Author: Mahesh Rathod

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दिल्ली में CJP नेता अभिजीत दीपके हिरासत में, नेहा बोरा रिहा; SIR के खिलाफ प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली में CJP नेता अभिजीत दीपके हिरासत में, नेहा बोरा रिहा; SIR के खिलाफ प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली में CJP नेता अभिजीत दीपके हिरासत में, नेहा बोरा रिहा; SIR के खिलाफ प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले कार्रवाई, अभिजीत दीपके को SEM कोर्ट में किया जाएगा पेश नई दिल्ली: दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने एहतियाती हिरासत में लिया है, जबकि अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, अभिजीत दीपके को शुक्रवार शाम मार्च में शामिल होने के लिए निकलते समय झंडेवालान, करोल बाग इलाके में हिरासत में लिया गया। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई की है। पुलिस ने बताया कि दीपके को शनिवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत के सामने पेश किया जाएगा। मार्च से पहले हिरासत में लिए गए दीपके पुलिस के मुताबिक, दीपके जिस स्थान पर ठहरे हुए थे, वहां से निकलकर सेंट्रल पार्क की ओर मार्च में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह पहली बार नहीं है जब CJP से जुड़े नेताओं पर प्रदर्शन से पहले कार्रवाई हुई है। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के दौरान विमान से हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें शांति भंग न करने के बांड पर रिहा किया गया था। सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल में पुलिस के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका को इस सप्ताह जंतर-मंतर पहुंचने और राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन करने के बाद दोबारा गिरफ्तार किया गया। उन पर बांड की शर्तों के उल्लंघन, अतिक्रमण और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने सहित आरोप लगाए गए हैं। दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं। CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को शांति बनाए रखने के लिए बांड पर पाबंद किया गया है। नेहा बोरा की हिरासत के बाद रिहाई इस बीच AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भी दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, उन्हें दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत की गई कार्रवाई से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। हालांकि, AISA ने आरोप लगाया कि हिरासत के बाद नेहा बोरा को करीब पांच घंटे तक दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया और बाद में आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। संगठन का यह भी दावा है कि देर रात थाने पहुंचे वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। SIR और CEC के खिलाफ जारी है विरोध नेहा बोरा की रिहाई के बाद AISA और अन्य विपक्षी संगठनों की ओर से विरोध जारी रहने की बात कही गई। CPI(ML) से जुड़े और पूर्व AISA नेता एन. साई बालाजी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने का आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना अभी बाकी है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि निवारक कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। Undercover Editor News Channel | Mahesh Rathod, Editor  
रुबियो की मुंबई में भारतीय अधिकारियों से प्रस्तावित मुलाकात पर राहुल गांधी का सरकार से सवाल

रुबियो की मुंबई में भारतीय अधिकारियों से प्रस्तावित मुलाकात पर राहुल गांधी का सरकार से सवाल

रुबियो की मुंबई में भारतीय अधिकारियों से प्रस्तावित मुलाकात पर राहुल गांधी का सरकार से सवाल कांग्रेस नेता ने कहा- विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी ‘भ्रमित’; प्रधानमंत्री मोदी से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग नई दिल्ली/मुंबई: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अगले सप्ताह मुंबई में भारतीय अधिकारियों के साथ प्रस्तावित मुलाकात को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी इस बैठक को लेकर असमंजस में हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले पर स्पष्टीकरण देने को कहा। राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए यह सवाल उठाया। उनकी यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि रुबियो मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उन्हें उम्मीद है कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी बैठक में मौजूद रहेंगे। राहुल गांधी ने क्या कहा? राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सरकार से सवाल करते हुए कहा कि रुबियो ने भारतीय अधिकारियों को मुंबई बुलाया है और विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस घटनाक्रम को लेकर भ्रमित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। राहुल गांधी की टिप्पणी पर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। मुंबई में होगी रुबियो की अहम बैठक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत यात्रा पर रहेंगे। उनकी यात्रा में मुंबई और गुजरात के जामनगर का दौरा शामिल है। रुबियो जामनगर में रिलायंस की एक इकाई का दौरा करेंगे। इसके बाद मुंबई में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित है। अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने कहा था कि इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा दिल्ली से अन्य अधिकारी भी मुंबई पहुंच सकते हैं। कांग्रेस ने पहले भी उठाए थे सवाल राहुल गांधी की टिप्पणी से पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी रुबियो की प्रस्तावित मुंबई बैठक को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। जयराम रमेश ने पूछा था कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी आखिर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा क्यों दी जा रही है, जबकि ऐसी आधिकारिक जानकारी आमतौर पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से जारी की जाती है। उन्होंने विदेश मंत्रालय की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठाया था। रुबियो की भारत यात्रा पर निगाहें मार्को रुबियो की आगामी भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न रणनीतिक, व्यापारिक और कूटनीतिक मुद्दों पर बातचीत जारी है। उनकी मुंबई और जामनगर यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों पर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर रहेगी। फिलहाल मुंबई में रुबियो और भारतीय अधिकारियों के बीच प्रस्तावित बैठक के एजेंडे और प्रतिभागियों को लेकर आधिकारिक विस्तृत जानकारी का इंतजार है। Undercover Editor News Channel महेश .एम. राठोड, एडिटर  
एंटी-CEC प्रदर्शन में शामिल अभिनेता इमरान खान को नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश

