Author: Mahesh Rathod

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₹15 लाख रिश्वत मामले में मुंबई के निलंबित जज पर मुकदमे की तैयारी, ACB ने अभियोजन मंजूरी मांगी

₹15 लाख रिश्वत मामले में मुंबई के निलंबित जज पर मुकदमे की तैयारी, ACB ने अभियोजन मंजूरी मांगी

₹15 लाख रिश्वत मामले में मुंबई के निलंबित जज पर मुकदमे की तैयारी, ACB ने अभियोजन मंजूरी मांगी क्लर्क पर जज के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप; फोरेंसिक जांच में कथित बातचीत और वॉयस सैंपल का मिलान मुंबई: मुंबई सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट के एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार मामले में कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जज के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन मंजूरी मांगी है। जज फिलहाल निलंबित हैं। ACB ने जुलाई में अभियोजन मंजूरी के लिए अपना प्रस्ताव कानून एवं न्याय विभाग को भेजा था। विभाग ने इसे सक्षम प्राधिकारी के फैसले के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट भेज दिया है। ACB के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मंजूरी मिलने के बाद ही मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। ₹15 लाख रिश्वत लेने का आरोप मामला नवंबर 2025 में दर्ज FIR से जुड़ा है। ACB ने उस समय जज की अदालत में क्लर्क-कम-टाइपिस्ट चंद्रकांत वासुदेव को कथित तौर पर ₹15 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। ACB का आरोप है कि क्लर्क ने एक सिविल विवाद में शिकायतकर्ता के पक्ष में आदेश दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की थी और कथित तौर पर यह रकम जज की ओर से ली गई थी। जज को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया था। ACB के अनुसार, जज को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए सीधे रंगे हाथ नहीं पकड़ा गया था। इसलिए जांच में उनकी कथित भूमिका स्थापित करने के लिए बातचीत की फोरेंसिक जांच कराई गई। बातचीत की रिकॉर्डिंग और वॉयस सैंपल की जांच ACB अधिकारी के मुताबिक, स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट में कथित बातचीत की पुष्टि हुई और आवाज के नमूने का भी मिलान किया गया। इसके बाद एजेंसी ने अभियोजन मंजूरी के लिए आवेदन करने का फैसला किया। जांच के दौरान ACB ने जज और क्लर्क के बीच अदालत के समय के बाद हुई कई फोन कॉल्स की भी जानकारी जुटाई। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अनुमति लेकर जज के परिसर की तलाशी और आगे की जांच की गई। दिसंबर 2025 में नोटिस मिलने के बाद जज ACB के सामने पेश हुए थे। जांच के दौरान उनका वॉयस सैंपल लिया गया और मोबाइल फोन भी आगे की जांच के लिए जब्त किया गया। ऐसे शुरू हुआ था मामला ACB के अनुसार, मामला सितंबर 2025 में शुरू हुआ। शिकायतकर्ता एक कंपनी की जमीन पर कथित जबरन कब्जे से जुड़े सिविल विवाद में शामिल था। 9 सितंबर को सुनवाई के दौरान जज के अदालत में तैनात क्लर्क ने शिकायतकर्ता के सहयोगी से कथित तौर पर संपर्क किया और कहा कि यदि “साहब के लिए कुछ किया जाए” तो उसके पक्ष में आदेश हो सकता है। इसके बाद कथित तौर पर ₹25 लाख की मांग की गई, जिसमें ₹15 लाख जज और ₹10 लाख क्लर्क के लिए बताए गए। बाद में कथित तौर पर रकम घटाकर ₹15 लाख कर दी गई। 8 नवंबर को कथित तौर पर धमकी भरी बातचीत के बाद शिकायतकर्ता ने ACB से संपर्क किया। इसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और 11 नवंबर 2025 को क्लर्क को कथित तौर पर ₹15 लाख स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया। ACB का दावा है कि इसके बाद क्लर्क के मोबाइल से जज को WhatsApp कॉल की गई, जिसमें कथित तौर पर रिश्वत की रकम मिलने की जानकारी दी गई। एजेंसी के मुताबिक, बातचीत में कथित तौर पर जज ने रकम अपने घर लाने को कहा। इस बातचीत की रिकॉर्डिंग स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में किए जाने का दावा किया गया है। अभियोजन मंजूरी का इंतजार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत सार्वजनिक सेवक के खिलाफ कथित आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े अपराध में अदालत द्वारा संज्ञान लेने से पहले अभियोजन मंजूरी आवश्यक होती है। कानून का उद्देश्य अधिकारियों को झूठी या बेबुनियाद शिकायतों से संरक्षण देना भी है। क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव को दिसंबर 2025 में जमानत मिल चुकी है, जबकि जज फिलहाल निलंबित हैं। उनके खिलाफ विभागीय जांच अभी शुरू नहीं हुई है। अब पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम अभियोजन मंजूरी पर सक्षम प्राधिकारी का फैसला होगा। मंजूरी मिलने के बाद ही ACB अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सकेगी। जज के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच एजेंसी के आरोप हैं और मामले में अंतिम दोष सिद्ध होना अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।  
मुंबई में Gen Z की बुलंद आवाज़, विरोध प्रदर्शनों से राजनीति तक पर खुली चर्चा

