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BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी
BEST बस हादसे के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेहाल, विधवा ने मांगी सरकारी नौकरी मुंबई के भांडुप इलाके में हुए दर्दनाक BEST बस हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन मृतक प्रशांत शिंदे के परिवार की मुश्किलें आज भी खत्म नहीं हुई हैं। इस हादसे में 43 वर्षीय प्रशांत शिंदे की मौत हो गई थी, जो अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके निधन के बाद परिवार गहरे आर्थिक संकट में फंस गया है। प्रशांत की पत्नी कंचन शिंदे और उनका 11 वर्षीय बेटा सोहम आज रोजमर्रा के खर्चों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बढ़ते किराए और स्थायी आय के अभाव ने उनकी स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। कंचन शिंदे का कहना है कि पति की अचानक मौत ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है और अब आर्थिक तंगी ने जीवन और कठिन बना दिया है। कंचन ने बताया, “जब मुझे मेरे पति की मौत की खबर मिली, तो मैं पूरी तरह टूट गई थी। हम आज तक उस सदमे से बाहर नहीं आ पाए हैं। अब हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या रोजी-रोटी की है, क्योंकि वही घर के इकलौते कमाने वाले थे।” हादसे के बाद BEST प्रशासन की ओर से परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी, लेकिन कंचन का कहना है कि यह राशि उनके भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इसे “मुंह बंद रखने की कीमत” जैसा बताया। कंचन के अनुसार, इस राशि का बड़ा हिस्सा उन्होंने अपने बेटे के भविष्य के लिए सुरक्षित रखा है, जो आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहता है। घर चलाने के लिए कंचन ने मजबूरी में घरेलू काम (कुक) करना शुरू किया है, लेकिन उनकी आय इतनी नहीं है कि वह परिवार का खर्च आसानी से उठा सकें। उन्होंने BEST प्रशासन और स्थानीय नेताओं से नौकरी की मांग की है, ताकि उन्हें एक स्थायी आय का स्रोत मिल सके। “मैंने BEST और स्थानीय नेताओं से नौकरी की मांग की है। अगर मुझे सरकारी नौकरी मिल जाए, तो मेरे परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सकता है,” कंचन ने कहा। इस बीच, परिवार की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। मकान मालिक द्वारा किराया बढ़ाए जाने के कारण उन्हें अब नया घर ढूंढना पड़ रहा है। कंचन को डर है कि अगर उन्हें दूर जाना पड़ा, तो उनके बेटे को स्कूल जाने में काफी परेशानी होगी। “हमारा किराया बढ़ा दिया गया है और अब हमें नया घर ढूंढना पड़ रहा है। अगर हमें भांडुप से बाहर जाना पड़ा, तो मेरे बेटे को अकेले स्कूल जाना पड़ेगा, जो मेरे लिए चिंता का विषय है,” उन्होंने कहा। हालांकि यह हादसा उस समय सुर्खियों में रहा था, लेकिन समय बीतने के साथ इस परिवार की परेशानियां लोगों की नजरों से ओझल हो गई हैं। छह महीने बाद भी उन्हें वह स्थायी मदद नहीं मिल पाई है, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि हादसों के बाद पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक सहारा देने के लिए मजबूत व्यवस्था की कितनी जरूरत है।
- बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई
- ‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार
- मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार
बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई
बांद्रा में 200 ड्रोन का अवैध नाइट शो: मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पुलिस ने की सख्त कार्रवाई मुंबई | विशेष रिपोर्ट: मुंबई के सबसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल इलाकों में से एक बांद्रा वेस्ट में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कमर्शियल शूट के दौरान बिना किसी अनुमति के एक साथ 200 से ज्यादा ड्रोन उड़ाए गए, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। घटना 28 मई की रात की है, जब बांद्रा पुलिस को सूचना मिली कि इलाके में बड़े पैमाने पर ड्रोन ऑपरेशन चल रहा है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम उस समय हैरान रह गई जब आसमान में सैकड़ों ड्रोन एक साथ उड़ते दिखाई दिए। तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ड्रोन गतिविधि को बंद कराया और मौके पर मौजूद संचालक को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी की पहचान दिल्ली निवासी गोपाल नारायण सिंह के रूप में हुई, जो एक मार्केटिंग कंपनी में मैनेजर बताया जा रहा है। उसने पुलिस को बताया कि यह पूरा ड्रोन शो एक विज्ञापन शूट का हिस्सा था। हालांकि, जब उससे अनुमति और दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई वैध परमिशन पेश नहीं कर सका। जांच में सामने आया कि इस ऑपरेशन के लिए आवश्यक अनुमति लेने की जिम्मेदारी एक अन्य अधिकारी सुनील गुप्ता के पास थी, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बिना किसी अधिकृत मंजूरी के यह गतिविधि शुरू कर दी गई थी। पुलिस ने मौके से कई हाई-टेक कैमरा युक्त ड्रोन, जिनकी कीमत करीब 80 हजार रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है, जब्त किए हैं। इसके अलावा, ड्रोन ऑपरेशन को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया गया लैपटॉप और अन्य तकनीकी उपकरण भी फॉरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में ड्रोन उड़ाने के लिए कड़े नियम लागू हैं, खासकर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में। सुरक्षा कारणों से किसी भी ड्रोन गतिविधि के लिए कई एजेंसियों से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इस मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और आरोपियों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह की अवैध ड्रोन गतिविधियां अन्य जगहों पर भी की गई थीं और क्या इसमें किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है। डीसीपी (जोन IX) डॉ. मोहित गर्ग ने पुष्टि की है कि मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जांच जारी है। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि नियमों की अनदेखी कर ऐसे बड़े पैमाने पर ऑपरेशन कैसे संभव हो पाए। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और भी खुलासे होने की संभावना है।
‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार
‘दाऊद-ISI कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा: दिल्ली में हमले की साजिश नाकाम, 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए 9 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया, जिनका संबंध दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी दिल्ली में “अत्यंत संवेदनशील स्थानों, सुरक्षा बलों और धार्मिक स्थलों” को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। कार्रवाई के दौरान उनके पास से हथियार, विस्फोटक सामग्री और कई हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए हैं, जिससे एक बड़े हमले की आशंका जताई जा रही थी। सूत्रों का कहना है कि इस आतंकी मॉड्यूल को लंबे समय से तैयार किया जा रहा था और इसके तार पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से जुड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में कुछ नेपाली मूल के लोग भी शामिल थे, जिन्हें ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई से राजधानी पर मंडरा रहा एक बड़ा खतरा टल गया है। फिलहाल एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग, भर्ती प्रक्रिया और लॉजिस्टिक सपोर्ट की गहराई से जांच कर रही हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच जारी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है। दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए हर थाने में काउंटर टेरर यूनिट (CTU) बनाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, विदेशी आतंकी संगठन अब एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और लोकल स्लीपर सेल के जरिए युवाओं को गुमराह कर उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां अब जमीनी स्तर पर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां हर चुनौती का सामना करने के लिए सतर्क और सक्षम हैं, और किसी भी आतंकी साजिश को सफल नहीं होने देंगी।
मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार
मुंबई में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब: एएनसी की कार्रवाई में ₹50 करोड़ से ज्यादा का एमडी बरामद, तीन गिरफ्तार मुंबई, प्रतिनिधि: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नशे के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने ₹50 करोड़ से अधिक कीमत के ड्रग्स का भंडाफोड़ किया है। दक्षिण मुंबई के अग्रिपाड़ा इलाके में स्थित एक हाई-राइज इमारत में छापेमारी कर पुलिस ने मेफेड्रोन (MD) बनाने की पूरी फैक्ट्री का पर्दाफाश किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 26 मई को ‘यासमीन टॉवर’ की 10वीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में की गई। कांडिवली यूनिट को मिली गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने जाल बिछाकर फ्लैट नंबर 1004 पर छापा मारा। तलाशी के दौरान वहां ड्रग्स बनाने का पूरा सेटअप मिला, जिसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। छापेमारी में कुल 14.493 किलोग्राम मेफेड्रोन और उससे जुड़े कच्चे माल बरामद किए गए। इनमें 8.305 किलोग्राम लिक्विड एमडी (लगभग ₹29.08 करोड़) और 6.188 किलोग्राम पाउडर एमडी (लगभग ₹21.65 करोड़) शामिल हैं। इसके अलावा, ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स, मशीनरी, एक देसी पिस्टल और 19 जिंदा कारतूस भी जब्त किए गए। जांच में सामने आया है कि आरोपी फ्लैट के अंदर गैस स्टोव पर केमिकल्स उबालकर और फिर उन्हें सुखाकर ड्रग्स तैयार करते थे। इस प्रक्रिया से निकलने वाली तेज गंध को छिपाने के लिए वे पूरे दिन एयर कंडीशनर चालू रखते थे और अगरबत्ती व फ्रेगरेंस स्प्रे का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने यह तकनीक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीखी थी। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि वे उत्पादन बढ़ाने के लिए किसी फार्महाउस की तलाश में थे, जिससे इस अवैध कारोबार को बड़े स्तर पर फैलाया जा सके। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शोएब मंसूरी (33), सूफियान मंसूरी (29) और मामुनी सरकार (23) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, शोएब के खिलाफ पहले से लूट, छिनैती और मारपीट के कई मामले दर्ज हैं। वहीं, मामुनी सरकार को शोएब की गर्लफ्रेंड बताया जा रहा है, जो बांग्लादेश की नागरिक बताई जा रही है। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने उन्हें 3 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब इस नेटवर्क के पीछे के बड़े गिरोह और सप्लाई चेन की जांच में जुटी है। इस कार्रवाई को मुंबई में ड्रग्स के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