एंटी-CEC प्रदर्शन में शामिल अभिनेता इमरान खान को नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश

एंटी-CEC प्रदर्शन में शामिल अभिनेता इमरान खान को नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश मुंबई में 10 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के बाद विदेशी नागरिक अभिनेता पर इमिग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट के तहत कार्रवाई मुंबई: मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद अभिनेता इमरान खान को मुंबई पुलिस की ओर से नोटिस जारी किया गया है। विदेशी नागरिक इमरान खान को 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई उनके वीजा की शर्तों और Immigration and Foreigners Act, 2025 के प्रावधानों के कथित उल्लंघन को लेकर की गई है। मामले में मुंबई स्थित Foreigners Regional Registration Office (FRRO) द्वारा नोटिस जारी किया गया है। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद कार्रवाई इमरान खान 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए थे। यह प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इमरान खान समेत कई प्रदर्शनकारियों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में इमरान खान ने पुलिस वाहन के अंदर से अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पोस्ट किया था कि वह पुलिस के साथ “ड्राइव” पर जा रहे हैं। विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों पर नियम मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इमरान खान की गतिविधियों को उनके वीजा की शर्तों तथा विदेशी नागरिकों से संबंधित कानून के तहत जांचा गया है। अधिकारी ने बताया कि मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए कार्रवाई शुरू की गई है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, भारत में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी, आवाजाही और गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार के पास कानून के तहत व्यापक अधिकार हैं। विदेशी नागरिकों के लिए भारत में राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी से संबंधित नियम भी लागू होते हैं। पुलिस ने निजी शिकायत से किया इनकार पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी निजी शिकायत के आधार पर नहीं की गई है। एक अधिकारी के मुताबिक, संबंधित विभाग ने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू की है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कार्रवाई का स्वागत किया भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इमरान खान के खिलाफ हुई कार्रवाई का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि विदेशी नागरिकों द्वारा भारत की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना गंभीर विषय है और कहा कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, सोमैया द्वारा लगाए गए विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान से धन आने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। आमिर खान के भतीजे हैं इमरान खान अभिनेता इमरान खान अभिनेता आमिर खान के भतीजे हैं और कई हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं। हाल के दिनों में उन्होंने मुंबई में CEC के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में सार्वजनिक रूप से हिस्सा लिया था। अब FRRO के नोटिस के बाद उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है। Undercover Editor News Channel महेश .एम. राठोड, एडिटर  
फ्रैंकफर्ट-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में हाईजैक अलर्ट, जयपुर डायवर्ट किया गया विमान

फ्रैंकफर्ट-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में हाईजैक अलर्ट, जयपुर डायवर्ट किया गया विमान