मुंबई में Gen Z की बुलंद आवाज़, विरोध प्रदर्शनों से राजनीति तक पर खुली चर्चा

मुंबई में Gen Z की बुलंद आवाज़, विरोध प्रदर्शनों से राजनीति तक पर खुली चर्चा दिल से बोल: मुंबई विद Gen Z राइजिंग’ में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी, हालिया प्रदर्शनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर विचार-विमर्श मुंबई: मुंबई में सोमवार को युवाओं की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को लेकर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों, कलाकारों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों ने हालिया विरोध प्रदर्शनों और भारतीय राजनीति में Gen Z की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। ‘Dil Se Bol: Mumbai with Gen Z Rising’ नामक यह कार्यक्रम वाई.बी. चव्हाण सेंटर में DIL Se Bol की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी स्टैंड-अप कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने की। कवि पुनीत शर्मा और कॉमेडियन अबिश मैथ्यू की प्रस्तुतियों के बाद पैनल चर्चा हुई, जिसमें एनसीपी (एसपी) प्रवक्ता अनिश गावंडे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रिया अहिर और रघुराम शामिल हुए। कई अन्य कलाकारों और कवियों ने भी स्वतंत्रता और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। हालिया छात्र प्रदर्शनों पर चर्चा कार्यक्रम के दौरान हालिया Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े छात्र प्रदर्शनों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। रिया अहिर ने 20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि पुलिस वाहन के सामने हाथ उठाए उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्होंने विरोध में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने का फैसला किया। अहिर ने दावा किया कि उन्होंने घटनास्थल पर एक पुलिस वाहन की नंबर प्लेट की तस्वीर ली और पाया कि उस पर अनिवार्य हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नहीं थी। उन्होंने ऐसे नौ अन्य वाहनों की भी पहचान करने का दावा किया। प्रदर्शनकारियों की एकजुटता का जिक्र अनिश गावंडे ने प्रदर्शनों के दौरान दिखाई दी एकजुटता का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई लोग रातभर प्रदर्शन स्थल पर रुके रहे और स्वयंसेवकों ने प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन तथा अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया। गावंडे ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग जगहों से लोग समर्थन देने पहुंचे। उनके अनुसार, बुजुर्गों से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों तक ने प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। शबाना आजमी ने युवाओं की भूमिका पर कही बात कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा कि हालिया प्रदर्शनों ने युवाओं के राजनीति से दूर रहने की धारणा को चुनौती दी है। उन्होंने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज को युवा पीढ़ी की आवाज़ को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने जुलाई में हुए प्रदर्शनों का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां का माहौल उनके लिए बेहद प्रभावशाली था और युवाओं ने अपनी अहमियत का एहसास कराया। आंसू गैस और मीडिया कवरेज पर सवाल कार्यक्रम के समापन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 20 जुलाई के प्रदर्शनों और जंतर-मंतर पर कथित तौर पर आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं में मौजूद असंतोष की जड़ें देश में लंबे समय से चली आ रही सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं से जुड़ी हैं। बोरा ने मुख्यधारा के टेलीविजन मीडिया के कवरेज की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने प्रदर्शनों की वास्तविक स्थिति को सही तरीके से पेश नहीं किया। उन्होंने युवाओं से राजनीतिक प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भागीदारी की अपील की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि Gen Z अब केवल सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने वाली पीढ़ी नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी भूमिका को लेकर भी मुखर हो रही है। युवाओं की यह बढ़ती राजनीतिक भागीदारी आने वाले समय में राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है।  
पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी, आज मुंबई में मंत्री से मुलाकात

पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी, आज मुंबई में मंत्री से मुलाकात

पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी, आज मुंबई में मंत्री से मुलाकात छात्र प्रतिनिधिमंडल की आदिवासी विकास मंत्री से मुलाकात, छात्रावासों की सुरक्षा और ₹1 करोड़ बीमा समेत कई मांगें पुणे/मुंबई: पुणे के आदिवासी सरकारी छात्रावास में छात्रों का आंदोलन सोमवार को 11वें दिन भी जारी रहा। अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए 10 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल आज मुंबई पहुंचकर आदिवासी विकास मंत्री प्रो. डॉ. अशोक रामाजी उईके से मंत्रालय में मुलाकात करेगा। छात्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात कर अपनी मांगें रखने की कोशिश करेंगे। हड़ताल में शामिल छह छात्र—श्वेता गिरनाक (26), निकिता मेचकर (22), शरद थोकल (26), विजय भांदबल (25), राहुल धनवे (26) और राजाराम पाडवी (20)—पुणे के हडपसर-मांजरी सीमा के पास स्थित आदिवासी सरकारी बालक छात्रावास में अनशन जारी रखे हुए हैं। सरकार के 14 अगस्त के GR को वापस लेने की मांग छात्रों की प्रमुख मांगों में महाराष्ट्र सरकार द्वारा 14 अगस्त 2026 को जारी आदिवासी छात्रावासों से संबंधित शासन निर्णय (GR) को वापस लेना शामिल है। छात्र संगठन का कहना है कि नया आदेश मौजूदा परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए। छात्रों ने 11 नवंबर 2011 के GR के आधार पर संशोधित आदेश जारी करने की मांग की है। साथ ही छात्रावासों में मिलने वाले भत्तों और अन्य आर्थिक सुविधाओं को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जोड़ने की मांग की गई है, ताकि महंगाई के अनुसार इन सुविधाओं में हर साल बढ़ोतरी हो सके। छात्रावासों में सुरक्षा और ₹1 करोड़ बीमा की मांग आदिवासी छात्रों ने छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। इसके अलावा प्रत्येक आदिवासी छात्र के लिए ₹1 करोड़ का बीमा कवर देने की मांग भी रखी गई है। यह मांग गडचिरोली में सांप के जहर से तीन आदिवासी छात्रों की हालिया मौत के बाद और महत्वपूर्ण हो गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मृत छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की भी मांग की है। महिला छात्रों के लिए सुरक्षित छात्रावास की मांग छात्रों ने पुणे में आदिवासी छात्राओं के लिए सुरक्षित और सभी जरूरी सुविधाओं से लैस केंद्रीय छात्रावास भवन बनाने की मांग भी की है। इसके अलावा छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में खाली पड़े पदों को तत्काल भरने की मांग की गई है। इनमें चपरासी, सुरक्षा गार्ड और सफाई कर्मचारियों के पद शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि नियमित भर्ती पूरी होने तक इन पदों पर स्थायी या अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। पहले भी हो चुकी है मंत्री और अधिकारियों से बैठक छात्र प्रतिनिधियों ने 18 अगस्त को आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके से मुलाकात की थी। इसके बाद 22 अगस्त को आदिवासी विकास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त और अन्य अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई। हालांकि, मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद छात्रों का आंदोलन और अनशन जारी है। अब छात्रों की नजर आज मुंबई में होने वाली बैठक पर है। प्रदर्शनकारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर आदिवासी छात्रों की सुरक्षा, शिक्षा और छात्रावासों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान करेगी।  
मुंबई में गणेश प्रतिमा गिरने से बड़ा हादसा, 2 की मौत; 5 घायल

