मुंबई में डेंगू के मामलों में 28% बढ़ोतरी, बारिश के बीच बढ़ा खतरा; डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह गर्म और उमस भरे मौसम के साथ जगह-जगह जमा पानी बना मच्छरों के प्रजनन का कारण; डेंगू के बाद बुखार उतरने पर भी कई दिनों तक रह सकती है कमजोरी मुंबई: मुंबई में डेंगू के मामलों में पिछले साल की तुलना में करीब 28 प्रतिशत बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। गर्म और उमस भरे मौसम के साथ बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी Aedes मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शहरवासियों से मच्छरों से बचाव के साथ डेंगू के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। डॉक्टरों के मुताबिक, डेंगू से ठीक होने के बाद भी मरीज को तुरंत पहले जैसी ऊर्जा महसूस हो, यह जरूरी नहीं है। बुखार खत्म होने के बाद भी थकान, कमजोरी, चक्कर, कम स्टैमिना और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी कई दिनों या कुछ मामलों में कुछ हफ्तों तक रह सकती है। क्यों बढ़ रहा है मुंबई में डेंगू का खतरा? डेंगू संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर अक्सर घरों और आसपास मौजूद छोटे-छोटे पानी जमा होने वाले स्थानों में पनपते हैं। फूलों के गमले और उनकी ट्रे, बाल्टी, कूलर, पुराने टायर, फेंके गए कंटेनर, छत, निर्माणाधीन इमारतों और अन्य जगहों पर जमा बारिश का पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। Zynova Shalby Hospital, Mumbai के Internal Medicine Expert डॉ. निमित्त नागड़ा के अनुसार, मुंबई में इस समय डेंगू के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। गर्म और उमस भरा मौसम Aedes मच्छरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करता है। डेंगू का खतरा किसी एक उम्र तक सीमित नहीं है। बच्चे, युवा, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग सभी संक्रमित मच्छर के काटने से डेंगू की चपेट में आ सकते हैं। बुखार उतरने के बाद भी कमजोरी क्यों? विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार खत्म होना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता। डॉ. विमल जे. पाहुजा, MD (Internal Medicine), Metabolic Physician एवं Diabetologist, Dr LH Hiranandani Hospital के मुताबिक, डेंगू और मलेरिया के बाद मरीज की रिपोर्ट बेहतर होने के बावजूद कुछ समय तक काफी कमजोरी महसूस हो सकती है। डेंगू में शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तेज हो सकती है और कई मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं तथा प्लेटलेट्स में कमी देखी जाती है। गंभीर मामलों में डिहाइड्रेशन, शरीर में तरल पदार्थों का असंतुलन और कुछ अंगों पर प्रभाव भी पड़ सकता है। वहीं मलेरिया लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इनके नष्ट होने से कुछ मरीजों में एनीमिया हो सकता है, जिससे थकान और शारीरिक क्षमता कम हो सकती है। डेंगू के सामान्य लक्षण क्या हैं? डेंगू या मलेरिया के दौरान मरीजों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: बुखार खत्म होने के बाद भी कुछ मरीजों को थोड़ी दूर चलने पर थकान, पैरों में भारीपन, चक्कर, कम स्टैमिना, ध्यान लगाने में परेशानी और सामान्य काम करने में कमजोरी महसूस हो सकती है। प्लेटलेट कम होने पर घबराएं नहीं, लेकिन निगरानी जरूरी डॉक्टरों के अनुसार डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ एक प्लेटलेट रिपोर्ट देखकर स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जाना चाहिए। मरीज की पूरी क्लिनिकल स्थिति, हाइड्रेशन, ब्लीडिंग के लक्षण और अलग-अलग दिनों की रिपोर्ट में आ रहे बदलाव को देखना महत्वपूर्ण है। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दोबारा रक्त जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट देखकर खुद से दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें? डेंगू से उबर रहे मरीज को यदि निम्न में से कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए: विशेष रूप से डेंगू के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। मच्छरों से बचाव के लिए क्या करें? डॉक्टरों ने लोगों से घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की है। इसके लिए: Aedes मच्छर दिन के समय भी काट सकते हैं, इसलिए मच्छरों से बचाव को केवल रात या शाम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। डेंगू का शक हो तो क्या करें? तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, त्वचा पर दाने, मतली या उल्टी जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, खासकर जब इलाके में डेंगू के मामले बढ़ रहे हों। डेंगू की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ, आराम, आवश्यक जांच और मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ सकती है। बुखार उतरते ही भारी व्यायाम, लंबे समय तक काम या ज्यादा शारीरिक मेहनत शुरू करना उचित नहीं है। मुंबई में डेंगू का बढ़ता खतरा शहरवासियों के लिए साफ संकेत है कि मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने के साथ-साथ संदिग्ध लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए। वहीं, डेंगू या मलेरिया से उबर रहे मरीजों को शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए पर्याप्त आराम देना चाहिए और सामान्य गतिविधियों में धीरे-धीरे लौटना चाहिए।