क्या मुंबई के आधिकारिक AQI आंकड़ों पर भरोसा किया जा सकता है? IQAir ने मुंबई को सबसे प्रदूषित बताया, जबकि CPCB के आंकड़ों में हवा ‘संतोषजनक’; IIT कानपुर के वैज्ञानिक ने समझाया दोनों आंकड़ों के बीच अंतर मुंबई: मुंबई की हवा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफIQAir जैसे निजी प्लेटफॉर्म के आंकड़े शहर में गंभीर प्रदूषण की तस्वीर दिखाते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी निगरानी नेटवर्क के तहत CPCB के आंकड़ों में कई बार हवा की स्थिति ‘संतोषजनक’ नजर आती है। 15 अक्टूबर को IQAir ने मुंबई को भारत का सबसे प्रदूषित शहर बताया था, जबकि उसी समय सरकारी आंकड़ों में हवा की गुणवत्ता को ‘संतोषजनक’ श्रेणी में बताया गया। ऐसे में बड़ा सवाल है—मुंबई की हवा की वास्तविक स्थिति आखिर कौन सा आंकड़ा बताता है? इस सवाल पर IIT कानपुर के वायुमंडलीय वैज्ञानिक और National Clean Air Programme (NCAP) की स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने महत्वपूर्ण बातें सामने रखी हैं। निजी और सरकारी AQI में इतना अंतर क्यों? प्रोफेसर त्रिपाठी के मुताबिक, अलग-अलग नेटवर्क से मिलने वाली AQI रीडिंग में अंतर के कई कारण हो सकते हैं। केवल आंकड़ों के अंतर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि कोई एक नेटवर्क लगातार प्रदूषण को ज्यादा या कम दिखा रहा है। निजी मॉनिटर किसी निर्माण स्थल, ट्रैफिक कॉरिडोर या स्थानीय प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट के करीब लगे हो सकते हैं। वहीं सरकारी मॉनिटर किसी दूसरे माइक्रो-एनवायरनमेंट में स्थित हो सकते हैं। इसके अलावा मॉनिटर की तकनीक, कैलिब्रेशन, रखरखाव और वातावरण में मौजूद नमी भी रीडिंग को प्रभावित कर सकती है। सही तुलना कैसे हो? विशेषज्ञ के अनुसार, दोनों नेटवर्क की तुलना तभी सार्थक होगी जब: यानी सिर्फ दो अलग-अलग AQI नंबर देखकर यह तय करना सही नहीं होगा कि कौन सा आंकड़ा सही है। मुंबई का आसमान धुंधला, फिर AQI ‘संतोषजनक’ क्यों? मुंबई की ऊंची इमारतों और समुद्री क्षितिज पर दिखाई देने वाली धुंध भी लोगों के बीच चिंता पैदा करती है। लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि दृश्यता और AQI एक ही चीज नहीं हैं। हवा में मौजूद नमी कणों के साथ मिलकर उन्हें अधिक बड़ा बना सकती है। इससे प्रकाश का बिखराव बढ़ता है और दूर की इमारतें या शहर का क्षितिज धुंधला दिखाई देने लगता है। इसके अलावा महीन कण, निर्माण से निकलने वाली धूल और ईंधन जलने से निकलने वाला धुआं भी धुंध बढ़ा सकता है। हालांकि, केवल आसमान में दिखाई देने वाली धुंध के आधार पर प्रदूषण की गंभीरता या स्वास्थ्य जोखिम का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। क्या सरकारी मॉनिटर पर भरोसा किया जा सकता है? प्रोफेसर त्रिपाठी के मुताबिक, सरकारी एयर क्वालिटी मॉनिटर भरोसेमंद डेटा दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए नियमित कैलिब्रेशन, रखरखाव और गुणवत्ता नियंत्रण बेहद जरूरी है। किसी उपकरण में खराबी, कैलिब्रेशन में बदलाव या रखरखाव की कमी डेटा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जनता का भरोसा बढ़ाने के लिए: कैलिब्रेशन रिकॉर्ड, डेटा वैलिडेशन और आसपास के अन्य मॉनिटर से तुलना जैसी जानकारी सार्वजनिक करना उपयोगी होगा। साथ ही सरकारी और निजी मॉनिटरिंग नेटवर्क के बीच नियमित तुलना से भी एयर क्वालिटी डेटा की विश्वसनीयता बेहतर हो सकती है। क्या