फ्रैंकफर्ट-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में हाईजैक अलर्ट, जयपुर डायवर्ट किया गया विमान AI-2030 ने जयपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की; सुरक्षा एजेंसियों ने विमान और यात्रियों के सामान की जांच की, सभी यात्री और क्रू सुरक्षित जयपुर: जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान AI-2030 को बुधवार सुबह सुरक्षा अलर्ट के बाद जयपुर डायवर्ट कर दिया गया। बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर विमान ने करीब 9:45 बजे जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान के पहुंचते ही सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गईं और उसे जांच के लिए आइसोलेशन बे में ले जाया गया। हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप रिपोर्टों के मुताबिक, विमान से कुछ समय के लिए Squawk 7500 सिग्नल प्राप्त हुआ। विमानन क्षेत्र में यह कोड संभावित हाईजैक या किसी तरह के अवैध हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देता है। इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर विमान को जयपुर की ओर मोड़ने का फैसला किया। शुरुआती रिपोर्टों में बम की धमकी की बात सामने आई थी। हालांकि, कुछ रिपोर्टों के अनुसार मामला कथित हाईजैक अलर्ट या अफवाह से जुड़ा हो सकता है और इसकी वास्तविक वजह की जांच अभी जारी है। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि अलर्ट संभवतः गलती से सक्रिय हुआ हो सकता है। अधिकारियों ने अभी तक इसे वास्तविक हाईजैक प्रयास के रूप में पुष्टि नहीं की है। विमान की गहन सुरक्षा जांच जयपुर में उतरने के बाद विमान को अलग स्थान पर ले जाकर CISF, स्थानीय पुलिस और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) की टीमों ने विमान तथा यात्रियों के सामान की जांच की। यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित रूप से विमान से उतारकर टर्मिनल के निर्धारित क्षेत्र में ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार, सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। विमान की जांच पूरी होने तक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत यात्रियों को नियंत्रित क्षेत्र में रखा गया। यात्रियों को एयर इंडिया की ओर से राहत एयर इंडिया ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की पेशकश की है। जिन यात्रियों की यात्रा रद्द होती है, उन्हें पूरी राशि वापस करने या बिना अतिरिक्त शुल्क के यात्रा पुनर्निर्धारित करने का विकल्प दिया जा रहा है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विमान से हाईजैक अलर्ट किस परिस्थितियों में जारी हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या मानवीय गलती थी। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। Undercover Editor News Channel रिपोर्ट: महेश .एम. राठोड, एडिटर  
मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

मतदाता सूची के SIR पर सियासी और कानूनी लड़ाई तेज, राहुल गांधी समेत 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका नई दिल्ली: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर केंद्र की राजनीति में जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में रिट याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने SIR से संबंधित फैसलों और उनकी प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड उपलब्ध कराने तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही, मामले का अंतिम निर्णय होने तक देशभर में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। याचिका में कौन-कौन हैं शामिल? राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा याचिका में INDIA गठबंधन से जुड़े विभिन्न दलों के नेताओं को याचिकाकर्ता बनाया गया है। इनमें शामिल हैं: याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। SIR के फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग याचिका में चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया से संबंधित फाइलें, बैठक की कार्यवाही, आधिकारिक टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियों का विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही ECINET और ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं ने 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के चुनाव आयोग के फैसले से संबंधित पूरी फाइल पेश करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि प्रक्रिया में लिए गए फैसलों की वैधानिकता और पारदर्शिता की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 तथा टी. एन. शेषन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के संदर्भ में भी सवाल उठाए गए हैं। हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण सार्वजनिक करने की मांग याचिका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि हटाए गए मतदाताओं के नाम बूथवार प्रकाशित किए जाएं और प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताया जाए। इसके अलावा, हटाए गए मतदाताओं का आयु और लिंग के आधार पर विवरण उपलब्ध कराने तथा पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र मतदाताओं को नाम शामिल कराने के लिए आवेदन का अवसर देने की मांग भी उठाई गई है। सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रस्ताव विपक्षी नेताओं ने SIR के तहत हटाए गए नामों और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने की मांग की है। याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से संबंधित प्रक्रियाओं की अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के आधार पर समीक्षा करने का अनुरोध भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि मामले के लंबित रहने के दौरान SIR से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाएं और उनकी कार्यवाही का उचित रिकॉर्ड रखा जाए। ऑनलाइन फॉर्म-6 को मौजूदा मतदाता पंजीकरण नियमों के अनुरूप बनाने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले दायर हुई याचिका यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR तथा चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगा था। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए अनुरोध स्वीकार नहीं किया कि संबंधित मुद्दे पहले से ही अदालत में विचाराधीन हैं। हालांकि, उन्होंने नेताओं को उचित राहत के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया था कि विपक्षी नेताओं की ओर से दायर नई याचिका पर भी लंबित मामलों के साथ विचार किया जा सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं की इस याचिका से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद को नया कानूनी मोड़ मिला है। विपक्षी दल जहां प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं याचिका पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उसके आदेशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, SIR पर रोक लगाने और अन्य राहतों की मांग याचिका का हिस्सा है। इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार या मंजूर किया गया अंतिम आदेश नहीं माना जाना चाहिए।  
शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई

शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई

शिवाजी पार्क प्रदर्शन मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस की कार्रवाई मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करने के मामले में 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे के नाम भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, यह प्रदर्शन उन लोगों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में किया गया था, जो चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज उठा रहे थे। मामले में पुलिस ने गैरकानूनी जमावड़े और प्रतिबंधात्मक आदेशों के कथित उल्लंघन से संबंधित धाराएं लगाई हैं। FIR में कई राजनीतिक नेताओं के नाम इस मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे के अलावा मनसे नेता एस. संदीप देशपांडे तथा शिवसेना (UBT) के नेताओं वरुण सरदेसाई और महेश सावंत के नाम भी FIR में शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) के साथ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1), 37(3) और 135 के तहत मामला दर्ज किया है। ये प्रावधान कथित गैरकानूनी जमावड़े और लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन से संबंधित हैं। FIR दर्ज होने का अर्थ अपने आप में आरोप साबित होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के दौरान तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। मतदाता सूची के SIR को लेकर विरोध प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे ने रविवार को प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार का मुद्दा उठाया। आदित्य ठाकरे ने BJP पर साधा निशाना प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सड़क पर उतरकर विरोध करने वाले नागरिकों से डरती है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार देशभक्त नागरिकों को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है। उन्होंने एकनाथ शिंदे और भाजपा के साथ गए नेताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनके बयान पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। 4 अक्टूबर के मार्च को लेकर भी दर्ज हुई थी FIR यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब मुंबई पुलिस ने 4 अक्टूबर को मनसे और शिवसेना (UBT) की ओर से निकाले गए संयुक्त मार्च के आयोजकों के खिलाफ भी अलग FIR दर्ज की थी। यह मामला आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, दक्षिण मुंबई में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों के बीच कथित तौर पर आवश्यक पुलिस अनुमति के बिना बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय की ओर मार्च निकाला गया था। इस मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और मतदाता सूची के SIR में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे थे। राजनीतिक टकराव के बीच बढ़ी हलचल मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विरोध प्रदर्शनों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस ने प्रदर्शनों के दौरान नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कानूनी कार्रवाई की है। अब इस मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।  
मुंबई के सायन अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव; कार्यभार को लेकर पहले जताई थी चिंता

मुंबई के सायन अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव; कार्यभार को लेकर पहले जताई थी चिंता