मुंबई में गणेश प्रतिमा गिरने से बड़ा हादसा, 2 की मौत; 5 घायल

मुंबई में गणेश प्रतिमा गिरने से बड़ा हादसा, 2 की मौत; 5 घायल भुलेश्वर में ‘भुलेश्वरचा राजा’ की आगमन शोभायात्रा के दौरान हादसा, घायलों में 5 और 7 साल की दो बच्चियां भी शामिल मुंबई: भुलेश्वर इलाके में शनिवार रात गणेश प्रतिमा की आगमन शोभायात्रा के दौरान बड़ा हादसा हो गया। ‘भुलेश्वरचा राजा’ की विशाल गणेश प्रतिमा अचानक गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो बच्चियां भी शामिल हैं। यह हादसा शनिवार, 22 अगस्त को रात करीब 9:30 बजे बलराम मर्चेंट रोड पर कबूतरखाना के पास जय अंबे चौक इलाके में हुआ। हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, 108 एंबुलेंस और बीएमसी की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार, हादसे में कुल सात लोग प्रभावित हुए। इनमें 33 वर्षीय संकेत नेवसे को रिलायंस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं 30 वर्षीय बृजेश हेमंत जोशी को जी.टी. अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। हादसे में घायल 38 वर्षीय वैभव घेनंद और 25 वर्षीय पवन चौरसिया का जी.टी. अस्पताल में इलाज चल रहा है और दोनों की हालत स्थिर बताई गई है। घायलों में 5 वर्षीय लावण्या गनेर, 7 वर्षीय दिव्या गनेर और 26 वर्षीय कुणाल काशीद भी शामिल हैं। तीनों को जे.जे. अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने में जुट गईं। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल बिना भवन के, 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं; सरकारी आंकड़ों से खुली शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर

राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल बिना भवन के, 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं; सरकारी आंकड़ों से खुली शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर

राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल बिना भवन के, 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं; सरकारी आंकड़ों से खुली शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर जयपुर: राजस्थान की सरकारी स्कूल व्यवस्था को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राज्य सरकार के अनुसार राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। यह जानकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली के सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने दी। सरकार के मुताबिक ये आंकड़े UDISE 2025-26 के हैं और समग्र शिक्षा अभियान के तहत दर्ज किए गए हैं। जयपुर में 38 स्कूल बिना भवन राजधानी जयपुर में ही 38 सरकारी स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ऐसे स्कूल झालावाड़ जिले के अकलेरा ब्लॉक में हैं, जहां 23 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। इसके बाद खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 स्कूल हैं। फालोदी के बाप में 11 और बांसवाड़ा के छोटीसड़वन में 10 स्कूल बिना भवन के हैं। 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अपने भवन वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। शौचालय की कमी के मामले में बांसवाड़ा 188 स्कूलों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूलों में शौचालय सुविधा नहीं है। बीकानेर, झालावाड़ और जैसलमेर भी प्रभावित जिलों में शामिल हैं। 1,049 स्कूलों में पीने का पानी नहीं बुनियादी सुविधाओं की स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। 1,049 सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इनमें दौसा के 96, उदयपुर के 70, अलवर के 65, करौली के 60 और बांसवाड़ा के 58 स्कूल शामिल हैं। 3,768 स्कूल जर्जर और असुरक्षित होने का दावा नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने सरकार पर स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस योजना नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछले साल हुए एक ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि 3,768 सरकारी स्कूल पूरी तरह जर्जर और उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित किए गए हैं। उनके मुताबिक, ऐसे स्कूलों को बंद या दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने से विद्यार्थियों के नामांकन पर भी असर पड़ा है। जूली ने यह भी दावा किया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में 83,783 कमरे जर्जर और असुरक्षित हैं। सरकार ने ₹3,000 करोड़ से अधिक के प्रावधान बताए राज्य सरकार ने बताया कि स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए ₹550 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं बिना भवन वाले और जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों के लिए नए भवनों के निर्माण हेतु ₹450 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्कूलों के नए निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल ₹2,500 करोड़ और पांच वर्षों में कुल ₹12,500 करोड़ उपलब्ध कराने की बात सरकार ने कही है। इसके लिए DMFT, समग्र शिक्षा, राज्य निधि, VB-G RAM-G, सांसद/विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि, SDRF और CSR सहित विभिन्न स्रोतों से धन जुटाया जाएगा। यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर निरीक्षण और विरोध का दौर जारी है। ऐसे में सरकार के सामने अब इन आंकड़ों को सुधारने के साथ-साथ विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन, शौचालय और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती है।  
मुंबई में ₹125 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 110 म्यूल बैंक अकाउंट का नेटवर्क बेनकाब

मुंबई में ₹125 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 110 म्यूल बैंक अकाउंट का नेटवर्क बेनकाब