समुद्र मुंबई को प्रदूषण से बचाता है? मुंबई की सबसे बड़ी भौगोलिक विशेषताओं में से एक उसका समुद्र से घिरा होना है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मुंबई हमेशा प्रदूषण से सुरक्षित रहेगी। समुद्री हवाएं प्रदूषकों को एक इलाके से दूसरे इलाके तक पहुंचा सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में हवा का पैटर्न प्रदूषकों को जमा होने का मौका भी दे सकता है। इस साल मुंबई में प्रदूषण की स्थिति जल्दी क्यों बिगड़ी, इसका पता लगाने के लिए सिर्फ AQI देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए बारिश, हवा की गति और दिशा, नमी तथा वातावरण में प्रदूषकों के फैलने की क्षमता जैसे कई मौसम संबंधी कारकों का विश्लेषण करना जरूरी है। मुंबई में प्रदूषण के लिए मौसम या इंसानी गतिविधियां जिम्मेदार? विशेषज्ञ के मुताबिक, दोनों की भूमिका है और उनका प्रभाव मौसम के अनुसार बदलता रहता है। मौसम यह तय करता है कि प्रदूषक हवा में कितनी आसानी से फैलेंगे या किसी इलाके में जमा होंगे। वहीं मानव गतिविधियों से जुड़े प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं: इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण भी मुंबई की हवा को प्रभावित कर सकता है। क्या मुंबई में पर्याप्त एयर मॉनिटरिंग स्टेशन हैं? सिर्फ मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि नेटवर्क पर्याप्त है या नहीं। मुंबई जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहर में यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि मॉनिटर कहां लगाए गए हैं। विशेषज्ञ के अनुसार, मॉनिटरिंग नेटवर्क में रिहायशी इलाके, ट्रैफिक कॉरिडोर, औद्योगिक क्षेत्र और प्रदूषण हॉटस्पॉट पर्याप्त रूप से शामिल होने चाहिए। एक ऐसा हाइब्रिड नेटवर्क, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले रेफरेंस-ग्रेड मॉनिटर के साथ सही तरीके से कैलिब्रेट किए गए कम लागत वाले सेंसर भी शामिल हों, शहर में प्रदूषण की ज्यादा व्यापक तस्वीर दे सकता है। मुंबई को प्रदूषण कम करने के लिए क्या करना चाहिए? विशेषज्ञ के मुताबिक, तत्काल स्तर पर सबसे पहले मॉनिटरिंग और डेटा की पारदर्शिता मजबूत करनी होगी। इसके साथ निर्माण और सड़क की धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन तथा खुले में कचरा जलाने पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। लेकिन केवल आपातकालीन कार्रवाई से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। लंबे समय में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ट्रैफिक प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और आसपास के क्षेत्रों के साथ क्षेत्रीय स्तर के समन्वय से जोड़ना होगा। सवाल सिर्फ AQI का नहीं, भरोसे का भी है मुंबई के लिए IQAir और CPCB जैसे अलग-अलग स्रोतों से आने वाले आंकड़ों में अंतर जनता के लिए भ्रम पैदा कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि सरकारी और निजी दोनों नेटवर्क के डेटा की गुणवत्ता, मॉनिटर की स्थिति और AQI की गणना पद्धति को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। क्योंकि मुंबई के नागरिकों के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि कौन सा AQI नंबर सही दिख रहा है, बल्कि यह है कि शहर की हवा वास्तव में कितनी साफ है और उसे बेहतर बनाने के लिए प्रशासन कितनी प्रभावी कार्रवाई कर रहा है। Undercover Editor Mahesh Rathod — Editor