मुंबई के सायन अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव; कार्यभार को लेकर पहले जताई थी चिंता मुंबई: मुंबई के सायन अस्पताल में प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. शिवशरण पाटिल शनिवार शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल के हॉस्टल के बाथरूम में मृत पाए गए। वह मूल रूप से कर्नाटक के निवासी थे और अस्पताल में सर्जरी विभाग में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर कार्यरत थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, वह आत्महत्या से मृत पाए गए हैं। मामले की पुलिस जांच और पोस्टमार्टम से जुड़ी आगे की जानकारी का इंतजार है। कई घंटों तक नहीं मिले, रूममेट ने अधिकारियों को दी सूचना       अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को डॉ. पाटिल कई घंटों तक दिखाई नहीं दिए। इसके बाद उनके रूममेट से उनकी तलाश करने को कहा गया। रूममेट ने जब उनके मोबाइल फोन पर कॉल किया, तो फोन की घंटी बाथरूम के भीतर सुनाई दी। इसके बाद उसने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। बताया गया है कि डॉ. पाटिल के पास एक इंजेक्शन लगाने में इस्तेमाल होने वाला चिकित्सा उपकरण मिला था। हालांकि, घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पहले भी कार्यभार को लेकर जताई थी चिंता अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार, डॉ. पाटिल ने पहले काम के अधिक दबाव को लेकर शिकायत की थी। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में इस संबंध में कोई नई शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई थी। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित यूनिट में काम का दबाव पहले की तुलना में कम हुआ था। अस्पताल प्रशासन ने उनके परिवार को सूचना दे दी है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। अस्पताल को फिलहाल पुलिस की ओर से किसी सुसाइड नोट की बरामदगी के संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी। रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटों पर फिर बहस इस घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटों, अत्यधिक कार्यभार और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं। खबर में उद्धृत जानकारी के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों में रेजिडेंट डॉक्टरों के साप्ताहिक कार्य समय को 48 घंटे तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, अस्पतालों में वास्तविक कामकाज के दौरान इन सीमाओं का पालन कितना होता है, यह एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। रिपोर्ट में नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के पुराने आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें एक प्रशिक्षु डॉक्टर के एक महीने में 540 घंटे से अधिक काम करने की बात सामने आई थी। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में कम से कम 25 रेजिडेंट डॉक्टरों की आत्महत्या से मौत होने का भी उल्लेख किया गया है। डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी डॉ. शिवशरण पाटिल की मौत चिकित्सा संस्थानों में काम करने वाले युवा डॉक्टरों की परिस्थितियों और उनकी मानसिक सेहत पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत को सामने लाती है। लंबे काम के घंटे, नींद की कमी, मरीजों की जिम्मेदारी और लगातार काम का दबाव डॉक्टरों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, इस मामले में कार्यभार को लेकर पहले की गई शिकायतों के बावजूद, मौत का कारण केवल काम का दबाव था—ऐसा निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा। घटना के कारणों और परिस्थितियों की स्पष्ट जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।  
CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तुषार गांधी हिरासत में, मुंबई पुलिस की कार्रवाई; 200 से अधिक लोगों को भी लिया गया था हिरासत में

CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तुषार गांधी हिरासत में, मुंबई पुलिस की कार्रवाई; 200 से अधिक लोगों को भी लिया गया था हिरासत में

CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तुषार गांधी हिरासत में, मुंबई पुलिस की कार्रवाई; 200 से अधिक लोगों को भी लिया गया था हिरासत में मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के समर्थन में मुंबई में होने वाली सभा से पहले पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी और कुछ अन्य आयोजकों को हिरासत में ले लिया। तुषार गांधी महात्मा गांधी के परपोते और ‘Hum Bharat Ke Log’ संगठन के अध्यक्ष हैं। यह कार्रवाई शनिवार, 10 अक्टूबर को मुंबई के बांद्रा इलाके में हुई। तुषार गांधी को पहले नेशनल कॉलेज चौराहे के पास रोके जाने की जानकारी सामने आई। बाद में उन्हें DN नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। आयोजकों के अनुसार, कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। अगस्त क्रांति मैदान में सभा का किया था आह्वान तुषार गांधी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन के समर्थन में मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में सभा आयोजित करने की अपील की थी। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध से जुड़ा था। आयोजकों ने सोशल मीडिया पर लोगों से शनिवार दोपहर सभा में पहुंचने की अपील की थी। हालांकि, पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संबंधित सभा के लिए अनुमति का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था और आधिकारिक अनुमति भी नहीं दी गई थी। हिरासत के बावजूद प्रदर्शन जारी रखने की अपील तुषार गांधी और अन्य आयोजकों की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि हिरासत के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रखने का उनका इरादा है। उन्होंने लोगों से अगस्त क्रांति मैदान पहुंचने की अपील की। तुषार गांधी ने सोशल मीडिया पर बताया कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उन्हें पहले सांताक्रूज पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में DN नगर पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। वहीं, मीडिया रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से कहा गया कि तुषार गांधी को हिरासत में लिया गया था, औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था। फिरोज मितिबोरवाला समेत अन्य आयोजकों पर भी कार्रवाई रिपोर्टों के मुताबिक, सामाजिक कार्यकर्ता फिरोज मितिबोरवाला को भी हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें उनके निवास से हिरासत में लेकर MIDC पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इन कार्रवाइयों के पीछे पुलिस की ओर से सभा के लिए अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया गया है। 9 अक्टूबर को 200 से अधिक लोग हिरासत में इससे एक दिन पहले, शुक्रवार 9 अक्टूबर को भी मुंबई पुलिस ने दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था, ताकि वे राजधानी में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आगे न जा सकें। महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में भी पुलिस सतर्कता बढ़ाए जाने की खबरें सामने आईं। यह कार्रवाई दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले की गई व्यापक सुरक्षा तैयारियों के बीच हुई। दिल्ली में CJP का प्रदर्शन क्यों? Cockroach Janta Party (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। आंदोलन से जुड़े लोगों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नामों के हटने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की जांच हो। ये आरोप राजनीतिक और आंदोलनकारी पक्षों की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें जांच या आधिकारिक निष्कर्ष से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने भी प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और कई आयोजकों तथा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। अब आगे क्या? मुंबई में तुषार गांधी और अन्य आयोजकों की हिरासत के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगस्त क्रांति मैदान पर प्रस्तावित सभा किस रूप में आगे बढ़ती है और पुलिस आगे क्या कदम उठाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदर्शन की अनुमति, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर बहस को तेज कर दिया है। फिलहाल, हिरासत और प्रस्तावित सभा से जुड़े घटनाक्रम पर आगे की जानकारी का इंतजार है।  
“भारत ने जिंदगी देखने का नजरिया बदल दिया!” मुंबई में 8 महीने से रह रही जापानी महिला ने साझा किया दिल छू लेने वाला अनुभव

