज रफ्तार टैक्सी और ऑटो रिक्शा के बीच हुई जोरदार टक्कर में एक बैंक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार, हादसे में Seawoods के NRI Complex के निवासी एक बैंक कर्मचारी को गंभीर चोटें आई थीं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे में टैक्सी में सवार पांच लोगों को भी चोटें आईं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उनकी चोटों की स्थिति को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। टैक्सी चालक गिरफ्तार पुलिस ने हादसे के बाद टैक्सी चालक Mobin Asif Shaikh (35) को गिरफ्तार किया है। वह मुंबई के Mankhurd इलाके का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत लापरवाही से वाहन चलाने के कारण मौत, धारा 125(b) के तहत दूसरे व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालते हुए गंभीर चोट पहुंचाने और धारा 281 के तहत सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाने से संबंधित मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। हादसे की जांच जारी फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। हादसा किस परिस्थिति में हुआ, टैक्सी की रफ्तार कितनी थी और टक्कर के पीछे अन्य कोई कारण था या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Undercover Editor News Channel हादसे से जुड़ी आगे की आधिकारिक जानकारी सामने आने पर अपने पाठकों तक अपडेट पहुंचाएगा।

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