मुंबई में ₹125 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 110 म्यूल बैंक अकाउंट का नेटवर्क बेनकाब मुंबई: मुंबई पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट सट्टेबाजी और ऑनलाइन कैसीनो की आड़ में होने वाले साइबर फ्रॉड से जुड़े एक बड़े म्यूल बैंक अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए महज 17 बैंक खातों के जरिए एक से दो महीने के भीतर ₹125 करोड़ से अधिक की रकम का लेन-देन किया गया। पुलिस ने अब तक ऐसे 110 बैंक खातों की पहचान की है। इनमें से 17 खातों का संबंध देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 38 साइबर अपराध की शिकायतों और मामलों से सामने आया है। तीन आरोपी गिरफ्तार इस मामले में मुंबई पुलिस की डोंगरी पुलिस के साइबर सेल ने मध्य प्रदेश के रहने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निखिल कमलकुमार जैसवानी (26), राहुल श्यामलाल पारसवानी (32) और जय बिहारी लाल तिरयानी (26) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान पांच अन्य संदिग्धों की भी पहचान हुई है और उनकी तलाश के लिए कार्रवाई जारी है। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोगों को बनाते थे निशाना जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले छोटी रकम देने का लालच दिया जाता था। खाता खुलने के बाद आरोपी कथित तौर पर खाताधारकों से पासबुक, डेबिट कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजने और उसकी आवाजाही के लिए किया जाता था। कई राज्यों में साइबर अपराध से जुड़े तार पुलिस जांच में 17 बैंक खातों का लिंक महाराष्ट्र समेत कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में दर्ज साइबर अपराधों से सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। 70 डेबिट कार्ड और 42 पासबुक बरामद कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों से जुड़े 70 डेबिट कार्ड और 42 पासबुक बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस को रैकेट के नेटवर्क और पैसों के लेन-देन से जुड़ी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है। मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ देशभर में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क से इसके कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही है।  
मुंबई के अंधेरी में बर्गर में कांच का टुकड़ा मिलने का आरोप, ग्राहक ने पुलिस और FDA से की शिकायत

मुंबई के अंधेरी में बर्गर में कांच का टुकड़ा मिलने का आरोप, ग्राहक ने पुलिस और FDA से की शिकायत

मुंबई के अंधेरी में बर्गर में कांच का टुकड़ा मिलने का आरोप, ग्राहक ने पुलिस और FDA से की शिकायत मुंबई: मुंबई के अंधेरी स्थित एक लोकप्रिय बर्गर रेस्टोरेंट में खाने के दौरान बर्गर के अंदर कांच का टुकड़ा मिलने के आरोप से हड़कंप मच गया है। ग्राहक ने मामले की शिकायत पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से की है। फिलहाल संबंधित अधिकारियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना 16 अगस्त की बताई जा रही है। शिकायतकर्ता तनिशा गोगरी अपनी एक दोस्त के साथ अंधेरी स्थित Jimi’s Burger पहुंची थीं। उन्होंने वहां Korean Veg Burger ऑर्डर किया था। शिकायत के अनुसार, बर्गर खाते समय तनिशा को उसमें कांच का एक टुकड़ा दिखाई दिया। उन्होंने तत्काल रेस्टोरेंट के कर्मचारियों और प्रबंधन को इसकी जानकारी दी। कांच का टुकड़ा फेंकने का आरोप तनिशा ने आरोप लगाया है कि घटना की जानकारी देने के बाद रेस्टोरेंट प्रबंधन ने कथित तौर पर कांच के टुकड़े को जांच के लिए सुरक्षित रखने के बजाय कूड़ेदान में फेंक दिया। तनिशा ने घटना के बारे में कहा कि बर्गर खाते समय उन्हें उसके अंदर कांच का टुकड़ा मिला और उन्होंने तुरंत रेस्टोरेंट प्रबंधन को इसकी जानकारी दी। उनके मुताबिक, इसके बाद वह टुकड़ा कूड़ेदान में फेंक दिया गया। पुलिस और FDA तक पहुंचा मामला घटना के बाद तनिशा के पिता ने अंबोली पुलिस स्टेशन में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके अलावा मामले की जानकारी FDA को भी दी गई है। पुलिस और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा शिकायत की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कथित तौर पर बर्गर में कांच का टुकड़ा कैसे पहुंचा और घटना में खाद्य सुरक्षा मानकों का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं। हालांकि, रेस्टोरेंट के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। रेस्टोरेंट की ओर से इस शिकायत पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का भी इंतजार है। जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।  
मुंबई में BASF का R&D विस्तार, हाइजीन प्रोडक्ट्स के लिए नया सुपरएब्जॉर्बेंट्स परफॉर्मेंस लैब शुरू