“भारत ने जिंदगी देखने का नजरिया बदल दिया!” मुंबई में 8 महीने से रह रही जापानी महिला ने साझा किया दिल छू लेने वाला अनुभव

“भारत ने जिंदगी देखने का नजरिया बदल दिया!” मुंबई में 8 महीने से रह रही जापानी महिला ने साझा किया दिल छू लेने वाला अनुभव मुंबई: सोशल मीडिया पर अक्सर किसी देश की पहचान कुछ चुनिंदा तस्वीरों और वीडियो के आधार पर बनाई जाती है। लेकिन किसी जगह को करीब से देखने और वहां के लोगों के साथ समय बिताने का अनुभव कई बार सोच बदल देता है। ऐसा ही अनुभव जापान से मुंबई आईं सोशल मीडिया क्रिएटर Hikaru-san ने साझा किया है। भारत में पिछले आठ महीनों से रह रहीं Hikaru-san का कहना है कि यहां बिताए समय ने जिंदगी को देखने का उनका नजरिया बदल दिया है। इंस्टाग्राम पर 7 अक्टूबर को साझा किए गए उनके वीडियो में भारत की संस्कृति, खानपान, लोगों और यहां की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी बातें सामने आईं। उनके अनुभव ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर भारत की छवि को लेकर क्या बोलीं Hikaru-san? Hikaru-san ने अपने वीडियो में कहा कि उन्होंने इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो और पोस्ट देखे हैं, जिनमें भारत को केवल गरीबी और गंदगी के नजरिए से दिखाया जाता है। उनका मानना है कि इस तरह की तस्वीरें किसी भी देश की पूरी सच्चाई नहीं बतातीं। हर देश में अच्छी बातें भी होती हैं और समस्याएं भी। उन्होंने यह भी कहा कि कचरा और गंदगी जैसी समस्याएं केवल भारत तक सीमित नहीं हैं; जापान में भी ऐसी जगहें मिल सकती हैं। Hikaru-san ने भारत की खूबसूरती, यहां के लोगों, संस्कृति और खानपान की सराहना की। उन्होंने उन कंटेंट क्रिएटर्स की भी आलोचना की, जो उनके विचार में अधिक व्यूज पाने के लिए किसी देश की भ्रामक या एकतरफा तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी देश के बारे में केवल सोशल मीडिया पर दिखाई गई सामग्री के आधार पर राय बनाने के बजाय वहां जाकर खुद अनुभव हासिल करना चाहिए। टूटी हुई चीजों को सुधारने से मिली जिंदगी की बड़ी सीख Hikaru-san के वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह है, जिसमें उन्होंने भारत में रहते हुए सीखी गई एक छोटी-सी बात को जिंदगी से जोड़कर समझाया। उन्होंने बताया कि भारत में उन्होंने कई बार देखा कि कोई चीज खराब हो जाने पर लोग उसे तुरंत फेंकने के बजाय ठीक करने की कोशिश करते हैं। मरम्मत करके उस चीज को दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है और उसे एक नया जीवन मिल जाता है। Hikaru-san ने इस आदत को इंसानी जिंदगी से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह किसी टूटी हुई चीज को सुधारा जा सकता है, उसी तरह इंसान भी अपनी गलतियों से सीखकर खुद को बेहतर बना सकता है। उनके अनुसार, जिंदगी में बदलाव और सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। किसी मुश्किल अनुभव या गलती का मतलब यह नहीं कि सब कुछ खत्म हो गया। इंसान सीख सकता है, आगे बढ़ सकता है और खुद का एक बेहतर रूप विकसित कर सकता है। यही वह सीख है, जिसे उन्होंने भारत में रहने के अनुभव से जोड़ा और जिसके लिए उन्होंने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। आखिर मुंबई में क्यों रह रही हैं Hikaru-san? रिपोर्ट के मुताबिक, Hikaru-san पिछले आठ महीनों से मुंबई में रह रही हैं। वह फिटनेस और बॉडीबिल्डिंग से संबंधित ICN India प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की योजना बना रही हैं। उन्होंने हाल ही में प्रतियोगिता के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी साझा की और बताया कि वह इसमें भाग लेने के लिए गोवा जाएंगी। इस तरह भारत में उनका प्रवास केवल घूमने तक सीमित नहीं है, बल्कि फिटनेस से जुड़े उनके व्यक्तिगत लक्ष्यों से भी जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया यूजर्स ने कैसे दी प्रतिक्रिया? Hikaru-san के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने भारत के बारे में अपने सकारात्मक अनुभव साझा करने और देश की संस्कृति व विविधता की सराहना करने के लिए उनका धन्यवाद किया। कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत को समझने के लिए यहां के लोगों, परंपराओं और रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखना जरूरी है। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि देश में सफाई, नागरिक जिम्मेदारी और बुनियादी सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में सुधार की जरूरत अब भी बनी हुई है। इस तरह वीडियो पर आई प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली सामग्री किस तरह लोगों की किसी देश के प्रति सोच को प्रभावित कर सकती है। भारत की पहचान सिर्फ तस्वीरों से नहीं, अनुभवों से भी बनती है Hikaru-san की कहानी का संदेश केवल भारत की तारीफ तक सीमित नहीं है। उनका अनुभव इस बात की याद दिलाता है कि किसी देश को समझने के लिए उसकी चुनौतियों और खूबियों, दोनों को देखना जरूरी है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में संस्कृति, खानपान, भाषाओं और लोगों के जीवन जीने के तरीकों में काफी अंतर देखने को मिलता है। किसी एक जगह या घटना के आधार पर पूरे देश के बारे में निष्कर्ष निकालना अधूरी तस्वीर पेश कर सकता है। Hikaru-san ने अपने अनुभव के जरिए यह भी बताया कि कभी-कभी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें जिंदगी के बारे में बड़ी सीख दे जाती हैं। टूटी हुई चीज को फेंकने के बजाय सुधारना और इंसान का अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना—यही वह विचार है, जिसने Hikaru-san के भारत में बिताए आठ महीनों को उनके लिए खास बना दिया।  
“सिर्फ साउथ मुंबई साफ होने से पूरा शहर साफ नहीं होता”, कचरा संकट पर बॉम्बे हाईकोर्ट की BMC को कड़ी फटकार

“सिर्फ साउथ मुंबई साफ होने से पूरा शहर साफ नहीं होता”, कचरा संकट पर बॉम्बे हाईकोर्ट की BMC को कड़ी फटकार

“सिर्फ साउथ मुंबई साफ होने से पूरा शहर साफ नहीं होता”, कचरा संकट पर बॉम्बे हाईकोर्ट की BMC को कड़ी फटकार मुंबई: मुंबई में कचरा और गंदगी की लगातार बनी समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ साउथ मुंबई या वर्ली जैसे इलाकों का साफ दिखाई देना पूरे मुंबई शहर के साफ होने का प्रमाण नहीं है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ शहर में लगातार जारी कचरा प्रबंधन और खुले में कचरा फेंके जाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई के विभिन्न इलाकों में सफाई व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। “साउथ मुंबई पूरा मुंबई नहीं है” सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शहर के कई हिस्सों में गंदगी की स्थिति बनी हुई है। पीठ ने विशेष रूप से इस बात पर नाराजगी जताई कि साउथ मुंबई और वर्ली जैसे कुछ इलाकों की सफाई को पूरे शहर की स्थिति का पैमाना नहीं बनाया जा सकता। अदालत के मुताबिक, मुंबई के अलग-अलग वार्डों में सड़क किनारे कचरा जमा होने और खुले में कचरा फेंके जाने की समस्या अभी भी खत्म नहीं हुई है। पीठ ने कहा कि BMC ने सभी 24 वार्डों के लिए सफाई योजना और उपाय बताए हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीन पर कचरा फेंके जाने की समस्या लगातार दिखाई दे रही है। मालाड और जोगेश्वरी की स्थिति पर खास चिंता अदालत ने मुंबई के पश्चिमी उपनगरों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया। सुनवाई के दौरान जोगेश्वरी और मालाड में कचरे की स्थिति को विशेष रूप से गंभीर बताया गया। इन इलाकों में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर कचरा जमा होने की शिकायतों को देखते हुए अदालत ने BMC से यह बताने को कहा कि संबंधित वार्ड अधिकारियों ने जमीन पर वास्तविक स्थिति की जांच के लिए क्या कदम उठाए हैं। वार्ड अधिकारियों से मांगा विस्तृत जवाब हाईकोर्ट ने BMC से एक व्यापक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें प्रत्येक वार्ड में सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और उसे सुधारने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देने को कहा गया है। अदालत यह भी जानना चाहती है कि गांधी जयंती के अवसर पर चलाए गए ‘स्वच्छता अभियान’ के तहत BMC और उसके वार्ड अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की और उसका जमीन पर कितना असर दिखाई दिया। “हम नागरिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर चिंतित हैं” सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है। अदालत की चिंता आम नागरिकों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन की गुणवत्ता को लेकर है। पीठ ने कहा कि शहर में बुनियादी स्वच्छता अनुशासन कायम रहना जरूरी है और हर वार्ड में स्वच्छता व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होनी चाहिए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वर्षों से दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। “कानून अच्छे हैं, लेकिन लागू करने में समस्या है” हाईकोर्ट ने कचरा फेंकने की नागरिकों की आदत पर भी टिप्पणी की। पीठ के मुताबिक, शहर में कई जगह खुले स्थान दिखाई देते ही वहां कचरा फेंकने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है। अदालत ने कहा कि मुंबई में कचरा प्रबंधन को लेकर पर्याप्त कानून और नियम मौजूद हैं, लेकिन उनके प्रभावी अमल और enforcement में समस्या बनी हुई है। इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुंबई की सफाई केवल BMC की जिम्मेदारी नहीं है; नागरिकों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना भी समस्या को बढ़ाता है। पहले भी दी थी कार्रवाई की चेतावनी इससे पहले 10 सितंबर को हुई सुनवाई में भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC के वार्ड अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि यदि शहर में लगातार जारी कचरा और खुले में कूड़ा फेंकने की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने उस समय भी मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। कांजुरमार्ग लैंडफिल से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की ये टिप्पणियां कांजुरमार्ग लैंडफिल में नगरपालिका ठोस कचरे के लगातार डंप किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आईं। इस मामले में अदालत मुंबई की समग्र कचरा प्रबंधन व्यवस्था, वार्ड स्तर की स्वच्छता और कचरे के निपटारे से जुड़े पहलुओं पर भी नजर रख रही है। 22 अक्टूबर को अगली सुनवाई अब BMC को अदालत के निर्देश के अनुसार वार्ड स्तर की कार्रवाई और स्वच्छता व्यवस्था से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि BMC अपने हलफनामे में मुंबई के 24 वार्डों की वास्तविक स्थिति, खासकर मालाड और जोगेश्वरी जैसे पश्चिमी उपनगरों में कचरा प्रबंधन को लेकर क्या जवाब देती है और अदालत के निर्देशों के बाद जमीन पर क्या बदलाव दिखाई देता है।  

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