मुंबई में BASF का R&D विस्तार, हाइजीन प्रोडक्ट्स के लिए नया सुपरएब्जॉर्बेंट्स परफॉर्मेंस लैब शुरू

मुंबई में BASF का R&D विस्तार, हाइजीन प्रोडक्ट्स के लिए नया सुपरएब्जॉर्बेंट्स परफॉर्मेंस लैब शुरू मुंबई: जर्मनी की प्रमुख केमिकल कंपनी BASF ने मुंबई में Superabsorbents Performance Lab शुरू किया है। नई अत्याधुनिक सुविधा का उद्देश्य हाइजीन उत्पादों से जुड़े परीक्षण, ग्राहक सहयोग और उत्पाद विकास की प्रक्रिया को तेज करना है। इस कदम से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में BASF की रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कंपनी के अनुसार, मुंबई स्थित नया लैब भारत में होने वाले विकास कार्यों को जर्मनी के लुडविग्सहाफेन स्थित BASF के ग्लोबल प्रोडक्ट डेवलपमेंट लैब से जोड़ेगा। इससे अलग-अलग देशों में मौजूद तकनीकी टीमों के बीच ज्ञान और अनुभव का तेजी से आदान-प्रदान संभव होगा। ग्राहक सहयोग और तेज इनोवेशन पर जोर BASF ने मुंबई लैब को केवल परीक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि ग्राहकों के साथ मिलकर नए समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। कंपनी का फोकस परफॉर्मेंस, सस्टेनेबिलिटी और ग्राहक मूल्य बढ़ाने पर है। मुंबई में लैब की मौजूदगी से ग्राहकों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने और उनके अनुरूप उत्पादों में बदलाव करने में मदद मिल सकती है। इससे उत्पाद विकास के विभिन्न चरणों में मिलने वाला फीडबैक भी तेजी से संबंधित टीमों तक पहुंच सकेगा। हाइजीन इंडस्ट्री के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह लैब? सुपरएब्जॉर्बेंट पॉलिमर हाइजीन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इनका उपयोग मुख्य रूप से ऐसे उत्पादों में किया जाता है, जहां अवशोषण क्षमता, आराम, गुणवत्ता और टिकाऊपन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। हाइजीन सेक्टर में उपभोक्ताओं और ब्रांड कंपनियों की अपेक्षाएं लगातार बदल रही हैं। ऐसे में सामग्री की गुणवत्ता और प्रदर्शन में छोटे सुधार भी उत्पाद की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर बड़ा असर डाल सकते हैं। मुंबई में स्थानीय स्तर पर परीक्षण और विकास की सुविधा मिलने से BASF को भारतीय तथा एशिया-प्रशांत बाजारों की जरूरतों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है। भारत और जर्मनी के बीच मजबूत होगा R&D नेटवर्क मुंबई का नया लैब BASF के जर्मनी स्थित Global Product Development Lab for Superabsorbents के साथ मिलकर काम करेगा। इससे भारत में होने वाले तकनीकी और उत्पाद विकास कार्यों को कंपनी के वैश्विक R&D नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी। यह मॉडल BASF की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें बड़े केंद्रीय रिसर्च हब के साथ-साथ ग्राहकों और प्रमुख बाजारों के करीब विशेषीकृत लैब विकसित किए जा रहे हैं। भारत के बढ़ते बाजार पर BASF की नजर एशिया-प्रशांत क्षेत्र हाइजीन उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल है और भारत में बढ़ती उपभोक्ता मांग, बदलती जीवनशैली तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के कारण इस क्षेत्र में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। मुंबई में नया परफॉर्मेंस लैब शुरू करके BASF ने भारत में अपनी तकनीकी मौजूदगी को और मजबूत करने का संकेत दिया है। कंपनी को उम्मीद है कि यह सुविधा तेज उत्पाद विकास, बेहतर ग्राहक सहयोग और नए हाइजीन समाधान तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी। कुल मिलाकर, मुंबई में BASF का नया लैब भारत को कंपनी के वैश्विक R&D नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ हाइजीन इंडस्ट्री में इनोवेशन और ग्राहक-केंद्रित उत्पाद विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  
मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरी, आज से नियम लागू; जानिए उल्लंघन पर क्या होगा

मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरी, आज से नियम लागू; जानिए उल्लंघन पर क्या होगा

मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरी, आज से नियम लागू; जानिए उल्लंघन पर क्या होगा मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा से जुड़ी शर्तों को लेकर सरकार ने अब सख्ती शुरू कर दी है। मंगलवार से नियम लागू होने के बाद जिन चालकों को मराठी का आवश्यक ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, नियम का उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किया जाएगा। सरकार ने चालकों को मराठी सीखने और आवश्यक प्रशिक्षण पूरा करने के लिए पहले पर्याप्त समय दिया था। अब यह समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, मराठी की आवश्यक जानकारी प्रदर्शित नहीं कर पाने वाले चालकों को सबसे पहले 30 दिन का नोटिस दिया जाएगा। नियम नहीं मानने पर लाइसेंस निलंबित हो सकता है नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि चालक मराठी भाषा की निर्धारित शर्त पूरी नहीं करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बावजूद नियम का पालन नहीं करने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाने का प्रावधान है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि चालकों को नियमों का पालन करने के लिए कुल मिलाकर करीब चार महीने तक का समय मिल सकता है। 1.25 लाख चालकों को राहत इस नियम के तहत करीब 1.25 लाख ऑटो और टैक्सी चालकों को राहत मिलेगी। इन चालकों ने सरकार द्वारा आयोजित मराठी भाषा पाठ्यक्रम पूरा कर परीक्षा पास की है और प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। ऐसे चालकों पर इस प्रावधान के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी। ठाणे में आयोजित ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा पाठ्यक्रम अभियान’ के समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी को “भक्ति की भाषा, मजबूरी की नहीं” के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो लोग मराठी सीख रहे हैं, उनका मजाक उड़ाने के बजाय उनसे मराठी में बातचीत कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। शिंदे के मुताबिक, 105 दिनों के अभियान के दौरान करीब 1.25 लाख ऑटो और टैक्सी चालकों ने मराठी सीखी, परीक्षा दी और प्रमाणपत्र हासिल किए। परिवहन मंत्री ने अपनाया सख्त रुख परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “मैं मराठी नहीं बोलूंगा” जैसी मानसिकता अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अभियान के पीछे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की राजनीतिक पहल को महत्वपूर्ण बताया। सरनाईक ने यह भी कहा कि अभियान के लिए उद्योग विभाग की ओर से 1 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी। सरकार का क्या कहना है? मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में बड़ी संख्या में गैर-मराठी भाषी लोग रहते हैं और ऑटो-टैक्सी क्षेत्र में भी दूसरे राज्यों से आए लोग बड़ी संख्या में काम करते हैं। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य गैर-मराठी लोगों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। अब नियम लागू होने के बाद आने वाले महीनों में इसका पालन किस तरह कराया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।  
मुंबई के कांदिवली में कमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग, 11 लोगों को सुरक्षित बचाया गया

मुंबई के कांदिवली में कमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग, 11 लोगों को सुरक्षित बचाया गया

मुंबई के कांदिवली में कमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग, 11 लोगों को सुरक्षित बचाया गया मुंबई: मुंबई के कांदिवली पश्चिम में सोमवार सुबह एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से हड़कंप मच गया। घटना सुबह करीब 6 बजे की बताई जा रही है। आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। बीएमसी के अनुसार, आग अभिराई होटल परिसर में लगी थी। दमकल कर्मियों ने इमारत की दूसरी मंजिल स्थित लॉजिंग हाउस से 11 लोगों को सीढ़ियों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आग मुख्य रूप से पास स्थित एक अस्थायी फल स्टॉल में रखी इलेक्ट्रिकल वायरिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, लकड़ी के फर्नीचर, तिरपाल, बांस और प्लास्टिक सामग्री तक सीमित थी। बीएमसी ने बताया कि आग की लपटें तिरुपति बैंक्वेट की चौथी मंजिल तक भी पहुंचीं, जहां करीब 50 वर्ग फीट क्षेत्र में कपड़ों, लकड़ी के फर्नीचर और फॉल्स सीलिंग को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा इमारत के बाहरी हिस्से में लगे एल्युमिनियम और प्लास्टिक की सजावटी शीट भी आग की चपेट में आ गईं। आग के कारण पूरी इमारत में धुआं भर गया था। दमकल कर्मियों ने समय रहते स्थिति पर काबू पाने के साथ ही इमारत में मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से नुकसान का विस्तृत आकलन भी किया जा रहा है।

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